कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 5

कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 5
कृष्ण जन्मभूमि के उद्धारक पेशवा महामना और बिडला
मनीष पाण्डेय
कृष्ण जन्म भूमि को आतताइयों से मुक्त कराने के लिए पनीर महान विभूतियों ने समय समय पर अपना अमूल्य योगदान दिया, कृष्ण जन्म भूमि के लिए मराठों की अमूल्य योगदान को नकारा लगभग असंभव है अनेक मराठों ने मुस्लिम आततायियों से मथुरा क्षेत्र को मुक्त करवाया था, ऐसे ही एक महान मराठा पेशवा माधवराव का भी इतिहास में नाम अमर है, एक ब्राह्मण योद्धा के रूप में चर्चित माधवराव पेशवा ने मथुरा से लेकर काशी तक का क्षेत्र पूरी तरह से मुस्लिम विहीन कर दिया था, इतिहास हमें यह जानकारी देता है कि बालाजी बाजीराव पेशवा की मृत्यु के उपरांत बेहद अल्पायु में ही माधवराव पेशवा को सिंहासन पर बैठा दिया गया पेशवा माधवराव ने अपने जीवन में अनेकों युद्धों का सामना किया यह वीरता पूर्वक लड़े और विजयी हुए, बताया जाता है कि अहमद शाह अब्दाली के भय से ब्रज क्षेत्र के अधिकांश हिंदू राजा पराजित होकर ब्रज क्षेत्र को छोड़ चुके थे पूरे क्षेत्र में मुसलमानों का आतंक अपने चरम पर था कहते हैं कि एक रात माधवराव को स्वप्न में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण दर्शन देकर ब्रज क्षेत्र से मुसलमानों को मुक्त कराने का आदेश दिया इस स्वप्न के उपरांत माधवराव पेशवा ने अपनी पूरी सेना के साथ ब्रज क्षेत्र को अहमद शाह अब्दाली के अत्याचार से मुक्त कराने हेतु निकल पड़े पेशवा माधवराव के तेज प्रताप को देख ब्रज क्षेत्र के हार कर भागे हुए राजा भी उनके साथ आ मिले और तब उन्होंने मिलकर पूरे ब्रज क्षेत्र को ना सिर्फ अहमद शाह अब्दाली के अत्याचार से मुक्त करवाया बल्कि ब्रज क्षेत्र पर पुनः कब्जा कर लिया, बताते हैं कि माधवराव की इस प्रचंड जीत की प्रसन्नता में महाराष्ट्र में प्रसिद्ध दहीहंडी त्यौहार को मनाने का प्रचलन प्रारंभ हुआ ,माधवराव की इस जीत का सिलसिला उस समय थम गया जब पेशवा माधवराव 1772 में अचानक बीमार पड़े, पेशवा माधवराव अपनी बीमारी से उबर नहीं सके और अंततः 18 नवंबर सन 1772 ईसवी को उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए ,सन 1770 ईसवी में महादजी सिंधिया ने मुगलों से प्रसिद्ध गोवर्धन का युद्ध किया था जिसे बैटल आफ गोवर्धन कहा गया गोवर्धन के युद्ध में मुगलों को पराजित कर कृष्ण जन्म भूमि को मुक्त करवा लिया गया था तथा पूरे क्षेत्र को नजूल भूमि घोषित कर दिया गया था मथुरा का पोतरा कुंड का जीर्णोद्धार भी महादजी सिंधिया द्वारा ही करवाया गया था, माधवराव पेशवा के बाद मराठों की शक्ति धीरे-धीरे क्षीण होने लगी 1802 लार्ड लेक मराठों पर जीत हासिल कर पूरे ब्रज क्षेत्र पर अधिकार कर लिया और पूरा क्षेत्र ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन चला गया ,1814 तक पूरा ब्रज क्षेत्र अंग्रेजो के कब्जे में आ चुका था 1815 में कृष्ण जन्मभूमि क्षेत्र को अंग्रेजों ने नीलाम कर दिया जिसे बनारस के राय पटनीमल जो कि एक समाजसेवी थे ने खरीद लिया, बताते हैं कि जब 1940 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने क्षेत्र का दौरा किया तो कृष्ण जन्म भूमि की दुर्दशा देख अत्यंत व्यथित हुए, और उन्होंने प्रसिद्ध उद्योगपति जुगल किशोर बिरला को एक पत्र लिखकर उसके उद्धार की बात लिखी ,तब जुगल किशोर बिरला ने मालवीय जी की इच्छा का सम्मान करते हुए 7 फरवरी 1944 को राय पत्नीमल के उत्तराधिकारी राय आनंद दास व राय किशन दास से इस क्षेत्र को ₹31400 में खरीद लिया था जमीन की रजिस्ट्री महामना पंडित मदन मोहन मालवीय गोस्वामी गणेश दत्त भीखन लाल जी अत्रे के नाम पर हुई थी, सारा पैसा जुगल किशोर बिरला द्वारा दिया गया था 12 नवंबर 1946 को महा मना ने अपने शरीर का त्याग कर दिया जुगल किशोर बिरला ने महा मना के अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए 21 फरवरी 1951 को श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की स्थापना की 1945 में मुसलमानों द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा एक रिट याचिका डाली गई जिसका निर्णय 1953 में आया निर्णय के बाद आषाढ़ शुक्ल द्वितीय संवत 2014, 29 जून 1957 को मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा हुई पूरे गर्भ ग्रह सहित मंदिर प्रांगण के पुनरुद्धार का कार्य प्रारंभ हुआ जो 1982 में जाकर पूरा हुआ अब इस समय सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि भगवान कृष्ण के मूल स्थान जो की जगह के रूप में है आज भी आदत आयु जिहादियों के कब्जे में है जिसे मुक्त कराने की महती जिम्मेदारी संपूर्ण हिंदू समाज के ऊपर है
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
1•पेशवा माधवराव
2•महादजी सिंधिया
3•महामना पंडित मदन मोहन मालवीय
4•जुगल किशोर बिरला
5•लॉर्ड लेक
6• राय आनंद कृष्णा तथा अरराय किशन दास (सबसे ऊपर वाली फोटो)

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