जब रोमन साम्राज्य ने तोड़े यहूदी मंदिर यहूदियों की की गई हत्या भाग 2

 जब रोमन साम्राज्य ने तोडे यहूदी मंदिर यहूदियों की हुई हत्याएं
*एकेश्वरवादी परंतु मूर्ति पूजा के घोर विरोधी यहूदी
मनीष पाण्डेय
एकेश्वरवाद अर्थात ईश्वर एक है यहूदी भी इसी एकेश्वरवाद की धारणा पर विश्वास रखते हैं लगभग 4000 वर्ष पुराना यह पंत न जाने कितनी बार टूटा बिखरा और खानाबदोश ओं की तरह इधर-उधर मारा मारा फिरा पर अपनी अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर नात शरीफ उसने अपनी विरासत अपनी संस्कृति अपनी सभ्यता और अपने अस्तित्व को सहेजने और बचाने में सफल हुआ बल्कि आज विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने में भी पूरी तरह सफल रहा है भारत से 1 वर्ष बाद अस्तित्व में आया हुआ इजराइल तथा मात्र 87 लाख की आबादी वाला यहूदियों का एकमात्र राष्ट्र इजरायल आज विश्व की प्रमुख शक्ति बन चुका है मूर्ति पूजा के घोर विरोधी तथा मूर्तिपूजक ओं से घृणा करने वाले यहूदी समुदाय के इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता जिससे यह कहा जाए कि उन्होंने मूर्तिपूजक ओं के साथ किसी प्रकार की हिंसा की हो यहूदी धार्मिक ग्रंथ तलमुद के अनुसार "राब्बिया ने युद्ध को एक दुष्कर बुराई के रूप में देखा" न्याय में देरी और न्याय की विकृति के कारण तलवार दुनिया में आती है ज्यूस को हमेशा युद्ध से नफरत है और शालोम शांति की बातें करता है, यहूदी यह भी मानते हैं कि हिंसा आत्मरक्षा की सेवा के लिए अनुमन्य है यहूदी यह भी मानते हैं कि कम से कम हिंसा का प्रयोग करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त किया जाए आधुनिक यहूदी विद्वान यह भी मानते हैं कि बाइबिल ग्रंथ अपमानजनक युद्ध को अधिकृत करने वाले बाइबल के कथन अब लागू नहीं होते हैं कहने का अर्थ यह है कि बाइबिल में जो युद्ध संबंधी जिहाद संबंधी जागरण फैलाने वाले कथन दिए गए हैं उनका असर यहूदी समाज पर नहीं पड़ा जबकि यहूदी धर्म शास्त्र यहूदियों को ईश्वर के प्रति प्रसिद्ध प्रतिशोध छोड़ने का निर्देश देते हैं ऐसा नहीं है कि यहूदी समुदाय ने युद्ध नहीं लड़े अपनी आत्मरक्षा अपनी संस्कृति और अपने अस्तित्व को बचाने के संघर्ष में लगे हुए यह लोग कई बार युद्ध का शिकार बने जोसुआ की पुस्तक जो कि हिंदू बाबिल तथा ओल्ड टेस्टामेंट नियम की छठी पुस्तक तथा ड्यूटोमिस्टिक इतिहास की प्रथम पुस्तक है जिसमें यहूदियों के व्यवस्था विवरण कानन पर उनकी विजय तथा बेबीलोन निर्वासन आदि का विस्तार पूर्वक वर्णन है पुस्तक यह बताती है कि यहूदियों द्वारा सर्वप्रथम लड़ाई को जेरिको की लड़ाई अर्थात बैटल आफ जेरिको कहा जाता है, यह लड़ाई कानून की विजय के रूप में प्रतिष्ठित है यह ओशो इस लड़ाई का कमांडर तथा उनका प्रमुख नेता था बैटल आफ जेरिको की लड़ाई के लिए परमेश्वर ने यहोशू को आदेश देते हुए कहा कि उसकी सेना दिन में 1 बार सीधे 6 दिनों तक शहर के चारों ओर घूमती रहे सातवें दिन इजराइल ने जेरिको की शहर पनाह के चारों ओर सात वार चढ़ाई की सातवें दिन जेरिको की दीवार को गिरा दिया गया केवल शहर के राबाह और उसकी परिवार को छोड़ दिया गया बाकी सभी को मारकर उनका सोना चांदी कांसा था सब सामान यहोवा के भंडार में जमा कर दिया गया, राबाह उस शहर की एक वेश्या थी जिसने इजरायली सेना के दो जासूसों को अपने घर में छुपा कर रखा था जेरिको की इस लड़ाई में राबाह को पूर्ण रूप से बचाने के लिए कसमें खाई गई, तथा सुरक्षा के तौर पर उसके घर की खिड़की पर लाल रंग की रस्सी को बांध दिया गया था, इतिहास गवाह है कि योगी समुदाय का पूरा जीवन विस्थापितों की तरह ही बिता वह यहां-वहां पूरी दुनिया में भटका यहूदी पंख से ही निकले हुए इस्लाम और ईसाइयत द्वारा उस पर तरह तरह के अत्याचार किए गए असीरियाई साम्राज्य अर्थात अश्शरो द्वारा भी यहूदियों पर भयंकर अत्याचार किए गए थे प्राचीन ईरान का हखमनी राजवंश यहूदियों के सहयोग के तौर पर जाने जाते थे, हखमनी साम्राज्य के कुरोष तथा दारुश द्वारा भी यहूदियों के मंदिरों के निर्माण एवं सहयोग के लिए याद किया जाता है, सबसे दिलचस्प बात यह है कि प्राचीन ईरान का राजधर्म "जरतोश्त" जिसे जरथुस्त्र द्वारा चलाया गया था सातवीं शताब्दी से पहले अर्थात ईरान में इस्लाम के प्रवेश से पहले ईरान का राजधर्म "जरतोश्त" पारसीपंथ ही था, पारसी पंथ पर आर्य संस्कृति का प्रभाव था आज भी ईरानी मूल के लोग अपने आप को पारसी पंथ से ही जोड़ते हैं यहूदियों पर इस जरतोश्त पंथ का व्यापक प्रभाव था, 700 ईसा पूर्व असीरिया साम्राज्य द्वारा यरूशलम पर हमला किया गया था जिसमें यहूदियों के 10 कबीलो को तितर-बितर कर दिया गया था, 72 वीईसा पूर्व रोमन साम्राज्य द्वारा भी यहूदियों पर हमला किया गया था, रोमन जूडीया जोकि साइप्रस साईरेनिका और मेसोपोटामिया का क्षेत्र था, 66 से 135 ईसवी के मध्य रोमन साम्राज्य द्वारा या आक्रमण हुआ था जिसमें रोमनो को विजय प्राप्त हुई थी, इस युद्ध को कोखरा विद्रोह(66-73CE ) जो कि ग्रीक और यहूदियों के मध्य धार्मिक तनावो को लेकर हुआ था, रोमन साम्राज्य द्वारा यहूदियों के मंदिरों को नष्ट कर दिया गया तथा यूरो सनम में 6000 यहूदियों को फांसी पर लटका दिया गया जिससे यहूदियों के मध्य विद्रोह भड़क उठा कोखरा विद्रोह के उपरांत किरोस युद्ध जोकि(115-117CE ) के मध्य हुआ था इस युद्ध को निर्वासन का विद्रोह के नाम से भी जाना गया इस विद्रोह को भी रोमन साम्राज्य द्वारा कुचल कर लाखों यहूदियों का कत्लेआम किया गया बार कोरबा विद्रोह(132-136CE ) रोमन सम्राट हाड्रियन(117-138CE ) ने यहूदी पंथ को जड़ से उखाड़ने का संकल्प किया था उन्होंने येरा व हिब्रू कैलेंडरो का पूर्ण रूप से निषेध किया और अनेक यहूदी विद्वानों को मार डाला पवित्र स्क्रोल को माउंट टेंपल में जला दिया गया मंदिर में रखी हुई मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया जब इस ईसाई पंथ का उदय हुआ तो सर्वप्रथम उसमें प्राचीन रोमन धर्म जो कि हिंदू सनातन धर्म के बेहद करीब था को नष्ट कर दिया तत्पश्चात और रोम का राजधर्म इसाई पंथ को घोषित कर दिया, ईसाईयों द्वारा भी लाखों यहूदियों की हत्या की गई, उनके मंदिरों को तोड़ा गया
आपका ही
मनीष पाण्डेय
MCOM LLB MBA( HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिन्दू महासभा  1•द बुक ऑफ जोशुआ
2•कोखबा विद्रोह
3•कोखबा विद्रोह 
 4•रोमन सम्राट हाड्रियन

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