Posts

Showing posts from September, 2019

न्यायमूर्ति के•एम•पांडेय:- राम जन्मभूमि का ताला खुलवाकर जिन्होंने दिया था, स्वतंत्र भारत का अद्भुत अकल्पनीय व अविश्वसनीय निर्णय

न्यायमूर्ति के•एम•पांडेय:- राम जन्मभूमि का ताला खुलवाकर जिन्होंने दिया था, स्वतंत्र भारत का अद्भुत अकल्पनीय व अविश्वसनीय निर्णय मनीष पांडेय क्या आपने अपने जीवन में किसी ऐसी घटना देखा या सुना है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत के किसी न्यायालय द्वारा एक ही दिन में किसी अधिवक्ता द्वारा प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया हो और उसी दिन उसकी सुनवाई होकर शाम तक निर्णय देते हुए यह कहा गया हो कि इस निर्णय का कार्यान्वयन 1 घंटे से कम समय में हो जाना चाहिए ऐसा चमत्कार हुआ जनपद फैजाबाद मैं जो अब अयोध्या के नाम से जाना जाता है , 25 जनवरी 1986 को अधिवक्ता उमेश चंद्र पांडे ने फैजाबाद के मुंसिफ सदर हरिशंकर द्विवेदी के न्यायालय में ताला खुलवाने हेतु प्रार्थना पत्र दिया था प्रार्थना पत्र में अधिवक्ता उमेश चंद्र पांडेय ने लिखा कि उनके व अन्य हिंदू समुदाय द्वारा जन्म स्थान पर पूजा और अर्चना की जाती है अतः जन्मभूमि की पूजा पर प्रतिबंध ना लगाया जाए तथा वहां लगे तालों को खोल दिया जाए, माननीय मुंसिफ सदर हरिशंकर द्विवेदी ने 28 जनवरी 1986 को यह कहते हुए प्रार्थना पत्र को निस्तारित करने में असमर्थता जताई ...
गोपाल सिंह विशारद:- राम के लिए संपूर्ण जीवन न्योछावर करने वाले एक योद्धा मनीष पांडेय स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद राम जन्मभूमि का पहला मुकदमा गोपाल सिंह विशारद पुत्र श्री गिरधारी सिंहo.o.s. (other original suit)no 1,1jan.1950 गोपाल सिंह विशारद बना जहूर अहमद तथा अन्य गोपाल सिंह विशारद 1949 में अखिल भारत हिंदू महासभा फैजाबाद यूनिट के जनरल सेक्रेटरी हुआ करते थे उनके द्वारा ही फैजाबाद की सिविल कोर्ट में माननीय भीम सिंह के न्यायालय में एक पिटीशन यह कहते हुए दायर की गई थी मेरे परिवार के लोग पिछले कई वर्षों से भगवान राम लला के दर्शन और पूजा अर्चना करते चले आ रहे हैं मैं भी जन्म स्थान पर लगाता जाकर पूजा-अर्चना करता हूं परंतु अब मुझे रोका जा रहा है इस जन्म स्थान की पूजा करना मेरा मौलिक अधिकार है इसलिए मुझे पूजा करने से ना रोका जाए ना ही मेरे मार्ग में कोई बाधा खड़ी की जाए इसके साथ ही साथ भगवान राम लला की सुरक्षा भी की जाए जिससे वहां कोई उनको हटाना सके तब जिला अदालत ने गोपाल सिंह विशारद जी के पक्ष में अंतरिम आदेश दे दिया मुसलमानों ने इसका विरोध किया उन्होंने हाईकोर्ट में जाकर फिर से इसके विरुद्ध...
ब्रिटिश साम्राज्य की दमनकारी कुनीति, उद्धार से वंचित हुई श्री राम जन्मभूमि मनीष पांडेय 1857 में जब विद्रोह हुआ तो उस समय अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध ना सिर्फ हिंदुओं ने बल्कि मुसलमानों ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था अंग्रेजों को भला यह कैसे सहन होता तब अंग्रेजों ने अपने विरुद्ध उठने वाली आवाज को दबाने के लिए अपनी प्रसिद्ध फूट डालो और शासन करो की नीति को लागू करते हुए हिंदू और मुसलमानों के बीच फूट डालने प्रारंभ कर दी राम जन्मभूमि का जो विवाद उस समय हल हो सकता था अंग्रेजों की कूटनीति चाल चलने के कारण संभव ना हो सका दुर्भाग्य रहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले अंग्रेजों द्वारा और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के सेकुलर वादी शासन के द्वारा इस मुद्दे का समाधान करने के बजाय जानबूझकर ,मात्र अपनी राजनीति रोटियां सेकने के उद्देश्य से इस मुद्दे को निरंतर उलझाया जाता रहा स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले अंग्रेज गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी की प्रसिद्ध फूट डालो और शासन करो की कुनीति को आगे बढ़ाते हुए लार्ड वाइसकाउन्ट कैनिंग के कृत्यों का वर्णन में करूं, इससे पहले मैं आपको राम जन्मभूमि प्रकरण...

एक बार मंदिर तो सर्वदा मंदिर

  एक बार मंदिर तो सदा सर्वदा मंदिर ,सुप्रीम कोर्ट जरा ध्यान दें मनीष पांडेय 6 अगस्त सन 2019 यही वह दिन था जब सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्म भूमि के संबंध में लगातार सुनवाई करने का निर्णय लिया था , 6 अगस्त से लेकर 30 अगस्त 2019 तक सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष की ओर से प्रमुख रूप से रामलला विराजमान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के परासरण वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन, राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से पीएन मिश्र, गोपाल सिंह विशारद की ओर से अधिवक्ता रंजीत कुमार तथा हिंदू महासभा की ओर से हरिशंकर जैन और वरिंदर मिश्र अतुल घोष आदि ने बेहद तार्किक संतुलित और पूरे साक्ष्य और सबूतों के साथ अपना-अपना पक्ष रखा था, मात्र 45 मिनट का समय शिया वक्फ बोर्ड की अधिवक्ता ढींगरा को मिला था जिसमें उन्होंने सारी भूमि हिंदुओं को सौंपने की बात कही थी, (मेरा यह परम सौभाग्य है कि मैं इन अनमोल पलों का गवाह बन रहा हूं बतौर एक अधिवक्ता भी और हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर भी मैं इस सुनवाई से किसी ना किसी रूप से लगातार जुड़ा हूं और मेरा यह प्रयास रहेगा की संभावित 15 नवंबर की जो तिथि निर्धारित की ...
म•रघुवर दास जिन्होंने दायर किया था,राम जन्मभूमि का प्रथम वाद मनीष पांडेय अपने जीवन में हम सभी ने रेल यात्राएं तो काफी की होंगी इन रेल यात्राओं के दौरान कुछ ऐसे अनुभव हमें प्राप्त होते हैं जो हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व को ना सिर्फ बदलते हैं बल्कि उन अनुभवों से फायदा उठाकर हम अपने आने वाले जीवन की कठिनाइयों का हल निकाले का एक बेहतरीन प्रयास भी करते हैं आपने ध्यान दिया होगा एक अत्यधिक भीड़भाड़ वाली रेल की बोगी में आप अपनी सीट पर किसी तरह बैठे हैं और ऐसे में कोई एक अन्य व्यक्ति जो खड़ा हुआ है उसे या तो आप सहृदयता पूर्वक अपनी ही सीट में से कुछ हिस्सा उसे बैठने के लिए प्रदान कर देते हैं कभी-कभी ऐसा भी होता है कि खड़ा हुआ व्यक्ति जबरदस्ती आपकी सीट पर अपना स्थान बनाने के लिए आतुर रहता है और इसके लिए वह आपसे लडता है झगडता है गाली गलौज करने पर भी उतर जाता है देखने सुनने में आया है इस सीट के लिए अक्सर मार पिटाई भी हो जाती है दोनों ही दशा में अगर व्यक्ति धूर्त और मक्कार है तो वह आपको धीरे-धीरे हटाता हुआ उस आपकी सीट पर लेटने का प्रयास करने लगता है आपकी सहनशीलता सहृदयता पूरी तरह से फायदा उठाता है अं...
मंदिर के अवशेषों का उपयोग कर हुआ मस्जिद का निर्माण-- पुरातत्वविद् केके मोहम्मद मनीष पांडेय अपनी अनीतिकारी नीतियों और दोगली मानसिकता के चलते इस राष्ट्र को गर्त मे गिराने का कार्य अगर किसी ने किया है तो वह कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा रही हैं, पूरे भारतीय इतिहास को खंगाल डालिए आपको कांग्रेस द्वारा किए गए हिंदू विरोधी कृत्य एक के बाद एक सामने आते जाएंगे ,देखा जाए तो कांग्रेस के पतन का मुख्य कारण भी शायद यही रहा है भारत की अधिसंख्य हिंदू जनता की भावनाओं व आस्थाओं के खिलाफ जाकर जिस तरह कांग्रेसी ने पूर्व में कृत्य किए उसका बुरा परिणाम कांग्रेस को आज भी प्राप्त हो रहा है, किंतु दुर्भाग्य है कि इतिहास से सबक लेने की बजाय कांग्रेस बार-बार वही कुकृत्य पुनः पुनः दोहरातीचली आ रही है, राम को काल्पनिक बताना रामसेतु को तोड़ने के प्रयास करना यह काग्रेस पूर्व में कर चुकी है किंतु वर्तमान में जिस तरह कांग्रेस यह लगातार प्रयास कर रही है कि श्री अयोध्या धाम में भव्य राम मंदिर निर्माण में लगातार अडंगे लगाए जाएं उससे तो यही प्रतीत होता है कि जो बची कुची कांग्रेस है वह भी भारत से मुक्त होने की दिशा में ...