कृष्ण जन्मभूमि का रक्तरंजित इतिहास भाग 8
कृष्ण कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 8
छल प्रपंच धोखा और विश्वासघात यही कांग्रेसका असली चेहरा
* कृष्ण जन्म भूमि पर स्वामित्व किसका?
मनीष पाण्डेय
राम के अस्तित्व को नकारने और रामसेतु को तोड़ने का प्रयास करने वाली कांग्रेस द्वारा कृष्ण जन्मभूमि बाद में भी अड़ंगा लगाया गया था कृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए जहां 1951 में कृष्ण जन्म भूमि ट्रस्ट का निर्माण हो चुका था किंतु कांग्रेस ने उसे ट्रस्ट को नकारते हुए साजिश अनेक अपना ही ट्रस्ट का निर्माण कर लिया इस ट्रस्ट का नाम था कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ जो कि कालांतर में कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के नाम से जाना गया इस ट्रस्ट का निर्माण 1958 में हुआ था ट्रस्ट के सचिव थी उस समय कांग्रेश के प्रमुख पदाधिकारी भगवान दास भार्गव थे वर्तमान में दीवानी में चल रहे मुकदमे का विरोध करने वाले महेश पाठक जो कि अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं द्वारा वर्ष 2019 में कांग्रेस के टिकट पर मथुरा संसदीय सीट से चुनाव भी लड़ा गया था महेश पाठक द्वारा कोर्ट में एक याचिका डालकर उन हिंदुत्ववादी संगठनों की याचिका खारिज करने की मांग की गई थी जिन्हें जो कृष्ण जन्मभूमि का मुकदमा वर्तमान में लड़ रहे हैं महेश पाठक ने अपनी याचिका में यह कहा कि श्री कृष्ण जन्मभूमि के मामले में मथुरा की शांति व्यवस्था भंग हो सकती है अपनी याचिका में महेश पाठक ने कहा कि इस मामले का समझौता 20 वीं सदी में हो चुका है अब मथुरा में मंदिर मस्जिद का विवाद नहीं है 17 वीं शताब्दी में बनी हुई मस्जिद का मामला उठाने वाले लोगों को उन्होंने बाहरी बताया और कहा कि अगल-बगल मंदिर मस्जिद होने से भावात्मक एकता बढ़ती है तथा दोनों समुदायों में परस्पर सद्भाव है महेश पाठक ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि 17वीं वीं शताब्दी में बनी मस्जिद को हटाने की मांग करने वालों की वजह से सामाजिक सद्भाव बिगड़ेगा, कांग्रेस नेता महेश पाठक की संस्था अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा श्री माथुर चतुर्वेद परिषद की ओर से हिंदू पक्ष द्वारा दायर वाद को खारिज करने के उद्देश्य से न्यायालय में कृष्ण जन्मभूमि के पक्षकार बनने हेतु प्रार्थना पत्र देते हुए कहा गया के भगवान श्री कृष्ण का हमसे बड़ा भक्त कोई हो नहीं सकता हम ऐसे समाज से जुड़े हैं जिसका जीवन पंडा वह पुरोहित गिरी पर ही आधारित है यदि पूर्व में दायर वाद से कोई विवाद होता है तो श्रद्धालु यहां आना छोड़ देंगे और इसका सीधा असर हमारे जीवन पर पड़ेगा शाही मस्जिद ईदगाह पिछले 300 सालों से कायम है ऐसे में यह वाद प्लेसमेंट आफ वरशिप एक्ट से बाधित होता है हिंदू पक्ष का वाद खारिज किया जाए महेश पाठक ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी कहा है कि मैं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का सदस्य हूं अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा और माथुर चतुर्वेद परिषद मेरी धार्मिक संस्थाएं हैं दोनों संस्थाओं की ओर से श्री कृष्ण जन्मस्थान के मामले में न्यायालय में पक्षकार बनने हेतु प्रार्थना पत्र दिया है यह मेरी संस्थाओं का मामला है इसका कांग्रेश से कोई लेना देना नहीं है सवाल यह उठता है कि जिस तरह महेश पाठक द्वारा यह कहा गया की अगर इस बात में कोई विवाद होता है तो यहां श्रद्धालु आना छोड़ देंगे यह बात पूरी तरह से अनुचित व डराने वाली है याद रखिए श्री राम जन्म भूमि का वाद भी न्यायालय में था किंतु अयोध्या में कभी भी श्रद्धालुओं ने आना नहीं छोड़ा और ना ही कभी श्रद्धालुओं ने राम मंदिर के दर्शन करने बंद किए देश के ही नहीं बल्कि विदेशों को भी करोड़ों हिंदू सनातन धर्मी यह चाहते हैं कि जिस तरह राम जन्मभूमि जिहादियों और आतंकियों से मुक्त हुई ठीक वैसे ही श्री कृष्ण जन्मभूमि भी मुक्त हो ठीक वैसे ही काशी विश्वनाथ भी मुक्त हो यह बात ध्यान देने योग्य है कि कानूनी तौर पर कृष्ण जन्म स्थान सेवा संघ को किसी भी प्रकार का मालिकाना अधिकार प्राप्त नहीं था फिर भी उसने मंदिर की संपत्ति के लालच में ना सिर्फ ट्रस्ट का गठन किया बल्कि ईदगाह मस्जिद प्रशासन से भी 12 अक्टूबर 1968 को गैरकानूनी ढंग से समझौता कर लिया था कृष्ण जन्मभूमि बाद में किस तरह कांग्रेसी वर्चस्व स्थापित हुआ इसके स्पष्ट प्रमाण है कृष्ण जन्मभूमि सेवा संघ अथवा संस्थान के प्रथम अध्यक्ष पूर्व लोकसभा स्पीकर गणेश वासुदेव मावलंकर बनाए गए थे जो कि कांग्रेसी थे मावलंकर के बाद बिहार के राज्यपाल एवं अनंत शयनम अयंगर वह भी कांग्रेस के ही थे
कृष्ण जन्मभूमि सेवा संघ द्वारा जिस तरह अवैध तरीके से 1968 आमीन शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के साथ समझौता कर लिया गया उससे यह सवाल उठना आवश्यक हो जाता है कि वास्तव में
कृष्ण जन्म भूमि पर स्वामित्व किसका है? 1•स्वामित्व के इतिहास को समझने के लिए हमें यह जानना आवश्यक होगा कि जब 1770 में बैटल आफ गोवर्धन की लड़ाई मुगल और मराठों के मध्य हुई तो उसमें जीत मराठों की हुई थी पूरा कटरा केशवपुर मराठों के अधीन आ गया था और उन्होंने उस पूरे क्षेत्र को नजूल भूमि घोषित कर दी थी यही प्रक्रिया 1804 में हुई जब अंग्रेजों का क्षेत्र पर अधिकार हो गया 1815 में उस भूमि की नीलामी हुई जिसे बनारस के बैंकर राय पाटनीमल ने अंग्रेजों से ₹1140 में खरीद लिया था, स्पष्ट है कृष्ण जन्म भूमि का स्वामित्व राय पटनीमल के हाथों में आ गया था
2• स्वतंत्रता से पहले तथा स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जितने भी मुकदमे मुस्लिम पक्ष द्वारा न्यायालय में डाले गए सभी में मुस्लिम पक्ष को मात मिली न्यायालय ने स्वामित्व का निर्णय राय पटनीमल उनके पश्चात उनके वंशजों तथा वंशजों के उपरांत अन्य लोगों के पक्ष में दिया
3• अट्ठारह सौ अट्ठासी में कटरा केशव देव की पूर्वी भाग को रेलवे के लिए हटाया गया था जिसका मुआवजा राय पाटनीमल के वंशज राय नरसिंह दास को मिला था
4• ईदगाह जिस खेवट संख्या में अर्थात खेवट संख्या 255 वर्तमान तथा खेवट संख्या 291 पुरानी का टैक्स आज भी कृष्ण जन्मभूमि सेवा संस्थान की ओर से ही दिया जाता है
5• ईदगाह मस्जिद का कोई भी अस्तित्व नगर निगम मथुरा वृंदावन के कार्डों में भी नहीं है वाटर टैक्स तथा अन्य टैक्स भी मंदिर प्रशासन की ओर से दिए जाते हैं
1951 में जब जुगल किशोर बिरला ने कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के गठन किया तो उन्होंने तीन सर के प्रमुख रूप से रखी थी
नंबर 1 कटरा का जीर्णोद्धार होगा वहां भगवान कृष्ण का मंदिर बनेगा और गीता के उपदेशों का प्रचार होगा
नंबर दो प्रॉपर्टी का कोई भी हिस्सा किसी को नहीं दिया जाएगा और ना ही गिरवी रखा जाएगा
नंबर 3 बिरला परिवार इस ट्रस्ट का आजीवन ट्रस्टी होगा उसे हटाया नहीं जा सकता
इतना सब होने के बाद भी 1958 में जयदयाल डालमिया द्वारा एक षड्यंत्र के तहत बिना जुगल किशोर बिरला से पूछे अथवा उनके परिवार से विचार विमर्श किए बिना ही कृष्ण जन्म भूमि सेवा संघ जो कि बाद में श्री कृष्ण जन्मभूमि सेवा संस्थान के नाम से परिवर्तित किया गया का गठन कर लिया गया था श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर 13•37 एकड़ में बना हुआ है जिसमें से 10•50 लगभग 11 एकड़ में कृष्ण जन्म भूमि लीला मंच भागवत भवन तथा बाकी बचा 2•37या 2•87 एकड़ में शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण हुआ है इस तरह लगभग 2 बीघा भूमि पर मुस्लिम पक्ष का कब्जा है
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
MCOM LLB MBA( HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
छल प्रपंच धोखा और विश्वासघात यही कांग्रेसका असली चेहरा
* कृष्ण जन्म भूमि पर स्वामित्व किसका?
मनीष पाण्डेय
राम के अस्तित्व को नकारने और रामसेतु को तोड़ने का प्रयास करने वाली कांग्रेस द्वारा कृष्ण जन्मभूमि बाद में भी अड़ंगा लगाया गया था कृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए जहां 1951 में कृष्ण जन्म भूमि ट्रस्ट का निर्माण हो चुका था किंतु कांग्रेस ने उसे ट्रस्ट को नकारते हुए साजिश अनेक अपना ही ट्रस्ट का निर्माण कर लिया इस ट्रस्ट का नाम था कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ जो कि कालांतर में कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के नाम से जाना गया इस ट्रस्ट का निर्माण 1958 में हुआ था ट्रस्ट के सचिव थी उस समय कांग्रेश के प्रमुख पदाधिकारी भगवान दास भार्गव थे वर्तमान में दीवानी में चल रहे मुकदमे का विरोध करने वाले महेश पाठक जो कि अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं द्वारा वर्ष 2019 में कांग्रेस के टिकट पर मथुरा संसदीय सीट से चुनाव भी लड़ा गया था महेश पाठक द्वारा कोर्ट में एक याचिका डालकर उन हिंदुत्ववादी संगठनों की याचिका खारिज करने की मांग की गई थी जिन्हें जो कृष्ण जन्मभूमि का मुकदमा वर्तमान में लड़ रहे हैं महेश पाठक ने अपनी याचिका में यह कहा कि श्री कृष्ण जन्मभूमि के मामले में मथुरा की शांति व्यवस्था भंग हो सकती है अपनी याचिका में महेश पाठक ने कहा कि इस मामले का समझौता 20 वीं सदी में हो चुका है अब मथुरा में मंदिर मस्जिद का विवाद नहीं है 17 वीं शताब्दी में बनी हुई मस्जिद का मामला उठाने वाले लोगों को उन्होंने बाहरी बताया और कहा कि अगल-बगल मंदिर मस्जिद होने से भावात्मक एकता बढ़ती है तथा दोनों समुदायों में परस्पर सद्भाव है महेश पाठक ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि 17वीं वीं शताब्दी में बनी मस्जिद को हटाने की मांग करने वालों की वजह से सामाजिक सद्भाव बिगड़ेगा, कांग्रेस नेता महेश पाठक की संस्था अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा श्री माथुर चतुर्वेद परिषद की ओर से हिंदू पक्ष द्वारा दायर वाद को खारिज करने के उद्देश्य से न्यायालय में कृष्ण जन्मभूमि के पक्षकार बनने हेतु प्रार्थना पत्र देते हुए कहा गया के भगवान श्री कृष्ण का हमसे बड़ा भक्त कोई हो नहीं सकता हम ऐसे समाज से जुड़े हैं जिसका जीवन पंडा वह पुरोहित गिरी पर ही आधारित है यदि पूर्व में दायर वाद से कोई विवाद होता है तो श्रद्धालु यहां आना छोड़ देंगे और इसका सीधा असर हमारे जीवन पर पड़ेगा शाही मस्जिद ईदगाह पिछले 300 सालों से कायम है ऐसे में यह वाद प्लेसमेंट आफ वरशिप एक्ट से बाधित होता है हिंदू पक्ष का वाद खारिज किया जाए महेश पाठक ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी कहा है कि मैं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का सदस्य हूं अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा और माथुर चतुर्वेद परिषद मेरी धार्मिक संस्थाएं हैं दोनों संस्थाओं की ओर से श्री कृष्ण जन्मस्थान के मामले में न्यायालय में पक्षकार बनने हेतु प्रार्थना पत्र दिया है यह मेरी संस्थाओं का मामला है इसका कांग्रेश से कोई लेना देना नहीं है सवाल यह उठता है कि जिस तरह महेश पाठक द्वारा यह कहा गया की अगर इस बात में कोई विवाद होता है तो यहां श्रद्धालु आना छोड़ देंगे यह बात पूरी तरह से अनुचित व डराने वाली है याद रखिए श्री राम जन्म भूमि का वाद भी न्यायालय में था किंतु अयोध्या में कभी भी श्रद्धालुओं ने आना नहीं छोड़ा और ना ही कभी श्रद्धालुओं ने राम मंदिर के दर्शन करने बंद किए देश के ही नहीं बल्कि विदेशों को भी करोड़ों हिंदू सनातन धर्मी यह चाहते हैं कि जिस तरह राम जन्मभूमि जिहादियों और आतंकियों से मुक्त हुई ठीक वैसे ही श्री कृष्ण जन्मभूमि भी मुक्त हो ठीक वैसे ही काशी विश्वनाथ भी मुक्त हो यह बात ध्यान देने योग्य है कि कानूनी तौर पर कृष्ण जन्म स्थान सेवा संघ को किसी भी प्रकार का मालिकाना अधिकार प्राप्त नहीं था फिर भी उसने मंदिर की संपत्ति के लालच में ना सिर्फ ट्रस्ट का गठन किया बल्कि ईदगाह मस्जिद प्रशासन से भी 12 अक्टूबर 1968 को गैरकानूनी ढंग से समझौता कर लिया था कृष्ण जन्मभूमि बाद में किस तरह कांग्रेसी वर्चस्व स्थापित हुआ इसके स्पष्ट प्रमाण है कृष्ण जन्मभूमि सेवा संघ अथवा संस्थान के प्रथम अध्यक्ष पूर्व लोकसभा स्पीकर गणेश वासुदेव मावलंकर बनाए गए थे जो कि कांग्रेसी थे मावलंकर के बाद बिहार के राज्यपाल एवं अनंत शयनम अयंगर वह भी कांग्रेस के ही थे
कृष्ण जन्मभूमि सेवा संघ द्वारा जिस तरह अवैध तरीके से 1968 आमीन शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के साथ समझौता कर लिया गया उससे यह सवाल उठना आवश्यक हो जाता है कि वास्तव में
कृष्ण जन्म भूमि पर स्वामित्व किसका है? 1•स्वामित्व के इतिहास को समझने के लिए हमें यह जानना आवश्यक होगा कि जब 1770 में बैटल आफ गोवर्धन की लड़ाई मुगल और मराठों के मध्य हुई तो उसमें जीत मराठों की हुई थी पूरा कटरा केशवपुर मराठों के अधीन आ गया था और उन्होंने उस पूरे क्षेत्र को नजूल भूमि घोषित कर दी थी यही प्रक्रिया 1804 में हुई जब अंग्रेजों का क्षेत्र पर अधिकार हो गया 1815 में उस भूमि की नीलामी हुई जिसे बनारस के बैंकर राय पाटनीमल ने अंग्रेजों से ₹1140 में खरीद लिया था, स्पष्ट है कृष्ण जन्म भूमि का स्वामित्व राय पटनीमल के हाथों में आ गया था
2• स्वतंत्रता से पहले तथा स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जितने भी मुकदमे मुस्लिम पक्ष द्वारा न्यायालय में डाले गए सभी में मुस्लिम पक्ष को मात मिली न्यायालय ने स्वामित्व का निर्णय राय पटनीमल उनके पश्चात उनके वंशजों तथा वंशजों के उपरांत अन्य लोगों के पक्ष में दिया
3• अट्ठारह सौ अट्ठासी में कटरा केशव देव की पूर्वी भाग को रेलवे के लिए हटाया गया था जिसका मुआवजा राय पाटनीमल के वंशज राय नरसिंह दास को मिला था
4• ईदगाह जिस खेवट संख्या में अर्थात खेवट संख्या 255 वर्तमान तथा खेवट संख्या 291 पुरानी का टैक्स आज भी कृष्ण जन्मभूमि सेवा संस्थान की ओर से ही दिया जाता है
5• ईदगाह मस्जिद का कोई भी अस्तित्व नगर निगम मथुरा वृंदावन के कार्डों में भी नहीं है वाटर टैक्स तथा अन्य टैक्स भी मंदिर प्रशासन की ओर से दिए जाते हैं
1951 में जब जुगल किशोर बिरला ने कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के गठन किया तो उन्होंने तीन सर के प्रमुख रूप से रखी थी
नंबर 1 कटरा का जीर्णोद्धार होगा वहां भगवान कृष्ण का मंदिर बनेगा और गीता के उपदेशों का प्रचार होगा
नंबर दो प्रॉपर्टी का कोई भी हिस्सा किसी को नहीं दिया जाएगा और ना ही गिरवी रखा जाएगा
नंबर 3 बिरला परिवार इस ट्रस्ट का आजीवन ट्रस्टी होगा उसे हटाया नहीं जा सकता
इतना सब होने के बाद भी 1958 में जयदयाल डालमिया द्वारा एक षड्यंत्र के तहत बिना जुगल किशोर बिरला से पूछे अथवा उनके परिवार से विचार विमर्श किए बिना ही कृष्ण जन्म भूमि सेवा संघ जो कि बाद में श्री कृष्ण जन्मभूमि सेवा संस्थान के नाम से परिवर्तित किया गया का गठन कर लिया गया था श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर 13•37 एकड़ में बना हुआ है जिसमें से 10•50 लगभग 11 एकड़ में कृष्ण जन्म भूमि लीला मंच भागवत भवन तथा बाकी बचा 2•37या 2•87 एकड़ में शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण हुआ है इस तरह लगभग 2 बीघा भूमि पर मुस्लिम पक्ष का कब्जा है
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
MCOM LLB MBA( HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
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