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Showing posts from 2020

काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 16

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काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 16 *न्यायालय ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड पर लगाया ₹3000 का जुर्माना *तारीख पर तारीख और कानूनी दांव पेंच मनीष पाण्डेय वाराणसी के जनपद न्यायालय में हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों के अधिवक्ताओं द्वारा कानूनी दांवपेचो की एक लंबी श्रृंखला चल रही है जहां यह कोई हिंदू पक्ष कार पूरे परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की अपनी मांग पर अधिक है वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्षकार यह नहीं चाह रहा कि वहां पर पुरातात्विक सर्वेक्षण जैसी कोई बातें हो 4 मार्च 2020 को काशी विश्वनाथ मंदिर तथा ज्ञानवापी मामले में सुनवाई जब प्रारंभ हुई तो संशय के बादल इस बात पर मंडराने लगी की सुनवाई बनारस भी चलेगी अथवा नहीं 26 फरवरी को हाईकोर्ट के आदेश अपलोड ना हो पाने के कारण दोनों पक्ष तरीका वक्ताओं द्वारा वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायालय में बहस की गई न्यायालय ने बहस उपरांत दोनों पक्षों से शपथ पत्र मांगा तथा इसके साथ ही साथ हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रेक कोर्ट में प्रस्तुत करने हेतु 2 दिन का समय भी दिया गया तथा अगली सुनवाई 6...

काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 15

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काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रृंखला भाग 15 तारीख पर तारीख कानूनी दांवपेच बौखलाया मुस्लिम पक्ष मनीष पाण्डेय काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रृंखला में दोनों पक्षों की ओर से अर्थात हिंदू और मुस्लिम पक्ष की ओर से न्यायालय में कानूनी दांव पर चले जाने लगे तारीख पे तारीख पड़ने लगी है जहां हिंदू न्यायालय से यह मांग कर रहा है कि पूरे परिसर का पुरातत्व सर्वेक्षण करवाया जाए वही मुस्लिम पक्ष हिंदू पक्ष की इस मांग से बेहद डरा हुआ दिखाई पड़ रहा है ,वह बार-बार पुरातात्विक सर्वेक्षण की बात को नकारने पर तुला हुआ है 9 जनवरी 1920 को सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रेक के न्यायालय में बेशक सुनवाई टल गई, और अगली सुनवाई हेतु तारीख को 21 जनवरी के लिए डाल दिया गया 21 जनवरी 2020 को जो सुनवाई हुई उसमें सोमनाथ व्यास के पुत्र (परिवार) द्वारा न्यायालय में कहा गया कि मुझे भी सुना जाए, क्योंकि अगला डीपी में ही हूं, क्योंकि सोमनाथ व्यास इस पर गद्दी नशीन थी, किंतु न्यायालय ने उस याचिका पर था क्योंकि प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया मुस्लिम पक्ष का यह कहना कि हमारा स्टे अभी बरकरार है तथा आगे भी बरकरार रहने की उम्मीद है जब तक...

बिहार में का बा••••••••?

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बिहार में का बा••••• जंगलराज, बाहुबल, राजनीति का अपराधीकरण यही है बिहार की असली त्रासदी? मनीष पाण्डेय  आखिरकार बिहार विधानसभा चुनाव वर्ष 2020 संपन्न हो ही गए, एग्जिट पोलो के अनुसार जहां कमल जहां मुरझाने की तैयारी कर रहा था, वही सुशासन बाबू के सुशासन का सूर्य अस्त होने की कगार पर था, अप्रत्याशित रूप से लालटेन की तेजी राजनीतिक धुरंधरों को भी हैरान कर रही थी, राजनैतिक विश्लेषकों और पंडितों के अनुमान धरे के धरे रह गए, बिहार के पूरे चुनाव परिदृश्य में अगर कुछ अप्रत्याशित हुआ तो वह लालटेन अर्थात आरजेडी का सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरना, चिराग तले अंधेरा हो जाना, और अपने बड़े-बड़े वादों और ईमानदार छवि की बदौलत पहली बार इस महासमर में उतरी द प्लूरल्स पार्टी, की करारी हार ने बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया, निश्चित रूप से पल्सर पार्टी की सर्वेसर्वा पुष्पम प्रिया चौधरी जो खुद दो स्थानों पर खड़ी हुई थी, दोनों जगहों पर करारी हार मिली बिहार की राजनीति में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में आरजेडी का आना बिहार के उस चेहरे को दिखाने के लिए काफी था जिसकी पहचान ना कभी मिटी है और ना ही शायद ही कभी मिटेगी...

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 14

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 14 तारीख पर तारीख बौखलाया और डरा मुस्लिम पक्ष? मनीष पाण्डेय राम जन्मभूमि के ऐतिहासिक निर्णय के तुरंत बाद वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर तथा मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति हेतु प्रयास तेजी से प्रारंभ कर दिए गए, 15 अक्तूबर, 1991 को इस अध्यादेश के विरुद्ध श्री काशी वि·श्वे·श्वर मुक्ति संघर्ष समिति, ज्ञानवापी वाराणसी तथा प्राचीन मंदिर के पुजारी पं. सोमनाथ भट्ट ने स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में न्यायालय सिविल जज, वाराणसी में वाद संख्या 610/91 दायर की। अन्जुमन इन्तजामिया मस्जिद इसमें प्रतिवादी बना। वाद की प्रक्रिया के बीच में उ.प्र. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ ने पक्षकार बनने हेतु प्रार्थना पत्र दिया, जिसको बहस के बाद न्यायालय प्रथम अतिरिक्त सिविल जज, वाराणसी ने पक्षकार मान लिया। सन् 1991 से सन् 1998 के बीच इस वाद में विभिन्न मुद्दों पर दोनों पक्षों ने प्रमाण प्रस्तुत किए। हिन्दू पक्ष ने न्यायालय के समक्ष मंदिर का ऐतिहासिक तथा पौराणिक साक्ष्य रखते हुए जानकारी दी कि सन् 1669 में औरंगजेब के कुछ सैनिकों द्...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 13

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 13 न्यायालय की प्रक्रिया और पुरातात्विक जांच से भागते मुस्लिम मनीष पाण्डेय इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 1942 में मुसलमानों का मुकदमा खारिज होने के बाद यह मामला ठंडा पड़ा रहा, कालांतर में अक्टूबर 1991 एक बार फिर से यह मुद्दा धीरे-धीरे गरमाने लगा, शिवभक्त जनता एक बार फिर से एकजुट होने लगी तब वाराणसी की शिवभक्त जनता ने ज्ञानवापी विशेषण मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए वर्ष 1991 श्री विश्वेश्वर विश्वनाथ मुक्ति संघर्ष समिति ज्ञानवापी वाराणसी का गठन किया जिसके अध्यक्ष बनारस के ही ख्याति प्राप्त अधिवक्ता श्री दान बहादुर सिंह एडवोकेट तथा वहां मंत्री श्री विजय शंकर रस्तोगी एडवोकेट को चुना गया उक्त समिति के तत्वाधान में ज्ञानवापी विशेषण मंदिर के तत्वों को दूर करने वार्ड संख्या 610 सन 1991 ईस्वी प्राचीन मूर्ति स्वयं को विशेष वर्ग व अन्य प्रति अंजुमन इंतजामियां मस्जिद दिनांक 15•10•1991में को न्यायालय सिविल जज वाराणसी में दाखिल किया गया, उसके बाद हिंदू जनता की ओर से आदेश 1 नियम जाब्ता दीवानी के अंतर्गत प्रतिनिधित्व वाद (रिप्रेजेंटेटिव सूट )दाखिल किया गया...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 12

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 12 जब कोर्ट में मुस्लिम पक्ष का दावा हुआ था बहिष्कृत मनीष पाण्डेय चाहे वह राम जन्मभूमि का मामला हो अथवा कृष्ण जन्मभूमि का या फिर काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर का या फिर उन सभी मंदिरों का जिन्हें मुस्लिम आक्रांता ओं द्वारा ध्वस्त कर वहां पर मस्जिद का निर्माण करवा दिया गया कालांतर में जब इन जगहों पर हिंदुओं द्वारा दावा ठोका गया, तो वह साक्ष्य सबूत पूरी तरह से खुलकर सामने आ गए, जिन्हें मुस्लिम आक्रांता द्वारा इतिहास के पन्नों के पीछे दबा दिया था, और उसी आधार पर राम जन्मभूमि का ऐतिहासिक निर्णय भी हुआ, आगे जो लड़ाई काशी विश्वनाथ मंदिर तथा मथुरा कृष्ण जन्म भूमि के लिए लड़ी जा रही हैं निश्चित रूप से उसका भी ऐतिहासिक निर्णय न्यायालय द्वारा ही होगा, काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर के मामले में पहला मुकदमा 11 अगस्त, 1936 को दीन मुहम्मद, मुहम्मद हुसैन और मुहम्मद जकारिया ने स्टेट इन काउन्सिल में प्रतिवाद संख्या-62 दाखिल किया और दावा किया कि जो भूमि संख्या 9130 है सम्पूर्ण परिसर वक्फ की सम्पत्ति है। इसीलिए उस पर मुस्लिमों के अधिकार को मानते हो व...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर श्रंखला भाग 11

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 11 पुरातात्विक साक्ष्य को नकारती जिहादी मुस्लिम मानसिकता और अंग्रेजों की कुटिल कूटनीति मनीष पाण्डेय यह एक सर्वविदित तथ्य है कि जिहादी मुस्लिम आक्रांता ओं द्वारा सनातन हिंदू धर्म को नष्ट भ्रष्ट तथा मिट्टी में मिला देने की कुत्सित मानसिकता के चलते तथा भारतीय संस्कृति को समाप्त कर देने की प्रवृत्ति के चलते हिंदू सनातन धर्म और संस्कृति पर ना जाने कितने आघात किए गए हिंदू मंदिरों को तोड़ने और हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों का भंजन करना मुस्लिम आक्रांताओं की हिट लिस्ट में हुआ करता था न सिर्फ काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर बल्कि राम जन्मभूमि कृष्ण जन्मभूमि सहित अनेक हिंदू मंदिरों के साथ मुस्लिम आक्रांताओं ने यही किया कालांतर में जब अंग्रेजी शासन आया तो वह इस विषय को अच्छी तरह जानते थे कि सभी मंदिरों को तोड़कर वहां मुस्लिमों द्वारा मस्जिद बनाई गई है इस सच्चाई से वाकिफ होने के बावजूद भी जानबूझकर वैमनस्यता पैदा करने का कार्य अंग्रेजों द्वारा किया गया और उन्होंने इस विषय को अनावश्यक रूप से बढ़ाते चले गए जो निर्णय हिंदू पक्ष में होना चाहिए था व...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 10

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 10 न सूत न कपास मुस्लिम करें महज लट्ठम लट्ठा मनीष पाण्डेय मुसलमानों के पास ना तो राम मंदिर मामले में साक्ष्य और सबूत थे, ना ही कृष्ण जन्मभूमि मामले में और ना ही काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर मामले में, माननीय न्यायालय द्वारा समय-समय पर उनके वाद को खारिज किया जाना, इसका सबसे बड़ा सबूत है ऐसे में जब राम जन्मभूमि मंदिर के ऐतिहासिक निर्णय के पश्चात श्री अयोध्या धाम में भव्य राम मंदिर का निर्माण होने जा रहा है तो ऐसे में हिंदू शौर्य एक बार फिर से जागृत अवस्था में आकर अपने इस अधिकार उस भगवान की संपत्ति को पुनः प्राप्त करने के लिए उतावला हो उठा है जिसे सैकड़ों वर्षो पूर्व मुगल आक्रांताओं द्वारा अपनी जिहादी प्रवृत्ति के चलते हिंदुओं से छीन लिया गया था, अगर हिंदू उसे पुनः प्राप्त करना चाहते हैं तो भला इसमें गलत क्या है? मेरा मुसलमानों से 2 सवाल एक तो यह कि मुस्लिम इसे ज्ञानवापी मस्जिद कहते हैं तो पहला सवाल यह है कि मुसलमानों द्वारा इस मस्जिद का नाम ज्ञानवापी क्यों रखा गया क्या पूरे विश्व में किसी मस्जिद का नाम संस्कृत में रखा जाता है क्यो...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 9

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 9 जब सावरकर ने कहा काल भैरव बन मस्जिद का करो विध्वंस *सिर्फ काशी विश्वनाथ ही नहीं, बल्कि राम जन्मभूमि, कृष्ण जन्मभूमि भी हिंदू महासभा के एजेंडे में थी मनीष पाण्डेय इससे पहले कि मैं हिंदू महासभा द्वारा काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर के लिए किए गए आंदोलनों पर एक दृष्टि डालें सुधी पाठकों को यह जान लेना आवश्यक है कि हिंदू महासभा द्वारा न सिर्फ काशी विश्वनाथ मंदिर पर बड़े आंदोलन किए गए थे बल्कि राम जन्म भूमि और कृष्ण जन्म भूमि पर भी एक प्रमुख आंदोलन कर्ता के रूप में इतिहास में दर्ज है यह सर्वविदित है कि राम जन्मभूमि मामले में हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई परमानंद द्वारा 1933 मेरा जन्म भूमि का मामला उठाया गया था तत्पश्चात वीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा इस मुद्दे को गंभीरता पूर्वक कर लिया गया था 1949 में हिंदू महासभा द्वारा ही राम जन्म भूमि के लिए मुकदमा हिंदू महासभा के नेता गोपाल सिंह विशारद के माध्यम से न्यायालय में लड़ा गया था वही कृष्ण जन्मभूमि में भी हिंदू महासभा का योगदान कम नहीं था, महा मना कृष्ण जन्म भूमि की दुर्दशा देख बेह...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 8

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 8 मंदिर निर्माण में, और बनारस में अपना अमूल्य योगदान देने राजा टोडरमल, राजा पटणीमल, और जेम्स प्रिंसेप मनीष पाण्डेय मुगल आक्रांता ओं द्वारा न जाने कितनी बार काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर का विध्वंस किया गया मुगल आक्रांता कुतुबुद्दीन ऐबक से प्रारंभ हुआ यह विध्वंस औरंगजेब पर आकर रुका ऐसा नहीं है किस विध्वंस में सृजन नहीं हो रहा था जहां एक और मुगल आक्रांता इस मंदिर का बार-बार विध्वंस कर रहे थे वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे हिंदू वीर भी थे जो बार-बार इस मंदिर का सृजन भी कर रहे थे, ऐसी दानवीर भी थे जिन्होंने अपनी थैलियां इस मंदिर के लिए खोल दी थी, इस कड़ी में सर्वप्रथम नाम आता है राजा टोडरमल का 1 जनवरी 1503 को पैदा हुए राजा टोडरमल मुगल शासन काल में अपने गुरु के कारण शहजाद और अवनी राय की बारी सम्मानित किया गया था एक धर्म प्राण अपने धर्म पर अधिक रहने वाले रायपुर अमन को राजा की उपाधि प्रदान की गई थी 8 नवंबर 1589 को उनकी हत्या उन्हीं के सजातीय द्वारा कर दी गई थी, बनारस के मुगलकालीन धार्मिक इतिहास में सबसे प्रसिद्ध घटना अकबर के राज्य काल में मंदिर की ...