कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 3
कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास श्रंखला भाग 3
देसी विदेशी इतिहासकारों, के दृष्टिकोण में कृष्ण जन्मभूमि
मनीष पाण्डेय
मधुरा मधुपुर मधुपुरी मधु नगरी और मथुरा को सप्तपुरीयों में श्रेष्ठता के दृष्टिकोण से दूसरे नंबर पर माना गया है मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि होने के कारण पूरे विश्व में यह नगरी अपने आध्यात्मिक धार्मिकता के कारण पूरे विश्व में एक विशिष्ट स्थान रखती है गरुण पुराण के अनुसार काशी कांची चमायाख्यातवयोध्याद्वारवतयपि, मथुराऽवन्तिका चैताः सप्तपुर्योऽत्र मोक्षदाः'; 'अयोध्या-मथुरामायाकाशीकांचीत्वन्तिका, पुरी द्वारावतीचैव सप्तैते मोक्षदायिकाः।' यह सर्वविदित है कि कृष्ण जन्मभूमि होने के कारण ही मथुरा की ख्याति पूरे विश्व में फैली हुई है आज से 5000 वर्ष पूर्व जब भगवान कृष्ण इस पृथ्वी पर अवतरित हुए थे तब उनके समय मैं भी राक्षस राक्षसईयो दैत्यों आदि का आतंक व्याप्त था बचपन से लेकर अपने मरणोपरांत तक भगवान श्री कृष्ण राक्षस रूपी आततायियों आतंकियों से लगातार लड़ते रहे और उनका वध करते रहे उनके परलोक गमन के पश्चात इस कृष्ण जन्म भूमि पर कब्जा करने के लिए आधुनिक राक्षसों जिहादी विचारधारा की उत्पत्ति हुई महमूद गजनवी इब्राहिम लोदी औरंगजेब आदि ऐसे ही जिहादी आतंकी विचारधाराओं के तत्व थे जो पूर्व जन्म में दैत्यों और राक्षसों की श्रेणी में आते थे, जिन का वध भगवान श्री कृष्ण ने किया था दुर्भाग्य से हजारों वर्ष बीतने के बाद भगवान कृष्ण का परलोक गमन पश्चात उनका "तो अभी तक पृथ्वी पर नहीं हुआ है किंतु दुर्भाग्यवश उस समय उनके हाथों से मारे गए व्यक्तियों और राक्षसों का अवतरण महमूद गजनवी इब्राहिम लोदी और औरंगजेब के रूप में हुआ जिनके द्वारा पूर्व जन्म की विचारधारा के चलते कृष्ण जन्मभूमि का विध्वंस हुआ आज दुर्भाग्य इस बात का भी है की इन दैत्य दानवों के मानस पुत्र कृष्ण जन्म भूमि पर लगातार कब्जा किए बैठे हैं आप सोच सकते हैं कि आज से 5000 वर्ष पूर्व मलपुरा क्षेत्र के कटरा केशव देव का इतिहास मिटाने के लिए न जाने कितने प्रयत्न किए गए किंतु वे अपने प्रयासों में कभी भी सफल नहीं हो सके पुराण के अनुसार "न केशवसमो देवो न माथुरसमों द्विज" अर्थात केशव के समान और कोई महात्मा युक्त देव नहीं है और माथुर ब्राह्मणों के समान और कोई ब्राह्मण नहीं है पंडित उमा शंकर दीक्षित अपनी पुस्तक कृष्ण जन्मभूमि में कहते हैं कि कृष्ण जन्मभूमि होने के कारण ही केशव देव को यह गौरव प्राप्त हुआ समझा जा सकता है इस प्रकार कटरा केशवपुर का ढाई सहस्त्र वर्षों का इतिहास प्राप्त होता है इतिहास और पुरातत्व दोनों की सम्मिलित साक्षी से हमारे अनुमानों की पुष्टि होती है यह स्थान ही पुरातन कृष्ण जन्मभूमि है, इतिहास गवाह रहा है कि राक्षसों के घर भी देवता गण पैदा हुए हैं जिस महमूद गजनवी ने कटरा केशवपुर स्थित कृष्ण जन्म स्थान का विध्वंस किया उसी के सिपहसालार मीर मुंशी अल्वी ने अपनी पुस्तक किताब ए यामिनी या तारीखे ए यामिनी मैं महमूद गजनवी द्वारा विध्वंस किए गए मंदिर की भव्यता का स्पष्ट रूप से उल्लेख करते हुए कहा गया है कि" मथुरा शहर के बीचोबीच एक भव्य मंदिर मौजूद है जिसे देखने पर लगता है कि इसका निर्माण फरिश्तों ने कराया होगा इस मंदिर का वर्णन शब्दों एवं चित्रों में करना नामुमकिन है सुल्तान खुद कहते हैं कि अगर कोई इस भव्य मंदिर को बनाना चाहे तो कम से कम 10 करोड़ दिनार और 200 साल लगेंगे" चाहे कितना भी अच्छा कोई कार्यक्रम इसमें लग जाए "अल उत्बी द्वारा दिए गए उक्त कथन के आधार पर आप आसानी से समझ सकते हैं कि उस समय कृष्ण जन्म भूमि पर बने हुए मंदिर की क्या भव्यता वैभवता, संपन्नता, समृद्धि रही होगी हिंदू राजाओं की एकता ना होने के कारण और हिंदू जनता के उदासीनता के चलते महमूद गजनवी ने इस मंदिर को ना सिर्फ जमकर लूटा बल्कि हजारों हिंदुओं का कत्ल भी किया, महमूद गजनवी का सिपहसालार अलबरूनी ने अपनी पुस्तक एक भारत मैं कई जगह श्री कृष्ण को वासुदेव कहकर संबोधित किया है वहीं अन्य पुस्तकों में श्रीकृष्ण को जाट राजा के रूप में कहकर संबोधित किया है, तथा राजा कुलीचंद्र को कृष्ण का वंशज, ऐसा प्रतीत होता है कि अलबरूनी भारत के संबंध में लिखते समय कई बार दिग्भ्रमित हुआ है उसका सबसे बड़ा कारण जो समझ में आता है वह है कि भाई एक तो भाषा की समस्या दूसरा उसके पास पर्याप्त रूप में भारतीय ग्रंथों का संग्रह ना होना अथवा यह भी हो सकता है क्योंकि वह महमूद गजनवी का सिपहसालार था इसलिए उसने कृष्ण जन्म भूमि के बारे में बहुत ज्यादा नहीं लिखा है, भारतीय इतिहासकार वासुदेव शरण अग्रवाल ने भी केशव कटरापुर को ही कृष्ण जन्मभूमि माना है•••••••••• क्रमशः
कुछ और साक्ष्य सबूत इतिहासकारों पुरातत्व वेक्ताओ की रिपोर्ट अगले अंक में प्रतीक्षा करें
आपका ही
मनीष पांडेय अधिवक्ता
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
Comments
Post a Comment