हिंदू राष्ट्र विरोधी ब्राह्मण विरोधी बौद्ध पंथी डॉक्टर अंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाएं भाग 4
हिंदू राष्ट्र विरोधी , ब्राह्मण विरोधी मानसिकता से ग्रस्त बौद्धपंथी डॉक्टर अंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाएं (भाग 4)
मनीष पाण्डेय
डॉक्टर अंबेडकर ने अपनी पुस्तक अंबेडकर एंड बुद्धिस्म इन इंडिया में कहा कि मैं हिंदू धर्म में पैदा जरूर हुआ हूं लेकिन हिंदू रहते मरूंगा नहीं डॉक्टर अंबेडकर ने ऐसा क्यों कहा इस वक्तव्य की गंभीरता को समझना अत्यंत आवश्यक है हिंदू राष्ट्र बनाए जाने की हिंदू महासभा की विचारधारा का विरोध करते हुए डॉक्टर अंबेडकर ने कहा था कि" वास्तव में हिंदू राज बनने पर निसंदेह इस देश के लिए एक भारी खतरा उत्पन्न हो जाएगा हिंदू कुछ भी कहे लेकिन यह सत्य है कि हिंदुत्व स्वतंत्रता समानता और भाईचारे के लिए एक खतरा है इस आधार पर प्रजातंत्र के लिए यह अनुपयुक्त हिंदू राज को हर कीमत पर रोका जाना चाहिए" इसका वर्णन उन्होंने अपनी पुस्तक पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन में किया है डॉ आंबेडकर ना सिर्फ हिंदू विरोधी मानसिकता से ग्रसित थे बल्कि ब्राह्मण विरोधी भी थी उनकी दृष्टि में हिंदू राष्ट्र का उदय का अर्थ ब्राह्मण वर्चस्व की स्थापना करना ही था डॉक्टर अंबेडकर की पुस्तक"REVOLUTION AND COUNTET REVOLUTION IN ANCEIENT INDIA " मैं भारत के बंटवारे और ब्राह्मण विरोधी विचारधारा का उल्लेख करते हैं वे लिखते हैं कि ऐतिहासिक रूप से यहां तीन भारत हैं ब्राह्मण भारत बौद्ध भारत और हिंदू भारत डॉक्टर अंबेडकर के इस बंटवारे से स्पष्ट हो जाता है कि उनके मन में कहीं ना कहीं दलित उत्थान को लेकर एक बड़ा सपना पल रहा था डॉ आंबेडकर मुसलमानों से ज्यादा हिंदू राष्ट्र को खतरा मानते थे डॉक्टर अंबेडकर ने हिंदू कोड बिल प्रस्तुत किया था वह भी हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को तोड़ने के लिए ही प्रस्तुत किया गया था इसी पुस्तक में भी आगे लिखते हैं कि अशोक ने बुद्ध धर्म को राजकीय धर्म घोषित कर दिया था सचमुच में ब्राह्मणवाद के लिए एक बड़ा धक्का था इससे ब्राह्मणों को राज्य का संरक्षण मिलना बंद हो गया अशोक साम्राज्य में उन्हें गॉड या अधीनस्थों का दर्जा दिया जाने लगा और उनकी अवहेलना की जाने लगी मिशन दे कहा जा सकता है कि ब्राह्मण धर्म को दबा दिया गया क्योंकि अशोक ने सभी पशु वलियों पर रोक लगा दी जिस पर ब्राह्मणवाद टिका हुआ था इस प्रकार न सिर्फ उन्हें राज्य का संरक्षण मिलना बंद हो गया बल्कि उनका व्यवसाय भी बंद हो गया यह व्यवसाय था यज्ञ कर्म करना और उसके बदले शुल्क लेना जो बहुत अधिक होता था इस दौरान ब्राह्मण लोग दलित और दमित वर्गों की तरह रहे इसी पुस्तक में वे लिखते हैं कि ब्राह्मण इससे परेशान होकर विद्रोह कर बैठे मौर्य समुदाय के विरुद्ध विद्रोह का नेतृत्व पुष्यमित्र शुंग द्वारा किया गया पुष्यमित्र शुंग गोत्र का था वह शाम वादी ब्राह्मण होते थे जो पशु बलि और सोम बलि में विश्वास रखते थे अंबेडकर लिखते हैं कि पुष्यमित्र चुकी एक ब्राह्मण था सामवेदी ब्राह्मण था, पुष्यमित्र द्वारा की गई राज हत्या का उद्देश्य राज्य धर्म के विरुद्ध बुद्ध धर्म को नष्ट करना और ब्राह्मणों को भारत का संप्रभु शासक बनाना था, अंबेडकर यह भी लिखते हैं कि पुष्यमित्र शुंग बुद्ध धर्म के प्रति तथा बौद्ध भिक्षुओं के प्रति कितना विधर्मी था इस बात से पता चलता है कि हर बौद्ध भिक्षु का सिर की कीमत उसने 100 मुद्राएं निर्धारित की थी, डॉक्टर अंबेडकर ने मनुस्मृति का भी जमकर विरोध किया था इसीलिए 1927 में महाड सत्याग्रह में अंबेडकर ने मनुस्मृति की प्रतियां जलाई थी 1935 में जब डॉक्टर अंबेडकर ने अपने आप को हिंदू धर्म से विमुख करने का घोषणा तो कर दी किंतु अगले 20 वर्षों तक वे शांत बैठे रहे और अंत में 1956 में अपने 500000 समर्थकों के साथ बौद्ध पंथ की दीक्षा नागपुर स्थित दीक्षाभूमि मैं ले ली इस अवसर पर उन्होंने हिंदू धर्म का घोर विरोध करते हुए अपनी 22 प्रतिज्ञा ओं को दोहराया यह बाईस प्रतिज्ञाएं निम्नलिखित थी
1•मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा
2•मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, में कोई आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा
3•मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा.
4•मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करता हूँ
5•मैं यह नहीं मानता और न कभी मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे. मैं इसे पागलपन और झूठा प्रचार-प्रसार मानता हूँ
6•मैं श्रद्धा (श्राद्ध) में भाग नहीं लूँगा और न ही पिंड-दान दूँगा.
7•मैं बुद्ध के सिद्धांतों और उपदेशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से कार्य नहीं करूँगा
8•मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूँगा
9•मैं मनुष्य की समानता में विश्वास करता हूँ
10•मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूँगा
11•मैं बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुशरण करूँगा
12•मैं बुद्ध द्वारा निर्धारित परमितों का पालन करूँगा.
13•मैं सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और प्यार भरी दयालुता रखूँगा तथा उनकी रक्षा करूँगा.
14•मैं चोरी नहीं करूँगा.
15•मैं झूठ नहीं बोलूँगा
16•मैं कामुक पापों को नहीं करूँगा.
17•मैं शराब, ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन नहीं करूँगा.
18•मैं महान आष्टांगिक मार्ग के पालन का प्रयास करूँगा एवं सहानुभूति और प्यार भरी दयालुता का दैनिक जीवन में अभ्यास करूँगा.
19•मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ जो मानवता के लिए हानिकारक है और उन्नति और मानवता के विकास में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर आधारित है, और स्व-धर्मं के रूप में बौद्ध धर्म को अपनाता हूँ
20•मैं दृढ़ता के साथ यह विश्वास करता हूँ की बुद्ध का धम्म ही सच्चा धर्म है.
21•मुझे विश्वास है कि मैं फिर से जन्म ले रहा हूँ (इस धर्म परिवर्तन के द्वारा).
22•मैं गंभीरता एवं दृढ़ता के साथ घोषित करता हूँ कि मैं इसके (धर्म परिवर्तन के) बाद अपने जीवन का बुद्ध के सिद्धांतों व शिक्षाओं एवं उनके धम्म के अनुसार मार्गदर्शन करूँगा. उपर्युक्त विवेचन से यह स्पष्ट हो जाता है कि डॉक्टर अंबेडकर पूरी प्लानिंग के साथ दलितों की आवाज उठा कर उन्हें राजनीतिक रूप से मजबूत बनाकर अपनी दमित इच्छा दलित स्थान को पूरा करना चाहते थे एक समय संयुक्त निर्वाचन की मांग करते करते अचानक जब यह पृथक निर्वाचन की मांग करने लगे तो यह स्पष्ट हो गया कि वे धीरे-धीरे दलित स्थान की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं ठीक पाकिस्तान की तर्ज पर उन्होंने भी पृथक निर्वाचन की मांग रखी और अंत में क्या हुआ मुसलमानों द्वारा पाकिस्तान का निर्माण करवा लिया गया डॉक्टर अंबेडकर की जाने के बाद आज ही उनके अनुयाई ना सिर्फ हिंदू धर्म पर आघात करते हैं बल्कि ब्राह्मणों को भी नीचा दिखाने की कोई कसर नहीं छोड़ते हैं वे ऐसा करते समय भूल जाते हैं कि एक ब्राह्मण ने ही डॉ आंबेडकर की नासिर शिक्षा-दीक्षा का प्रबंध किया था बल्कि उन्हें अपना अंबेडकर जाति भी प्रदान कर दी थी जिसे अंबेडकर ने पूरी इज्जत के साथ अपने पूरे जीवन लगाए रखा मेरी समझ से अगर एमसी राजा की जो सोच थी वह यह कि हिंदुओं की बीच रहते हुए बिना बंटवारे की सोचे हुए अगर डॉक्टर अंबेडकर संयुक्त निर्वाचन की मांग का समर्थन करते तो निश्चित रूप से आज उनका कद कहीं और ज्यादा बड़ा होता दुर्भाग्यवश जो उन्होंने जहर अपने वक्तव्य से उजला उसने ना सिर्फ हिंदू समाज का बंटवारा किया बल्कि हिंदू समाज को एक ऐसे अंधेरी खाई में धकेल दिया जहां से निकलना बेहद कठिन है ऐसा नहीं है कि जातिवाद का जहर पहले भी था पहले भी था जिसको लेकर संघर्ष डॉक्टर अंबेडकर ने किया किंतु उनके क्रियाकलाप और उनका बौद्ध पंथ में जाना ना सिर्फ हिंदुत्व के लिए बल्कि दलित समाज के लिए भी घातक सिद्ध हुआ आज जब दलित समाज को हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां तोड़ते हुए देखा जाता है हिंदू धार्मिक ग्रंथों को जलाते हुए देखा जाता है हिंदू धर्म को गालियां ब्राह्मणों को गालियां दी जाती दिखाई जाती है तो बड़ा दुख और प्रसंता होती है दलित समाज आरक्षण प्राप्त कर बड़े-बड़े पदों पर बैठना चाहता है जबकि उसमें योग्यता का पूर्ण अभाव होता है सवाल यह उठता है कि जब कंपटीशन का युग है तो फिर कैसा आरक्षण जिसमें योग्यता हो वह नौकरी ले जाए दलित समाज आरक्षण लेते लेते अपने अंदर की योग्यता को मार चुका है आरक्षण की बैसाखी उसे पंगु बना चुकी है दुर्भाग्य सबसे बड़ा यह है कि आज दलित समाज की इसी कमजोरी का फायदा उठाकर विदेशी देशद्रोही ताकतें उन्हें अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर रही हैं आज बड़ी संख्या में इन दलितों का ही ईसाई करण ईसाई मिशनरी याद कर रही हैं अभी समय है जो दलित बौद्ध पंथ को स्वीकार कर चुके हैं अथवा करने की तैयारी कर रहे हैं उन्हें वापस हिंदू सनातन धर्म में वापसी कर इन विदेशी ताकतों आतंकी संस्थाओं मुस्लिम राष्ट्रों ईसाई मिशनरियों को मुंहतोड़ जवाब दे यही दलित समाज के लिए हिंदुत्व के लिए और इस भारतवर्ष के लिए बेहतर कदम होगा
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
MCOM, LLB, MBA( HR )
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
1•अंबेडकर की पुस्तक क्रांति और प्रति क्रांति
मनीष पाण्डेय
डॉक्टर अंबेडकर ने अपनी पुस्तक अंबेडकर एंड बुद्धिस्म इन इंडिया में कहा कि मैं हिंदू धर्म में पैदा जरूर हुआ हूं लेकिन हिंदू रहते मरूंगा नहीं डॉक्टर अंबेडकर ने ऐसा क्यों कहा इस वक्तव्य की गंभीरता को समझना अत्यंत आवश्यक है हिंदू राष्ट्र बनाए जाने की हिंदू महासभा की विचारधारा का विरोध करते हुए डॉक्टर अंबेडकर ने कहा था कि" वास्तव में हिंदू राज बनने पर निसंदेह इस देश के लिए एक भारी खतरा उत्पन्न हो जाएगा हिंदू कुछ भी कहे लेकिन यह सत्य है कि हिंदुत्व स्वतंत्रता समानता और भाईचारे के लिए एक खतरा है इस आधार पर प्रजातंत्र के लिए यह अनुपयुक्त हिंदू राज को हर कीमत पर रोका जाना चाहिए" इसका वर्णन उन्होंने अपनी पुस्तक पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन में किया है डॉ आंबेडकर ना सिर्फ हिंदू विरोधी मानसिकता से ग्रसित थे बल्कि ब्राह्मण विरोधी भी थी उनकी दृष्टि में हिंदू राष्ट्र का उदय का अर्थ ब्राह्मण वर्चस्व की स्थापना करना ही था डॉक्टर अंबेडकर की पुस्तक"REVOLUTION AND COUNTET REVOLUTION IN ANCEIENT INDIA " मैं भारत के बंटवारे और ब्राह्मण विरोधी विचारधारा का उल्लेख करते हैं वे लिखते हैं कि ऐतिहासिक रूप से यहां तीन भारत हैं ब्राह्मण भारत बौद्ध भारत और हिंदू भारत डॉक्टर अंबेडकर के इस बंटवारे से स्पष्ट हो जाता है कि उनके मन में कहीं ना कहीं दलित उत्थान को लेकर एक बड़ा सपना पल रहा था डॉ आंबेडकर मुसलमानों से ज्यादा हिंदू राष्ट्र को खतरा मानते थे डॉक्टर अंबेडकर ने हिंदू कोड बिल प्रस्तुत किया था वह भी हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को तोड़ने के लिए ही प्रस्तुत किया गया था इसी पुस्तक में भी आगे लिखते हैं कि अशोक ने बुद्ध धर्म को राजकीय धर्म घोषित कर दिया था सचमुच में ब्राह्मणवाद के लिए एक बड़ा धक्का था इससे ब्राह्मणों को राज्य का संरक्षण मिलना बंद हो गया अशोक साम्राज्य में उन्हें गॉड या अधीनस्थों का दर्जा दिया जाने लगा और उनकी अवहेलना की जाने लगी मिशन दे कहा जा सकता है कि ब्राह्मण धर्म को दबा दिया गया क्योंकि अशोक ने सभी पशु वलियों पर रोक लगा दी जिस पर ब्राह्मणवाद टिका हुआ था इस प्रकार न सिर्फ उन्हें राज्य का संरक्षण मिलना बंद हो गया बल्कि उनका व्यवसाय भी बंद हो गया यह व्यवसाय था यज्ञ कर्म करना और उसके बदले शुल्क लेना जो बहुत अधिक होता था इस दौरान ब्राह्मण लोग दलित और दमित वर्गों की तरह रहे इसी पुस्तक में वे लिखते हैं कि ब्राह्मण इससे परेशान होकर विद्रोह कर बैठे मौर्य समुदाय के विरुद्ध विद्रोह का नेतृत्व पुष्यमित्र शुंग द्वारा किया गया पुष्यमित्र शुंग गोत्र का था वह शाम वादी ब्राह्मण होते थे जो पशु बलि और सोम बलि में विश्वास रखते थे अंबेडकर लिखते हैं कि पुष्यमित्र चुकी एक ब्राह्मण था सामवेदी ब्राह्मण था, पुष्यमित्र द्वारा की गई राज हत्या का उद्देश्य राज्य धर्म के विरुद्ध बुद्ध धर्म को नष्ट करना और ब्राह्मणों को भारत का संप्रभु शासक बनाना था, अंबेडकर यह भी लिखते हैं कि पुष्यमित्र शुंग बुद्ध धर्म के प्रति तथा बौद्ध भिक्षुओं के प्रति कितना विधर्मी था इस बात से पता चलता है कि हर बौद्ध भिक्षु का सिर की कीमत उसने 100 मुद्राएं निर्धारित की थी, डॉक्टर अंबेडकर ने मनुस्मृति का भी जमकर विरोध किया था इसीलिए 1927 में महाड सत्याग्रह में अंबेडकर ने मनुस्मृति की प्रतियां जलाई थी 1935 में जब डॉक्टर अंबेडकर ने अपने आप को हिंदू धर्म से विमुख करने का घोषणा तो कर दी किंतु अगले 20 वर्षों तक वे शांत बैठे रहे और अंत में 1956 में अपने 500000 समर्थकों के साथ बौद्ध पंथ की दीक्षा नागपुर स्थित दीक्षाभूमि मैं ले ली इस अवसर पर उन्होंने हिंदू धर्म का घोर विरोध करते हुए अपनी 22 प्रतिज्ञा ओं को दोहराया यह बाईस प्रतिज्ञाएं निम्नलिखित थी
1•मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा
2•मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, में कोई आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा
3•मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा.
4•मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करता हूँ
5•मैं यह नहीं मानता और न कभी मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे. मैं इसे पागलपन और झूठा प्रचार-प्रसार मानता हूँ
6•मैं श्रद्धा (श्राद्ध) में भाग नहीं लूँगा और न ही पिंड-दान दूँगा.
7•मैं बुद्ध के सिद्धांतों और उपदेशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से कार्य नहीं करूँगा
8•मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूँगा
9•मैं मनुष्य की समानता में विश्वास करता हूँ
10•मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूँगा
11•मैं बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुशरण करूँगा
12•मैं बुद्ध द्वारा निर्धारित परमितों का पालन करूँगा.
13•मैं सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और प्यार भरी दयालुता रखूँगा तथा उनकी रक्षा करूँगा.
14•मैं चोरी नहीं करूँगा.
15•मैं झूठ नहीं बोलूँगा
16•मैं कामुक पापों को नहीं करूँगा.
17•मैं शराब, ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन नहीं करूँगा.
18•मैं महान आष्टांगिक मार्ग के पालन का प्रयास करूँगा एवं सहानुभूति और प्यार भरी दयालुता का दैनिक जीवन में अभ्यास करूँगा.
19•मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ जो मानवता के लिए हानिकारक है और उन्नति और मानवता के विकास में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर आधारित है, और स्व-धर्मं के रूप में बौद्ध धर्म को अपनाता हूँ
20•मैं दृढ़ता के साथ यह विश्वास करता हूँ की बुद्ध का धम्म ही सच्चा धर्म है.
21•मुझे विश्वास है कि मैं फिर से जन्म ले रहा हूँ (इस धर्म परिवर्तन के द्वारा).
22•मैं गंभीरता एवं दृढ़ता के साथ घोषित करता हूँ कि मैं इसके (धर्म परिवर्तन के) बाद अपने जीवन का बुद्ध के सिद्धांतों व शिक्षाओं एवं उनके धम्म के अनुसार मार्गदर्शन करूँगा. उपर्युक्त विवेचन से यह स्पष्ट हो जाता है कि डॉक्टर अंबेडकर पूरी प्लानिंग के साथ दलितों की आवाज उठा कर उन्हें राजनीतिक रूप से मजबूत बनाकर अपनी दमित इच्छा दलित स्थान को पूरा करना चाहते थे एक समय संयुक्त निर्वाचन की मांग करते करते अचानक जब यह पृथक निर्वाचन की मांग करने लगे तो यह स्पष्ट हो गया कि वे धीरे-धीरे दलित स्थान की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं ठीक पाकिस्तान की तर्ज पर उन्होंने भी पृथक निर्वाचन की मांग रखी और अंत में क्या हुआ मुसलमानों द्वारा पाकिस्तान का निर्माण करवा लिया गया डॉक्टर अंबेडकर की जाने के बाद आज ही उनके अनुयाई ना सिर्फ हिंदू धर्म पर आघात करते हैं बल्कि ब्राह्मणों को भी नीचा दिखाने की कोई कसर नहीं छोड़ते हैं वे ऐसा करते समय भूल जाते हैं कि एक ब्राह्मण ने ही डॉ आंबेडकर की नासिर शिक्षा-दीक्षा का प्रबंध किया था बल्कि उन्हें अपना अंबेडकर जाति भी प्रदान कर दी थी जिसे अंबेडकर ने पूरी इज्जत के साथ अपने पूरे जीवन लगाए रखा मेरी समझ से अगर एमसी राजा की जो सोच थी वह यह कि हिंदुओं की बीच रहते हुए बिना बंटवारे की सोचे हुए अगर डॉक्टर अंबेडकर संयुक्त निर्वाचन की मांग का समर्थन करते तो निश्चित रूप से आज उनका कद कहीं और ज्यादा बड़ा होता दुर्भाग्यवश जो उन्होंने जहर अपने वक्तव्य से उजला उसने ना सिर्फ हिंदू समाज का बंटवारा किया बल्कि हिंदू समाज को एक ऐसे अंधेरी खाई में धकेल दिया जहां से निकलना बेहद कठिन है ऐसा नहीं है कि जातिवाद का जहर पहले भी था पहले भी था जिसको लेकर संघर्ष डॉक्टर अंबेडकर ने किया किंतु उनके क्रियाकलाप और उनका बौद्ध पंथ में जाना ना सिर्फ हिंदुत्व के लिए बल्कि दलित समाज के लिए भी घातक सिद्ध हुआ आज जब दलित समाज को हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां तोड़ते हुए देखा जाता है हिंदू धार्मिक ग्रंथों को जलाते हुए देखा जाता है हिंदू धर्म को गालियां ब्राह्मणों को गालियां दी जाती दिखाई जाती है तो बड़ा दुख और प्रसंता होती है दलित समाज आरक्षण प्राप्त कर बड़े-बड़े पदों पर बैठना चाहता है जबकि उसमें योग्यता का पूर्ण अभाव होता है सवाल यह उठता है कि जब कंपटीशन का युग है तो फिर कैसा आरक्षण जिसमें योग्यता हो वह नौकरी ले जाए दलित समाज आरक्षण लेते लेते अपने अंदर की योग्यता को मार चुका है आरक्षण की बैसाखी उसे पंगु बना चुकी है दुर्भाग्य सबसे बड़ा यह है कि आज दलित समाज की इसी कमजोरी का फायदा उठाकर विदेशी देशद्रोही ताकतें उन्हें अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर रही हैं आज बड़ी संख्या में इन दलितों का ही ईसाई करण ईसाई मिशनरी याद कर रही हैं अभी समय है जो दलित बौद्ध पंथ को स्वीकार कर चुके हैं अथवा करने की तैयारी कर रहे हैं उन्हें वापस हिंदू सनातन धर्म में वापसी कर इन विदेशी ताकतों आतंकी संस्थाओं मुस्लिम राष्ट्रों ईसाई मिशनरियों को मुंहतोड़ जवाब दे यही दलित समाज के लिए हिंदुत्व के लिए और इस भारतवर्ष के लिए बेहतर कदम होगा
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
MCOM, LLB, MBA( HR )
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
1•अंबेडकर की पुस्तक क्रांति और प्रति क्रांति
2•डॉ आंबेडकर की पुस्तक पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन
3•मनुस्मृति का अध्ययन करते डॉक्टर अंबेडकर
4•भारत विरोधी और हिंदुत्व विरोधी गुट मोहम्मद अली जिन्ना पेरियार और डॉक्टर अंबेडकर
5. महाराष्ट्र के नागपुर स्थित दीक्षाभूमि में डॉक्टर अंबेडकर द्वारा की गई 22 प्रतिज्ञाएं शिलालेख
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