राजनीति का मकड़जाल न्याय भला कैसे मिलेगा
राजनीति का मकड़जाल न्याय कैसे मिलेगा?
मनीष पाण्डेय
पिछले कई दिनों से इस विषय पर आज मौका मिला तो सोचा अपने दिल की बात आप सब लोगों के समक्ष प्रस्तुत कर दूं सुशांत सिंह राजपूत से केस का प्रारंभ होता है सुशांत राजपूत की हत्या हुई अथवा आत्महत्या इस विषय को लेकर न्यूज़ चैनलों ने ने जिस तरह युद्ध छेड़ा, उसे देखकर तो यही प्रतीत हुआ की यह युद्ध सुशांत सिंह राजपूत को न्याय दिलाने के लिए नहीं बल्कि अपनी अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए छेड़ा गया था, जैसे ही टीवी न्यूज़ चैनलों की टीआरपी कम होने लगी वैसे ही उनके सामने हाथरस दलित बालिका रेप कांड आ गया फिर बलरामपुर कांड फिर राजस्थान का पुजारी हत्याकांड और अभी ताजा तरीन मामला गोंडा में पुजारी पर जानलेवा हमला सवाल ये उठता है की न्यूज़ चैनलों को किसने यह मीडिया ट्रायल करने का अधिकार दे दिया महाराष्ट्र की घटना पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंग गई सुशांत सिंह राजपूत को न्याय दिलाने की बात तो एक कोने में चली गई अब यह मामला न्यूज़ चैनल शिवसेना बनाम भाजपा का हो गया हाथरस कांड में भी पीड़िता को तो न्याय नहीं मिला किंतु मीडिया ने टीआरपी खूब बटोरी यहां भी मामला राजनीतिक हो गया योगी सरकार को टारगेट लेकर कांग्रेस भाजपा बसपा आदि आदि आदि मतलब कुछ राष्ट्र विरोधी संगठन तथाकथित कुछ दलित मसीहा कहने वाले संगठन और भी ना जाने क्या क्या कौन-कौन आतंकी तत्वों ने हाथरस कांड के बहाने बहती गंगा में हाथ धोने का प्रयास किया क्या पीड़िता को न्याय मिला नहीं क्या आगे नया मिलेगा इसकी उम्मीद भी कदापि नहीं बलरामपुर कांड में क्या दलित बालिका को न्याय मिला आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है उसके बाद भी नई नई कहानियां गढ़ी जा रही हैं जहां हाथरस कांड में एक और न सिर्फ पूरा विपक्ष बल्कि कुछ टट पूंजिये दल भी दलित बालिकाओं को इंसाफ दिलाने की नियत से हाथरस पहुंच गए क्या उनका मकसद वास्तव में उस दलित बालिकाओं को इंसाफ दिया था नहीं कदापि नहीं बल्कि उनका एकमात्र मकसद न्यूज़ चैनलों की टीआरपी की दौड़ में दौड़ते हुए मात्र अपने आप को हाईलाइट करने का था और योगी सरकार को किस तरह घेरा जाए यही एकमात्र मकसद था इस खेल में भीम आर्मी पीएफआई जैसी संस्थाएं हुई थी जिन्हें विदेशों से आतंकी संस्थाओं से भारत विरोधी संस्थाओं से फंडिंग की प्राप्ति होती है मैं दो बातें स्पष्ट यहां पर कहना चाहूंगा एक तो यह कि राजनीतिक दल इतने ना गिर जाए कि किसी रेप कांड को आधार बनाकर बजाय इंसाफ दिलाने के सरकार गिराने का कार्य करें क्या यह अच्छा नहीं होता कि हाथरस कांड बलरामपुर रेप कांड अथवा पुजारियों पर हमला पुजारियों को जलाकर मार डालने की घटनाओ पर गंदी राजनीति ताक पर रखकर पूरी सुचिता और पवित्रता के साथ पक्ष और विपक्ष एक मंच पर आकर इस समस्या का समाधान करते अपनी गंदी राजनीति में जिस तरह राजनीतिक दलों द्वारा जनता को मूर्ख बनाया जा रहा है वह भी किसी अक्षम्य अपराध से कम नहीं है सवाल यह है कि क्या जनता ऐसे राजनीतिक दलों को दंड देने का कार्य करेगी जिन्होंने राष्ट्र विरोधी तत्वों के साथ मिलकर भारत की एकता और अखंडता को नष्ट कर जातिवाद के जहर ना सिर्फ प्रदेश बल्कि पूरे देश को नफरत की आग में धकेल दिया है इस देश की केंद्र सरकार को अथवा राज्य सरकार सभी से में निष्पक्ष रुप से बस यही कहना चाहता हूं कि पिछले दिनों जितनी भी यह सब घटनाएं हुई हैं उन घटनाओं की निष्पक्ष जांच उच्च स्तरीय जांच वह पूरी ईमानदारी के साथ करवाने का कार्य करें ऐसे में की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है जिस तरह हाथरस कांड में उसने मामला स्वत संज्ञान में लेकर जांच के आदेश दिए हैं वैसे ही सभी मामले और आने वाले मामले भी न्यायालय स्वत संज्ञान में लेकर उसकी निष्पक्ष जांच कराने का कार्य करें, निश्चित रूप से अगर देश में अपराधों को कम करना है अथवा समाप्त करना है तूने आलू को एक कदम आगे बढ़ते हुए मामलों को स्वत संज्ञान में लेना ही होगा परंतु दुर्भाग्य वश जहां एक और विपक्ष और न्यूज़ चैनल स्वार्थ वर्ष मुखर वही न्यायालय का मौन रहना देश हित में पूरी तरह से घातक है जहां तक विपक्ष का सवाल है अगर इस देश में स्वच्छ और स्वस्थ राजनीति करने का बीड़ा उठाते हैं तो सभी एकजुट होकर एक मंच पर आएं और जो भी घटना कारित हुई है, अथवा कारित होने जा रही है, उन घटनाओं पर वास्तविक व रूप से न्याय की प्राप्ति हो सके ऐसा प्रयत्न करें और इन न्यूज़ चैनलों का क्या करना होगा इसका भी फैसला जितनी गंभीरता से हो उतना ही अच्छा निर्णय जनता की अदालत में आज मेरे मन में जो भड़ास थी वह आप लोगों के सामने मैंने रख दी पता नहीं मैं कितना सही हूं अथवा कितना गलत जनता जनार्दन स्वयं निर्णय करें
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
M•COM,LLB,MBA (H R)
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