जब यहूदियों ने ईसा मसीह को चढ़ाया था क्रूस पर भाग 3
जब यहूदियों ने ईसा मसीह को चढ़ाया था फांसी पर भाग 3
*क्या ईसा मसीह का हुआ था धर्म परिवर्तन
* ईसा में शैतान की अवधारणा कितनी सच कितनी झूठ?
मनीष पाण्डेय
यह यह सर्वविदित तथ्य है कि यहूदियों द्वारा ही ईसा मसीह को सूली पर चढ़ा कर मार दिया गया था इस आई पंथ में इस बात को लेकर हमेशा से यहूदियों के साथ एक वैमनस्यता आक्रोश वह दुश्मनी देखी गई है किंतु यह आक्रोश और वैमनस्यता उस समय कम होती देखी गई थी जब 16वें पोप बेनेडिक्ट इस पुरानी दावे का कोई ठोस आधार दिखाई नहीं देता है पोप जॉन बेनेडिक्ट ने अपनी पुस्तकJESUS OF NAZARETH में यहूदियों को इस कृत्य के लिए पूरी तरह से दोषमुक्त करार दिया पोप बेनेडिक्ट ने कहा कि इस बात का कोई प्रमाणिक आधार नहीं है कि सभी यहूदी ईसा मसीह की मौत के लिए जिम्मेदार है पोप बेनेडिक्ट द्वारा इस घोषणा से जहां इसाई समुदाय में आश्चर्य व आक्रोश था वही यहूदी समुदाय ने इस बात को लेकर प्रसन्नता जाहिर की थी इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने पोप की इस कदम को स्वागत किया और पूर्व को पत्र लिखा कि मैं इस बात की सराहना करता हूं कि आपने नई किताब में पुरजोर ढंग से गलत आरोपों को नकारा है पुराना पुराने दावे के अनुसार कई सदियों से यहूदियों को घटना का शिकार होना पड़ा है हमें आशा है कि आप के दावे के बाद ईसाई यहूदी समुदाय के मध्य रिश्ते मजबूत होंगे परंतु इतिहास और खुद ईसाई धर्म ग्रंथ बाइबिल भी उन तथ्यों की ओर यह साफ साफ इशारा करता है कि ईसा मसीह को मारने में यहूदियों का कितना बड़ा हाथ था पोप ने भी यही कहा था कि सभी यहूदी ईसा मसीह की मौत के लिए जिम्मेदार नहीं है आइए इस इतिहास को समझने का प्रयास करते हैं वास्तव में,ईसाई पंथ में ईसा मसीह, इस्लाम में यीशू और यहूदी पंथ में येशुआ यह तीनों नाम एक ही है बस पंथ अलग-अलग है तीनों पंथ्यों में एक ही व्यक्ति जिसे जीसस क्राइस्ट के नाम से जाना गया ईसा मसीह या कहीं यूसुफ की मां मरियम जो कि आप उनके पुत्र यूसुफ की पत्नी थी एक यहूदी महिला थी बाइबल कहती है कि बेशक मरियम का विवाह मंगनी युसूफ से हुआ था किंतु विवाह से पूर्व वह ईश्वरीय प्रभाव के कारण कुंवारी मां बनी थी उस समय वहां सम्राट हेरोदस का शासन था, यहूदी इसे हेरोड द ग्रेट कहकर पुकारते थे ,इजराइल जिसका पूरा नाम जुड़ाया था, पर 37 ईसा पूर्व से लेकर चार ईसा पूर्व तक शासन किया था सम्राट या कहीं गवर्नर हर वर्ष के अंतिम समय में यीशु का जन्म हुआ था कहते हैं कि उसने यीशु को मारने के लिए हैरोड ने उस समय 2 साल से कम उम्र के सभी बच्चों को मरवा दिया था हालांकि कुछ विद्वान इस विषय पर असहमत दिखाई देते हैं बाइबल के अनुसार जीसस के जन्म की भविष्यवाणी पहले से ही कर दी गई थी जीसस के जन्म की बात सुन हेरोदस घबरा गया और उसने अपने ज्योतिषियों से पूछा कि मसीह का जन्म कहां हुआ है तो ज्योतिषियों ने उत्तर दिया यहूदियों के बेथल हम में बाइबल कहती है कि प्रभु के दूध इस बात को जानते थे कि है रोडश जीसस को मरवा देगा इसलिए उन्होंने युसूफ से कहा कि वह जीसस वह मरियम को लेकर मिश्र भाग जाए तब यूसुफ और मरियम रात के अंधेरे में मिस्र की ओर निकल गए और हर वर्ष की मृत्यु तक मिश्र में ही रहे प्रसंग वहां वश यहां यह बताना आवश्यक होता है कि जरा सोचिए कि हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण के जन्म के समय भी कंस ने भगवान कृष्ण के जन्म को रोकने के लिए गोकुल के बच्चों को किस तरह राक्षसों को भेजकर मरवा दिया था प्रश्न और यहूदी बंद का आपस में क्या कोई रिश्ता है अगर है तो क्या है निश्चित रूप से इसे आगे की कड़ियों में विस्तृत रूप से जानने का प्रयास करेंगे फिलहाल जीसस का जीवन 13 वर्ष से लेकर 29 वर्ष तक का संतराल अंधेरे में है कहते हैं कि इस समय तक जीसस भारत आ गए थे जम्मू कश्मीर मैं आज भी उनकी समाधि बनी हुई है जिसका वर्णन आगे के किसी भाग में होगा जब जीसस ने अपने 30वें वर्ष में प्रवेश किया तो बाइबल के अनुसार ईसा मसीह का किस माह जॉर्डन में जॉर्डन नदी में हुआ था द होली पैगंबर जॉन द पेपर टुडे उद्धार करता पर खुद को बपतिस्मा दिया एक सवाल अक्सर उठता है कि क्या ईसा मसीह में शैतान का वास था इस विषय पर बाइबल मर्कुस 3:22 में लिखा है कि तब शास्त्री जो यूरो सनम से आए हुए थे कह रहे थे कि इसमें बाल जरूर समाया है पाल जो मूल अर्थात शैतान और दुष्ट आत्माओं के सरदार की सहायता से दुष्ट आत्माओं को निकालता है बाइबिल में दिए गए इस कथन के अर्थ को समझना तंत्र आवश्यक है वास्तव में उस समय रोमन साम्राज्य में ईसाई पंथ तेजी के साथ अपना सिर उठा रहा था, ईसाई मिशनरियों चर्च के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों का विशेष कर यहूदियों का धर्मांतरण कर रही थी प्राचीन रोम में इसाई करण की जो आंधी चली उसका प्रारंभ सम्राट कांस्टेंटटाइन द्वारा किया गया था किंतु 380 ईसवी में सम्राट थियोडोरस द्वारा रोम का अधिकाधिक पंथ इसाई पंत को घोषित कर दिया गया था जिस समय ईसा मसीह का बपतिस्मा यूहन्ना द्वारा किया गया उससे पहले ही शादी यहूदी थे जब ईशा का धर्म परिवर्तन हुआ तो वी ईसाई पंत का प्रचार प्रसार अन्य लोगों विशेषकर यहूदियों का बपतिस्मा देकर बड़ी संख्या में धर्म परिवर्तन आदि करने लगे यह बात यह यहूदियों को अप्रिय लगी बपतिस्मा वास्तव में ईसाई पंथ की दीक्षा दिए जाने के समय होने वाला एक संस्कार है जिसमें व्यक्ति को चर्च की सदस्यता प्रदान की जाती है स्वयं ईसा मसीह का भविष्य मा किया गया था इस आई पंथ में यह माना जाता है कि बपतिस्मा का संस्कार ईसा मसीह ने स्वयं प्रारंभ किया था बपतिस्मा के अंतर्गत पादरी ईसाई होने वाली व्यक्ति को जल छिड़क कर उसे इस आई पंथ में सम्मिलित करवाते थे ईशा की बपतिस्मा की प्रारंभिक घटनाओं को इग्निशियस ऑफ एन्टिओक(INGATIUS OF ANTIOCH) द्वारा यह दावा किया गया कि बपतिस्मा के जल को शुद्ध करने के लिए ईशा का बपतिस्मा किया गया तथा जॉर्डन माय डियर की व्याख्या अनुसार ईशा का बपतिस्मा सभी के लिए आदर्श उदाहरण है सवाल यह उठता है कि यहूदियों ने ईसा मसीह को क्रूस पर चढ़ा कर क्यों मार डाला इस विषय पर गहन रूप से चिंतन करने के उपरांत यह कहा जा सकता है कि अगर यहूदी धर्म धर्माचार्य सीधे-सीधे ईसा मसीह को मारते तो जनता भड़क जाती इसाई पंथ ईसाई पंथ में जिन यहूदियों का धर्मांतरण हुआ था वह भी भड़क जाते धर्मगुरु तथा गवर्नर द्वारा यह चाल चली गई कि यह प्रसारित व प्रचारित कर दिया जाए कि यूसू जो कर रहा है उससे शैतान करवा रहा है यीशु शैतान के बस में है यहूदी द्वारा ईसी शैतान की अवधारणा बनाकर उसे गुलगुता नामक स्थान पर ले जाकर फांसी पर चढ़ा दिया गया था उस समय गली प्रांत का गवर्नर पिलातूस द्वारा दोषपत्र में यह लिखा गया कि यीशु नासरी अर्थात यहूदियों का राजा ईसा मसीह के समय रोमन साम्राज्य था जब रोमन सरकार किसी बड़े अपराधी को मृत्युदंड देती थी तो एक बड़े बोर्ड पर उस अपराधी के दोष को इंगित करते हुए उसके बारे में लिखकर अपराधी के पास रख देते थे ईसा मसीह के पास भी ऐसा ही एक दोष पत्र रखा गया था जो कि 3 भाषाओं में था अर्थात इब्रानी अर्थात हिब्रू ,लेटिन ,ग्रीक, दोष पत्र अर्थात इंक्रिप्शन लिखने की पीछे यही धारणा होती थी कि जिससे लोग उसे देखें अपराधी की गलतियों को देखें और अपने आप में सुधार करें यीशु मसीह को भी क्रूस पर चढ़ाते समय यह तख्ती लगाई गई थी जिस पर लिखा था आई एन आर आई(INRI) लैटिन में इसका अर्थ होता है JESUS OF NAZARETH KING OF JEWS लैटिन में इसे इस तरह बोला जाता है,IESUS OF NAZARETH KING OF JEWS अर्थात I =ईशू,N =नासरी र=रेक्स I =इयारदरूम
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
MCOM LLB MBA (HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा1. ईसा मसीह का बपतिस्मा पेंटिंग लियोनार्दो डा विंची
*क्या ईसा मसीह का हुआ था धर्म परिवर्तन
* ईसा में शैतान की अवधारणा कितनी सच कितनी झूठ?
मनीष पाण्डेय
यह यह सर्वविदित तथ्य है कि यहूदियों द्वारा ही ईसा मसीह को सूली पर चढ़ा कर मार दिया गया था इस आई पंथ में इस बात को लेकर हमेशा से यहूदियों के साथ एक वैमनस्यता आक्रोश वह दुश्मनी देखी गई है किंतु यह आक्रोश और वैमनस्यता उस समय कम होती देखी गई थी जब 16वें पोप बेनेडिक्ट इस पुरानी दावे का कोई ठोस आधार दिखाई नहीं देता है पोप जॉन बेनेडिक्ट ने अपनी पुस्तकJESUS OF NAZARETH में यहूदियों को इस कृत्य के लिए पूरी तरह से दोषमुक्त करार दिया पोप बेनेडिक्ट ने कहा कि इस बात का कोई प्रमाणिक आधार नहीं है कि सभी यहूदी ईसा मसीह की मौत के लिए जिम्मेदार है पोप बेनेडिक्ट द्वारा इस घोषणा से जहां इसाई समुदाय में आश्चर्य व आक्रोश था वही यहूदी समुदाय ने इस बात को लेकर प्रसन्नता जाहिर की थी इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने पोप की इस कदम को स्वागत किया और पूर्व को पत्र लिखा कि मैं इस बात की सराहना करता हूं कि आपने नई किताब में पुरजोर ढंग से गलत आरोपों को नकारा है पुराना पुराने दावे के अनुसार कई सदियों से यहूदियों को घटना का शिकार होना पड़ा है हमें आशा है कि आप के दावे के बाद ईसाई यहूदी समुदाय के मध्य रिश्ते मजबूत होंगे परंतु इतिहास और खुद ईसाई धर्म ग्रंथ बाइबिल भी उन तथ्यों की ओर यह साफ साफ इशारा करता है कि ईसा मसीह को मारने में यहूदियों का कितना बड़ा हाथ था पोप ने भी यही कहा था कि सभी यहूदी ईसा मसीह की मौत के लिए जिम्मेदार नहीं है आइए इस इतिहास को समझने का प्रयास करते हैं वास्तव में,ईसाई पंथ में ईसा मसीह, इस्लाम में यीशू और यहूदी पंथ में येशुआ यह तीनों नाम एक ही है बस पंथ अलग-अलग है तीनों पंथ्यों में एक ही व्यक्ति जिसे जीसस क्राइस्ट के नाम से जाना गया ईसा मसीह या कहीं यूसुफ की मां मरियम जो कि आप उनके पुत्र यूसुफ की पत्नी थी एक यहूदी महिला थी बाइबल कहती है कि बेशक मरियम का विवाह मंगनी युसूफ से हुआ था किंतु विवाह से पूर्व वह ईश्वरीय प्रभाव के कारण कुंवारी मां बनी थी उस समय वहां सम्राट हेरोदस का शासन था, यहूदी इसे हेरोड द ग्रेट कहकर पुकारते थे ,इजराइल जिसका पूरा नाम जुड़ाया था, पर 37 ईसा पूर्व से लेकर चार ईसा पूर्व तक शासन किया था सम्राट या कहीं गवर्नर हर वर्ष के अंतिम समय में यीशु का जन्म हुआ था कहते हैं कि उसने यीशु को मारने के लिए हैरोड ने उस समय 2 साल से कम उम्र के सभी बच्चों को मरवा दिया था हालांकि कुछ विद्वान इस विषय पर असहमत दिखाई देते हैं बाइबल के अनुसार जीसस के जन्म की भविष्यवाणी पहले से ही कर दी गई थी जीसस के जन्म की बात सुन हेरोदस घबरा गया और उसने अपने ज्योतिषियों से पूछा कि मसीह का जन्म कहां हुआ है तो ज्योतिषियों ने उत्तर दिया यहूदियों के बेथल हम में बाइबल कहती है कि प्रभु के दूध इस बात को जानते थे कि है रोडश जीसस को मरवा देगा इसलिए उन्होंने युसूफ से कहा कि वह जीसस वह मरियम को लेकर मिश्र भाग जाए तब यूसुफ और मरियम रात के अंधेरे में मिस्र की ओर निकल गए और हर वर्ष की मृत्यु तक मिश्र में ही रहे प्रसंग वहां वश यहां यह बताना आवश्यक होता है कि जरा सोचिए कि हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण के जन्म के समय भी कंस ने भगवान कृष्ण के जन्म को रोकने के लिए गोकुल के बच्चों को किस तरह राक्षसों को भेजकर मरवा दिया था प्रश्न और यहूदी बंद का आपस में क्या कोई रिश्ता है अगर है तो क्या है निश्चित रूप से इसे आगे की कड़ियों में विस्तृत रूप से जानने का प्रयास करेंगे फिलहाल जीसस का जीवन 13 वर्ष से लेकर 29 वर्ष तक का संतराल अंधेरे में है कहते हैं कि इस समय तक जीसस भारत आ गए थे जम्मू कश्मीर मैं आज भी उनकी समाधि बनी हुई है जिसका वर्णन आगे के किसी भाग में होगा जब जीसस ने अपने 30वें वर्ष में प्रवेश किया तो बाइबल के अनुसार ईसा मसीह का किस माह जॉर्डन में जॉर्डन नदी में हुआ था द होली पैगंबर जॉन द पेपर टुडे उद्धार करता पर खुद को बपतिस्मा दिया एक सवाल अक्सर उठता है कि क्या ईसा मसीह में शैतान का वास था इस विषय पर बाइबल मर्कुस 3:22 में लिखा है कि तब शास्त्री जो यूरो सनम से आए हुए थे कह रहे थे कि इसमें बाल जरूर समाया है पाल जो मूल अर्थात शैतान और दुष्ट आत्माओं के सरदार की सहायता से दुष्ट आत्माओं को निकालता है बाइबिल में दिए गए इस कथन के अर्थ को समझना तंत्र आवश्यक है वास्तव में उस समय रोमन साम्राज्य में ईसाई पंथ तेजी के साथ अपना सिर उठा रहा था, ईसाई मिशनरियों चर्च के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों का विशेष कर यहूदियों का धर्मांतरण कर रही थी प्राचीन रोम में इसाई करण की जो आंधी चली उसका प्रारंभ सम्राट कांस्टेंटटाइन द्वारा किया गया था किंतु 380 ईसवी में सम्राट थियोडोरस द्वारा रोम का अधिकाधिक पंथ इसाई पंत को घोषित कर दिया गया था जिस समय ईसा मसीह का बपतिस्मा यूहन्ना द्वारा किया गया उससे पहले ही शादी यहूदी थे जब ईशा का धर्म परिवर्तन हुआ तो वी ईसाई पंत का प्रचार प्रसार अन्य लोगों विशेषकर यहूदियों का बपतिस्मा देकर बड़ी संख्या में धर्म परिवर्तन आदि करने लगे यह बात यह यहूदियों को अप्रिय लगी बपतिस्मा वास्तव में ईसाई पंथ की दीक्षा दिए जाने के समय होने वाला एक संस्कार है जिसमें व्यक्ति को चर्च की सदस्यता प्रदान की जाती है स्वयं ईसा मसीह का भविष्य मा किया गया था इस आई पंथ में यह माना जाता है कि बपतिस्मा का संस्कार ईसा मसीह ने स्वयं प्रारंभ किया था बपतिस्मा के अंतर्गत पादरी ईसाई होने वाली व्यक्ति को जल छिड़क कर उसे इस आई पंथ में सम्मिलित करवाते थे ईशा की बपतिस्मा की प्रारंभिक घटनाओं को इग्निशियस ऑफ एन्टिओक(INGATIUS OF ANTIOCH) द्वारा यह दावा किया गया कि बपतिस्मा के जल को शुद्ध करने के लिए ईशा का बपतिस्मा किया गया तथा जॉर्डन माय डियर की व्याख्या अनुसार ईशा का बपतिस्मा सभी के लिए आदर्श उदाहरण है सवाल यह उठता है कि यहूदियों ने ईसा मसीह को क्रूस पर चढ़ा कर क्यों मार डाला इस विषय पर गहन रूप से चिंतन करने के उपरांत यह कहा जा सकता है कि अगर यहूदी धर्म धर्माचार्य सीधे-सीधे ईसा मसीह को मारते तो जनता भड़क जाती इसाई पंथ ईसाई पंथ में जिन यहूदियों का धर्मांतरण हुआ था वह भी भड़क जाते धर्मगुरु तथा गवर्नर द्वारा यह चाल चली गई कि यह प्रसारित व प्रचारित कर दिया जाए कि यूसू जो कर रहा है उससे शैतान करवा रहा है यीशु शैतान के बस में है यहूदी द्वारा ईसी शैतान की अवधारणा बनाकर उसे गुलगुता नामक स्थान पर ले जाकर फांसी पर चढ़ा दिया गया था उस समय गली प्रांत का गवर्नर पिलातूस द्वारा दोषपत्र में यह लिखा गया कि यीशु नासरी अर्थात यहूदियों का राजा ईसा मसीह के समय रोमन साम्राज्य था जब रोमन सरकार किसी बड़े अपराधी को मृत्युदंड देती थी तो एक बड़े बोर्ड पर उस अपराधी के दोष को इंगित करते हुए उसके बारे में लिखकर अपराधी के पास रख देते थे ईसा मसीह के पास भी ऐसा ही एक दोष पत्र रखा गया था जो कि 3 भाषाओं में था अर्थात इब्रानी अर्थात हिब्रू ,लेटिन ,ग्रीक, दोष पत्र अर्थात इंक्रिप्शन लिखने की पीछे यही धारणा होती थी कि जिससे लोग उसे देखें अपराधी की गलतियों को देखें और अपने आप में सुधार करें यीशु मसीह को भी क्रूस पर चढ़ाते समय यह तख्ती लगाई गई थी जिस पर लिखा था आई एन आर आई(INRI) लैटिन में इसका अर्थ होता है JESUS OF NAZARETH KING OF JEWS लैटिन में इसे इस तरह बोला जाता है,IESUS OF NAZARETH KING OF JEWS अर्थात I =ईशू,N =नासरी र=रेक्स I =इयारदरूम
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
MCOM LLB MBA (HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा1. ईसा मसीह का बपतिस्मा पेंटिंग लियोनार्दो डा विंची
2. क्रूस पर ईसा मसीह
3. ईसा मसीह का बपतिस्मा यूहन्ना द्वारा
4. सम्राट हेरोडस
5.पिलाते
6. जीसस ऑफ नजारथ पुस्तक16वे पोप बेनेडिक्ट
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