काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 9

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 9
जब सावरकर ने कहा काल भैरव बन मस्जिद का करो विध्वंस
*सिर्फ काशी विश्वनाथ ही नहीं, बल्कि राम जन्मभूमि, कृष्ण जन्मभूमि भी हिंदू महासभा के एजेंडे में थी
मनीष पाण्डेय
इससे पहले कि मैं हिंदू महासभा द्वारा काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर के लिए किए गए आंदोलनों पर एक दृष्टि डालें सुधी पाठकों को यह जान लेना आवश्यक है कि हिंदू महासभा द्वारा न सिर्फ काशी विश्वनाथ मंदिर पर बड़े आंदोलन किए गए थे बल्कि राम जन्म भूमि और कृष्ण जन्म भूमि पर भी एक प्रमुख आंदोलन कर्ता के रूप में इतिहास में दर्ज है यह सर्वविदित है कि राम जन्मभूमि मामले में हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई परमानंद द्वारा 1933 मेरा जन्म भूमि का मामला उठाया गया था तत्पश्चात वीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा इस मुद्दे को गंभीरता पूर्वक कर लिया गया था 1949 में हिंदू महासभा द्वारा ही राम जन्म भूमि के लिए मुकदमा हिंदू महासभा के नेता गोपाल सिंह विशारद के माध्यम से न्यायालय में लड़ा गया था वही कृष्ण जन्मभूमि में भी हिंदू महासभा का योगदान कम नहीं था, महा मना कृष्ण जन्म भूमि की दुर्दशा देख बेहद व्यथित व चिंतित थे, 8 फरवरी 1944 को राजा पटनीमल के वंशज राय किशन दास, राय आनंद दास, से 13 •37 एकड़ भूमि को पंडित महामना मदन मोहन मालवीय, वीकेंद्र लाल अत्रेय, तथा गोस्वामी गणेश दास, के नाम पर बैनामा किया गया जिसका भुगतान हिंदू महासभा के नेता व उद्योगपति जुगल किशोर बिडला द्वारा किया गया था काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए हिंदू महासभा ने आजादी से पहले और आजादी के बाद भी कई आंदोलन किए थे आजादी से पहले की एक घटना है धर्म सम्राट करपात्री जी बलरामपुर जनपद गोंडा में एक यज्ञ करना चाहते थे, यज्ञ का प्रारंभ हुआ यह बात जनवरी 1947 की है जब गोंडा के जिलाधिकारी के के के नायक थे गोंडा के महाराजा पाटेश्वरी सिंह व हिंदू महासभा के नेता गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत आदित्यनाथ जी महाराज तथा धर्म सम्राट राम राज्य परिषद के अध्यक्ष संस्थापक करपात्री जी महाराज के बीच यज्ञ समापन के पश्चात यह चर्चा प्रारंभ हुई कि जिन हिंदू धर्म स्थान पर विदेशी आक्रांता व ने कब्जा किया है को मुक्त करो किस प्रकार करवाया जाए इस पर मान लीजिए ना जी महाराज ने कहा कि यह मुद्दा तो हिंदू महासभा के एजेंडे में पहले से ही है चारों लोग अर्थात करपात्री जी महाराज महाराजा पाटेश्वरी सिंह के के के नायर तथा महंत दिग्विजय नाथ जी महाराज ने आपस में विचार-विमर्श कर निर्णय लिया कि अयोध्या स्थित राम जन्म भूमि को मुक्त कराना है कि के के नायर इस विषय पर बेहद गंभीर थी और उन्होंने राम जन्म भूमि को मुक्त कराने हेतु अपना वादा दोहराया और कहा कि वे इस विषय पर पूर्ण रुप से गंभीर है तथा इस पर गहन ता पूर्वक विचार विमर्श करेंगे अगले दिन की इनायत फिर दोबारा यज्ञ स्थल पर पहुंचे वहां एक बार फिर से गहन विचार-विमर्श प्रारंभ हुआ वहां पार्टी सॉरी सिंह नहीं थे, विचार विमर्श इन्हीं तीन लोगों के मध्य प्रारंभ हुआ, तीनों महानुभाव द्वारा इस विषय पर गहन मंत्रणा की गई, कि राम जन्मभूमि को किस तरह मुक्त करवाना है, जहां एक और केकेके नायर ने राम जन्म भूमि को मुक्त कराने हेतु अपनी एक विस्तृत योजना बताई ,वहीं महंत दिग्विजय नाथ जी महाराज ने काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर तथा कृष्ण जन्म भूमि को पुनः प्राप्त करने हेतु अपना एक विस्तृत योजना सामने रखी, मीटिंग के उपरांत महंत दिग्विजय नाथ जी महाराज जी ने यह घोषणा की कि इस अभीष्ट लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भी अपना सब कुछ त्याग ने को तैयार हैं यहां तक कि वह अपना पद भी
श्रीराम जन्मस्थान मंदिर आन्दोलन के पश्चात् सन १९५८-५९ हिन्दू महासभा ने मंदिर पुनर्निर्माण के लिए सत्याग्रह आन्दोलन आरम्भ किया.यह आन्दोलन कई वर्ष तक चला.ज्ञानवापी के सामने प्रचंड नंदी के बीच ऊपर बैठ कर यज्ञ किया जाता था पुलिस रोकती और कारागार ले जाती थी.गंगा घाट हिन्दू महासभा का कार्यालय था, बताते हैं कि बनारस में हिंदू महासभा के तीन स्थानों पर कार्यालय के एक दालमंडी दूसरा गांव घाट और तीसरा रविंद्रपुरी में सभी कार्यकर्ता गऊघाट वाले कार्यालय पर ही एकत्रित हुआ करते थे और वही से काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर के उद्धार के लिए रणनीतियां बनती थी, 1959 में काशी विश्वनाथ मंदिर उद्धार आंदोलन जिसे हिंदू महासभा द्वारा बड़े स्तर पर चलाया जा रहा था हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोरक्षा पीठाधीश्वर महंत दिग्विजय नाथ जी महाराज ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था, अखिल भारत हिन्दू महासभा राष्ट्रीय महामंत्री वी•जी• देशपांडे भी बंदी बने थे. बनारस में हुए आंदोलन में यह मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया जाता था कि यह मस्जिद नहीं मंदिर है ! ऐसा निर्णय हो चुका है फिर भी सरकार उसे हिंदुओं को सौपती नहीं ! ऐसी शिकायत लेकर हिन्दू महासभाई वीर सावरकर जी के निवास स्थान दादर पहुंचे.सावरकर जी ने पूछा "आपने सत्याग्रह क्यों किया ? काशी में कितने हिन्दू है?
काशी के लाखों हिन्दुओ के संयुक्त प्रयास से मस्जिद गिराई जा सकती है.किसी एक हिन्दु ने कालभैरव बनकर प्रवेश किया तो वह मस्जिद रहेगी ? यह क्रान्ति मार्ग है.शत्रु के सामने सत्याग्रह नहीं." यहां इस बात का ध्यान देना होगा कि जिस प्रकार वीर विनायक दामोदर सावरकर ने काशी स्थित इस मस्जिद को गिराने की बात की थी वैसी ही रणनीति राम जन्मभूमि मामले में बाबरी मस्जिद को लेकर भी बनी थी क्या मृत्यु 1992 में वीर सावरकर की योजना सफल हुई थी किंतु काशी और मथुरा अभी बाकी है, काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर हेतु हिंदू महासभा की ओर से आंदोलन कई बार हिंदू महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री विष्णु घनश्याम देशपांडे के नेतृत्व में चलाए गया था श्री देशपांडे का जन्म महाराष्ट्र के विदर्भ में हुआ था हिंदू महासभा के बैनर तले आपने अनेक आंदोलन चलाए थे, जिसमें 1939 में हैदराबाद निजाम के विरुद्ध नागरिकों के अधिकार विषय पर हुए आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था 1948 से लेकर 1952 तक विभिन्न आंदोलनों को चलाने हेतु अनुदान कटारिया दी थी 1947 में हुए देश विभाजन के लिए उन्होंने महात्मा गांधी को जिम्मेदार बताया था गांधी हत्या के 3 दिन बाद ही उनकी गिरफ्तारी हुई थी 1951 के आम चुनाव में विजय देशपांडे ने लोकसभा क्षेत्र ग्वालियर गुना से एक साथ चुनाव जीता था बाद में उन्होंने ग्वालियर सीट हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष खरे के समर्थन में छोड़ दी थी विजय देशपांडे बाद में शामिल हो गए तथा 1964 में विश्व हिंदू परिषद की स्थापना करने में अपना योगदान दिया था राम जन्मभूमि आंदोलन में भी वीजी देशपांडे पूरी तरह से सक्रिय थे ,1950 में भी अयोध्या आकर इस विषय में आंदोलनरत है
आपका ही अधिवक्ता मनीष पांडेय
MCOM,LLB,MBA (HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
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