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उत्तराखंड का लैंड जिहाद मजार जिहाद लव जिहाद और सांप्रदायिक दंगे तथा आचार्य प्रमोद कृष्ण की भूमिका

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उत्तराखंड का लैंड, मजार और लव जिहाद ,सांप्रदायिक दंगे, और आचार्य प्रमोद कृष्णन मनीष पांडेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रमोद कृष्णन के कल्कि धाम शिलान्यास कार्यक्रम में प्रमोद कृष्णन की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने काफी संघर्ष किया है और यह कि वह ऐसी धार्मिक आध्यात्मिक कार्यों में  वे कितनी मेहनत से लगे रहते हैं।अब सवाल यह उठता है की भला कौन सा संघर्ष? किसके विरुद्ध? कौन से आध्यात्मिक कार्य? सनातन धर्म का चोला ओढ़कर मुस्लिम मुशायरों में जाकर अल्लाह हू अकबर अल्लाह हू अकबर, मौला मौला या अली या अली का गान करने वाले आध्यात्मिक कार्य प्रमोद त्यागी जिन्हें आज  आचार्य प्रमोद कृष्णन के रूप में जाना जाता है, को कांग्रेस से हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखला दिया गया, इतिहास में जाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि लगभग यह सभी को ज्ञात है कि जब कोई जहाज डूबने को होता है तो सबसे पहले उसे जहाज के चूहे अपने आप को बचाने के लिए समुद्र में छलांग लगा देते हैं, प्रमोद कृष्णन ऐसे ही चूहे हैं, आचार्य प्रमोद कृष्णन कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं, और दोनों बार चुनाव हारे ह...

अल्लामा इकबाल की मजहबी कट्टर मानसिकता का बुरा परिणाम भुगतता भारत?

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अल्लामा इकबाल की कट्टर मजहबी विचारधारा का बुरा परिणाम आज भी भारत भुगत रहा है? मनीष पांडेय उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद स्थित फरीदपुर के कमला नेहरू कम्पोजिट विद्यालय में पिछले दिनों एक मुस्लिम शिक्षक वजीरउद्दीन और मुस्लिम शिक्षिका द्वारा विद्यालय के बच्चों को एक उर्दू कविता का गायन"लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी"प्रतिदिन कराया जाता है, अधिकतर यह कविता मदरसों में गाई जाती है, सवाल यह नहीं है कि कविता या नज्म उर्दू में है, सवाल यह भी नहीं कि वह एक हिंदू नाम वाले विद्यालय में गाई जाती है पर सवाल यह उठता है कि इस उर्दू कविता को लिखने वाले मोहम्मद अल्लामा इकबाल जिनकी वजह से पाकिस्तान शब्द का जन्म हुआ जिनके कारण भारत विभाजन की लकीरें खींची गई और जिनकी मजहबी कट्टरता के कारण सांप्रदायिक दंगों में लाखों हिंदुओं का कत्ल कर दिया गया ऐसे व्यक्ति की कविता का गायन भारत के स्कूलों में भला क्यों? मोहम्मद अल्लामा इकबाल ने किसी समय सारे जहां से अच्छा हिंदुस्ता हमारा लिखा था किंतु कुछ समय बाद ही उन्होंने अपनी मजहबी कट्टरता का प्रदर्शन करते हुए तराना ए मिल्की के माध्यम से यह लिखा कि चीन ओ अरबहम...

कृष्ण जन्मभूमि का रक्तरंजित इतिहास भाग 8

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कृष्ण कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 8 छल प्रपंच धोखा और विश्वासघात यही कांग्रेसका असली चेहरा * कृष्ण जन्म भूमि पर स्वामित्व किसका? मनीष पाण्डेय राम के अस्तित्व को नकारने और रामसेतु को तोड़ने का प्रयास करने वाली कांग्रेस द्वारा कृष्ण जन्मभूमि बाद में भी अड़ंगा लगाया गया था कृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए जहां 1951 में कृष्ण जन्म भूमि ट्रस्ट का निर्माण हो चुका था किंतु कांग्रेस ने उसे ट्रस्ट को नकारते हुए साजिश अनेक अपना ही ट्रस्ट का निर्माण कर लिया इस ट्रस्ट का नाम था कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ जो कि कालांतर में कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के नाम से जाना गया इस ट्रस्ट का निर्माण 1958 में हुआ था ट्रस्ट के सचिव थी उस समय कांग्रेश के प्रमुख पदाधिकारी भगवान दास भार्गव थे वर्तमान में दीवानी में चल रहे मुकदमे का विरोध करने वाले महेश पाठक जो कि अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं द्वारा वर्ष 2019 में कांग्रेस के टिकट पर मथुरा संसदीय सीट से चुनाव भी लड़ा गया था महेश पाठक द्वारा कोर्ट में एक याचिका डालकर उन हिंदुत्ववादी संगठनों की याचिका खारिज करने की मांग की ...

कृष्ण जन्मभूमि का रक्तरंजित इतिहास भाग 7

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कृष्ण कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 7 न्यायालय के निर्णय ईदगाह वाला हिस्सा ही कृष्ण जन्म भूमि मनीष पाण्डेय जिस प्रकार राम मंदिर को न्यायालय में जानबूझकर मुस्लिम पक्ष द्वारा उलझाया गया था, ठीक वैसे ही कृष्ण जन्म भूमि के साथ भी हुआ था जहां राम जन्मभूमि का वादन न्यायालयों में 125 वर्षों तक हो जा रहा वहीं कृष्ण जन्म भूमि का वाद भी लगभग 143 वर्ष तक न्यायालय में उलझा रहा जब तक 1968 मैं गैर कानूनी ढंग से समझौता नहीं हो गया मराठा शासन के पतन के बाद ब्रज क्षेत्र की कमान पूरी तरह से अंग्रेजों के हाथ में आ गई थी 1815 में कटरा केशव देव अर्थात कृष्ण जन्म भूमि को 13•37 एकड़ भूमि को जब नीलाम किया गया तो वाराणसी के बैंकर राय पत्नीमल द्वारा इसे खरीद लिया गया राय पत्नीमल उस भूमि पर खुद कृष्ण मंदिर का निर्माण करना चाहते थे किंतु मुसलमानों द्वारा यह कहकर विरोध किया गया की नीलामी में खरीदी गई भूमि में ईदगाह की भूमि सम्मिलित नहीं है न्यायालय द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्णय 1832 में पहला मुकदमा:- मुस्लिम अत्ताउल्लाह खान द्वारा 15 मार्च 1932 को कलेक्टर के यहां प्रार्थना पत्र देकर कहा गया कि 1815 की हुई नील...

कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 6

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कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 6 *कृष्ण जन्मभूमि विश्वासघात की लिखी गई एक कहानी मनीष पाण्डेय 10 अगस्त 1968 को समझौता हुआ उस समय मथुरा जनपद के जिला अधिकारी आरके गोयल तथा पुलिस अधीक्षक गिरीश बिहारी थे इन्हीं दोनों महानुभावों ने हिंदू अर्थात कृष्ण जन्म सेवा संघ संस्थान तथा शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के पदाधिकारियों के मध्य समझौता करने का दबाव बनाया था समझौता हिंदू पक्ष की ओर से सह सचिव देवधर शर्मा तथा फूल चंद्र गुप्ता द्वारा किया गया था अधिवक्ता अब्दुल गफ्फार थे वही मुस्लिम पक्ष की ओर से शाह माननीय डॉक्टर साहब उद्दीन शाकिर अब्दुल्ला खान मोहम्मद याकूब आलू वाला के हस्ताक्षर अधिवक्ता थे रज्जाक हुसैन श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ तथा शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के मध्य जो इकरारनामा हुआ वह निम्न प्रकार से था 1•हम, श्री देवधर शास्त्री, कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ, मथुरा द्वारा प्रथम दल के रूप में और प्राधिकृत, और श्री शाह मीर मलीह और श्री अब्दुल गफ्फार, वकील, शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट, मथुरा के प्रतिनिधि, दूसरे पक्ष के रूप में, ट्रस्ट के संकल्प संख्या 2 दिनांक 8-10-1968 के तहत, 2•श्री...

कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 5

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कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 5 कृष्ण जन्मभूमि के उद्धारक पेशवा महामना और बिडला मनीष पाण्डेय कृष्ण जन्म भूमि को आतताइयों से मुक्त कराने के लिए पनीर महान विभूतियों ने समय समय पर अपना अमूल्य योगदान दिया, कृष्ण जन्म भूमि के लिए मराठों की अमूल्य योगदान को नकारा लगभग असंभव है अनेक मराठों ने मुस्लिम आततायियों से मथुरा क्षेत्र को मुक्त करवाया था, ऐसे ही एक महान मराठा पेशवा माधवराव का भी इतिहास में नाम अमर है, एक ब्राह्मण योद्धा के रूप में चर्चित माधवराव पेशवा ने मथुरा से लेकर काशी तक का क्षेत्र पूरी तरह से मुस्लिम विहीन कर दिया था, इतिहास हमें यह जानकारी देता है कि बालाजी बाजीराव पेशवा की मृत्यु के उपरांत बेहद अल्पायु में ही माधवराव पेशवा को सिंहासन पर बैठा दिया गया पेशवा माधवराव ने अपने जीवन में अनेकों युद्धों का सामना किया यह वीरता पूर्वक लड़े और विजयी हुए, बताया जाता है कि अहमद शाह अब्दाली के भय से ब्रज क्षेत्र के अधिकांश हिंदू राजा पराजित होकर ब्रज क्षेत्र को छोड़ चुके थे पूरे क्षेत्र में मुसलमानों का आतंक अपने चरम पर था कहते हैं कि एक रात माधवराव को स्वप्न में स्वयं भगवा...

जन्मभूमि का इतिहास भाग 4

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कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास (श्रंखला) भाग 4 पुरातात्विक साक्ष्य, पुरातत्ववेक्क्ताओं और इतिहासकारों ने कहा ,यही है कृष्ण जन्म भूमि मनीष पाण्डेय  अक्सर कुछ सेकुलर वादी मानसिकता के लोग भारत के मुस्लिम शासकों को महान बताने से नहीं चूकते हैं वे उस अकबर को भी महान बता देते हैं जिसने इस्लामिक जिहाद की आड़ लेकर ना सिर्फ हिंदू मंदिरों को तोड़ वाया बल्कि लव जिहाद के तहत,जोधाबाई से निकाह किया इतिहास बताता है कि अकबर ने सैकड़ों मंदिरों का विध्वंस करवाया, किंतु नऐ मंदिरों का निर्माण करवाने पर पूरी तरह से रोक लगवा दी, इतिहासकार बताते हैं कि अकबर ने तुलसीदास जी को भी हनुमान मंदिर बनाने से रोका था, मौलवी मोहम्मद हुसैन आजाद द्वारा लिखित दरबार ए अकबर मैं कृष्ण जन्मभूमि अर्थात कटरा केशवपुर पर एक ब्राह्मण चौबे द्वारा मंदिर स्थल पर चबूतरे का निर्माण करवाकर उस पर भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करवा कर पूजा अर्चना करने का विवरण साफ-साफ दर्ज है दरबार ए अकबर यह भी बताती है कि कटरा केशोपुर पर मंदिर निर्माण के पश्चात धर्मांध मुसलमानों द्वारा किस तरह विरोध किया गया और किस प्रकार अकबर द्वारा अपनी द...