काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 10

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 10
न सूत न कपास मुस्लिम करें महज लट्ठम लट्ठा
मनीष पाण्डेय
मुसलमानों के पास ना तो राम मंदिर मामले में साक्ष्य और सबूत थे, ना ही कृष्ण जन्मभूमि मामले में और ना ही काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर मामले में, माननीय न्यायालय द्वारा समय-समय पर उनके वाद को खारिज किया जाना, इसका सबसे बड़ा सबूत है ऐसे में जब राम जन्मभूमि मंदिर के ऐतिहासिक निर्णय के पश्चात श्री अयोध्या धाम में भव्य राम मंदिर का निर्माण होने जा रहा है तो ऐसे में हिंदू शौर्य एक बार फिर से जागृत अवस्था में आकर अपने इस अधिकार उस भगवान की संपत्ति को पुनः प्राप्त करने के लिए उतावला हो उठा है जिसे सैकड़ों वर्षो पूर्व मुगल आक्रांताओं द्वारा अपनी जिहादी प्रवृत्ति के चलते हिंदुओं से छीन लिया गया था, अगर हिंदू उसे पुनः प्राप्त करना चाहते हैं तो भला इसमें गलत क्या है? मेरा मुसलमानों से 2 सवाल एक तो यह कि मुस्लिम इसे ज्ञानवापी मस्जिद कहते हैं तो पहला सवाल यह है कि मुसलमानों द्वारा इस मस्जिद का नाम ज्ञानवापी क्यों रखा गया क्या पूरे विश्व में किसी मस्जिद का नाम संस्कृत में रखा जाता है क्योंकि ज्ञानवापी का अर्थ तो ज्ञान का कुआं होता है और ज्ञान व्यापी अर्थात कोणार्क कुंड का महत्व तो पुराणों में भी वर्णित है दूसरा सवाल यह है कि नंदी का मुख हमेशा शिवलिंग क्यों होता है काशी विश्वनाथ में नंदी का मुख ज्ञानवापी की ओर है इसी से पता चल जाता है कि भगवान शिव का वास उसी ज्ञानवापी मंदिर में था, काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर के संबंध में अगर साक्षी और सबूतों की बातें करें तो अभी मामला कोर्ट में ही लंबित है कि कोर्ट द्वारा उस पूरे क्षेत्र का पुरातात्विक सर्वेक्षण करवाया जाए निश्चित रूप से अगर कोर्ट से आदेश देता है तो दूध का दूध और पानी का पानी अपने आप हो जाएगा किंतु मुस्लिम से डरा हुआ है और वह बार-बार इस पुरातात्विक सर्वेक्षण कराए जाने का विरोध कर रहा है अनेक विदेशी यात्रियों इतिहासकारों ने समय-समय पर अपनी रचनाओं के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया है कि मुस्लिम आक्रांता ओं द्वारा काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर का विध्वंस कर उस पर मस्जिद बनाई गई, अभी हाल में ही काशी विश्वनाथ कॉरिडोर मैं जब सरस्वती गेट से मणिकर्णिका घाट तक कैरीडोर का निर्माण किया जा रहा है तो उसके खुदाई में 18वीं और 19वीं शताब्दी के की प्राप्ति हो रही है उस पूरे क्षेत्र में कहीं से भी मस्जिद के कोई भी चिन्ह नहीं प्राप्त हुए हैं कोर्ट मैं हिंदू पक्ष इसीलिए पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की मांग कर रहे हैं जिसे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके परंतु मुस्लिम इस बात से लेकर बेहद डरे हुए हैं और वह कोर्ट में लगातार इस सर्वेक्षण का विरोध कर रहे हैं असलियत में भी जानते हैं कि अगर कोर्ट ने पुरातात्विक सर्वेक्षण की मांग को लागू कर दिया तो मुसलमानों के चेहरे पर पड़ा हुआ झूठ का नकाब अपने आप खुल जाएगा, तथाकथित ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर की दीवारों को देखने से यह साफ-साफ पता चलता है कि यह हिंदू कलाकृति का ही नमूना है मंदिरों की दीवार पर बने कमल पुष्प के चिन्ह इस बात को साफ साफ दर्शाते हैं की मस्जिद का यह भाग अभी मंदिर का ही एक हिस्सा हुआ करता था, जहां तक काशी विश्वनाथ के स्थान की प्रमाणिकता है तो इस संबंध में लिंग पुराण के अनुसार देवस्य दक्षिणे भागे वापी तिष्ठति शोभना तस्याउत्पादों पीत्वा पुनर्जन्म न विघते
लिंग पुराण पृष्ठ संख्या 109
यैस्तु तत्र जलं पीतं कृतार्थास्ते हि मानवा:
तेषां तु तारां ज्ञानगुत्पत्स्यातिन संशय
त्री ति पृष्ठ संख्या 359
अर्थात विश्वनाथ के दक्षिण भाग में एक वापी है जिसके जल को पीने से पुनर्जन्म नहीं होता एवं ज्ञान की उत्पत्ति होती है निश्चय ही यह वापी ज्ञानवापी है
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार भी अवि मुक्तेश्वर की आराधना सर्व प्रधान है, अभी हाल ही में काशी विश्वनाथ प्रोजेक्ट की खुदाई के दौरान ज्ञानवापी मंदिर के पास 16वीं शताब्दी के मंदिरों के अवशेषों की प्राप्ति हुई है तथा एक सुरंग भी वहां पर मिली है फिलहाल एएसआई इस विषय की जांच कर रहा है कि उस सुरंग का क्या रहस्य है निश्चित रूप से अगर पुरातात्विक सर्वेक्षण होता है तो ज्ञानवापी मस्जिद के नीचे मंदिरों के अवशेषों की प्राप्ति होगी जिसे मुगल आक्रांता ओने तोड़कर उस स्थान पर मस्जिद का निर्माण कर दिया,
स्कंध पुराण में 15000 श्लोको में काशी विश्वनाथ का गुणगान मिलता है। इससे सिद्ध होता है कि यह मंदिर हजारो वर्ष पुराना है। शिव पुराण के अनुसार, काशी विश्वनाथ (Kashi Vishwanath) के मंदिर की स्थापना काशी में भगवान विष्णु ने विधिवत रूप से की थी। काशी खंड ’के अनुसार, ज्ञानवापी के उत्तर में श्री काशी विश्वनाथ जी की स्थिति सुनिश्चित है।
मस्जिद की दीवारों में हिंदू देवी देवताओं और प्रतीक चिन्ह आज भी बने हुए हैं तथा मस्जिद के दीवार में ही श्रृंगार गौरी की पूजा हिन्दू लोग वर्ष में 1 बार करने जाते हैँ , और मस्जिद के ठीक सामने भगवान विश्वनाथ का नंदी विराजमान है….! इस संबंध में एडविन ग्रीव्स लिखते हैं कि
At the back of the mosque and in continuation of it are some broken remains of what was probably the old Bishwanath Temple. It must have been a right noble building ; there is nothing finer, in the way of architecture in the whole city, than this scrap. A few pillars inside the mosque appear to be very old also.
— Edwin Greaves, Kashi the city illustrious, or Benares, 1909
सोलवी शताब्दी में पुजारियों द्वारा शिव का नाम बदलकर विश्वनाथ कर दिया गया था पहले काशी के और युक्तेश्वर के स्वयंभू लिंग की पूजा होती थी स्वयंभू को आदि लिंग भी कहा जाता था, यह मंदिर ज्ञानवापी के उत्तर में स्थित था ,जबकि विश्वनाथ मंदिर ज्ञानवापी की जगह पर था
मां श्रृंगार गौरी मुस्लिम आक्रांता उनके कब्जे में:- बाबा विश्वनाथ की धर्मपत्नी मानी जाने वाली मां श्रंगार गौरी मुस्लिम आक्रांता उनके कब्जे में है मां श्रृंगार गौरी का मंदिर उसी ज्ञानवापी मंदिर क्षेत्र में है जिस पर मुसलमानों ने कब्जा कर रखा है
शिवार्चनम के लिए तय स्थल ज्ञानवापी मसजिद के दक्षिण-पूर्व का भाग, जहां वीर भद्रेश्वर मंदिर और शृंगार गौरी विराजमान हैं, यूपी में जब सपा-बसपा की मिलीजुली सरकार थी तो 1995 में काशी विश्वनाथ मंदिरपरिसर में मौजूद मां श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन पर रोक लगा दी गयी थी। इस मंदिर में साल में सिर्फ एक बार चैत्र नवरात्र की चतुर्थी को ही दर्शन की अनुमति दी गई है।
उक्त साक्ष्य व सबूतों का अवलोकन करने के उपरांत सवाल यह उठता है कि क्या ज्ञानवापी में मुसलमानों द्वारा पढ़ी जाने वाली नमाज हराम है, और ज्ञानवापी में नमाज पढ़ने वाले मुस्लिम क्या काफिर है इस संबंध में एक किस्सा बहुत ही दृष्टांत है मदीने में एक मस्जिद हुआ करती थी जिसका नाम मस्जिदे कबा था, मोहम्मद साहब वहां नमाज पढ़ा करते थे अबू आमिर नाम का एक व्यक्ति था उसमें मस्जिद ए काबा के पास एक दूसरी मस्जिद बनाई जिसका नाम मस्जिदे जरार रखा गया जब मस्जिदे जरार बनकर तैयार हो गई तू लोग मोहम्मद साहब के सामने प्रस्तुत हुए और कहा कि हमने बीमारू कमजोरी के लिए तथा बरसात का ख्याल रखते हुए एक मस्जिद का निर्माण करवाया है आप वहां चले और नमाज को अदा करें मोहम्मद साहब मान गए और उन्होंने वहां चलने का फायदा अबू आमिर से कर दिया किंतु बाद में जब नहीं मालूम हुआ कि उस मस्जिद की बुनियाद के पीछे कई विवाद है और वह हिंदू आस्था पर प्रहार कर रही है उसका उद्देश्य समाज में फूट डालना है तो उन्होंने यह आदेश दिया कि मस्जिद को हमारे पहुंचने से पहले ही ध्वस्त कर दिया जाए और उसे जला दिया जाए इस प्रकार मोहम्मद साहब के आदेश से मस्जिदे जरार को दोस्त कर उसे जला दिया गया सवाल यह उठता है कि जिस ज्ञानवापी मंदिर पर मुस्लिम कब्जा कर कर बैठे हुए हैं और नमाज तथा अन्य क्रियाकलाप करते हैं क्या वह इस्लाम की दृष्टि से हराम है क्या उसे ध्वस्त अथवा जला नहीं देना चाहिए मुसलमानों के पवित्र ग्रंथ कुरान सूरह तौबा 9 संख्या 107, 8,9 यह कहती है कि किसी भी विवादित स्थल पर पड़ी गई नमाज को अल्लाह कबूल नहीं करता कुरान यह भी कहती है कि उस मस्जिद में खड़ा होना भी गुनाह है ,ज्ञानवापी मस्जिद जिसे आलमगीर मस्जिद नाम दिया गया है वास्तव में इमान वाले मुस्लिम समुदाय के साथ धोखा है। क्योंकि क़ुरआन के सूरा ए मायदा 5/87 के अनुसार अल्लाह के अलावा किसी देवी देवता या उसके स्थान पर या व्यक्ति या वस्तु की उपासना करना या नमाज पढ़ना ‘शिर्क’ कहलाता है और शिर्क करने वालों को मुशरिक कहा जाता है, इस प्रकार ज्ञानवापी मस्जिद में नमाज़ अदा करने वाले मुशरिक है और अल्लाह चाहे तो काफ़िर को माफ कर सकता है लेकिन मुशरिक को कभी माफ नहीं करेगा।
फिर सवाल ऐसे में आता है कि जिस ज्ञानवापी मंदिर में मुस्लिम नमाज तथा अन्य क्रियाकलापों संपादित करता है क्या वह हराम नहीं है मुस्लिम बताएं कि जब कुरान में लिखा हुआ है क्या वह गलत है
शेष अगले अंक में
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
MCOM,LLB,MBA (HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
प्लीज डू नॉट कट पेस्ट एंड कॉपी ओनली शेयर

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