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Showing posts from September, 2020

जब औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर के विध्वंस का दिया था आदेश

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काशी काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 5 जब औरंगजेब ने विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने का जारी किया था आदेश मनीष पाण्डेय जब मैं मुसलमानों के मुंह से सुनता हूं कि उन्हें भारतीय संविधान भारतीय कानून के अनुसार नहीं चलना बल्कि अपनी शरीयत के अनुसार ही सारी व्यवस्थाओं को चलाना चाहते हैं शरिया में पैगम्बर मुहम्मद की, इस्लाम की, और कुरान की आलोचना को कड़ाई से निषिद्ध किया गया है। इसमें जिहाद के बारे में और जिहाद की परिभाषा दी गयी है। शरिया के अनुसार तब तक जिहाद जारी रखना चाहिए जब तक पूरा विश्व शरिया की शरण में न आ जाय (शरिया के अनुसार न चलना शुरू कर दे)। शरिया के अनुसार सभी काफिर और गैर-मुसलमानों को धिम्मी बनाना हैं इस्लाम में धिम्मी (dhimmi ([ˈðɪmːiː]; अरबी: ذمي‎, समूह में أهل الذمة अह्ल अल-धिम्माह; ओटोमान तुर्की एवं उर्दू में जिम्मी) उस व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को कहते हैं जो मुसलमान नहीं है और शरियत कानून के अनुसार चलने वाले किसी राज्य की प्रजा है। इस्लाम के अनुसार इन्हें...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिरविध्वंस श्रंखला भाग 4

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 काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 4 विदेशी यात्रियों, इतिहासकारों, लेखकों, की दृष्टि में काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस मनीष पाण्डेय काशी महादेव की नगरी है, काशी मोक्ष की नगरी है कहते हैं काशी स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर के जिसने दर्शन कर गंगा नदी में स्नान कर लिया उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है पुराणों में कथा का वर्णन आता है जिसमें हिम पुत्री पार्वती का विवाह भगवान शंकर के साथ संपन्न होता है भगवान शंकर कैलाश पर्वत में ही रहने लगते हैं किंतु पार्वती को यह पसंद नहीं आता और वह शंकर से बार-बार आग्रह करती है कि वह अपने स्थान पर ले चले अपने देश ले चले, भगवान शंकर की बात को मान जाते हैं और पार्वती संग काशी चले जाते हैं, कहते हैं कि काशी में आकर भगवान शंकर यहीं पर 12वें ज्योतिर्लिंग के रूप में विश्वनाथ अथवा विशेश्वर के रूप में प्रतिष्ठित हो गए, दुर्भाग्यवश इसी काशी विश्वनाथ मंदिर जहां भगवान शिव स्वयं विराजे को नष्ट भ्रष्ट करने के लिए ना जाने कितनी बार मुगल आक्रांताओं ने इस ओर रुख किया, अपनी जिहादी और आतंकी प्रवृत्ति से वशीभूत इन जिहादी लुट...

जब शाहजहां ने तुडवाया था काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रृंखला भाग 3 जब शाहजहां ने करवाया था मंदिर का विध्वंस मनीष पाण्डेय  भारत में मुगल आक्रांताओं का इतिहास बेहद डरावना घृणित विभक्त विलासिता अय्याशी और आतंक से परिपूर्ण है मोहम्मद बिन कासिम से लेकर जितने भी मुगल शासकों ने इस भारत की पवित्र पावन भूमि पर राज करने का मकसद मात्र और मात्र इस्लाम को फैलाना, शरीयत को लागू करना , भारत की संपत्ति को लूटना, और यहां के हिंदू धर्म स्थलों को ध्वस्त कर उसे विवादित बनाते हुए वहां पर मस्जिदों का निर्माण कर देना ,जो सेकुलर वादी हिंदू मुगलों द्वारा बनाई गई इमारतों स्थलों को मुगल स्थापत्य का शानदार नमूना बताते हुए थकते नहीं हैं उन्हें इस बात का ज्ञान होना चाहिए कि जिस जिस इमारत जिस भवन और जिस मस्जिद का आज वे यशोगान वे कर रहे हैं, उस भवन उस इमारत और उस तथाकथित मस्जिद के पीछे न जाने कितने हिंदुओं का रक्त और हड्डियां उसकी नींव पड़ी हुई है, भारत के अनेक वामपंथी इतिहासकारों,  मुगल साम्राज्य और मुगल आक्रांताओं की शान में न जाने कितने प्रशस्ति पत्र पुस्तक के रूप में लिख डाले, पर क्या असली इतिहास हमारे सामने कभी आया य...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 2

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 2 जब काशी में मोहम्मद गौरी ने धर्म पर आरूढ़ हिंदुओं का किया था वध *फिरोजशाह तुगलक ने लगाया था ब्राह्मणों पर जजिया कर, विध्वंस किया काशी विश्वनाथ मंदिर मनीष पाण्डेय  मोहम्मद गौरी( 1173 से 1206) का इतिहास हमें यह बताता है कि मोहम्मद गौरी द्वारा भारत पर आक्रमण करने का उद्देश्य सर्वप्रथम यहां की संपत्ति को लूटना और दूसरा इस्लाम अर्थात तुर्क साम्राज्य की स्थापना करना जिस तरह ज्यादातर मुस्लिम शासक शरीयत और कुरान से वशीभूत होकर काफिरों अर्थात हिंदुओं का क़त्ल करो, उनकी संपत्ति को लूट लो, और उनके मंदिरों को नष्ट भ्रष्ट कर दो , यही भावना मोहम्मद गोरी में भी थी लेखक हसन निजामी मैं मोहम्मद गौरी के व्यक्तित्व का वर्णन अपनी पुस्तक ताज उल मासिर में इस तरह से किया है पंथ के दायित्वों के निर्वाह के लिए जैसा वीर पुरुष चाहिए वह सुल्तानों के सुल्तान भविष्य वासियों और बहू देवता पूजन के विध्वंस मोहम्मद गौरी के शासन में उपलब्ध हुआ, और उसे अल्लाह ने उस समय के राजाओं और शहंशाह में से छांटा था, क्योंकि उसने अपने आपको पंथ के शत्रुओं के मूलोच्छदन ...

ह्वेनसांग ने जब देखी थी भगवान शिव की 100 फुट की मूर्ति

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विवाद श्रंखला   भाग 1 जब ह्वेनसांग ने देखी थी 100 फुट भगवान शिव की मूर्ति *अब मथुरा और काशी की बारी है•••• मनीष पाण्डेय  जब से राम जन्मभूमि का ऐतिहासिक निर्णय देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया तब से ही देश के हिंदू जनमानस में मुगल आक्रांता द्वारा कब्जा किए गए हिंदू मंदिरों जिन्हें मुगल आक्रांताओं द्वारा जानबूझकर एक विशेष रणनीति के तहत विवादित बनाया गया था की मुक्ति का रास्ता दिखाई देने लगा राम जन्म भूमि के बाद देश के बहुसंख्यक हिंदू समाज और हिंदूवादी संगठनों की दृष्टि मथुरा और काशी की ओर मुड़ गई है, वाराणसी शहर का नामकरण वरुणा और असी नदी को मिलाकर बना हुआ है, काशी और मथुरा पर अखाड़ा परिषद की प्रयागराज में हुई बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय हुआ कि, एक ओर तो वे हिंदू संगठनों के माध्यम से जन आंदोलन को चलाने हेतु प्राथमिकता देंगे तथा दूसरे वे न्यायालय की भी शरण लेंगे फिलहाल राष्ट्रीय स्वयं संघ ने इस विषय पर अपना गोलमोल उत्तर दिया है और कहा कि अखाड़ा परिषद फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है हमें यह सूचना है कि हमें भविष्य मे...

भारतीय संस्कृति और दर्शन की ब्रांड एंबेसडर रेनी लिन

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भारतीय संस्कृति और दर्शन की ब्रांड एंबेसडर हैं रेनी लिन मनीष पाण्डेय  भारतीय संस्कृति विश्व की सभी संस्कृतियों में महान और सर्वोपरि है यह भारतीय संस्कृति की वैभव ता ही है जिस से प्रभावित होकर विदेशी अक्सर इस ओर खींचे चले आते हैं जहां एक ओर भारतीय संस्कृति की वैभव ता व संपन्नता को देख विदेशी लुटेरे इस ओर आकर्षित हुए वहीं भारत की महान संस्कृति के विद्यमान ऐसे अनेक तथ्य थे जिनको देखकर यह विदेशी भारतीय रंग में ही रंग गए यह भारतीय संस्कृति का ही प्रभाव था कि उन्हें भारत की मातृभूमि अपनी मातृभूमि से अधिक प्यारी लगने लगी इतिहास में ऐसे अनेक चरित्र हैं जिन्होंने इस संस्कृति को सर आंखों पर बैठाया उसका गुणगान किया और जीवन पर्यंत भारत के दर्शन कला संस्कृति को अक्षुण्ण रखने का मनसा,वाचा कर्मणा से आत्मसात भी किया है, इतिहास पर अगर दृष्टि डालें तो अनेक विदेशी नागरिक भारत आए और भारत की कला दर्शन और संस्कृति को देखकर यही पर अपना सारा जीवन व्यतीत कर दिया अथवा उन्होंने अपना सारा जीवन संपूर्ण व्यक्तित्व ने ही अभूतपूर्व परिवर्तन कर लिया कुछ समय पहले आई हुई हॉलीवुड सुपरस्टार विल...

यूपीएससी जिहाद रसोडे में कौन-कौन था और कौन-कौन है

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यूपीएससी के प्रशासनिक जिहाद पर भला सरकार मौन क्यों? * जांच हो कि रसोडे में कौन-कौन था, और कौन  है? मनीष पाण्डेय  28 तारीख को सुदर्शन टीवी पर बिंदास बोल के माध्यम से एक कार्यक्रम प्रसारित होना था जिस पर सरकार द्वारा रोक लगा दी गई कार्यक्रम में सुदर्शन टीवी के प्रमुख सुरेश चौहान यूपीएससी मैं बड़ी तादाद में बढ़ रहे मुस्लिमों की संख्या एक पीछे छुपे हुए सत्य को उजागर करने मंशा थी किंतु कार्यक्रम प्रसारित होने से पहले ही सरकार की भ्रुकुटी पूरे कार्यक्रम पर जिस तरह तनी वह अपने आप में बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है खैर जब कार्यक्रम पर रोक लगाई गई तो मुझे बहुत विशेष आश्चर्य नहीं हुआ था क्योंकि वर्तमान में जिस तरह सरकार मुस्लिम तुष्टीकरण की ओर तेजी से बढ़ी है उसमें यह आश्चर्य कतई नहीं होना चाहिए कि अपने मुस्लिम वोट बैंक और बड़ी मात्रा में प्राप्त होने वाली फंडिंग को सरकार किसी भी दशा में छोड़ना नहीं चाहती है दुर्भाग्यवश जो कार्य कांग्रेश के काल में होता था अब वही कार्य भाजपा के काल में हो रहा है खैर मूल मुद्दा वह है जिसे सुरेश चौहान अपने कार्यक्रम के माध्यम से उठाना चाहते थे उसके पीछ...