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Showing posts from August, 2020

अरे सुनो कालनेमियो राम का नाम बदनाम ना करो

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 धरोहर, सभ्यता,संस्कृति,और इतिहास है, हमारी पहचान इसकी उपेक्षा पड़ेगी बेहद भारी? मनीष पाण्डेय पिछले कई वर्षों से मेरे द्वारा राम जन्मभूमि के मुद्दे पर मुखर होकर ना सिर्फ आंदोलन किया गया बल्कि कई स्तरों पर भव्य राम मंदिर निर्माण हेतु, एक ओर तो अधर्मी और विधर्मियों से, तो दूसरी ओर कुछ कालनेमियों से भी अनेक अवसरों पर विवाद में उलझना पड़ा, पिछले 30 वर्षों से हिंदू हितों के संघर्ष सहित हिंदू अस्मिता से जुड़े अनेक विषयों, मुद्दो पर न सिर्फ मैंने आवाज उठाई, बल्कि एक लंबा संघर्ष भी किया, राम जन्म भूमि के लिए यह संघर्ष दशकों से चल रहा है, और जब तक इस पृथ्वी पर हूं यह संघर्ष अनवरत प्रारंभ रहेगा चाहे हार मिले अथवा जीत, खैर अब आता हूं मूल मुद्दे पर, माननीय सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद भव्य राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो चुका है,तो ऐसे में राम जन्मभूमि से जुड़े हुई सभी अनावश्यक विषयों पर विराम लग जाना चाहिए था, परन्तु ऐसा हो नहीं सका, सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के उपरांत कुछ अनुत्तरित प्रश्न ऐसे भी रह गए, जिनका हल तलाशा जाना ...

फ्री का चंदन घिस मेरे नंदन

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फ्री का चंदन घिसो मेरे नंदन, वाली मानसिकता छोड़ें भारतीय मनीष पाण्डेय  फ्री फ्री फ्री एक के साथ दूसरा फ्री,इस सामान के साथ यह फ्री, उस सामान के साथ वह फ्री, बाय वन गेट वन फ्री, अधिकतर ई-कॉमर्स कंपनियों पर चले जाइए फ्री का मकड़जाल, में  उलझे हुए बिना आप रह नहीं पाएंगे, ग्राहक इस ओर ध्यान नहीं देते की वस्तुएं ग्रे मार्केट की हैं अथवा घटिया क्वालिटी की, बस उनका दाम कम होना चाहिए, अथवा वस्तु फ्री में मिली चाहिए, याद करिए जब अंग्रेज भारत में आए थे और उन्हें अपनी चाय को बेचने के लिए किस तरह भारतीयों को फ्री में चाय पिला पिला कर भारतीयों को इसका मानसिक रूप से गुलाम बना लिया था जो भारतीय कभी घी और दूध पर निर्भर रह कर अपना हष्ट पुष्ट शरीर किया करते थे वह दिन रात चाय पी पी कर अपना शारीरिक और मानसिक बल लोप करने में लग गए, इतिहास गवाह है कि फ्री के चक्कर में पड़कर हम भारतीयों ने ज्यादातर घाटा ही उठाया है, हर वर्ष दीपावली के आसपास ई कॉमर्स कंपनियां बिग बिलीयन डे अथवा इसी प्रकार के ऑफर ग्राहकों के लिए निकालती है ग्राहक इस ओर कभी ध्यान ही नहीं देता कि वह वस्तु जो खरीद रहे हैं अथवा एक के साथ ...

जब जब होई धरम कै हानि

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जब जब होई धरम कै हानि, बारहि असुर अधम अभिमानी अयोध्या में यह अधर्म और अन्याय भला क्यों? मनीष पाण्डेय  राम राम जन्मभूमि परिसर में ऐसे अनेक मंदिर विद्यमान हैं जिनका अपना पौराणिक महत्व है एक उसी में एक कंदर्पकूप भी है साक्षी गोपाल का मंदिर भी है और मानस भवन भी है और वह ऐतिहासिक राम चबूतरा भी है जिसके इर्द-गिर्द पूरी राम जन्मभूमि का आंदोलन टिका हुआ था, यह वही राम चबूतरा था जिस पर वर्षों तक निर्मोही अखाड़े का कब्जा था और उसके द्वारा प्रभु राम की मूर्ति स्थापित कर पूजा अर्चना की गई थी, राम चबूतरे का अपना पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व है, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि राम जन्मभूमि आंदोलन का मुख्य केंद्र बिंदु ही राम चबूतरा रहा है अब ऐसे में एक विध्वंस कारी निर्णय लेते हुए जिस तरह इन स्थानों को तोड़ने का निर्णय लिया गया है वह अनर्थ और अधर्म नहीं तो और क्या है? ऐसे में जब अयोध्या की पवित्र पावन भूमि पर राम मंदिर का निर्माण होने जा रहा है तो यह आवश्यक था कि इन ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों की सुरक्षा की जाती है उनका जीवन उद्धार किया जाता जिससे कि आने वाली पीढ़ियां उन स्थानों को देखकर भाव विभोर हो...

शायरी के पीछे एक जहरीली सोच नाम राहत इंदौरी

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शायरी के पीछे जहरीली सोच, नाम••• राहत इंदौरी मनीष पाण्डेय  कल एक ऐसे व्यक्ति की मौत हो गई, जो मेरी दृष्टि में ना सिर्फ देशद्रोही था बल्कि रामद्रोही भी, दुनिया को दिखाने के लिए तो वह व्यक्ति एक शायर था शायरी को ही हथियार बनाकर वह अक्सर अपनी जहरीली सोच को समाज के सामने उड़ेल देता था, और समाज की बेवकूफियां देखिए विशेषकर हिंदू समाज उसकी इसी जहरीली सोच पर वाह-वाह कर उठती थी, कल मैं सोशल मीडिया पर देख रहा था उसकी मौत पर न जाने कितने लोगों ने विधवा विलाप किया, ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे उनका सगा वाला मर गया हो ,मेरी दृष्टि में राहत इंदौरी का क्या अस्तित्व क्या है उसके काले चेहरे के पीछे छिपी हुई कलुषित भावना पर आइये मैं चर्चा कर लेता हूं, 1992 में जब बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ तो राहत इंदौरी के लिए मानों हृदय पर व्रजपात हो गया था, कुछ कर तो सकते थे नहीं, किंतु अपनी शायरी को ही इन्होंने जहरीला हथियार बनाकर जनमानस के समक्ष प्रस्तुत कर दिया था उनकी जहरीली शायरी थी" टूट रही है हर दिन मुझ में एक मस्जिद, इस बस्ती में रोज दिसंबर आता है, देश में जब सीएए तथा एनआरसी लागू किया गया तब इसका विरोध करत...

कांग्रेसी सत्ता के दलाल देव मुरारी बापू

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कांग्रेस, सत्ता, दलाली,मक्कारी, लोभीबाबा, और देव मुरारी बापू मनीष पाण्डेय  देव मुरारी बापू हो सकता है यह नाम बहुत लोगों को पता ना हो, किंतु आजकल मध्य प्रदेश की जनता इस नाम को बखूबी जानने लगी है, और हां अब मथुरा वाले भी जानने लगे हैं, क्योंकि कल ही मथुरा पुलिस द्वारा उनके विरुद्ध सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने के दृष्टिकोण से उन पर 153a 153b आदि धाराओं को लगाकर जेल भेजने की तैयारी करने का प्लान शुरू कर दिया है, मेरी दृष्टि में देव मुरारी बापू एक ऐसे असंत हैं जिन्हें सत्ता का दलाल कहीं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी, सत्ता किसी की हो यह दलाली करने अवश्य पहुंच जाएंगे, वैसे तो यह सामान्य सी बात है न जाने कितने ऐसे व्यक्ति/संत इस पृथ्वी पर विद्यमान है, जिनको सरकार बदलने से कोई चिंता नहीं होती, सरकार जिसकी होगी दलाली उसी की शुरू हो जाएगी, किंतु दुख और ग्लानी उस समय होती है, जब कोई संत वेशधारी व्यक्ति सत्ता की दलाली और पद लोलुपता में इतना अंधा हो जाए कि अपनी सारी मर्यादा भूल कर, उसे तार-तार करता हुआ बस किस तरह सत्ता की मलाई खाए जाए दिन रात इसी में डूबा रहता है, देव मुरारी बापू की दलाली का प्रारंभ ह...