काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 16
काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 16
*न्यायालय ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड पर लगाया ₹3000 का जुर्माना
*तारीख पर तारीख और कानूनी दांव पेंच
मनीष पाण्डेय
वाराणसी के जनपद न्यायालय में हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों के अधिवक्ताओं द्वारा कानूनी दांवपेचो की एक लंबी श्रृंखला चल रही है जहां यह कोई हिंदू पक्ष कार पूरे परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की अपनी मांग पर अधिक है वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्षकार यह नहीं चाह रहा कि वहां पर पुरातात्विक सर्वेक्षण जैसी कोई बातें हो 4 मार्च 2020 को काशी विश्वनाथ मंदिर तथा ज्ञानवापी मामले में सुनवाई जब प्रारंभ हुई तो संशय के बादल इस बात पर मंडराने लगी की सुनवाई बनारस भी चलेगी अथवा नहीं 26 फरवरी को हाईकोर्ट के आदेश अपलोड ना हो पाने के कारण दोनों पक्ष तरीका वक्ताओं द्वारा वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायालय में बहस की गई न्यायालय ने बहस उपरांत दोनों पक्षों से शपथ पत्र मांगा तथा इसके साथ ही साथ हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रेक कोर्ट में प्रस्तुत करने हेतु 2 दिन का समय भी दिया गया तथा अगली सुनवाई 6 मार्च 2020 को निर्धारित की गई जब 6 मार्च 2020 शुक्रवार को सुनवाई हुई तो प्रतिवादी पक्ष ने हाईकोर्ट में लंबित याचिका का हवाला दिया तथा सुनवाई को स्थगित करने की अपील की लेकिन न्यायालय ने उक्त अपील को खारिज कर दिया अगली सुनवाई 18 मार्च 2020 को निर्धारित की गई हिंदू तथा मुस्लिम पक्षकारों द्वारा कोरोनावायरस के चलते सुनवाई को स्थगित करने का अनुरोध किया गया था जिसे न्यायाधीश अजय भनोट ने दोनों पक्षों की आपसी सहमति के बाद सुनवाई की अगली तारीख 15 अप्रैल निर्धारित की थी, 19 मार्च 2020 मंगलवार को हुई सुनवाई में अंजुमन जामिया मस्जिद कमेटी के अधिवक्ता मुमताज अहमद ने हाईकोर्ट द्वारा मुकदमे की कार्यवाही स्थगित करने के आदेश से का आदेश की प्रति प्रस्तुत की इस पर न्यायालय ने सुनवाई स्थगित करते हुए हवेली सुन तिथि 28 अप्रैल को निर्धारित की 12 अगस्त 2020 को वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई सुनवाई पर बहस उपरांत अगली तिथि 1 सितंबर 2020 लगा दी गई 1 जुलाई 2020 को प्रतिवादी अंजुमन इंतजाम या मस्जिद कमेटी की ओर से सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायालय में प्रार्थना पत्र देते हुए कहा गया कि मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट में नहीं हो सकती कोर्ट ने अंजुमन या को उक्त प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया और सुनवाई को जारी रखने का आदेश दिया तथा मेरे द्वारा एक और प्रार्थना पत्र किया गया था जिसमें कहा गया था कि लखनऊ एयरपोर्ट टर्मिनल न्यायाधिकरण के पास प्रकरण को भेजा जाए इसे भी सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रेक कोर्ट द्वारा खारिज कर दिया गया था इसी याचिका के खिलाफ जिला जज के न्यायालय में 1 जुलाई को याचिका दाखिल की गई जिस पर जिला जज द्वारा सुनवाई करते हुए बोर्ड को नोटिस जारी किया गया, 11 सितंबर 2020 को ज्ञानवापी मस्जिद के पक्षकारों ने जिला जज वाराणसी फास्टट्रैक न्यायालय में यह अपील की थी कि उक्त वाद को लखनऊ वक्त ट्रिब्यूनल में स्थानांतरित कर दिया जाए जिसे सुनवाई के बाद कोर्ट द्वारा मुस्लिम पक्ष की मांग को खारिज कर दिया गया तब मुस्लिम पक्ष कार द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट के इस आदेश को जिला जज के न्यायालय में चुनौती दी गई 11 सितंबर 2020 दिन शुक्रवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट के इसी आदेश निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई की गई अगली तिथि 11 सितंबर 2020 निर्धारित की गई मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता तौहीद खान ने अपना वकालतनामा लगाते हुए जिला जज न्यायालय के यहां रिवीजन की कॉपी की मांग की 18 सितंबर 2020 को सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता ने सिविल एविएशन दाखिल की जिस पर स्वयंभू भगवान विशेश्वर नाथ का पक्ष जानने के लिए कोर्ट नी 28 सितंबर की तारीख नियत की थी और सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था न्यायालय ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की याचिका को स्वीकार कर तो लिया किंतु देर से आज का दाखिल करने के लिए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड पर ₹3000 का हर्जाना भी लगा दिया सुनवाई की अगली तारीख 13 अक्टूबर निर्धारित की गई थी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता तौहीद खान ने कहा कि न्यायालय में सिविल इंजन दाखिल करने में हुई देरी के लिए क्षमा मांगी गई तथा लिमिटेशंस एक्ट सेक्शन 5 के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था 28 सितंबर 2020 को जिला जज न्यायालय में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल सिविल रिवीजन याचिका पर बहस की गई याचिका को काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर से भी चुनौती दी गई थी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड यह चाहता है कि उक्त वाद को वक्त ट्रिब्यूनल लखनऊ में चलाया जाए जिला जज द्वारा भैंस के उपरांत अपना आदेश सुरक्षित रख लिया गया था अगली डेट 3 अक्टूबर 2020 निर्धारित की गई थी मुस्लिम स्टारों में सिविल जज सीनियर डिवीजन के न्यायालय में मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार होने के प्रश्न पर आदेश को चुनौती दी गई थी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल आवेदन में मियाद समाप्त होने के मामले में कोई कोर्ट में सुनवाई हुई थी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल निगरानी याचिका की मियाद अधिनियम के तहत देरी से देर के लिए माफी के मुद्दे पर सोमवार को बहस हुई थी स्वयंभू लॉर्ड विशेश्वर की ओर से न्यायालय में मियाद अधिनियम के तहत विलंब माफ किए जाने के विरोध में दाखिल की गई थी दोनों पक्ष को सुनने के उपरांत अगली तारीख 3 अक्टूबर निर्धारित की गई थी 3 अक्टूबर 2020 को सुनवाई टली क्योंकि जिला जज अवकाश पर थे 13 अक्टूबर 2020 रिवीजन का एडमिशन बहस का विषय इतना ही था कि मामला सिविल कोर्ट में चलेगा थोड़ा वक्त ट्रिब्यूनल में मुस्लिम पक्ष वक्त ट्रिब्यूनल में वह चलाने का पक्ष धर है 13 अक्टूबर 2020 को सुनवाई टली अगली डेट 15 अक्टूबर 2020 निर्धारित की गई 15 अक्टूबर 2020 सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा दाखिल की गई निगरानी याचिका की पोषणीय था पर सुनवाई नहीं हुई क्योंकि 2 अधिवक्ताओं के निधन के कारण बार एसोसिएशन द्वारा शोक सभा कर कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया गया था जिला जज प्रथम राजीव कमल पांडे के न्यायालय में सुनवाई की अगली डेट 20 अक्टूबर को निर्धारित की गई थी के बाद यह डेट 20 अक्टूबर 2020 को उमेश चंद्र शर्मा के न्यायालय में लगी वाराणसी जिला जज के न्यायालय में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा दाखिल सिविल रिवीजन की एडमिशन पर बहस हुई थी निगरानी याचिका की ग्राह्यता सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता तोहिद खान व अभय नाथ यादव द्वारा बहस की गई रोहित खान द्वारा यह दलील दी गई कि सिविल जज का आदेश अंतिम आदेश है उक्त आदेश से मेरा अधिकार प्रभावित होता है अतः सिविल जज का आदेश निगरानी योग्य है अगली डेट 12 नवंबर 2020 को लगाई गई 12 नवंबर 2020 प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विशेश्वर से जुड़े ज्ञानवापी मामले में सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड तथा अंजुमन इंतजाम या मस्जिद कमेटी की ओर से दाखिल निगरानी याचिकाओं की सुनवाई एक साथ करने का निर्णय लिया गया जिला जज जीयूसी शर्मा के न्यायालय में चल रही सुनवाई के उपरांत सुनवाई की अगली डेट 1 दिसंबर 2020 निर्धारित की गई दोनों निगरानी याचिका में कहा गया कि ज्ञानवापी मामले की सुनवाई का अधिकार यहां की अवर न्यायालय को नहीं है बल्कि सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ को है भगवान विशेश्वर की ओर से वाद मित्र अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी और अमरनाथ शर्मा है आवेदन आवेदन किया गया कि ज्ञानवापी परिसर का पुरातत्व सर्वेक्षण और पूजा पाठ की अनुमति मांगी गई जिसके विरोध में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा तथा अंजुमन इंतजाम या मस्जिद कमेटी द्वारा निगरानी याचिका जिला जज के न्यायालय में दाखिल की गई थी 1 दिसंबर 2020 ज्ञानवापी प्रथम पर बनारस के जिला अध्यक्ष उमेश चंद्र शर्मा के न्यायालय में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड तथा अंजुमन इंतजा मियां की ओर से दाखिल निगरानी याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 4 जनवरी 2021 निर्धारित की गई मंगलवार 1 दिसंबर को जिला जज उमेश चंद्र शर्मा यूसी शर्मा की अदालत में अंजुमन इंतजा मियां तथा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ताओं ने इस मुकदमे में हाई कोर्ट द्वारा पूर्व में जारी स्थगन आदेश का हवाला देकर निगरानी अदालत में पत्रावली तलब कराने की अपील की इस पर वाद मित्र अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी द्वारा इसका विरोध किया गया न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला जज द्वारा निचली अदालत से पत्रावली यों को तलब कराने का आदेश देते हुए अगली तारीख 4 जनवरी 2021 निर्धारित की गई है,
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
MCOM,LLB,MBA( HR)
*न्यायालय ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड पर लगाया ₹3000 का जुर्माना
*तारीख पर तारीख और कानूनी दांव पेंच
मनीष पाण्डेय
वाराणसी के जनपद न्यायालय में हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों के अधिवक्ताओं द्वारा कानूनी दांवपेचो की एक लंबी श्रृंखला चल रही है जहां यह कोई हिंदू पक्ष कार पूरे परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की अपनी मांग पर अधिक है वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्षकार यह नहीं चाह रहा कि वहां पर पुरातात्विक सर्वेक्षण जैसी कोई बातें हो 4 मार्च 2020 को काशी विश्वनाथ मंदिर तथा ज्ञानवापी मामले में सुनवाई जब प्रारंभ हुई तो संशय के बादल इस बात पर मंडराने लगी की सुनवाई बनारस भी चलेगी अथवा नहीं 26 फरवरी को हाईकोर्ट के आदेश अपलोड ना हो पाने के कारण दोनों पक्ष तरीका वक्ताओं द्वारा वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायालय में बहस की गई न्यायालय ने बहस उपरांत दोनों पक्षों से शपथ पत्र मांगा तथा इसके साथ ही साथ हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रेक कोर्ट में प्रस्तुत करने हेतु 2 दिन का समय भी दिया गया तथा अगली सुनवाई 6 मार्च 2020 को निर्धारित की गई जब 6 मार्च 2020 शुक्रवार को सुनवाई हुई तो प्रतिवादी पक्ष ने हाईकोर्ट में लंबित याचिका का हवाला दिया तथा सुनवाई को स्थगित करने की अपील की लेकिन न्यायालय ने उक्त अपील को खारिज कर दिया अगली सुनवाई 18 मार्च 2020 को निर्धारित की गई हिंदू तथा मुस्लिम पक्षकारों द्वारा कोरोनावायरस के चलते सुनवाई को स्थगित करने का अनुरोध किया गया था जिसे न्यायाधीश अजय भनोट ने दोनों पक्षों की आपसी सहमति के बाद सुनवाई की अगली तारीख 15 अप्रैल निर्धारित की थी, 19 मार्च 2020 मंगलवार को हुई सुनवाई में अंजुमन जामिया मस्जिद कमेटी के अधिवक्ता मुमताज अहमद ने हाईकोर्ट द्वारा मुकदमे की कार्यवाही स्थगित करने के आदेश से का आदेश की प्रति प्रस्तुत की इस पर न्यायालय ने सुनवाई स्थगित करते हुए हवेली सुन तिथि 28 अप्रैल को निर्धारित की 12 अगस्त 2020 को वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई सुनवाई पर बहस उपरांत अगली तिथि 1 सितंबर 2020 लगा दी गई 1 जुलाई 2020 को प्रतिवादी अंजुमन इंतजाम या मस्जिद कमेटी की ओर से सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायालय में प्रार्थना पत्र देते हुए कहा गया कि मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट में नहीं हो सकती कोर्ट ने अंजुमन या को उक्त प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया और सुनवाई को जारी रखने का आदेश दिया तथा मेरे द्वारा एक और प्रार्थना पत्र किया गया था जिसमें कहा गया था कि लखनऊ एयरपोर्ट टर्मिनल न्यायाधिकरण के पास प्रकरण को भेजा जाए इसे भी सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रेक कोर्ट द्वारा खारिज कर दिया गया था इसी याचिका के खिलाफ जिला जज के न्यायालय में 1 जुलाई को याचिका दाखिल की गई जिस पर जिला जज द्वारा सुनवाई करते हुए बोर्ड को नोटिस जारी किया गया, 11 सितंबर 2020 को ज्ञानवापी मस्जिद के पक्षकारों ने जिला जज वाराणसी फास्टट्रैक न्यायालय में यह अपील की थी कि उक्त वाद को लखनऊ वक्त ट्रिब्यूनल में स्थानांतरित कर दिया जाए जिसे सुनवाई के बाद कोर्ट द्वारा मुस्लिम पक्ष की मांग को खारिज कर दिया गया तब मुस्लिम पक्ष कार द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट के इस आदेश को जिला जज के न्यायालय में चुनौती दी गई 11 सितंबर 2020 दिन शुक्रवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट के इसी आदेश निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई की गई अगली तिथि 11 सितंबर 2020 निर्धारित की गई मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता तौहीद खान ने अपना वकालतनामा लगाते हुए जिला जज न्यायालय के यहां रिवीजन की कॉपी की मांग की 18 सितंबर 2020 को सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता ने सिविल एविएशन दाखिल की जिस पर स्वयंभू भगवान विशेश्वर नाथ का पक्ष जानने के लिए कोर्ट नी 28 सितंबर की तारीख नियत की थी और सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था न्यायालय ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की याचिका को स्वीकार कर तो लिया किंतु देर से आज का दाखिल करने के लिए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड पर ₹3000 का हर्जाना भी लगा दिया सुनवाई की अगली तारीख 13 अक्टूबर निर्धारित की गई थी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता तौहीद खान ने कहा कि न्यायालय में सिविल इंजन दाखिल करने में हुई देरी के लिए क्षमा मांगी गई तथा लिमिटेशंस एक्ट सेक्शन 5 के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था 28 सितंबर 2020 को जिला जज न्यायालय में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल सिविल रिवीजन याचिका पर बहस की गई याचिका को काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर से भी चुनौती दी गई थी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड यह चाहता है कि उक्त वाद को वक्त ट्रिब्यूनल लखनऊ में चलाया जाए जिला जज द्वारा भैंस के उपरांत अपना आदेश सुरक्षित रख लिया गया था अगली डेट 3 अक्टूबर 2020 निर्धारित की गई थी मुस्लिम स्टारों में सिविल जज सीनियर डिवीजन के न्यायालय में मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार होने के प्रश्न पर आदेश को चुनौती दी गई थी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल आवेदन में मियाद समाप्त होने के मामले में कोई कोर्ट में सुनवाई हुई थी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल निगरानी याचिका की मियाद अधिनियम के तहत देरी से देर के लिए माफी के मुद्दे पर सोमवार को बहस हुई थी स्वयंभू लॉर्ड विशेश्वर की ओर से न्यायालय में मियाद अधिनियम के तहत विलंब माफ किए जाने के विरोध में दाखिल की गई थी दोनों पक्ष को सुनने के उपरांत अगली तारीख 3 अक्टूबर निर्धारित की गई थी 3 अक्टूबर 2020 को सुनवाई टली क्योंकि जिला जज अवकाश पर थे 13 अक्टूबर 2020 रिवीजन का एडमिशन बहस का विषय इतना ही था कि मामला सिविल कोर्ट में चलेगा थोड़ा वक्त ट्रिब्यूनल में मुस्लिम पक्ष वक्त ट्रिब्यूनल में वह चलाने का पक्ष धर है 13 अक्टूबर 2020 को सुनवाई टली अगली डेट 15 अक्टूबर 2020 निर्धारित की गई 15 अक्टूबर 2020 सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा दाखिल की गई निगरानी याचिका की पोषणीय था पर सुनवाई नहीं हुई क्योंकि 2 अधिवक्ताओं के निधन के कारण बार एसोसिएशन द्वारा शोक सभा कर कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया गया था जिला जज प्रथम राजीव कमल पांडे के न्यायालय में सुनवाई की अगली डेट 20 अक्टूबर को निर्धारित की गई थी के बाद यह डेट 20 अक्टूबर 2020 को उमेश चंद्र शर्मा के न्यायालय में लगी वाराणसी जिला जज के न्यायालय में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा दाखिल सिविल रिवीजन की एडमिशन पर बहस हुई थी निगरानी याचिका की ग्राह्यता सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता तोहिद खान व अभय नाथ यादव द्वारा बहस की गई रोहित खान द्वारा यह दलील दी गई कि सिविल जज का आदेश अंतिम आदेश है उक्त आदेश से मेरा अधिकार प्रभावित होता है अतः सिविल जज का आदेश निगरानी योग्य है अगली डेट 12 नवंबर 2020 को लगाई गई 12 नवंबर 2020 प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विशेश्वर से जुड़े ज्ञानवापी मामले में सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड तथा अंजुमन इंतजाम या मस्जिद कमेटी की ओर से दाखिल निगरानी याचिकाओं की सुनवाई एक साथ करने का निर्णय लिया गया जिला जज जीयूसी शर्मा के न्यायालय में चल रही सुनवाई के उपरांत सुनवाई की अगली डेट 1 दिसंबर 2020 निर्धारित की गई दोनों निगरानी याचिका में कहा गया कि ज्ञानवापी मामले की सुनवाई का अधिकार यहां की अवर न्यायालय को नहीं है बल्कि सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ को है भगवान विशेश्वर की ओर से वाद मित्र अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी और अमरनाथ शर्मा है आवेदन आवेदन किया गया कि ज्ञानवापी परिसर का पुरातत्व सर्वेक्षण और पूजा पाठ की अनुमति मांगी गई जिसके विरोध में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा तथा अंजुमन इंतजाम या मस्जिद कमेटी द्वारा निगरानी याचिका जिला जज के न्यायालय में दाखिल की गई थी 1 दिसंबर 2020 ज्ञानवापी प्रथम पर बनारस के जिला अध्यक्ष उमेश चंद्र शर्मा के न्यायालय में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड तथा अंजुमन इंतजा मियां की ओर से दाखिल निगरानी याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 4 जनवरी 2021 निर्धारित की गई मंगलवार 1 दिसंबर को जिला जज उमेश चंद्र शर्मा यूसी शर्मा की अदालत में अंजुमन इंतजा मियां तथा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ताओं ने इस मुकदमे में हाई कोर्ट द्वारा पूर्व में जारी स्थगन आदेश का हवाला देकर निगरानी अदालत में पत्रावली तलब कराने की अपील की इस पर वाद मित्र अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी द्वारा इसका विरोध किया गया न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला जज द्वारा निचली अदालत से पत्रावली यों को तलब कराने का आदेश देते हुए अगली तारीख 4 जनवरी 2021 निर्धारित की गई है,
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
MCOM,LLB,MBA( HR)
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