कहते है कि राजनीति बड़ी गंदी चीज है अच्छे लोगों के लिए यह नहीं बनी है किन्तु अक्सर यदा कदा अच्छे लोगों को राजनीति की गंदगी को दूर करने के लिए अच्छे सोच के लोगो को राजनीति में आने की नसीहत , सलाह अक्सर हमारे वरिष्ठ नेतागण देते रहते है उनकी सलाह मानकर वेहद बढे लिखे युवा अपनी अच्छी खासी पैकेज वाली नौकरी को छोड़कर राजनीति में कुछ कर गुजरने का सपना लेकर चुनाव में कूद तो जाते है किन्तु उसका कड़वा अनुभव उन्हे जल्द ही हो जाता है राजनीति की गंदगी उनके सपनों नई सोच व समाज सेवी सिद्धान्तों को निगल जाती है मुर्गा, दारू, व पैसे पर बिकने वाले ज्यादातर मतदाताओं द्वारा उनके सपनों को धूल-धूसित कर दिया जाता है इसका ताजा उदाहरण हमें उत्तर प्रदेश में हुए ताजातरीन प्रधानी के चुनाव में देखने को मिली है जिसके शिकार लाखों युवा हुए है वे युवा जिन्होने अपने गाँव के विकास के लिए एक सपना देखा था कि गाँव में बिजली होगी पानी होगा सड़के होगी शिक्षा व्यवस्था उन्नत होगी स्वास्थ सुविधायें होगीं स्त्रीयों का सशक्तिकरण होगा वह हर विकास जो उनके बदहाल गाँव की दिशा व दशा उनके जीतनें के बाद बदलेगी किन्तु एैसा हो न सका उनके विचारों , सपनों इमानदारी कर्मठता और त्याग पर मुर्गा, शराब , पैसा , दावत, गिफ्ट , हावी हो गये उत्तर प्रदेश में प्रधानी के चुनाव में तरूण शेखावत ने राजनीति की इस गंदगी और भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए विदेश में अपनी 37 लाख सालाना की नौकरी को लात मार दी प्रिया जो की बी0टेक0 , एम0बी0ए0 , थी एक कंम्पनी में बतौर एच0आर0 एक बड़े पैकेज पर नौकरी कर रही थी कुछ कर गुजरने का सपना लेकर व्यवस्था परिवर्तन का सपना संजोकर अपना सब कुछ दांव पर लगा कर प्रधानी का चुनाव लड़ा पर हुआ क्या 10 हजार की आबादी वाले गाँव में उसे महज 27 मत प्रात हुए तरूण व प्रिया जैसी विचार धारा वाले लाखों लोंग राजनीति में आना तो चाहतें है परन्तु तथा कथित मतदाताओं की पुरातन पंथी सोच तथा मुर्गा, दारू, पैसे , दावत और गिफ्ट की भेट चढ़ जाते है राजनीति का भ्रष्टाचार और गंदगी उनकी अच्छी सोच पर बे्रक लगा देती है और वे भी कह उठते है कि राजनीति बड़ी गंदी चीज है इसमें भला अच्छे लोगों क्या काम? द्वारा मनीष पाण्डेय।
राष्ट्रहित के लिए आवश्यकःसमान नागरिक संहिता लेखक - मनीष कुमार पाण्डेय अधिवक्ता पत्रकार एम0काॅम0. , एल0एल0बी0, एम0बी0ए0 (एच0आर0) प्रदेश प्रवक्ता अखिल भारत हिन्दू महासभा उ0प्र0. ऽ शरीयत अदालतो मुस्लिम पसर्नलाॅ बोर्ड जैसी संस्थाओं पर लगे बैन कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक समारोह में कहा था है कि वे चाहते है कि देश में ऐसे कानूनोे को वे समाप्त करना चाहते है जिनकी प्रासंगिकता वर्तमान समय में लगभग समाप्त हो चुकी है उन्होने यह भी कहा कि ऐसे कानूनो को एक दिन में एक कानून समाप्त करने की उनकी मंशा है अर्थात वे चाहते है कि एक दिन में एक कानून की समाप्ति की जाऐ प्रधान मंत्री जी की सोच बिल्कुल सही है हम भारतवासी सैकड़ो वर्षो से ऐसे कानूनो को क्यों ढोऐ जो घिस पिट चुके है जो सभ्य समाज के लिए नासूर बन चुके है ऐसे कानून जो हमें राष्ट्रीयता नही बल्कि गुलामी,राष्ट्रद्रोह की ओर ढकेलती हो निश्चित रूप से ऐसी व्यवास्थाओं कानूनो को समाप्त कर उसकी जगह नये कानूनोे का सृजन करना ही राष्ट्रहित के लिए आवश्यक होगा परन्तु तब बड़ा आश्चर्य होता है जब राष्ट्र के ...
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