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Showing posts from October, 2020

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 13

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 13 न्यायालय की प्रक्रिया और पुरातात्विक जांच से भागते मुस्लिम मनीष पाण्डेय इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 1942 में मुसलमानों का मुकदमा खारिज होने के बाद यह मामला ठंडा पड़ा रहा, कालांतर में अक्टूबर 1991 एक बार फिर से यह मुद्दा धीरे-धीरे गरमाने लगा, शिवभक्त जनता एक बार फिर से एकजुट होने लगी तब वाराणसी की शिवभक्त जनता ने ज्ञानवापी विशेषण मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए वर्ष 1991 श्री विश्वेश्वर विश्वनाथ मुक्ति संघर्ष समिति ज्ञानवापी वाराणसी का गठन किया जिसके अध्यक्ष बनारस के ही ख्याति प्राप्त अधिवक्ता श्री दान बहादुर सिंह एडवोकेट तथा वहां मंत्री श्री विजय शंकर रस्तोगी एडवोकेट को चुना गया उक्त समिति के तत्वाधान में ज्ञानवापी विशेषण मंदिर के तत्वों को दूर करने वार्ड संख्या 610 सन 1991 ईस्वी प्राचीन मूर्ति स्वयं को विशेष वर्ग व अन्य प्रति अंजुमन इंतजामियां मस्जिद दिनांक 15•10•1991में को न्यायालय सिविल जज वाराणसी में दाखिल किया गया, उसके बाद हिंदू जनता की ओर से आदेश 1 नियम जाब्ता दीवानी के अंतर्गत प्रतिनिधित्व वाद (रिप्रेजेंटेटिव सूट )दाखिल किया गया...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 12

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 12 जब कोर्ट में मुस्लिम पक्ष का दावा हुआ था बहिष्कृत मनीष पाण्डेय चाहे वह राम जन्मभूमि का मामला हो अथवा कृष्ण जन्मभूमि का या फिर काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर का या फिर उन सभी मंदिरों का जिन्हें मुस्लिम आक्रांता ओं द्वारा ध्वस्त कर वहां पर मस्जिद का निर्माण करवा दिया गया कालांतर में जब इन जगहों पर हिंदुओं द्वारा दावा ठोका गया, तो वह साक्ष्य सबूत पूरी तरह से खुलकर सामने आ गए, जिन्हें मुस्लिम आक्रांता द्वारा इतिहास के पन्नों के पीछे दबा दिया था, और उसी आधार पर राम जन्मभूमि का ऐतिहासिक निर्णय भी हुआ, आगे जो लड़ाई काशी विश्वनाथ मंदिर तथा मथुरा कृष्ण जन्म भूमि के लिए लड़ी जा रही हैं निश्चित रूप से उसका भी ऐतिहासिक निर्णय न्यायालय द्वारा ही होगा, काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर के मामले में पहला मुकदमा 11 अगस्त, 1936 को दीन मुहम्मद, मुहम्मद हुसैन और मुहम्मद जकारिया ने स्टेट इन काउन्सिल में प्रतिवाद संख्या-62 दाखिल किया और दावा किया कि जो भूमि संख्या 9130 है सम्पूर्ण परिसर वक्फ की सम्पत्ति है। इसीलिए उस पर मुस्लिमों के अधिकार को मानते हो व...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर श्रंखला भाग 11

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 11 पुरातात्विक साक्ष्य को नकारती जिहादी मुस्लिम मानसिकता और अंग्रेजों की कुटिल कूटनीति मनीष पाण्डेय यह एक सर्वविदित तथ्य है कि जिहादी मुस्लिम आक्रांता ओं द्वारा सनातन हिंदू धर्म को नष्ट भ्रष्ट तथा मिट्टी में मिला देने की कुत्सित मानसिकता के चलते तथा भारतीय संस्कृति को समाप्त कर देने की प्रवृत्ति के चलते हिंदू सनातन धर्म और संस्कृति पर ना जाने कितने आघात किए गए हिंदू मंदिरों को तोड़ने और हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों का भंजन करना मुस्लिम आक्रांताओं की हिट लिस्ट में हुआ करता था न सिर्फ काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर बल्कि राम जन्मभूमि कृष्ण जन्मभूमि सहित अनेक हिंदू मंदिरों के साथ मुस्लिम आक्रांताओं ने यही किया कालांतर में जब अंग्रेजी शासन आया तो वह इस विषय को अच्छी तरह जानते थे कि सभी मंदिरों को तोड़कर वहां मुस्लिमों द्वारा मस्जिद बनाई गई है इस सच्चाई से वाकिफ होने के बावजूद भी जानबूझकर वैमनस्यता पैदा करने का कार्य अंग्रेजों द्वारा किया गया और उन्होंने इस विषय को अनावश्यक रूप से बढ़ाते चले गए जो निर्णय हिंदू पक्ष में होना चाहिए था व...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 10

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 10 न सूत न कपास मुस्लिम करें महज लट्ठम लट्ठा मनीष पाण्डेय मुसलमानों के पास ना तो राम मंदिर मामले में साक्ष्य और सबूत थे, ना ही कृष्ण जन्मभूमि मामले में और ना ही काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर मामले में, माननीय न्यायालय द्वारा समय-समय पर उनके वाद को खारिज किया जाना, इसका सबसे बड़ा सबूत है ऐसे में जब राम जन्मभूमि मंदिर के ऐतिहासिक निर्णय के पश्चात श्री अयोध्या धाम में भव्य राम मंदिर का निर्माण होने जा रहा है तो ऐसे में हिंदू शौर्य एक बार फिर से जागृत अवस्था में आकर अपने इस अधिकार उस भगवान की संपत्ति को पुनः प्राप्त करने के लिए उतावला हो उठा है जिसे सैकड़ों वर्षो पूर्व मुगल आक्रांताओं द्वारा अपनी जिहादी प्रवृत्ति के चलते हिंदुओं से छीन लिया गया था, अगर हिंदू उसे पुनः प्राप्त करना चाहते हैं तो भला इसमें गलत क्या है? मेरा मुसलमानों से 2 सवाल एक तो यह कि मुस्लिम इसे ज्ञानवापी मस्जिद कहते हैं तो पहला सवाल यह है कि मुसलमानों द्वारा इस मस्जिद का नाम ज्ञानवापी क्यों रखा गया क्या पूरे विश्व में किसी मस्जिद का नाम संस्कृत में रखा जाता है क्यो...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 9

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 9 जब सावरकर ने कहा काल भैरव बन मस्जिद का करो विध्वंस *सिर्फ काशी विश्वनाथ ही नहीं, बल्कि राम जन्मभूमि, कृष्ण जन्मभूमि भी हिंदू महासभा के एजेंडे में थी मनीष पाण्डेय इससे पहले कि मैं हिंदू महासभा द्वारा काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर के लिए किए गए आंदोलनों पर एक दृष्टि डालें सुधी पाठकों को यह जान लेना आवश्यक है कि हिंदू महासभा द्वारा न सिर्फ काशी विश्वनाथ मंदिर पर बड़े आंदोलन किए गए थे बल्कि राम जन्म भूमि और कृष्ण जन्म भूमि पर भी एक प्रमुख आंदोलन कर्ता के रूप में इतिहास में दर्ज है यह सर्वविदित है कि राम जन्मभूमि मामले में हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई परमानंद द्वारा 1933 मेरा जन्म भूमि का मामला उठाया गया था तत्पश्चात वीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा इस मुद्दे को गंभीरता पूर्वक कर लिया गया था 1949 में हिंदू महासभा द्वारा ही राम जन्म भूमि के लिए मुकदमा हिंदू महासभा के नेता गोपाल सिंह विशारद के माध्यम से न्यायालय में लड़ा गया था वही कृष्ण जन्मभूमि में भी हिंदू महासभा का योगदान कम नहीं था, महा मना कृष्ण जन्म भूमि की दुर्दशा देख बेह...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 8

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 8 मंदिर निर्माण में, और बनारस में अपना अमूल्य योगदान देने राजा टोडरमल, राजा पटणीमल, और जेम्स प्रिंसेप मनीष पाण्डेय मुगल आक्रांता ओं द्वारा न जाने कितनी बार काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर का विध्वंस किया गया मुगल आक्रांता कुतुबुद्दीन ऐबक से प्रारंभ हुआ यह विध्वंस औरंगजेब पर आकर रुका ऐसा नहीं है किस विध्वंस में सृजन नहीं हो रहा था जहां एक और मुगल आक्रांता इस मंदिर का बार-बार विध्वंस कर रहे थे वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे हिंदू वीर भी थे जो बार-बार इस मंदिर का सृजन भी कर रहे थे, ऐसी दानवीर भी थे जिन्होंने अपनी थैलियां इस मंदिर के लिए खोल दी थी, इस कड़ी में सर्वप्रथम नाम आता है राजा टोडरमल का 1 जनवरी 1503 को पैदा हुए राजा टोडरमल मुगल शासन काल में अपने गुरु के कारण शहजाद और अवनी राय की बारी सम्मानित किया गया था एक धर्म प्राण अपने धर्म पर अधिक रहने वाले रायपुर अमन को राजा की उपाधि प्रदान की गई थी 8 नवंबर 1589 को उनकी हत्या उन्हीं के सजातीय द्वारा कर दी गई थी, बनारस के मुगलकालीन धार्मिक इतिहास में सबसे प्रसिद्ध घटना अकबर के राज्य काल में मंदिर की ...

राजनीति का मकड़जाल न्याय भला कैसे मिलेगा

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राजनीति का मकड़जाल न्याय कैसे मिलेगा? मनीष पाण्डेय  पिछले कई दिनों से इस विषय पर आज मौका मिला तो सोचा अपने दिल की बात आप सब लोगों के समक्ष प्रस्तुत कर दूं सुशांत सिंह राजपूत से केस का प्रारंभ होता है सुशांत राजपूत की हत्या हुई अथवा आत्महत्या इस विषय को लेकर न्यूज़ चैनलों ने ने जिस तरह युद्ध छेड़ा, उसे देखकर तो यही प्रतीत हुआ की यह युद्ध सुशांत सिंह राजपूत को न्याय दिलाने के लिए नहीं बल्कि अपनी अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए छेड़ा गया था, जैसे ही टीवी न्यूज़ चैनलों की टीआरपी कम होने लगी वैसे ही उनके सामने हाथरस दलित बालिका रेप कांड आ गया फिर बलरामपुर कांड फिर राजस्थान का पुजारी हत्याकांड और अभी ताजा तरीन मामला गोंडा में पुजारी पर जानलेवा हमला सवाल ये उठता है की न्यूज़ चैनलों को  किसने यह मीडिया ट्रायल करने का अधिकार दे दिया महाराष्ट्र की घटना पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंग गई सुशांत सिंह राजपूत को न्याय दिलाने की बात तो एक कोने में चली गई अब यह मामला न्यूज़ चैनल शिवसेना बनाम भाजपा का हो गया हाथरस कांड में भी पीड़िता को तो न्याय नहीं मिला किंतु मीडिया ने टीआरपी खूब बटोरी यहां भी मामला...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 7

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काशी काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर श्रंखला भाग 7 काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर के उद्धारक रहे मराठा साम्राज्य और होलकर राजवंश मनीष पाण्डेय निश्चित रूप से जब हिंदुत्व की बात आती है तो उसमें सर्वोपरि रूप से महाराष्ट्र का नाम अवश्य आता है दूसरे अर्थों में अगर आप कहें कि हिंदुत्व की उत्पत्ति ही महाराष्ट्र से हुई है तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी महाराष्ट्र मराठा साम्राज्य की उत्पत्ति हुई महाराष्ट्र की पवित्र पावन भूमि ने एक से एक वीर शिरोमणि को पैदा किया है जो ना सिर्फ हिंदुत्व की आन बान और शान के प्रतीक रहे बल्कि उन्होंने हिंदू धर्म ध्वजा को संपूर्ण विश्व में फहराने का कार्य भी किया है, मराठा साम्राज्य की नींव वीर शिरोमणि छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा 1645 ईसवी में रखी गई थी, जोकि 1818 ईसवी तक चली, संभाजी बाजीराव पेशवा बालाजी बाजीराव , मल्हार राव होलकर ,नारायण राव, जैसे हिंदू वीरों से होता हुआ यह कारवां यहीं नहीं रुका बल्कि हिंदुत्व की धर्म ध्वजा उठाने का कार्य कालांतर में वीर विनायक दामोदर सावरकर पंडित नाथूराम गोडसे बाला साहेब ठाकरे पर आकर समाप्त हुआ होलकर साम्राज्य जिसका राजवंश मराठा साम...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर श्रंखला भाग 6

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस संखला भाग 6 विदेशी यात्री पीटर मुंडी तथा अन्य लेखकों की दृष्टि में काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस मनीष पाण्डेय  इतिहासकार पीटर मुंडी जो कि शाहजहां के समय में बनारस में ही स्वयं उपस्थित थे शाहजहां द्वारा विश्वनाथ मंदिर के विध्वंस के आदेश का वर्णन इस प्रकार करता है 3 दिसंबर 1632 को जब पीटर मंडी मुगलसराय जा रहा था तो उसने एक व्यक्ति को फांसी पर लटके हुए देखा जब उसने इसका पता लगाया तो उसे यह बात सामने आई कि इलाहाबाद के सूबेदार हैदर बेग ने अपने चाचा आजाद भाई को बनारस नए मंदिरों को तोड़ने के लिए भेजा एक राजपूत रास्ते में छिप गया था और उसने अपनी कॉमेडी से सूबेदार के चचेरे भाई और उसके चार साथियों को मार डाला था लड़ते-लड़ते हुआ खुद भी मारा गया तो मुगलों द्वारा उसकी लाश को पेड़ पर लटका दिया गया  ट्रैवल ऑफ पीटर मंडी भाग 2 पृष्ठ 178 1914 मंडी आगे लिखता है कि बनारस खत्री ब्राम्हण तथा बनियों की बस्ती है और यहां दूर-दूर से लोग देवताओं की पूजा करने आते हैं इनमें काशी विश्वेश्वर महादेव का मंदिर सबसे प्राचीन है मैं उसके साथ उसके अंदर गया अर्थात विश्व...