पूना पैक्ट राजा मुजे पैक्ट और हिंदू महासभा भाग 3
राजा मुंजे पैक्ट, पूना पैक्ट और हिंदू महासभा भाग 3
*पूना पैक्ट से पहले राजा मुंजे पैक्ट हिंदू महासभा का था विशिष्ट योगदान
मनीष पाण्डेय
24 सितंबर 1932 को अंबेडकर और गांधी के मध्य यरवदा सेंट्रल जेल में एक समझौता हुआ जिसे पूना पैक्ट समझौता के नाम से जाना गया
डॉक्टर अंबेडकर दलितों के लिए पृथक निर्वाचन व्यवस्था की मांग कर रहे थे और अपनी मांग पर अड़े हुए थे तब गांधी ने यह कहते हुए यरवदा जेल में अनशन प्रारंभ कर दिया कि दलितों के पृथक निर्वाचन व्यवस्था से हिंदू समाज विघटित होगा जब चारों ओर से दबाव पड़ने लगा तो डॉक्टर अंबेडकर मजबूर हुए और उन्होंने अंत में जो समझौता किया वही पूना पैक्ट कहलाया किंतु यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पूना पैक्ट से पहले ही हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे डॉक्टर बालकृष्ण शिवराम मुंजे तमिलनाडु के दलित नेता मालकाई चिन्ना थंबी राजा द्वारा दलित हितों को ध्यान में रखते हुए पृथक निर्वाचन का विरोध करते हुए संयुक्त निर्वाचन प्रणाली का समर्थन करते हुए एक समझौता फरवरी 1932 माह में कर दिया गया था, जिसे राजा मुंजेपैक्ट कहा गया था राजा मुंजे पैक्ट का मूल उद्देश्य ही था कि वह एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत करेगा जो ना तो न्याय से समझौता ही करेगा और ना ही अंग्रेजों की बनाई नीति फूट डालो शासन करो की नीति का शिकार नहीं होगा मालकाई चिन्नाथंबी राजा (17 जून 1883 20 अगस्त 1943) दलित राजनीतिज्ञ और तमिलनाडु के सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता थे जस्टिस पार्टी पेरियरो जो कि एक अनुसूचित जाति समुदाय था, के सर्वमान्य नेता हुआ करते थे राजा व डॉक्टर अंबेडकर कद लगभग एक ही था, डॉक्टर अंबेडकर का राजा दोनों ने दूसरे गोलमेज सम्मेलन में दलितों का प्रतिनिधित्व किया था, श्याम 1935 में डॉक्टर अंबेडकर ने हिंदू धर्म को छोड़ने का निर्णय किया तो सबसे पहले विरोध राजा नहीं किया था क्योंकि राजा मानते थे कि हिंदू धर्म से धर्मान्तरित दलित हिंदू समाज सुधार को के दृढ़ संकल्प को कमजोर करेगा जो जातिगत विसंगतियों को लड़ने में सम्मिलित थे डॉक्टर मुझे हिंदू महासभा के अध्यक्ष 1927 थे हिंदुओं को सैन्य प्रशिक्षण देने के प्रबल समर्थकों के तौर पर जाने जाते थे महाराष्ट्र के भोंसला मिलट्री स्कूल की स्थापना उन्होंने ही की थी,1934 में मुंजे ने सेंट्रल हिंदू मिलिट्री एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना की जिसका उद्देश्य मातृभूमि की रक्षा के लिए युवा हिंदुओं को सैन्य प्रशिक्षण देना और उन्हें 'सनातन धर्म' की शिक्षा देना था। साथ ही, निजी सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की कला में युवाओं को प्रशिक्षित करना था। टॉम जीने 1930 तथा 1931 में हुए गोलमेज सम्मेलन में हिंदू महासभा के प्रतिनिधि के तौर पर भाग लिया था
डॉक्टर अंबेडकर ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड द्वारा घोषित सांप्रदायिक पुरस्कार को एक अमूल्य विशेषाधिकार माना था, साइमन कमीशन ने एससी को प्रांतीय विधायिका में 14 से 36 सीटों में से 117 सीटें दी थी तथा 237 सीटें अल्पसंख्यक संधि के तहत जिस पर डॉक्टर अंबेडकर ने हस्ताक्षर किए थे भारतीय केंद्रीय समिति की सिफारिशों के अनुसार दी थी राजा संयुक्त निर्वाचन के पक्ष में थे उन्होंने कहा कि "मुझे नहीं पता कि प्रधानमंत्री सीटों के आरक्षण के साथ संयुक्त निर्वाचन की घोषणा को अव्यावहारिक क्यों कहते हैं यह मद्रास और कुछ अन्य प्रांतों में स्थानीय निकायों में पहले से ही लागू है और बहुत संतोषजनक ढंग से कार्य कर रहा है मुझे प्रधानमंत्री के इस तर्क पर हैरानी है कि कोई कल गांव नहीं है क्योंकि हम जाति के हिंदुओं को वोट दे सकते हैं जिन्हें हमारे वोट को हासिल करना होगा लेकिन महोदय जब हम उच्च जातियों के वोट को नहीं डालना चाहते तो हम नागरिकता के एक सामान्य आदर्श के बारे में कैसे ला सकते हैं" उन्होंने कहा कि" हम निराश वर्ग अपने आपको सच्चे हिंदू के तौर पर महसूस करते हैं क्योंकि किसी भी जाति के हिंदू हो सकते हैं और हमें लगता है कि हिंदुओं के महत्व के विवेक को इस हद तक रौंदा गया है कि हमारा उद्धार हिंदू समाज के मुख्य समाज के भीतर बदलाव लाने में नहीं थे और खुद को हमें उनसे अलग नहीं करना चाहिए तमिलनाडु की आवश्यकता विरोध अभियान" के सक्रिय नेता के बाश्याम ने राजा से मुलाकात कर उनके साथ किए गए समझौते का समर्थन किया था सच तो यह है कि पूना पैक्ट राजामुंजे द्वारा किए गए पैक्ट की ही प्रतिकृति थी, 16 मार्च 1932 को एमसीएम के नेता देवरूखबर द्वारा राजा मुजे द्वारा किए गए समझौते के पक्ष में एक जुलूस भी निकाला गया था ,एमसी राजा तथा 20 मई के मध्य पहला हिंदू ऐसी समझौता था एम सी राजा ने इस आरक्षण समझौते के महत्व को इंगित करते हुए कहा कि इसे उदास वर्ग का एकमात्र केंद्रीय संगठन तथा पूर्ण रूप से हिंदुओं के संगठित निकाह के बीच हुए समझौते के रूप में मान्यता प्रदान की, अंबेडकर दलितों के लिए अलग से निर्वाचक मंडल की मांग कर रहे थे वही एमसी राजा संयुक्त निर्वाचन मंडल की मांग कर रहे थे 1 जनवरी 1931 को प्रथम गोलमेज सम्मेलन में डॉक्टर अंबेडकर ने भाषण देते हुए कहा था कि "दलित वर्गों के हम चार करोड़ 30 लाख लोग अपने और हिंदुओं के बीच पूर्व बंटवारा चाहते हैं यह हमारी पहली मांग है राजनैतिक उद्देश्यों के लिए हमें हिंदू कहा जाता है किंतु हिंदुओं ने हमें सामाजिक दृष्टि से अपना भाई कभी नहीं माना" किंतु एमसी राजा ने 13 सितंबर 1932 को केंद्रीय विधान मंडल में अपने भाषण देते हुए कहा कि "दलित वर्गों के हम लोग अपने को उतना ही सच्चा हिंदू मानते हैं जितना कि कोई सामान हिंदू हो सकता है हम अनुभव कर रहे हैं कि हिंदुओं की नैतिक चेतना में इतना अधिक परिवर्तन आया है कि अब हम हिंदू समाज के भीतर ही परिवर्तन ला कर अपना उद्धार करने की आशा कर सकते हैं ना कि अपने आपको उनसे अलग करके सरकार ने जो रास्ता अपनाया है उससे प्रशंसनीय आंदोलन की प्राप्ति निश्चित रूप से बाधित होगी "डॉक्टर अंबेडकर के वक्तव्य से यह स्पष्ट हो जाता है कि वे जिस बंटवारे की बात कर रहे थे वह सीधे-सीधे उन्हें दलित स्थान की ओर ले जा रही थी
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
MCOM, LLB, MBA( HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिन्दू महासभा
1• एन अनफॉरगेटेबल दलित वॉइस एमसी राजा
*पूना पैक्ट से पहले राजा मुंजे पैक्ट हिंदू महासभा का था विशिष्ट योगदान
मनीष पाण्डेय
24 सितंबर 1932 को अंबेडकर और गांधी के मध्य यरवदा सेंट्रल जेल में एक समझौता हुआ जिसे पूना पैक्ट समझौता के नाम से जाना गया
डॉक्टर अंबेडकर दलितों के लिए पृथक निर्वाचन व्यवस्था की मांग कर रहे थे और अपनी मांग पर अड़े हुए थे तब गांधी ने यह कहते हुए यरवदा जेल में अनशन प्रारंभ कर दिया कि दलितों के पृथक निर्वाचन व्यवस्था से हिंदू समाज विघटित होगा जब चारों ओर से दबाव पड़ने लगा तो डॉक्टर अंबेडकर मजबूर हुए और उन्होंने अंत में जो समझौता किया वही पूना पैक्ट कहलाया किंतु यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पूना पैक्ट से पहले ही हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे डॉक्टर बालकृष्ण शिवराम मुंजे तमिलनाडु के दलित नेता मालकाई चिन्ना थंबी राजा द्वारा दलित हितों को ध्यान में रखते हुए पृथक निर्वाचन का विरोध करते हुए संयुक्त निर्वाचन प्रणाली का समर्थन करते हुए एक समझौता फरवरी 1932 माह में कर दिया गया था, जिसे राजा मुंजेपैक्ट कहा गया था राजा मुंजे पैक्ट का मूल उद्देश्य ही था कि वह एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत करेगा जो ना तो न्याय से समझौता ही करेगा और ना ही अंग्रेजों की बनाई नीति फूट डालो शासन करो की नीति का शिकार नहीं होगा मालकाई चिन्नाथंबी राजा (17 जून 1883 20 अगस्त 1943) दलित राजनीतिज्ञ और तमिलनाडु के सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता थे जस्टिस पार्टी पेरियरो जो कि एक अनुसूचित जाति समुदाय था, के सर्वमान्य नेता हुआ करते थे राजा व डॉक्टर अंबेडकर कद लगभग एक ही था, डॉक्टर अंबेडकर का राजा दोनों ने दूसरे गोलमेज सम्मेलन में दलितों का प्रतिनिधित्व किया था, श्याम 1935 में डॉक्टर अंबेडकर ने हिंदू धर्म को छोड़ने का निर्णय किया तो सबसे पहले विरोध राजा नहीं किया था क्योंकि राजा मानते थे कि हिंदू धर्म से धर्मान्तरित दलित हिंदू समाज सुधार को के दृढ़ संकल्प को कमजोर करेगा जो जातिगत विसंगतियों को लड़ने में सम्मिलित थे डॉक्टर मुझे हिंदू महासभा के अध्यक्ष 1927 थे हिंदुओं को सैन्य प्रशिक्षण देने के प्रबल समर्थकों के तौर पर जाने जाते थे महाराष्ट्र के भोंसला मिलट्री स्कूल की स्थापना उन्होंने ही की थी,1934 में मुंजे ने सेंट्रल हिंदू मिलिट्री एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना की जिसका उद्देश्य मातृभूमि की रक्षा के लिए युवा हिंदुओं को सैन्य प्रशिक्षण देना और उन्हें 'सनातन धर्म' की शिक्षा देना था। साथ ही, निजी सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की कला में युवाओं को प्रशिक्षित करना था। टॉम जीने 1930 तथा 1931 में हुए गोलमेज सम्मेलन में हिंदू महासभा के प्रतिनिधि के तौर पर भाग लिया था
डॉक्टर अंबेडकर ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड द्वारा घोषित सांप्रदायिक पुरस्कार को एक अमूल्य विशेषाधिकार माना था, साइमन कमीशन ने एससी को प्रांतीय विधायिका में 14 से 36 सीटों में से 117 सीटें दी थी तथा 237 सीटें अल्पसंख्यक संधि के तहत जिस पर डॉक्टर अंबेडकर ने हस्ताक्षर किए थे भारतीय केंद्रीय समिति की सिफारिशों के अनुसार दी थी राजा संयुक्त निर्वाचन के पक्ष में थे उन्होंने कहा कि "मुझे नहीं पता कि प्रधानमंत्री सीटों के आरक्षण के साथ संयुक्त निर्वाचन की घोषणा को अव्यावहारिक क्यों कहते हैं यह मद्रास और कुछ अन्य प्रांतों में स्थानीय निकायों में पहले से ही लागू है और बहुत संतोषजनक ढंग से कार्य कर रहा है मुझे प्रधानमंत्री के इस तर्क पर हैरानी है कि कोई कल गांव नहीं है क्योंकि हम जाति के हिंदुओं को वोट दे सकते हैं जिन्हें हमारे वोट को हासिल करना होगा लेकिन महोदय जब हम उच्च जातियों के वोट को नहीं डालना चाहते तो हम नागरिकता के एक सामान्य आदर्श के बारे में कैसे ला सकते हैं" उन्होंने कहा कि" हम निराश वर्ग अपने आपको सच्चे हिंदू के तौर पर महसूस करते हैं क्योंकि किसी भी जाति के हिंदू हो सकते हैं और हमें लगता है कि हिंदुओं के महत्व के विवेक को इस हद तक रौंदा गया है कि हमारा उद्धार हिंदू समाज के मुख्य समाज के भीतर बदलाव लाने में नहीं थे और खुद को हमें उनसे अलग नहीं करना चाहिए तमिलनाडु की आवश्यकता विरोध अभियान" के सक्रिय नेता के बाश्याम ने राजा से मुलाकात कर उनके साथ किए गए समझौते का समर्थन किया था सच तो यह है कि पूना पैक्ट राजामुंजे द्वारा किए गए पैक्ट की ही प्रतिकृति थी, 16 मार्च 1932 को एमसीएम के नेता देवरूखबर द्वारा राजा मुजे द्वारा किए गए समझौते के पक्ष में एक जुलूस भी निकाला गया था ,एमसी राजा तथा 20 मई के मध्य पहला हिंदू ऐसी समझौता था एम सी राजा ने इस आरक्षण समझौते के महत्व को इंगित करते हुए कहा कि इसे उदास वर्ग का एकमात्र केंद्रीय संगठन तथा पूर्ण रूप से हिंदुओं के संगठित निकाह के बीच हुए समझौते के रूप में मान्यता प्रदान की, अंबेडकर दलितों के लिए अलग से निर्वाचक मंडल की मांग कर रहे थे वही एमसी राजा संयुक्त निर्वाचन मंडल की मांग कर रहे थे 1 जनवरी 1931 को प्रथम गोलमेज सम्मेलन में डॉक्टर अंबेडकर ने भाषण देते हुए कहा था कि "दलित वर्गों के हम चार करोड़ 30 लाख लोग अपने और हिंदुओं के बीच पूर्व बंटवारा चाहते हैं यह हमारी पहली मांग है राजनैतिक उद्देश्यों के लिए हमें हिंदू कहा जाता है किंतु हिंदुओं ने हमें सामाजिक दृष्टि से अपना भाई कभी नहीं माना" किंतु एमसी राजा ने 13 सितंबर 1932 को केंद्रीय विधान मंडल में अपने भाषण देते हुए कहा कि "दलित वर्गों के हम लोग अपने को उतना ही सच्चा हिंदू मानते हैं जितना कि कोई सामान हिंदू हो सकता है हम अनुभव कर रहे हैं कि हिंदुओं की नैतिक चेतना में इतना अधिक परिवर्तन आया है कि अब हम हिंदू समाज के भीतर ही परिवर्तन ला कर अपना उद्धार करने की आशा कर सकते हैं ना कि अपने आपको उनसे अलग करके सरकार ने जो रास्ता अपनाया है उससे प्रशंसनीय आंदोलन की प्राप्ति निश्चित रूप से बाधित होगी "डॉक्टर अंबेडकर के वक्तव्य से यह स्पष्ट हो जाता है कि वे जिस बंटवारे की बात कर रहे थे वह सीधे-सीधे उन्हें दलित स्थान की ओर ले जा रही थी
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
MCOM, LLB, MBA( HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिन्दू महासभा
1• एन अनफॉरगेटेबल दलित वॉइस एमसी राजा
2•द्वितीय गोलमेज सम्मेलन
3•ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड
4•यरवदा जेल में पूना पैक्ट समझौता
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