काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 15

काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रृंखला भाग 15
तारीख पर तारीख कानूनी दांवपेच बौखलाया मुस्लिम पक्ष
मनीष पाण्डेय
काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रृंखला में दोनों पक्षों की ओर से अर्थात हिंदू और मुस्लिम पक्ष की ओर से न्यायालय में कानूनी दांव पर चले जाने लगे तारीख पे तारीख पड़ने लगी है जहां हिंदू न्यायालय से यह मांग कर रहा है कि पूरे परिसर का पुरातत्व सर्वेक्षण करवाया जाए वही मुस्लिम पक्ष हिंदू पक्ष की इस मांग से बेहद डरा हुआ दिखाई पड़ रहा है ,वह बार-बार पुरातात्विक सर्वेक्षण की बात को नकारने पर तुला हुआ है 9 जनवरी 1920 को सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रेक के न्यायालय में बेशक सुनवाई टल गई, और अगली सुनवाई हेतु तारीख को 21 जनवरी के लिए डाल दिया गया 21 जनवरी 2020 को जो सुनवाई हुई उसमें सोमनाथ व्यास के पुत्र (परिवार) द्वारा न्यायालय में कहा गया कि मुझे भी सुना जाए, क्योंकि अगला डीपी में ही हूं, क्योंकि सोमनाथ व्यास इस पर गद्दी नशीन थी, किंतु न्यायालय ने उस याचिका पर था क्योंकि प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया मुस्लिम पक्ष का यह कहना कि हमारा स्टे अभी बरकरार है तथा आगे भी बरकरार रहने की उम्मीद है जब तक स्टे वायलेट नहीं हो जाता लोअर कोर्ट कोई अधिकार नहीं है कि वह पुरातात्विक सर्वेक्षण की मांग को मानने निर्णय ले सिर्फ वह सर्वे करा सकती है एएसआई को यह अधिकार नहीं है अंजुमन इंतजामियां की ओर से दायर की गई आपत्ती में यह कहा गया कि
नंबर 1 नेक्स्ट फ्रेंड बनाए जाने पर आपत्ति विजय शंकर रस्तोगी को वाद मित्र बनाए जाने पर विरोध जताया गया सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड तथा अंजुमन इंतजामियां का कहना था कि वाद मित्र सोमनाथ व्यास के परिवार की ओर से होना चाहिए था,
(नंबर 2) एएसआई द्वारा सर्वे गलत है यह कानूनन भी गलत है
(नंबर 3) सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग है कि जब तक स्टे जिस कोर्ट में ग्रांट किया गया है ,उसे कोई वायकेट नहीं हो जाता, तब तक कहीं के नहीं चल सकता अर्थात केस दो जगह नहीं चल सकता है, यह कि हाईकोर्ट में भी चले और सिविल में भी एक ही मामले की सुनवाई पहले से ही हाई कोर्ट में चल रही थी तो लोअर कोर्ट में यह केस क्यों चल रहा है, हिंदू पक्ष की ओर से जवाब देते हुए कहा गया कि नंबर 1 1998 में न्यायालय द्वारा सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया गया यह आपत्ति गलत है, नंबर दो -पोषणीय नहीं है ,किसी प्रावधान का उल्लेख भी नहीं किया गया है आदेश 26 नियम दस दीवानी प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत दिया गया है जिसका उल्लेख करना प्रार्थना पत्र में आवश्यक नहीं है जो बात चल रहा है 1998 में हाई कोर्ट ने इसे कार्यवाही को स्थगित कर दी थी लंबे समय तक स्थगित स्थगित की थी सुप्रीम कोर्ट ने रिसर्फेसिंग कंपनी लिमिटेड में दिया गया निर्णय जो कि किसी भी स्थगन आदेश को 6 माह से अधिक प्रभावी नहीं होगा 6 माह के पश्चात व स्वयं समाप्त हो जाएगा इस संबंध में हिंदू पक्ष द्वारा
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दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत 1411 2018 स्टेटस प्रभावी नहीं है और 1411 2018 से ही इस केस की कार्यवाही प्रचलित है विपक्षी गण कि इसमें सहभागिता है मुस्लिम पक्ष द्वारा यह कहा गया कि वह आदेश आज भी प्राणी है जो रूलिंग मुस्लिम पक्ष द्वारा दी गई है वह इस केस में लागू नहीं होता है नंबर 3 पक्ष कार के संबंध में न्यायालय द्वारा विस्तृत आदेश दिया गया है, इस संबंध में अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी द्वारा यह भी कहा गया कि मुझे काशी विश्वनाथ स्वयंभू विशेश्वर का वाद मित्र नियुक्त किया गया है उसके विरुद्ध ना कोई अपील की गई है ना ही रिवीजन दाखिल की गई है ,यह अंतिम आदेश है अब इसमें कोई अन्य पक्षकार नहीं है और ना ही आगे हो सकता है न्यायालय द्वारा सुनवाई हेतु अगली तारीख 3 फरवरी 2020 को नियत की गई, 3 फरवरी को सुनवाई 1 दिन के लिए न्यायालय द्वारा टाल दी गई अगली सुनवाई 4 फरवरी 2020 को नियत की गई अंजुमन इंतजा मियां तथा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की आपत्तियों को न्यायालय ने खारिज कर दिया दोनों संगठन की ओर से ज्ञानवापी परिसर के पुरातात्विक सर्वेक्षण संबंधी मांग पर दोनों पक्षों की ओर से बहस सुनने के पश्चात विद्वान न्यायाधीश ने मुस्लिम पक्ष अर्थात अंजुमन इंतजाम या मस्जिद तथा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की आपत्तियों को खारिज कर दिया अंजुमन इंतजामियां के अधिवक्ता अखलाक अहमद तथा सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता तौहीद खान ने हाईकोर्ट में लंबित प्रकरण का हवाला देते हुए इस पर स्थगन आदेश की जानकारी न्यायालय को दी उन्होंने कहा कि जब प्रकरण हाईकोर्ट में लंबित है तथा उस पर स्थगन आदेश भी है तो उक्त कोर्ट द्वारा उस पर सुनवाई नहीं की जानी चाहिए यह उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है तथा पूरे प्रकरण की सुनवाई स्थगित की जानी चाहिए न्यायालय ने सुनवाई की अगली तारीख 17 फरवरी 2020 निर्धारित कर दी 17 फरवरी 2020 सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट कोर्ट आशुतोष तिवारी के न्यायालय में चल रहे काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस प्रकरण में विपक्षी अर्थात मुस्लिम पक्ष की ओर से क्षेत्र अधिकार को लेकर प्रश्न पत्र दिया गया था न्यायालय ने अगली तारीख 20 फरवरी को निर्धारित की 20 फरवरी 2020 सीनियर डिवीजन फास्ट कोर्ट के जज आशुतोष तिवारी के न्यायालय में काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी क्षेत्र के क्षेत्राधिकार पर चल रही बहस में स्वयंभू भगवान विशेश्वर बहस के दौरान विजय शंकर रस्तोगी द्वारा दलील दी गई कि विवादित क्षेत्र मंदिर है इसका धार्मिक स्वरूप मंदिर से परिवर्तित किया गया है ऐसे में मुकदमे की सुनवाई वक्फ ट्रिब्यूनल को नहीं है, बबलू को नहीं वक्ता तथा वार्ड मित्र विजय शंकर रस्तोगी द्वारा यह कहा गया कि ज्ञानवापी मस्जिद का जिस वक्त एक्ट 1954 के तहत रजिस्टर होना बताया गया था वह यूपी में लागू नहीं हुआ था कोर्ट ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की बहस के लिए अगली सुनवाई 25 फरवरी निर्धारित की है 25 फरवरी 2020 को सुन्नी वक्फ बोर्ड तथा अंजुमन इंतजामियां द्वारा सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में उस आपत्ति को खारिज कर दिया गया जिसमें मुस्लिम पक्ष द्वारा सुनवाई के क्षेत्र अधिकार को चुनौती दी गई थी इस संबंध में अंजुमन इंतजाम या की याचिका लंबित थी अंजुमन जामिया द्वारा 1 जुलाई तथा सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के द्वारा 18 सितंबर को निगरानी याचिका दायर की गई थी
शेष अगले अंक में
आपका ही  मनीष पांडेय
 राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
MCOM,LLB,MBA(HR) 

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