काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर श्रंखला भाग 6

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस संखला भाग 6
विदेशी यात्री पीटर मुंडी तथा अन्य लेखकों की दृष्टि में काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस
मनीष पाण्डेय 
इतिहासकार पीटर मुंडी जो कि शाहजहां के समय में बनारस में ही स्वयं उपस्थित थे शाहजहां द्वारा विश्वनाथ मंदिर के विध्वंस के आदेश का वर्णन इस प्रकार करता है 3 दिसंबर 1632 को जब पीटर मंडी मुगलसराय जा रहा था तो उसने एक व्यक्ति को फांसी पर लटके हुए देखा जब उसने इसका पता लगाया तो उसे यह बात सामने आई कि इलाहाबाद के सूबेदार हैदर बेग ने अपने चाचा आजाद भाई को बनारस नए मंदिरों को तोड़ने के लिए भेजा एक राजपूत रास्ते में छिप गया था और उसने अपनी कॉमेडी से सूबेदार के चचेरे भाई और उसके चार साथियों को मार डाला था लड़ते-लड़ते हुआ खुद भी मारा गया तो मुगलों द्वारा उसकी लाश को पेड़ पर लटका दिया गया 
ट्रैवल ऑफ पीटर मंडी भाग 2 पृष्ठ 178 1914
मंडी आगे लिखता है कि बनारस खत्री ब्राम्हण तथा बनियों की बस्ती है और यहां दूर-दूर से लोग देवताओं की पूजा करने आते हैं इनमें काशी विश्वेश्वर महादेव का मंदिर सबसे प्राचीन है मैं उसके साथ उसके अंदर गया अर्थात विश्वनाथ मंदिर के अंदर मंडी गया था मंदिर के बीच में एक ऊंची जगह पर एक लघु तरा बिना नक्काशी का सादा पत्थर है सब लोग उस पर पानी फल अक्षत और पिघला हुआ कि चढ़ाते हैं पूजा के समय ब्राह्मण कुछ पढ़ते हैं यह गवार उसे समझते नहीं लिंग के ऊपर एक रेशमी चादर है वहां पर कई प्रकार की बत्तियां जलती है उस सादी थोथी मूरत का मतलब एक गवार के शब्दों में महादेव का लिंग है अगर ऐसी बात है तो जान पड़ता है कि इसी में स्त्रियां अपने छोटे बच्चों को निरोग करवाने आती है शायद इस लिंग में प्रजनन और रक्षण दोनों भाव निहित है ट्रैवल ऑफ हीटर मंडी पृष्ठ संख्या 122 123
पीटर मुंडी (  1597 - 1667) सत्रहवीं सदी के ब्रिटिश व्यापारी, यात्री और लेखक थे। पीटर मुंडी ने अपनी पुस्तक में विश्वनाथ मंदिर के बारे में काफी कुछ लिखा है उसने यह भी लिखा है कि बनारस के लगभग सभी मंदिरों में मुख्य द्वार पर नंदी की मूर्ति पाई जाती है जैसा कि काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर में भी नंदी की मूर्ति लगी हुई है इसके अलावा उसने बनारस के विश्वनाथ मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों में लगी गणेश चतुर्भुज और देवी की मूर्तियों को भी देख कर सब विस्तार से वर्णन किया है   इसी प्रकार प्रसिद्ध लेखक यदुनाथ सरकार ने भी औरंगजेब द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर विद्वान पर लिखते हुए कहा है कि सन 1659 में औरंगजेब ने फरमान जारी किया उसने कहा था कि पुराने मंदिरों को नहीं तोड़ना चाहिए किंतु कोई नया मंदिर बनने नहीं देना चाहिए कितना 9 अप्रैल 1969 में औरंगजेब का अंतिम आदेश हुआ जिसमें हुक्म दिया गया कि काफिरों के सब शिवालय और मंदिर गिरा दिये जाऐ, और उनकी धार्मिक प्रथाओं को दबा दिया जाए, इसी कड़ी में काशी विश्वनाथ मंदिर सहित भारत के अनेक मंदिरों का विध्वंस करने का श्रेय औरंगजेब को जाता है
"औरंगजेब" यदुनाथ सरकार खंड 3
अन्य विदेशी लिखो जिसमें फ्यूरर, फरिश्ता, टैबोनियर, तथा अन्य लेखकों व विदेशी यात्रियों ने भी अपनी अपनी यात्राओं में काशी विश्वनाथ मंदिर के विध्वंस का सविस्तार वर्णन किया है शेष अगले अंक में
आपका ही 
मनीष पांडेय
MCOM,LLB,MBA (HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
प्लीज डू नॉट कट पेस्ट एंड कॉपी ओनली शेयर

Comments

Popular posts from this blog

कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 3

इस्लाम और ईसाई पंथ की गंगोत्री है यहूदी पंथ भाग 1