कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 1
कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास( श्रंखला) भाग एक
जब कृष्ण जन्मस्थान को बना दिया गया ईदगाह/मस्जिद
मनीष पांडेय
अगर आप इतिहास के पन्नों को पलटिये तो हमें यह ज्ञात होता है कि हिंदू संस्कृति व सभ्यता को नष्ट भ्रष्ट करने के लिए आतंकियों , आतताइयों, जिहादियों, अधर्मी और विधर्मियों ने समय-समय पर अनेक कुचक्र षड्यंत्र साजिश सेकुलरवादी छल, और तलवार के बल पर युद्ध लड़े हिंदू या फिर कहे कि सनातनी शक्ति, जो अपने पूरे प्रचंड वेग के साथ विश्व में आच्छादित होती चली जा रही थी, यह बात धीरे-धीरे विश्व में उदय हो रहे अन्य सभ्यताओं को रास नहीं आ रही थी इन तत्वों को अपनी कुसंस्कृति,कुसभ्यता, के आगे हिंदू सनातनी शक्ति, का अस्तित्व समाप्त होने का खतरा महसूस होने लगा था ऐसे में उन्होंने साम दाम दंड भेद सभी तरीके अपनाकर इस सनातनी शक्ति के प्रचंड वेग को रोकने का भरपूर प्रयास किया जो इस्लाम बौद्ध जैन आदि पंथ लोगों को दिखाई देते हैं वह कभी हिंदू सनातन शक्ति के ही अंग हुआ करते थे पहले इन लोगों ने सनातन धर्म को तोड़ने के लिए नए-नए मजहब और बंधुओं का निर्माण कर डाला और तत्पश्चात जातियों में उपजाति हूं का निर्माण करना शुरू किया और यह परंपरा आज तक चली आ रही है यह सर्वविदित है कि हिंदू सनातन धर्म से ही इस्लाम का उदय हुआ किंतु प्रवृत्ति चुकी राक्षसी थी इसीलिए यह पंथ या कहीं मजहब ने हिंदू संस्कृति के आचार विचारों और सिद्धांतों को ना अपना कर जलन वस ठीक उसके विपरीत कार्य किए आप इसे कह सकते हैं कि इस्लाम की प्रवृत्ति भस्मासुर वाली प्रवृत्ति थी जो अपने ही उत्पत्ति कारक को नष्ट करने के लिए दौड़ पड़ी थी हिंदू सनातन धर्म को नष्ट करने के उद्देश्य से उसे नेस्तनाबूद करने के दृष्टिकोण से इस्लाम ने हिंदू धार्मिक स्थलों पर विवाद पैदा करने शुरू किए शुरुआत में यह प्रवृत्ति छोटे भाई को शरण देने के रूप में आरंभ हुई जहां भाई को शरण नहीं मिली वहां पर तलवार की नोक के बल पर उन्होंने इसे पाने की कोशिश की चाहे आप राम जन्मभूमि का इतिहास उठाकर देख लीजिए या फिर कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास अथवा काशी विश्वनाथ का इतिहास या फिर भारत में जहां-जहां ऐसे विवाद हुए हैं उनका भी इतिहास अगर आप देखेंगे तो पाएंगे कि पहले तो उन्होंने शरण/ईबादत के नाम पर जगह मांगी फिर धीरे-धीरे उस पर कब्जा करने की कोशिश की,जानबूझकर विवादास्पद बनाया विवाद बढ़ाने का उद्देश्य मात्र ही था कि अंत में सुलह समझौता और मध्यस्थता होगी तो हमें कुछ ना कुछ इसमें से तो मिल ही जाएगा नहीं मिला तब पूरे पर कब्जा होगा, राम जन्मभूमि विवाद खड़ा करने के पीछे भी वही साजिशें थी जो कृष्ण जन्मभूमि में है या फिर काशी विश्वनाथ मंदिर में है राम जन्म भूमि के इतिहास के बारे में तो मैं अपनी पिछली आर्टिकल में काफी कुछ लिख चुका हूं कृष्ण जन्मभूमि अब यह आर्टिकल प्रारंभ कर रहा हूँ,
मथुरा में कृष्ण जन्म भूमि पर आज जिस भाग में ईदगाह/ मस्जिद का निर्माण है वह वही भूमि है जहां पर भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था जैसे राम जन्मभूमि में मुख्य गुंबद के ठीक नीचे वाला स्थान पर राम का जन्म हुआ था यह ऐतिहासिक तथ्य है कि भगवान कृष्ण का जन्म कंस के कारागार में हुआ था जिस स्थान पर मस्जिद है उसी स्थान पर कंस का कारागार था इस बात को समझने के लिए हमें जूनागढ़ रियासत की घटनाओं को भी समझना होगा जूनागढ़ रियासत पर भी कभी मुसलमानों का शासन था वहां पर बनी हुई मस्जिद को किसी अनियंत्रित स्थान पर हस्तांतरित कर दिया गया था किंतु मथुरा में जन्म स्थान को ही हस्तांतरित कर दिया गया इतिहास पर अगर दृष्टि डालें तो कृष्ण जन्मभूमि के इस मंदिर को अनेकों बार आतताइयों द्वारा तोड़ा गया, बार-बार हिंदू राजाओं द्वारा इसे बनवाया गया इतिहास हमें बताता है कि सन 1017 -18 में इसे मोहम्मद गजनवी द्वारा तोड़ा गया तब 1150 में इसे पुनः हिंदू शासकों ने बनवाया 16 वीं शताब्दी में एक बार फिर इसे एक बार फिर सिकंदर लोदी द्वारा तोड़ा गया सन 1669 ने औरंगजेब द्वारा कृष्ण जन्मभूमि की सामग्री का उपयोग करते हुए यहां पर एक ईदगाह( मस्जिद) बनवा दी गई, फ्रांसीसी यात्री जीन बापिस्टे टेबर्नियर( jen baptiste tavernier) जोकि 1630 से लेकर 1668 तक भारत में कई बार आया ने अपनी पुस्तक ट्रेवल इन इंडिया में लिखते हैं कि मैंने जो उस समय देखा वह एक शानदार अनुभव था मुख्य देवता काले पत्थर के थे, उनकी दो आंखों में सफेद माणिक्य के दो कंसल्ट लगे थे पूरे भारत में यह एक शानदार संपत्ति थी औरंगजेब की सेना में इटालियन कमांडर निकोलाओ मानूची (जिसने राम जन्म भूमि के संबंध में भी काफी कुछ लिखा है मेरे पिछले आर्टिकल में है) अपनी यात्रा वृतांत storia do mogor में कृष्ण जन्म भूमि के बारे में भी काफी कुछ लिखा है मानूची लिखते हैं कि केशवदेव मंदिर का स्वर्णाच्छादित शिखर इतना ऊँचा था कि दीपावली की रात उस पर जले दीपकों का प्रकाश 18 कोस दूर स्थित आगरा में भी दिखता था।
-------शेष अगले भाग में
आपका ही मनीष पांडेय अधिवक्ता
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
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