अमर्त्य सेन एक अर्थशास्त्री अथवा अर्थशास्त्री


पहले अपने घर की बिगड़ती संस्कृति पर ध्यान दें अनर्थशास्त्री अमर्त्य सेन
मनीष पांडे
अपने आपको को अर्थशास्त्र भी बताने वाले अमर्त्य सेन ने अभी पश्चिमी बंगाल के जादवपुर विश्वविद्यालय में आयोजित एक समारोह में कहा कि जय श्री राम का नारा बंगाली संस्कृति का हिस्सा नहीं है यह लोगों को पीटने के बहाने के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है जब उन्होंने यह कहा तो मुझे उनकी इस अद्भुत ज्ञान पर बेहद आश्चर्य हुआ क्या इसी ज्ञान के बल पर वह एक अर्थशास्त्री बने जिन्हें ना बांग्ला संस्कृति का ज्ञान है ना ही साहित्य का, आश्चर्य होता है मुझे इस बात का भी की अमृत सेन को बांग्ला साहित्य कि इतनी ज्यादा तो समझ है किंतु अपने घर की संस्कृति और सभ्यता जो उनकी बेटी नंदिता सेन के द्वारा समाज में नग्नता और अश्लीलता परोसी जा रही है वह उन्हें कभी नहीं दिखाई डी इससे पहले कि मैं अपनी बातों को आप सभी जागरूक जनता जनार्दन विशेष कर बंगाल साहित्य और संस्कृति को समझने वाले बांग्ला जनता के बीच रखो हम लोगों के लिए यह जान लेना आवश्यक है कि आखरी बंगाल में जय श्री राम के विरोध का इतना बड़ा कारण क्या है आन अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन पहली बात तो यही गलत बोलते हैं कि बांग्ला साहित्य में या संस्कृति में भगवान राम है ही नहीं ऐसा कहते वक्त वह भूल जाते हैं की बंग भाषा के आदि कवि कृति वास ओझा द्वारा बंग भाषा में पहली रामायण लिखी गई उसके बाद तो पूरा बांग्ला साहित्य ही राम की महिमा का गुणगान करता हुआ नजर आता है चाहे वह गद्य में हो चाहे वह पद में हो इसमें आगे हम सुख में भट्टाचार्य द्वारा रचित रामायण अरे सरिता वर्ली अमलेश भट्टाचार्य द्वारा लिखित रामायण कथा रही हूं फिर चाहे बांग्ला साहित्य की कमी चंद्रावती द्वारा रचित चंद्रावती रामायण और बांग्ला साहित्य में ही कवि माइकल मधुसूदन दत्ता का मेघनाथ वध काव्य इस तरह एक लंबी श्रंखला है बांग्ला साहित्य में जिन्होंने पूरे मनोयोग से प्रभु श्री राम के चरित्र का वर्णन किया है अमर सिंह ने भी भूल जाते हैं कि प्रभु राम ने ही राम रावण युद्ध के दौरान जिस शक्ति की पूजा की थी वह देवी दुर्गा ही थी जिन्हें वह बंगाल की संस्कृति में रचा बसा मानते हैं अमृत सेन को यह याद रखना चाहिए कि मेदनीपुर नदिया हावड़ा जैसे स्थानों में आज यही श्री राम की आने के पीठ स्थापित हैं फिर क्या कारण है कि पश्चिमी बंगाल में भगवान राम का इतना विरोध मैं उन कारणों पर प्रकाश डालने की कोशिश करता हूं जिस से स्थितियां स्पष्ट रूप से आप सभी के सामने आ जाएंगे दर्शन देखा जाए तो यह कांग्रेश जनित एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा रहा है तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी है वह भी कभी कांग्रेसका ही हिस्सा था कांग्रेस ने क्या कहा यह सर्वविदित है कांग्रेसमें ही रामायण को एक फिक्शन बताया भगवान राम को काल्पनिक और सांप्रदायिक बताया 1913 में सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दिया किराम का अस्तित्व है ही नहीं और यह भी कहा कि राम तो कभी पैदा ही नहीं है एक बात और ध्यान देने योग्य है कि पश्चिमी बंगाल जो कभी हिंदू संस्कृति का एक बड़ा केंद्र हुआ करता था धीरे धीरे उसका इस्लामीकरण होने लगा बांग्लादेश किस पार्टी के रूप में मुसलमान पश्चिमी बंगाल में एक बड़ी पैठ बना चुके हैं जिनके बल पर सत्ता बदलती है एक कटु सत्य भी है कि पश्चिमी बंगाल में रहने वाला मूल बंगाली बांग्लादेशी घुसपैठियों के मकड़जाल में बुरी तरह फंस चुका है उसकी रगों में अब वीर सुभाष चंद्र बोस का खून नहीं उबलता बल्कि सोनागाछी का कलंक माथे पर लगा अपने आप को बांग्ला संस्कृति का सिरमौर समझता है यह मूल बांग्ला निवासी बाहर से आए हुए बांग्लादेश घुसपैठियों के आगे नतमस्तक है उनके दबाव में यह तो सेकुलर विचारधारा का हो चुका है इसीलिए जब वहां पर हिंदू संस्कृति के रूप में रामनवमी जैसे त्यौहारों को मनाया जाता है तो ना सिर्फ वहां कब्जा जमा चुका बांग्लादेशी घुसपैठिए के रूप में मुसलमान उनके साथ ही साथ इन मूल बंगालियों के सीने पर सांप लोटने लगता है दब्बू और कायर बन चुके यह मूल बंगाली जो अपने आप को बांग्ला संस्कृति का सिरमौर मानते हैं इन घुसपैठियों के आगे घुटने टेक कर रहम की भीख मांगता हुआ प्रतीत होता है और जैसा भी इशारा करते हैं वैसे ही यह लोग मजबूरी बस प्रभु श्री राम का और रामनवमी जैसे त्योहारों का विरोध करने लगते हैं इससे ना बंगाल की पूर्व सत्ता बच सकी थी ना ही आज की ममता बनर्जी कि तृणमूल काग्रेस मैं समझता हूं कि देश की जनता विशेषकर बांग्ला जनता ही आसानी से समझ चुकी होगी कि पश्चिम बंगाल में जय श्री राम बोले के पीछे क्या षड्यंत्र हैं क्या मनोभाव हैं और क्यों विरोध हो रहा है

Comments

Popular posts from this blog

कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 3

इस्लाम और ईसाई पंथ की गंगोत्री है यहूदी पंथ भाग 1