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Showing posts from 2019

न्यायमूर्ति के•एम•पांडेय:- राम जन्मभूमि का ताला खुलवाकर जिन्होंने दिया था, स्वतंत्र भारत का अद्भुत अकल्पनीय व अविश्वसनीय निर्णय

न्यायमूर्ति के•एम•पांडेय:- राम जन्मभूमि का ताला खुलवाकर जिन्होंने दिया था, स्वतंत्र भारत का अद्भुत अकल्पनीय व अविश्वसनीय निर्णय मनीष पांडेय क्या आपने अपने जीवन में किसी ऐसी घटना देखा या सुना है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत के किसी न्यायालय द्वारा एक ही दिन में किसी अधिवक्ता द्वारा प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया हो और उसी दिन उसकी सुनवाई होकर शाम तक निर्णय देते हुए यह कहा गया हो कि इस निर्णय का कार्यान्वयन 1 घंटे से कम समय में हो जाना चाहिए ऐसा चमत्कार हुआ जनपद फैजाबाद मैं जो अब अयोध्या के नाम से जाना जाता है , 25 जनवरी 1986 को अधिवक्ता उमेश चंद्र पांडे ने फैजाबाद के मुंसिफ सदर हरिशंकर द्विवेदी के न्यायालय में ताला खुलवाने हेतु प्रार्थना पत्र दिया था प्रार्थना पत्र में अधिवक्ता उमेश चंद्र पांडेय ने लिखा कि उनके व अन्य हिंदू समुदाय द्वारा जन्म स्थान पर पूजा और अर्चना की जाती है अतः जन्मभूमि की पूजा पर प्रतिबंध ना लगाया जाए तथा वहां लगे तालों को खोल दिया जाए, माननीय मुंसिफ सदर हरिशंकर द्विवेदी ने 28 जनवरी 1986 को यह कहते हुए प्रार्थना पत्र को निस्तारित करने में असमर्थता जताई ...
गोपाल सिंह विशारद:- राम के लिए संपूर्ण जीवन न्योछावर करने वाले एक योद्धा मनीष पांडेय स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद राम जन्मभूमि का पहला मुकदमा गोपाल सिंह विशारद पुत्र श्री गिरधारी सिंहo.o.s. (other original suit)no 1,1jan.1950 गोपाल सिंह विशारद बना जहूर अहमद तथा अन्य गोपाल सिंह विशारद 1949 में अखिल भारत हिंदू महासभा फैजाबाद यूनिट के जनरल सेक्रेटरी हुआ करते थे उनके द्वारा ही फैजाबाद की सिविल कोर्ट में माननीय भीम सिंह के न्यायालय में एक पिटीशन यह कहते हुए दायर की गई थी मेरे परिवार के लोग पिछले कई वर्षों से भगवान राम लला के दर्शन और पूजा अर्चना करते चले आ रहे हैं मैं भी जन्म स्थान पर लगाता जाकर पूजा-अर्चना करता हूं परंतु अब मुझे रोका जा रहा है इस जन्म स्थान की पूजा करना मेरा मौलिक अधिकार है इसलिए मुझे पूजा करने से ना रोका जाए ना ही मेरे मार्ग में कोई बाधा खड़ी की जाए इसके साथ ही साथ भगवान राम लला की सुरक्षा भी की जाए जिससे वहां कोई उनको हटाना सके तब जिला अदालत ने गोपाल सिंह विशारद जी के पक्ष में अंतरिम आदेश दे दिया मुसलमानों ने इसका विरोध किया उन्होंने हाईकोर्ट में जाकर फिर से इसके विरुद्ध...
ब्रिटिश साम्राज्य की दमनकारी कुनीति, उद्धार से वंचित हुई श्री राम जन्मभूमि मनीष पांडेय 1857 में जब विद्रोह हुआ तो उस समय अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध ना सिर्फ हिंदुओं ने बल्कि मुसलमानों ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था अंग्रेजों को भला यह कैसे सहन होता तब अंग्रेजों ने अपने विरुद्ध उठने वाली आवाज को दबाने के लिए अपनी प्रसिद्ध फूट डालो और शासन करो की नीति को लागू करते हुए हिंदू और मुसलमानों के बीच फूट डालने प्रारंभ कर दी राम जन्मभूमि का जो विवाद उस समय हल हो सकता था अंग्रेजों की कूटनीति चाल चलने के कारण संभव ना हो सका दुर्भाग्य रहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले अंग्रेजों द्वारा और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के सेकुलर वादी शासन के द्वारा इस मुद्दे का समाधान करने के बजाय जानबूझकर ,मात्र अपनी राजनीति रोटियां सेकने के उद्देश्य से इस मुद्दे को निरंतर उलझाया जाता रहा स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले अंग्रेज गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी की प्रसिद्ध फूट डालो और शासन करो की कुनीति को आगे बढ़ाते हुए लार्ड वाइसकाउन्ट कैनिंग के कृत्यों का वर्णन में करूं, इससे पहले मैं आपको राम जन्मभूमि प्रकरण...

एक बार मंदिर तो सर्वदा मंदिर

  एक बार मंदिर तो सदा सर्वदा मंदिर ,सुप्रीम कोर्ट जरा ध्यान दें मनीष पांडेय 6 अगस्त सन 2019 यही वह दिन था जब सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्म भूमि के संबंध में लगातार सुनवाई करने का निर्णय लिया था , 6 अगस्त से लेकर 30 अगस्त 2019 तक सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष की ओर से प्रमुख रूप से रामलला विराजमान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के परासरण वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन, राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से पीएन मिश्र, गोपाल सिंह विशारद की ओर से अधिवक्ता रंजीत कुमार तथा हिंदू महासभा की ओर से हरिशंकर जैन और वरिंदर मिश्र अतुल घोष आदि ने बेहद तार्किक संतुलित और पूरे साक्ष्य और सबूतों के साथ अपना-अपना पक्ष रखा था, मात्र 45 मिनट का समय शिया वक्फ बोर्ड की अधिवक्ता ढींगरा को मिला था जिसमें उन्होंने सारी भूमि हिंदुओं को सौंपने की बात कही थी, (मेरा यह परम सौभाग्य है कि मैं इन अनमोल पलों का गवाह बन रहा हूं बतौर एक अधिवक्ता भी और हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर भी मैं इस सुनवाई से किसी ना किसी रूप से लगातार जुड़ा हूं और मेरा यह प्रयास रहेगा की संभावित 15 नवंबर की जो तिथि निर्धारित की ...
म•रघुवर दास जिन्होंने दायर किया था,राम जन्मभूमि का प्रथम वाद मनीष पांडेय अपने जीवन में हम सभी ने रेल यात्राएं तो काफी की होंगी इन रेल यात्राओं के दौरान कुछ ऐसे अनुभव हमें प्राप्त होते हैं जो हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व को ना सिर्फ बदलते हैं बल्कि उन अनुभवों से फायदा उठाकर हम अपने आने वाले जीवन की कठिनाइयों का हल निकाले का एक बेहतरीन प्रयास भी करते हैं आपने ध्यान दिया होगा एक अत्यधिक भीड़भाड़ वाली रेल की बोगी में आप अपनी सीट पर किसी तरह बैठे हैं और ऐसे में कोई एक अन्य व्यक्ति जो खड़ा हुआ है उसे या तो आप सहृदयता पूर्वक अपनी ही सीट में से कुछ हिस्सा उसे बैठने के लिए प्रदान कर देते हैं कभी-कभी ऐसा भी होता है कि खड़ा हुआ व्यक्ति जबरदस्ती आपकी सीट पर अपना स्थान बनाने के लिए आतुर रहता है और इसके लिए वह आपसे लडता है झगडता है गाली गलौज करने पर भी उतर जाता है देखने सुनने में आया है इस सीट के लिए अक्सर मार पिटाई भी हो जाती है दोनों ही दशा में अगर व्यक्ति धूर्त और मक्कार है तो वह आपको धीरे-धीरे हटाता हुआ उस आपकी सीट पर लेटने का प्रयास करने लगता है आपकी सहनशीलता सहृदयता पूरी तरह से फायदा उठाता है अं...
मंदिर के अवशेषों का उपयोग कर हुआ मस्जिद का निर्माण-- पुरातत्वविद् केके मोहम्मद मनीष पांडेय अपनी अनीतिकारी नीतियों और दोगली मानसिकता के चलते इस राष्ट्र को गर्त मे गिराने का कार्य अगर किसी ने किया है तो वह कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा रही हैं, पूरे भारतीय इतिहास को खंगाल डालिए आपको कांग्रेस द्वारा किए गए हिंदू विरोधी कृत्य एक के बाद एक सामने आते जाएंगे ,देखा जाए तो कांग्रेस के पतन का मुख्य कारण भी शायद यही रहा है भारत की अधिसंख्य हिंदू जनता की भावनाओं व आस्थाओं के खिलाफ जाकर जिस तरह कांग्रेसी ने पूर्व में कृत्य किए उसका बुरा परिणाम कांग्रेस को आज भी प्राप्त हो रहा है, किंतु दुर्भाग्य है कि इतिहास से सबक लेने की बजाय कांग्रेस बार-बार वही कुकृत्य पुनः पुनः दोहरातीचली आ रही है, राम को काल्पनिक बताना रामसेतु को तोड़ने के प्रयास करना यह काग्रेस पूर्व में कर चुकी है किंतु वर्तमान में जिस तरह कांग्रेस यह लगातार प्रयास कर रही है कि श्री अयोध्या धाम में भव्य राम मंदिर निर्माण में लगातार अडंगे लगाए जाएं उससे तो यही प्रतीत होता है कि जो बची कुची कांग्रेस है वह भी भारत से मुक्त होने की दिशा में ...
सुनवाई 6वहां दिन हिंदुओं की आस्था है कि अयोध्या में जन्मे थे भगवान राम सुप्रीम कोर्ट तर्कों की कसौटी पर इसे ना देखें-हिन्दू पक्ष मनीष पांडेय राजीव धवन नहीं सुधरोगे जब पूरी लाइफ नहीं सुधरे तो भला अब क्या सुधरोगे जी हां सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता और कांग्रेसी मानसिकता मैं जकड़े और अति होशियारी नामक के लिए कीङे द्वारा काटे गए, अधिवक्ता राजीव धवन अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं सुप्रीम कोर्ट द्वारा बार-बार टोके जाने के बावजूद उनका हालिया हो गया है दिल है कि मानता नहीं और दिमाग है कि काम करता नहीं कोई ना कोई छींटाकशी करना उनकी आदत में शुमार हो चुका है सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को ताक पर रखते हुए ऐसा दिन कोई नहीं जाता जिस दिन वे अनावश्यक रूप से टोका टाकी कर माहौल को खराब करने की कोशिश ना करते हो आज प्रातः जैसे ही कोर्ट शुरू हुई उनकी यह बीमारी फिर से उबर आई जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई रामलला विराजमान के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन को उन्होंने टोकते हुए कहा कि वेदनाथन का ध्यान सिर्फ दिए गए न्यायालय के निर्णय पर यह कोई तथ्यात्मक बात हुई रख नहीं रहे साक्ष्य व सबूतों से तो वह कोसों दूर है, मुख...
 भारतीय संस्कृति और पाश्चात्य संस्कृति में व्याप्त मित्रताओं का एक तुलनात्मक अध्ययन मनीष पांडेय आज पूरा विश्व फ्रेंडशिप डे मना रहा है पाश्चात्य संस्कृति सभ्यता से वशीभूत बहुत से भारतीय भी बिना समझे बिना जाने बूझे कि वास्तव में हम भारतीयों के लिए यह फ्रेंडशिप डे मनाने का भला क्या औचित्य है एक अंधी दौड़ एक भेङ चाल में शामिल हो जाते हैं, ठीक उसी तरह जिस तरह हमारे सर पर वेलेंटाइन डे हग डे रोज डे किस डे चॉकलेट डे आदि आदि डे यो का बुखार पूरी तरह सिर चढ़कर बोलता है फ्रेंडशिप डे भी उन्हीं बुखारो में से एक बुखार है जो आज लाखों करोड़ों भारतीयों को अपनी गिरफ्त में ले चुका है वर्ष 1935 अमेरिका सरकार द्वारा एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है उस व्यक्ति की मृत्यु के गम में उसका दोस्त आत्महत्या कर लेता है बस उसी दिन से यह मूर्खतापूर्ण परंपरा पूरे विश्व में शुरू हो जाती है फ्रेंडशिप डे के रूप में मनाने की जिसे आज भारतीय भी बिना जाने पूछे पूरे मनोयोग से मनाने में जुटे हुए दरअसल हम भारतीयों की समस्या हमेशा से यह भी की हम पाश्चात्य संस्कृति के चकाचौंध से हमेशा प्रभावित रहे हैं और प्रभावित ...

जोमैटो एक सेकुलर वादी सोच से ग्रसित व्यवसाय कंपनी

खाना खाना अपने आप में है धर्म जोमैटो की यह विकृत और घृणित सोच मनीष पांडेय जोमैटो ने जो किया वह पूरी तरह से गलत है उसका यह कुतर्क देना कि खाने का कोई धर्म नहीं होता खाना अपने आप में खुद धर्म है यह भी जोमैटो के अल्प ज्ञान को ही प्रदर्शित करता है एक कुलीन ब्राह्मण जो शिवभक्त भी है अगर सावन के महीने में पूरी तरह सात्विक भावना के साथ मात्र इतना कहता है कि उसे जोमैटो के खाने से परहेज नहीं बल्कि उस खाने को लेकर आने वाले से परहेज है इस विषय पर एक गहन विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है गहन विचार-विमर्श करने के उपरांत अमित शुक्ला ने यह क्यों कहा यह पूरी तरह से सामने आ जाएगा वास्तव में मुस्लिम को कभी भी हिंदू त्योहारों की पवित्रता क्या होती है इस विषय में सर्वथा जानकारी का अभाव रहता है एक हिंदू जब व्रत त्यौहार रखता है तो वह कितनी सात्विकता के साथ उसका निर्वहन करता है यह बात कभी भी मुस्लिम नहीं समझ सकता इस बात का ध्यान दीजिए कि अमित शुक्ला ने भोजन का विरोध नहीं किया बल्कि उस भोजन को लाने वाले मुस्लिम युवक का विरोध किया जो संभवतः एक सात्विक विचारधारा में परिपूर्ण नहीं अथवा खरा नहीं उतरता है, और...
जर जोरू जमीन कांग्रेस और सोनभद्र हत्याकांड की सच्चाई मनीष पांडेय  कहा जाता है कि विश्व में अगर कभी कोई लड़ाई लड़ी गई अथवा वर्तमान या फिर भविष्य में कोई लड़ी जाएगी तो उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ जर जोरू और जमीन की होगी सोनभद्र हत्याकांड के पीछे भी विवाद ,लड़ाई और फिर हत्याकांड की मूल जड़ वही जमीन ही है परंतु इस पूरे घटनाक्रम उसमें कांग्रेस का कितना दोष रहा इस बात को समझने के लिए हमें पुन: इतिहास के पन्नों को पलट ना होगा और विश्वास करें पन्ने पलटने के बाद हमारे सामने कांग्रेस का भ्रष्टतम चेहरा उजागर होगा कहानी या फिर कहें विवाद का प्रारंभ होता है वर्ष 1955 से उस समय वहां के जिलाधिकारी हुआ करते थे प्रभात कुमार मिश्र जिन्होंने आदिवासियों की जमीनों पर अपनी बुरी नजर डालते हुए उसे अपने नाम पर कराने के लिए एड़ी की चोट पर जोर लगा दिया वह जमीनी जिन पर आदिवासियों का कब्जा था और जो ना सिर्फ सैकड़ों वर्षों से वहां पर लगातार खेती करते आ रहे थे बल्कि राजस्व का भुगतान अभी पूरी ईमानदारी से करते चले आ रहे थे 600 बीघे से ऊपर की जमीन पर डीएम महोदय द्वारा कागजों में हेराफेरी कर और अन्य प्रशासनिक अधिकार...

हाफिज सईद के विरुद्ध सर्जिकल स्ट्राइक करे भारत सरकार

हाफिज सईद के विरुद्ध कोट लखपत जेल में हो सर्जिकल स्ट्राइक मनीष पांडेय पूरे विश्व में अपनी आतंकवादी गतिविधियों आतंकी संगठनों को संरक्षित और पोषित करने के चक्कर में जिस तरह पाकिस्तान ने अपनी छीछालेदर करवाई है वह किसी से छुपा नहीं है ऐसे समय में जब पाकिस्तान अपने कुकृत्य के कारण आईसीजे में बुरी तरह मात खा चुका है पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान एक बार पुनः अमेरिका की चरण वंदना करने हेतु राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने हेतु जा रहे हैं और जाने से पहले विश्व भर को यह दिखाने हेतु कि हम आतंकवाद के विरुद्ध कितना खड़े हैं हाफिज सईद को गिरफ्तार कर कोर्ट लखपत जेल लाहौर की दीवारों के पीछे डाल दिया गया किंतु सच्चाई पूरा विश्व जानता है कि यह मात्र पाकिस्तान का दिखावा है पाकिस्तान के मन में आज भी कड़ुवाहट है आंखों में बेशर्मी है दिल में जिहाद है और मस्तिष्क में कुटिल चालें यह वही कोट लखपत जेल है जहां सरबजीत सिंह को बुरी तरह प्रताड़ना देकर उसकी हत्या की गई थी इतिहास गवाह है कि कोट लखपत जेल में अनेक भारतीय कैदियों की हत्या कर दी गई है आपको याद होगा इससे पहले चमेल सिंह को भी इसी तरह मारा गया था ब...

इस प्यार को मैं क्या नाम दूं😀

धोखे विश्वासघात और षडयंत्र की बुनियाद पर टीका अजितेश साक्षी का बेमेल रिश्ता # लव जिहाद की तर्ज पर दलित जिहाद की शिकार हो गई साक्षी मनीष पांडेय पिछले कई दिनों से मैं अजय देश द्वारा किए गए लव जिहाद पिया कहे दलित हाथ पर पैनी दृष्टि गड़ाए बैठा हुआ था तत्काल टिप्पणी से बचना चाहता था क्योंकि मन के किसी कोने में यह विचार लगातार उठ रहा था कि अभी इस केस में बहुत से रहस्य का आना अभी बाकी है और ठीक वैसा ही हुआ आज अजितेश के बारे में वह सारा काला चिट्ठा सोशल मीडिया पर आ चुका है जिसे आप भी लगातार देख व समझ रहे होंगे विश्वास करें अगर मैं तभी तत्काल कोई एक तरफा टिप्पणी कर देता तो शायद या लेख आज आपके सामने ना होता शायद मेरी क्षणिक उत्तेजना पूरे मामले के पीछे छिपे हुए एक भयानक षडयंत्र को ले डूबती कागजों पर यू उतार ना पाती, ज्यादा भूमिका ना बांधते हुए मैं सीधे मूल मुद्दे पर ही आ जाता हूं घटनाक्रम के, अतीत के पन्नों को थोड़ा सा पलटता हुआ चलता हूं मैंने शुरूआत में ही एक शब्द का प्रयोग किया है लव जिहाद वैसे तो जो हिंदू हैं वह इस शब्द से अच्छी तरह परिचित होंगे इस्लाम को बढ़ावा देने के मकसद से मुस्लिम ल...

अमर्त्य सेन एक अर्थशास्त्री अथवा अर्थशास्त्री

पहले अपने घर की बिगड़ती संस्कृति पर ध्यान दें अनर्थशास्त्री अमर्त्य सेन मनीष पांडे अपने आपको को अर्थशास्त्र भी बताने वाले अमर्त्य सेन ने अभी पश्चिमी बंगाल के जादवपुर विश्वविद्यालय में आयोजित एक समारोह में कहा कि जय श्री राम का नारा बंगाली संस्कृति का हिस्सा नहीं है यह लोगों को पीटने के बहाने के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है जब उन्होंने यह कहा तो मुझे उनकी इस अद्भुत ज्ञान पर बेहद आश्चर्य हुआ क्या इसी ज्ञान के बल पर वह एक अर्थशास्त्री बने जिन्हें ना बांग्ला संस्कृति का ज्ञान है ना ही साहित्य का, आश्चर्य होता है मुझे इस बात का भी की अमृत सेन को बांग्ला साहित्य कि इतनी ज्यादा तो समझ है किंतु अपने घर की संस्कृति और सभ्यता जो उनकी बेटी नंदिता सेन के द्वारा समाज में नग्नता और अश्लीलता परोसी जा रही है वह उन्हें कभी नहीं दिखाई डी इससे पहले कि मैं अपनी बातों को आप सभी जागरूक जनता जनार्दन विशेष कर बंगाल साहित्य और संस्कृति को समझने वाले बांग्ला जनता के बीच रखो हम लोगों के लिए यह जान लेना आवश्यक है कि आखरी बंगाल में जय श्री राम के विरोध का इतना बड़ा कारण क्या है आन अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन पह...