जोमैटो एक सेकुलर वादी सोच से ग्रसित व्यवसाय कंपनी
खाना खाना अपने आप में है धर्म जोमैटो की यह विकृत और घृणित सोच मनीष पांडेय जोमैटो ने जो किया वह पूरी तरह से गलत है उसका यह कुतर्क देना कि खाने का कोई धर्म नहीं होता खाना अपने आप में खुद धर्म है यह भी जोमैटो के अल्प ज्ञान को ही प्रदर्शित करता है एक कुलीन ब्राह्मण जो शिवभक्त भी है अगर सावन के महीने में पूरी तरह सात्विक भावना के साथ मात्र इतना कहता है कि उसे जोमैटो के खाने से परहेज नहीं बल्कि उस खाने को लेकर आने वाले से परहेज है इस विषय पर एक गहन विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है गहन विचार-विमर्श करने के उपरांत अमित शुक्ला ने यह क्यों कहा यह पूरी तरह से सामने आ जाएगा वास्तव में मुस्लिम को कभी भी हिंदू त्योहारों की पवित्रता क्या होती है इस विषय में सर्वथा जानकारी का अभाव रहता है एक हिंदू जब व्रत त्यौहार रखता है तो वह कितनी सात्विकता के साथ उसका निर्वहन करता है यह बात कभी भी मुस्लिम नहीं समझ सकता इस बात का ध्यान दीजिए कि अमित शुक्ला ने भोजन का विरोध नहीं किया बल्कि उस भोजन को लाने वाले मुस्लिम युवक का विरोध किया जो संभवतः एक सात्विक विचारधारा में परिपूर्ण नहीं अथवा खरा नहीं उतरता है, और...