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Showing posts from 2021

कृष्ण जन्मभूमि का रक्तरंजित इतिहास भाग 8

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कृष्ण कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 8 छल प्रपंच धोखा और विश्वासघात यही कांग्रेसका असली चेहरा * कृष्ण जन्म भूमि पर स्वामित्व किसका? मनीष पाण्डेय राम के अस्तित्व को नकारने और रामसेतु को तोड़ने का प्रयास करने वाली कांग्रेस द्वारा कृष्ण जन्मभूमि बाद में भी अड़ंगा लगाया गया था कृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए जहां 1951 में कृष्ण जन्म भूमि ट्रस्ट का निर्माण हो चुका था किंतु कांग्रेस ने उसे ट्रस्ट को नकारते हुए साजिश अनेक अपना ही ट्रस्ट का निर्माण कर लिया इस ट्रस्ट का नाम था कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ जो कि कालांतर में कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के नाम से जाना गया इस ट्रस्ट का निर्माण 1958 में हुआ था ट्रस्ट के सचिव थी उस समय कांग्रेश के प्रमुख पदाधिकारी भगवान दास भार्गव थे वर्तमान में दीवानी में चल रहे मुकदमे का विरोध करने वाले महेश पाठक जो कि अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं द्वारा वर्ष 2019 में कांग्रेस के टिकट पर मथुरा संसदीय सीट से चुनाव भी लड़ा गया था महेश पाठक द्वारा कोर्ट में एक याचिका डालकर उन हिंदुत्ववादी संगठनों की याचिका खारिज करने की मांग की ...

कृष्ण जन्मभूमि का रक्तरंजित इतिहास भाग 7

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कृष्ण कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 7 न्यायालय के निर्णय ईदगाह वाला हिस्सा ही कृष्ण जन्म भूमि मनीष पाण्डेय जिस प्रकार राम मंदिर को न्यायालय में जानबूझकर मुस्लिम पक्ष द्वारा उलझाया गया था, ठीक वैसे ही कृष्ण जन्म भूमि के साथ भी हुआ था जहां राम जन्मभूमि का वादन न्यायालयों में 125 वर्षों तक हो जा रहा वहीं कृष्ण जन्म भूमि का वाद भी लगभग 143 वर्ष तक न्यायालय में उलझा रहा जब तक 1968 मैं गैर कानूनी ढंग से समझौता नहीं हो गया मराठा शासन के पतन के बाद ब्रज क्षेत्र की कमान पूरी तरह से अंग्रेजों के हाथ में आ गई थी 1815 में कटरा केशव देव अर्थात कृष्ण जन्म भूमि को 13•37 एकड़ भूमि को जब नीलाम किया गया तो वाराणसी के बैंकर राय पत्नीमल द्वारा इसे खरीद लिया गया राय पत्नीमल उस भूमि पर खुद कृष्ण मंदिर का निर्माण करना चाहते थे किंतु मुसलमानों द्वारा यह कहकर विरोध किया गया की नीलामी में खरीदी गई भूमि में ईदगाह की भूमि सम्मिलित नहीं है न्यायालय द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्णय 1832 में पहला मुकदमा:- मुस्लिम अत्ताउल्लाह खान द्वारा 15 मार्च 1932 को कलेक्टर के यहां प्रार्थना पत्र देकर कहा गया कि 1815 की हुई नील...

कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 6

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कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 6 *कृष्ण जन्मभूमि विश्वासघात की लिखी गई एक कहानी मनीष पाण्डेय 10 अगस्त 1968 को समझौता हुआ उस समय मथुरा जनपद के जिला अधिकारी आरके गोयल तथा पुलिस अधीक्षक गिरीश बिहारी थे इन्हीं दोनों महानुभावों ने हिंदू अर्थात कृष्ण जन्म सेवा संघ संस्थान तथा शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के पदाधिकारियों के मध्य समझौता करने का दबाव बनाया था समझौता हिंदू पक्ष की ओर से सह सचिव देवधर शर्मा तथा फूल चंद्र गुप्ता द्वारा किया गया था अधिवक्ता अब्दुल गफ्फार थे वही मुस्लिम पक्ष की ओर से शाह माननीय डॉक्टर साहब उद्दीन शाकिर अब्दुल्ला खान मोहम्मद याकूब आलू वाला के हस्ताक्षर अधिवक्ता थे रज्जाक हुसैन श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ तथा शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के मध्य जो इकरारनामा हुआ वह निम्न प्रकार से था 1•हम, श्री देवधर शास्त्री, कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ, मथुरा द्वारा प्रथम दल के रूप में और प्राधिकृत, और श्री शाह मीर मलीह और श्री अब्दुल गफ्फार, वकील, शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट, मथुरा के प्रतिनिधि, दूसरे पक्ष के रूप में, ट्रस्ट के संकल्प संख्या 2 दिनांक 8-10-1968 के तहत, 2•श्री...

कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 5

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कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 5 कृष्ण जन्मभूमि के उद्धारक पेशवा महामना और बिडला मनीष पाण्डेय कृष्ण जन्म भूमि को आतताइयों से मुक्त कराने के लिए पनीर महान विभूतियों ने समय समय पर अपना अमूल्य योगदान दिया, कृष्ण जन्म भूमि के लिए मराठों की अमूल्य योगदान को नकारा लगभग असंभव है अनेक मराठों ने मुस्लिम आततायियों से मथुरा क्षेत्र को मुक्त करवाया था, ऐसे ही एक महान मराठा पेशवा माधवराव का भी इतिहास में नाम अमर है, एक ब्राह्मण योद्धा के रूप में चर्चित माधवराव पेशवा ने मथुरा से लेकर काशी तक का क्षेत्र पूरी तरह से मुस्लिम विहीन कर दिया था, इतिहास हमें यह जानकारी देता है कि बालाजी बाजीराव पेशवा की मृत्यु के उपरांत बेहद अल्पायु में ही माधवराव पेशवा को सिंहासन पर बैठा दिया गया पेशवा माधवराव ने अपने जीवन में अनेकों युद्धों का सामना किया यह वीरता पूर्वक लड़े और विजयी हुए, बताया जाता है कि अहमद शाह अब्दाली के भय से ब्रज क्षेत्र के अधिकांश हिंदू राजा पराजित होकर ब्रज क्षेत्र को छोड़ चुके थे पूरे क्षेत्र में मुसलमानों का आतंक अपने चरम पर था कहते हैं कि एक रात माधवराव को स्वप्न में स्वयं भगवा...

जन्मभूमि का इतिहास भाग 4

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कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास (श्रंखला) भाग 4 पुरातात्विक साक्ष्य, पुरातत्ववेक्क्ताओं और इतिहासकारों ने कहा ,यही है कृष्ण जन्म भूमि मनीष पाण्डेय  अक्सर कुछ सेकुलर वादी मानसिकता के लोग भारत के मुस्लिम शासकों को महान बताने से नहीं चूकते हैं वे उस अकबर को भी महान बता देते हैं जिसने इस्लामिक जिहाद की आड़ लेकर ना सिर्फ हिंदू मंदिरों को तोड़ वाया बल्कि लव जिहाद के तहत,जोधाबाई से निकाह किया इतिहास बताता है कि अकबर ने सैकड़ों मंदिरों का विध्वंस करवाया, किंतु नऐ मंदिरों का निर्माण करवाने पर पूरी तरह से रोक लगवा दी, इतिहासकार बताते हैं कि अकबर ने तुलसीदास जी को भी हनुमान मंदिर बनाने से रोका था, मौलवी मोहम्मद हुसैन आजाद द्वारा लिखित दरबार ए अकबर मैं कृष्ण जन्मभूमि अर्थात कटरा केशवपुर पर एक ब्राह्मण चौबे द्वारा मंदिर स्थल पर चबूतरे का निर्माण करवाकर उस पर भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करवा कर पूजा अर्चना करने का विवरण साफ-साफ दर्ज है दरबार ए अकबर यह भी बताती है कि कटरा केशोपुर पर मंदिर निर्माण के पश्चात धर्मांध मुसलमानों द्वारा किस तरह विरोध किया गया और किस प्रकार अकबर द्वारा अपनी द...

कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 3

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कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास श्रंखला भाग 3 देसी विदेशी इतिहासकारों, के दृष्टिकोण में कृष्ण जन्मभूमि मनीष पाण्डेय  मधुरा मधुपुर मधुपुरी मधु नगरी और मथुरा को सप्तपुरीयों में श्रेष्ठता के दृष्टिकोण से दूसरे नंबर पर माना गया है मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि होने के कारण पूरे विश्व में यह नगरी अपने आध्यात्मिक धार्मिकता के कारण पूरे विश्व में एक विशिष्ट स्थान रखती है गरुण पुराण के अनुसार काशी कांची चमायाख्यातवयोध्याद्वारवतयपि, मथुराऽवन्तिका चैताः सप्तपुर्योऽत्र मोक्षदाः'; 'अयोध्या-मथुरामायाकाशीकांचीत्वन्तिका, पुरी द्वारावतीचैव सप्तैते मोक्षदायिकाः।' यह सर्वविदित है कि कृष्ण जन्मभूमि होने के कारण ही मथुरा की ख्याति पूरे विश्व में फैली हुई है आज से 5000 वर्ष पूर्व जब भगवान कृष्ण इस पृथ्वी पर अवतरित हुए थे तब उनके समय मैं भी राक्षस राक्षसईयो दैत्यों आदि का आतंक व्याप्त था बचपन से लेकर अपने मरणोपरांत तक भगवान श्री कृष्ण राक्षस रूपी आततायियों आतंकियों से लगातार लड़ते रहे और उनका वध करते रहे उनके परलोक गमन के पश्चात इस कृष्ण जन्म भूमि पर कब्जा करने के लिए आधुनिक राक्षसों जिहादी विचारधारा की उत्...

कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 2

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कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास( श्रंखला) भाग 2 अनेकों बार विध्वंस और पुनः निर्माण की साक्षी बनी है कृष्ण जन्मभूमि मनीष पांडेय  मथुरा जो कई बार उजड़ी और कई बार बसाई गई सर्वप्रथम मथुरा को मधु नामक दैत्य ने बसाया था कालांतर में जब मधु दैत्य के पुत्र लवणासुर ने मथुरा का शासन संभाला तो उसके कार्यकाल में नागरिक गण त्रस्त रहने लगे तब राजा राम के भाई शत्रुघ्न ने लवणासुर को मारकर मथुरा का पुनः निर्माण किया था, एक और तो मथुरा की वैभवता और समृद्धता ,अधर्मियो और विधर्मीयो,तथा लुटेरों को हमेशा खटकती रहती थी, वहीं दूसरी ओर कृष्ण जन्मभूमि होने के कारण भी इस्लामिक दुराआत्माएं, उस पर कब्जा करने के उद्देश्य से निरंतर प्रयत्नशील रहती थी  उनकी मंशा मंदिर को ध्वस्त करके, उसकी संपत्ति को लूट कर उस पर कब्जा करके मस्जिदों का निर्माण करने के लिए प्रयत्नशील रहा करती थी मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा कृष्ण जन्म भूमि को तीन बार अलग-अलग कालखंड में तोड़ा गया था पहली बार महमूद गजनवी द्वारा दूसरी बार सिकंदर लोदी द्वारा और तीसरी बार औरंगजेब द्वारा, हुण और कुषाण द्वारा भी कृष्ण जन्मभूमि को नष्ट किए जाने के भी प्रमाण मिलत...

कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 1

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कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास( श्रंखला) भाग एक जब कृष्ण जन्मस्थान को बना दिया गया ईदगाह/मस्जिद मनीष पांडेय  अगर आप इतिहास के पन्नों को पलटिये तो हमें यह ज्ञात होता है कि हिंदू संस्कृति व सभ्यता को नष्ट भ्रष्ट करने के लिए आतंकियों , आतताइयों, जिहादियों, अधर्मी और विधर्मियों ने समय-समय पर अनेक कुचक्र षड्यंत्र साजिश सेकुलरवादी छल, और तलवार के बल पर युद्ध लड़े हिंदू या फिर कहे कि सनातनी शक्ति, जो अपने पूरे प्रचंड वेग के साथ विश्व में आच्छादित होती चली जा रही थी, यह बात धीरे-धीरे विश्व में उदय हो रहे अन्य सभ्यताओं को रास नहीं आ रही थी इन तत्वों को अपनी कुसंस्कृति,कुसभ्यता, के आगे हिंदू सनातनी शक्ति, का अस्तित्व समाप्त होने का खतरा महसूस होने लगा था ऐसे में उन्होंने साम दाम दंड भेद सभी तरीके अपनाकर इस सनातनी शक्ति के प्रचंड वेग को रोकने का भरपूर प्रयास किया जो इस्लाम बौद्ध जैन आदि पंथ लोगों को दिखाई देते हैं वह कभी हिंदू सनातन शक्ति के ही अंग हुआ करते थे पहले इन लोगों ने सनातन धर्म को तोड़ने के लिए नए-नए मजहब और बंधुओं का निर्माण कर डाला और तत्पश्चात जातियों में उपजाति हूं का निर्माण करना शुर...

जब यहूदियों ने ईसा मसीह को चढ़ाया था क्रूस पर भाग 3

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जब यहूदियों ने ईसा मसीह को चढ़ाया था फांसी पर भाग 3 *क्या ईसा मसीह का हुआ था धर्म परिवर्तन * ईसा में शैतान की अवधारणा कितनी सच कितनी झूठ? मनीष पाण्डेय यह यह सर्वविदित तथ्य है कि यहूदियों द्वारा ही ईसा मसीह को सूली पर चढ़ा कर मार दिया गया था इस आई पंथ में इस बात को लेकर हमेशा से यहूदियों के साथ एक वैमनस्यता आक्रोश वह दुश्मनी देखी गई है किंतु यह आक्रोश और वैमनस्यता उस समय कम होती देखी गई थी जब 16वें पोप बेनेडिक्ट इस पुरानी दावे का कोई ठोस आधार दिखाई नहीं देता है पोप जॉन बेनेडिक्ट ने अपनी पुस्तकJESUS OF NAZARETH में यहूदियों को इस कृत्य के लिए पूरी तरह से दोषमुक्त करार दिया पोप बेनेडिक्ट ने कहा कि इस बात का कोई प्रमाणिक आधार नहीं है कि सभी यहूदी ईसा मसीह की मौत के लिए जिम्मेदार है पोप बेनेडिक्ट द्वारा इस घोषणा से जहां इसाई समुदाय में आश्चर्य व आक्रोश था वही यहूदी समुदाय ने इस बात को लेकर प्रसन्नता जाहिर की थी इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने पोप की इस कदम को स्वागत किया और पूर्व को पत्र लिखा कि मैं इस बात की सराहना करता हूं कि आपने नई किताब में पुरजोर ढंग से गलत आरोपों को ...

जब रोमन साम्राज्य ने तोड़े यहूदी मंदिर यहूदियों की की गई हत्या भाग 2

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 जब रोमन साम्राज्य ने तोडे यहूदी मंदिर यहूदियों की हुई हत्याएं *एकेश्वरवादी परंतु मूर्ति पूजा के घोर विरोधी यहूदी मनीष पाण्डेय एकेश्वरवाद अर्थात ईश्वर एक है यहूदी भी इसी एकेश्वरवाद की धारणा पर विश्वास रखते हैं लगभग 4000 वर्ष पुराना यह पंत न जाने कितनी बार टूटा बिखरा और खानाबदोश ओं की तरह इधर-उधर मारा मारा फिरा पर अपनी अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर नात शरीफ उसने अपनी विरासत अपनी संस्कृति अपनी सभ्यता और अपने अस्तित्व को सहेजने और बचाने में सफल हुआ बल्कि आज विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने में भी पूरी तरह सफल रहा है भारत से 1 वर्ष बाद अस्तित्व में आया हुआ इजराइल तथा मात्र 87 लाख की आबादी वाला यहूदियों का एकमात्र राष्ट्र इजरायल आज विश्व की प्रमुख शक्ति बन चुका है मूर्ति पूजा के घोर विरोधी तथा मूर्तिपूजक ओं से घृणा करने वाले यहूदी समुदाय के इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता जिससे यह कहा जाए कि उन्होंने मूर्तिपूजक ओं के साथ किसी प्रकार की हिंसा की हो यहूदी धार्मिक ग्रंथ तलमुद के अनुसार "राब्बिया ने युद्ध को एक दुष्कर बुराई के रूप में देखा" न्याय में देरी और न्याय की विकृति के क...