कम्युनल अवार्ड साइमन कमीशन और हिंदू महासभा का विरोध

कम्युनल अवार्ड, , साइमन कमीशन और हिंदू महासभा भाग 2
*जब अंग्रेजों की फूट डालो शासन करो की नीति के शिकार हो गए थे डॉक्टर अंबेडकर
मनीष पाण्डेय
1909 के इंडियन काउंसिल एक्ट (मॉर्ले-मिंटो सुधार) ने पहले ही मुसलमानों को अलग मतदाताओं का अधिकार दे दिया है। बाद में इसे 1919 की मोंटागु-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट द्वारा मान्यता दी गई और 1935 के भारत सरकार अधिनियम द्वारा आगे बढ़ाया गया। 1909 से 1946 तक स्थानीय निकाय और विधान परिषद के सभी चुनाव पृथक निर्वाचक प्रणाली के आधार पर हुए।डॉ। बी.आर अम्बेडकर अनुसूचित जातियों के लिए भी इसी तरह के प्रावधान चाहते थे। ब्रिटिश सरकार अंबेडकर के विवाद से सहमत थी, लाहौर प्रस्ताव प्रस्तुत करते समय जिन्ना के मन में पाकिस्तान अथवा देश विभाजन की अवधारणा नहीं थी उस समय मद्रास के गवर्नर के साथ हुई चर्चा के समय जिन्ना का कथन था कि भारत को चार हिस्सों में बांट देना चाहिए यह चार हिस्से में थे पहला द्रविड़ स्थान दूसरा हिंदुस्तान (मुंबई तथा मध्य प्रांत को लेकर) तीसरा बंगालीस्तान (बंगाल व असम) तथा चौथा पंजाब सिंध और उत्तर-पश्चिम सरहदी प्रदेश
1931 32 में दो राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस गोलमेज सम्मेलन हिंदू मुसलमान सिख तथा दलित पिछड़ों को देश की शासन व्यवस्था तथा संविधान में उनको मिलने वाले संरक्षण व सुविधाओं पर सर्वसम्मति से कोई निर्णय नहीं हो सका तब सभी ने मिलकर इन सब का निर्णय करने के लिए ब्रिटिश सरकार केसर माथे पर डाल दिया तब 16 अगस्त 1932 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री राम से मैकडोनाल्ड ने जो घोषणा की उसे ही सांप्रदायिक निर्णय सांप्रदायिक पंचाट अथवा कम्युनल अवार्ड या मैकडोनाल्ड अवार्ड कहा गया इस अवार्ड में निम्नलिखित प्रावधान किए गए थे
1• प्रांतीय व्यवस्थापिका सभाओं की सदस्य संख्या दोगुनी की जाएगी
2• अल्पसंख्यक तथा विशेष हितों वाले संप्रदायों की संख्या बढ़ा दी गई इसके अंतर्गत मुसलमानों को दलितों पिछड़ी जातियों भारतीय ईसाई एग्रो इंडियन यूरोपियन व्यापारिक व औद्योगिक वर्गों को रखा गया था
3• अल्पसंख्यकों के लिए अलग निर्वाचन की व्यवस्था रखी गई
4• अछूतों को हिंदुओं से अलग मानकर उनके लिए भी अलग निर्वाचन तथा प्रतिनिधित्व का अधिकार दिया गया
5• स्त्रियों के लिए स्थान निर्धारित हुआ
6• श्रम वाणिज्य उद्योग चाय बागान संघ जमीदारों और विश्वविद्यालयों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था वह स्थान आरक्षित किया गया
7• जिन क्षेत्रों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं उन्हें वैसी रियायत नहीं दी गई जैसी मुसलमानों को दी गई थी जहां उनकी जनसंख्या कम थी जिन प्रांतों में मुसलमानों की संख्या कम थी वहां मुद जनसंख्या के अनुपात में भी अधिक प्रतिनिधित्व दिया गया परंतु पंजाब और बंगाल जहां मुसलमान बहुमत में थे उनके लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था की गई उत्तर प्रदेश बिहार मद्रास में मुसलमानों की जनसंख्या के अनुपात से दोगुने स्थान प्रदान किए गए थे
1931 की जनगणना के अनुसार बंगाल में मुसलमानों की कुल जनसंख्या 54 पॉइंट 8% थी तथा हिंदू 44 पॉइंट 8% प्रांतीय विधान मंडल में 250 स्थानों में से 119 स्थान मुसलमानों को तथा 80 स्थान हिंदुओं को दिए गए 18 अगस्त 1932 को महात्मा गांधी ने मैकडोनाल्ड को पत्र लिखा कि अगर दलितों के लिए पृथक निर्वाचन प्रणाली को समाप्त नहीं किया गया तो वे 20 अगस्त 1932 को आमरण अनशन प्रारंभ कर देंगे सरकार ने गांधी को पत्र का जवाब नहीं दिया बल्कि गांधीजी पर यह आरोप लगाया कि दलितों का व्यवस्था नहीं चाहते हैं 20 अगस्त को यरवदा जेल में आमरण अनशन प्रारंभ हुआ 17 अगस्त 1932 को कम्युनल अवार्ड की घोषणा हुई जिसमें मुसलमानों को तथा अन्य वर्गों के लिए विशिष्ट प्रावधानों के साथ इस अवार्ड में दलित वर्गों के लिए अलग प्रतिनिधित्व को सुबह कार्य किया गया तथा उसमें यह व्यवस्था की गई कि वोट की योग्यता वाले दलित पिछड़े वर्गों के लोग पृथक निर्वाचन क्षेत्रों में ही वोट डाल सकेंगे यह व्यवस्था 20 वर्षों तक के लिए आवश्यक होगी ऐसे ही सेपरेट इलेक्टोटेट व्यवस्था कहा गया 8 सितंबर 1932 8को ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड ने महात्मा गांधी को पत्र लिखा जिसमें कहा गया है कि आप तो केवल चाहते हैं कि आज अध्यक्षता जो दलित वर्ग भयंकर सुविधाओं से त्रस्त हुआ ग्रस्त हैं विधान मंडलों में अपनी आवाज उठाने वाली अपनी मर्जी से गिने चुने प्रतिनिधि भी ना चुने जा सकें, क्योंकि उनके भविष्य पर उनका जबरदस्त प्रभाव होगा हिंदू महासभा द्वारा सांप्रदायिक निर्णय का विरोध तीन बिंदुओं पर किया गया जो निम्नलिखित है 1•सांप्रदायिक निर्णय ने संयुक्त रूप से तांत्रिक जिम्मेदार पूर्ण एवं प्रतिनिधि सरकार के विरुद्ध प्रथम चुनाव प्रणाली जारी रखने का निर्णय दिया
2• इस निर्णय ने 19 जनवरी को ब्रिटिश प्रधानमंत्री द्वारा की गई घोषणा पर पानी फेर दिया
3• इससे हिंदुओं से खुशियों और दलित वर्गों के साथ-साथ भारत है कि महिलाओं जो संयुक्त चुनाव प्रणाली के पक्ष में थी उनकी सलाह का तिरस्कार किया गया था
हिंदू महासभा ने अपने 14वें अधिवेशन जो कि दिल्ली में हुआ था, इसका व्यापक विरोध किया, तत्पश्चात हिंदू महासभा के 15वें अधिवेशन में जो कि अजमेर में हुआ था, इस बिल का तथा श्वेत पत्र का विरोध किया गया था ,भारत में अंग्रेज फूट डालो शासन करो की नीति अपना रहे थे जहां एक और वे मोहम्मद अली जिन्ना को निरंतर उकसा रहे थे, वही वह डॉक्टर अंबेडकर का भी पूर्ण समर्थन कर रहे थे जब भारत के संविधान सुधारों के अध्ययन हेतु सर जॉन साइमन के नेतृत्व में 8 नवंबर 1927 को साइमन कमीशन बनाया गया जिसमें ब्रिटिश के साथ सांसद प्रमुख रूप से जिसमें सर जॉन साइमन, क्लिमेंट एटली, हैरी लेवी लासन, एडवर्ड कैडोगन, वर नोन हार्डशोर्न, जाडीलेन फॉक्स तथा डोनाल्ड हावर् सम्मिलित थे साइमन कमीशन 1928 को भारत आया था का विरोध भारत का हर वर्ग कर रहा था विरोध का प्रमुख कारण यह था कि "साइमन कमीशन में भारत के नेताओं का प्रतिनिधित्व नहीं था दूसरे भला अंग्रेज भारत के संविधान स्वशासन और भारत की भावनाओं को कैसे जान पाएंगे किंतु यह बात डॉक्टर अंबेडकर ना समझ सके साइमन कमीशन भारत आया तो डॉक्टर अंबेडकर ने उसके समक्ष पृथक निर्वाचन की मांग नहीं रखी थी बल्कि संयुक्त निर्वाचन की मांग की थी और इस पर उन्होंने हस्ताक्षर भी किए थे साइमन कमीशन को 18 दलित संगठन द्वारा ज्ञापन दिया गया था जिसमें से 16 दलित संगठनों ने पृथक निर्वाचन की मांग रखी थी, आश्चर्य की बात यह है कि जिस साइमन कमीशन में डॉक्टर अंबेडकर ने संयुक्त निर्वाचन की मांग रखी थी वही गोलमेज सम्मेलन में उन्होंने पलटते हुए पृथक निर्वाचन की मांग रख दी ऐसा प्रतीत होता है डॉक्टर अंबेडकर अंग्रेजों के हाथ में खेल रहे थे, इससे पहले कि मैं आगे लिखू प्रथम गोलमेज सम्मेलन के बारे में कुछ आवश्यक बातें जान लेना आवश्यक है प्रथम गोलमेज सम्मेलन बुरी तरह असफल सिद्ध हुआ मुसलमान नेता यह मानने लगे कि बहुसंख्यक समुदाय यानी हिंदू हमारे ऊपर शासन करेंगे और परिणाम स्वरूप हमारे अधिकार असुरक्षित हो जाएंगे ठीक ऐसा ही डॉक्टर अंबेडकर भी सोच रहे थे, हिंदुओं से उनका विरोध मात्र इसी कारण था कि वे मानते थे कि हिंदू विशेषकर ब्राह्मण वर्ग के कारण दलितों के हित सुरक्षित हैं अतः यह आवश्यक है कि जिस प्रकार मुसलमान पृथक निर्वाचन की मांग कर रहे हैं उसी प्रकार दलितों को भी पृथक निर्वाचन का अधिकार मिलना चाहिए सत्य यह भी है कि जिस तरह मुसलमानों की पृथक निर्वाचन की व्यवस्था देकर अंग्रेजी सरकार ने पाकिस्तान की नींव रख दी कालांतर में डॉ आंबेडकर ने भी मुसलमानों की पद चिन्हों पर चलते हुए दलितों के लिए पृथक निर्वाचन की मांग रख दी यह बात अलग है कि वह बार-बार अलग देश ना बनाने की मांग साथ एक रूप से करते रहे किंतु जिस प्रकार डॉक्टर अंबेडकर फूंक-फूंक कर कदम रख रहे थे वह धीरे-धीरे उन्हें दल स्थान की ओर ले जा रहा था,
गांधी की ब्लैंक चेक पॉलिसी
हिंदू महासभा को यह आशंका हो गई थी कि गांधी जिन्ना और आगा खान की सांप्रदायिक मांगों के आगे झुक जाएंगे इसीलिए उनकी लंदन जाने से पूर्व भी हिंदू महासभा की ओर से एक शिष्टमंडल उन्हें दिल्ली में मिला था भाई परमानंद जी ने हिंदू महासभा की स्थिति और मुसलमानों की सांप्रदायिकता को गांधी के सम्मुख रखा भाई परमानंद ने कहा कि आप मुसलमानों को पूरा चेक ब्लैंक चेक प्रस्तुत करने का विचार छोड़ दें अन्यथा हिंदू महासभा विरोध करेगी परंतु गांधी जी ने हिंदू महासभा की चेतावनी पर कोई ध्यान नहीं दिया उन्होंने हिंदू महासभा को पृथक रखकर हिंदू मुस्लिम एकता के लिए आगा खां के सामने ब्लैंक चेक प्रस्तुत कर दिया ब्लैंक चेक का अर्थ था कि जिन्ना द्वारा प्रस्तुत 14 मांगों को ही नहीं बल्कि भी जितनी चाहे मांगे लिख ले और गांधीजी उन सब मांगों को कांग्रेस की ओर से स्वीकार कर लेंगे दूसरी गोलमेज सम्मेलन में गांधी ने कहा कि दलितों को यदि हिंदू जाति से अलग किया गया तो वे अपने प्राणों की बाजी लगा देंगे गांधी जी ने ऐसा विरोध करने का एकमात्र कारण था कि उनका डॉक्टर अंबेडकर के साथ एक बैठक में तनातनी हो गई थी
इसी साइमन कमीशन का विरोध करते हुए हिंदू महासभा के अध्यक्ष (1925 )लाला लाजपत राय द्वारा लाहौर में हुए प्रदर्शन में जो कि 30 अक्टूबर 1928 को हुआ था पुलिस अधीक्षक स्कॉट ने लाठीचार्ज का आदेश दिया उप अधीक्षक सांडर्स जनता पर लाठी लेकर टूट पड़ा, और इन्हीं लाठियों से लाला लाजपत को काफी यूटीआई जो कि बाद में उनकी मृत्यु का कारण बनी, अपनी मृत्यु से पूर्व लाला लाजपत राय ने कहा "आज मेरे ऊपर बरसी हर एक लाठी की चोट अंग्रेजों के ताबूत की आखरी की बनेगी" 17 नवंबर 1928 को लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई जिससे देश के क्रांतिकारी भड़क उठे, और उन्होंने स्कॉर्ट को मारने का निर्णय ले लिया 10 दिसंबर 1928 को निर्णय हुआ जिसमें प्रमुख रुप से भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद राजगुरु सुखदेव जय गोपाल तथा दुर्गा भाभी आदि सम्मिलित हुई अंततः चंद्रशेखर आजाद सुखदेव राजगुरु जय गोपाल और भगत सिंह को इस कार्य के लिए नियुक्त किया गया 17 दिसंबर 28 को उपाधीक्षक सांडर्स ऑफिस से जब बाहर निकला तो उसे ही स्कॉर्ट समझकरम राजगुरू इस पर गोली चला दी, भगत सिंह ने सांडर्स के सिर पर गोली मारी, अगले दिन लाहौर की दीवारों पर एक पंपलेट लगा हुआ था जिसमें लिखा था "हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन ने लाला लाजपत राय की हत्या का प्रतिशोध ले लिया"
शेष अगले भाग में••••••••••••
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पाण्डेय
MCOM, LLB, MBA (HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिन्दू महासभा 1•हिंदु महासभा अध्यक्ष लाला लाजपत राय 
2•सांडर्स
3•साइमन कमीशन का विरोध
4•सर जॉन साइमन
5•अंबेडकर और साइमन कमीशन के सदस्य
6• द हिस्ट्री  ऑफ द फ्रीडम मूवमेंट इन इंडिया ताराचंद
7• भाई परमानंद और उनका युग प्रोफेसर धर्मवीर

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