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Showing posts from November, 2020

बिहार में का बा••••••••?

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बिहार में का बा••••• जंगलराज, बाहुबल, राजनीति का अपराधीकरण यही है बिहार की असली त्रासदी? मनीष पाण्डेय  आखिरकार बिहार विधानसभा चुनाव वर्ष 2020 संपन्न हो ही गए, एग्जिट पोलो के अनुसार जहां कमल जहां मुरझाने की तैयारी कर रहा था, वही सुशासन बाबू के सुशासन का सूर्य अस्त होने की कगार पर था, अप्रत्याशित रूप से लालटेन की तेजी राजनीतिक धुरंधरों को भी हैरान कर रही थी, राजनैतिक विश्लेषकों और पंडितों के अनुमान धरे के धरे रह गए, बिहार के पूरे चुनाव परिदृश्य में अगर कुछ अप्रत्याशित हुआ तो वह लालटेन अर्थात आरजेडी का सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरना, चिराग तले अंधेरा हो जाना, और अपने बड़े-बड़े वादों और ईमानदार छवि की बदौलत पहली बार इस महासमर में उतरी द प्लूरल्स पार्टी, की करारी हार ने बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया, निश्चित रूप से पल्सर पार्टी की सर्वेसर्वा पुष्पम प्रिया चौधरी जो खुद दो स्थानों पर खड़ी हुई थी, दोनों जगहों पर करारी हार मिली बिहार की राजनीति में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में आरजेडी का आना बिहार के उस चेहरे को दिखाने के लिए काफी था जिसकी पहचान ना कभी मिटी है और ना ही शायद ही कभी मिटेगी...

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 14

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 14 तारीख पर तारीख बौखलाया और डरा मुस्लिम पक्ष? मनीष पाण्डेय राम जन्मभूमि के ऐतिहासिक निर्णय के तुरंत बाद वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर तथा मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति हेतु प्रयास तेजी से प्रारंभ कर दिए गए, 15 अक्तूबर, 1991 को इस अध्यादेश के विरुद्ध श्री काशी वि·श्वे·श्वर मुक्ति संघर्ष समिति, ज्ञानवापी वाराणसी तथा प्राचीन मंदिर के पुजारी पं. सोमनाथ भट्ट ने स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में न्यायालय सिविल जज, वाराणसी में वाद संख्या 610/91 दायर की। अन्जुमन इन्तजामिया मस्जिद इसमें प्रतिवादी बना। वाद की प्रक्रिया के बीच में उ.प्र. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ ने पक्षकार बनने हेतु प्रार्थना पत्र दिया, जिसको बहस के बाद न्यायालय प्रथम अतिरिक्त सिविल जज, वाराणसी ने पक्षकार मान लिया। सन् 1991 से सन् 1998 के बीच इस वाद में विभिन्न मुद्दों पर दोनों पक्षों ने प्रमाण प्रस्तुत किए। हिन्दू पक्ष ने न्यायालय के समक्ष मंदिर का ऐतिहासिक तथा पौराणिक साक्ष्य रखते हुए जानकारी दी कि सन् 1669 में औरंगजेब के कुछ सैनिकों द्...