मंदिर के अवशेषों का उपयोग कर हुआ मस्जिद का निर्माण-- पुरातत्वविद् केके मोहम्मद मनीष पांडेय अपनी अनीतिकारी नीतियों और दोगली मानसिकता के चलते इस राष्ट्र को गर्त मे गिराने का कार्य अगर किसी ने किया है तो वह कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा रही हैं, पूरे भारतीय इतिहास को खंगाल डालिए आपको कांग्रेस द्वारा किए गए हिंदू विरोधी कृत्य एक के बाद एक सामने आते जाएंगे ,देखा जाए तो कांग्रेस के पतन का मुख्य कारण भी शायद यही रहा है भारत की अधिसंख्य हिंदू जनता की भावनाओं व आस्थाओं के खिलाफ जाकर जिस तरह कांग्रेसी ने पूर्व में कृत्य किए उसका बुरा परिणाम कांग्रेस को आज भी प्राप्त हो रहा है, किंतु दुर्भाग्य है कि इतिहास से सबक लेने की बजाय कांग्रेस बार-बार वही कुकृत्य पुनः पुनः दोहरातीचली आ रही है, राम को काल्पनिक बताना रामसेतु को तोड़ने के प्रयास करना यह काग्रेस पूर्व में कर चुकी है किंतु वर्तमान में जिस तरह कांग्रेस यह लगातार प्रयास कर रही है कि श्री अयोध्या धाम में भव्य राम मंदिर निर्माण में लगातार अडंगे लगाए जाएं उससे तो यही प्रतीत होता है कि जो बची कुची कांग्रेस है वह भी भारत से मुक्त होने की दिशा में धीरे-धीरे बढ़ रही है ,सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर से संबंधित सुनवाई लगातार चल रही है ऐसे में कांग्रेसी मानसिकता से ग्रसित वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने ना सिर्फ राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए बल्कि रामायण और महाभारत को काल्पनिक तक कह दिया राजीव धवन ने आर्कियोलॉजी आफ सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट पर भी निशाना साधते हुए इसे एक तरीके से फर्जी साबित करने की कोशिश की शायद राजीव धवन यह बात भूल गए कि जब 6 दिसंबर 1992 जब को राम जन्म भूमि पर निर्मित बाबरी ढांचे का विध्वंस हुआ तो उसके पश्चात जनवरी 1993 मैं तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर यह यह जानना चाहा कि क्या अंदर और बाहरी परिसर सहित राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद नाम के ढांचे का निर्माण से पूर्व वहां कोई अन्य ढांचा खड़ा हुआ था क्या वहां किसी हिंदू मंदिर या हिंदू भवन का अस्तित्व था, 1993 से लेकर वर्ष 2003 के बीच काफी पानी बह चुका था ना जाने क्यों सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के उस प्रश्न पर गंभीरता पूर्वक विचार नहीं किया किंतु वर्ष 2003 में एक बार पुनः जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसी प्रश्न के परिपेक्ष में एक archaeology of Survey of India के पुरातत्वविदों का एक प्रतिनिधिमंडल को उत्खनन हेतु भेजने का निर्णय लिया तब उस प्रतिनिधिमंडल उन पुरातत्व विधियों का सबसे अगर ज्यादा किसी ने विरोध किया तो वह मुसलमानों द्वारा ही किया गया था और कहा गया था कि उस पुरातत्व प्रतिनिधिमंडल में मुसलमान शामिल होंगे सरकार ने वह बात मान ली फिर उन्होंने कहा कि मजदूरों में मुसलमान शामिल होंगे सरकार ने वह बाद में मान ली, मुसलमानों ने कहा की वीडियोग्राफी कराने वाला भी मुसलमान होगा सरकार ने वह बात मान ली, यहां तक कि मुसलमानों ने उस समय कहा था कि हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई करने वाले जजों में भी मुसलमान होंगे जिसे बाद में माना गया और खंडपीठ में मुसलमान जज को शामिल किया गया, कहने का अर्थ यह है कि कदम कदम पर मुसलमानों द्वारा अपनी बेवजह की शर्तो को लागू किया गया, मित्रों अब मैं आता हूं मूल मुद्दे पर बात है सन 1976 और 77 की जब प्रोफेसर बीवी लाल के नेतृत्व में अयोध्या में उत्खनन टीम में दिल्ली स्कूल आफ आर्कियोलॉजी एक सदस्य के रूप में केके मोहम्मद भी अयोध्या आए हुए थे, एक मुसलमान होने के बावजूद भी के के मुहम्मद ने उत्खनन से प्राप्त सच्चाई को जिस तरह पूरी निष्पक्षता के साथ राष्ट्र के सामने रखा उससे इन कांग्रेसी व वामपंथी विचारधारा से पोषित लोगों के पैर के नीचे की जमीन खिसक गई उन्हें उम्मीद नहीं थी कि कदम कदम पर अपने पक्ष में करने की रणनीति के तहत जिस तरह मुसलमानों का सपोर्ट होने किया वही एक मुसलमान के के मोहम्मद उनकी आशाओं उम्मीदों पर तुषारापात कर देगा, पुरातत्व के के मोहम्मद ने अपनी पुस्तक जोकि मलयालम में लिखी गई Jaan Anna bhartiyan जो उन्होंने वर्ष 2016 में लिखी थी बाद में उसका हिंदी संस्करण मैं हूं भारतीय के रूप में हमारे सामने आया मेक ए के मोहम्मद ने बताया कि जब मैं उत्खनन के लिए वहां पहुंचा वहां पहुंचा तो मस्जिद की दीवारों में मंदिर के स्तंभ थे इन स्तंभों का निर्माण ब्लैक बसाल्ट कसौटी के पत्थरों के नाम से जाने जाने वाले पत्थरों से किया गया था इस स्तंभ के नीचे के भाग में 11वीं और 12वीं सदी के मंदिरों को दिखाने वाले पूर्ण कलश बनाए गए थे मंदिर कला में पूर्ण कलश 8 ऐश्वर्य तीनों में से एक है सन 1992 में बाबरी मस्जिद है जाने से पहले इस तरह के एक या दो स्तंभ नहीं बल्कि 14 स्तंभों को हमने देखा है पुरातत्व के के मोहम्मद ने यह भी बताया कि बाबर के सेनानायक मीर बाकी तोड़े गए या पहले से तोड़े गए मंदिर के अंशों का उपयोग करके मस्जिद का निर्माण किया गया है पहले जो कसौटी के पत्थरों से निर्मित स्तंभ के बारे में बताया गया था उसी तरह के स्तंभ और उसके नीचे के भाग में ईद का चबूतरा मस्जिद के बगल में और पीछे के भाग में उत्खनन से प्राप्त हुए अतः मैं इन सबूतों के आधार पर कहता हूं कि बाबरी मस्जिद के नीचे मंदिर था केके मोहम्मद ने इसके आगे भी कहा जरा ध्यान से पढ़िए गा उन्होंने कहा कि उपग्रह पंथी मुस्लिम गुट की मदद करने के लिए कुछ वामपंथी इतिहासकार सामने आए और उन्होंने बाबरी मस्जिद नहीं छोड़ने का उपदेश दे दिया वास्तव में उन्हें यह नहीं मालूम था कि वह कितना बड़ा पाप कर रहे हैं केके मोहम्मद ने जिन इतिहासकारों का नाम लिया उनमें प्रमुख रूप से जेएनयू के प्रोफेसर के एस गोपाल रोमिला थापर बिपिन चंद्र तो थे ही उनके साथ प्रोफेसर आर एस शर्मा अनवर अली डीएन झा सूरजभान और प्रोफेसर इरफान हबीब ठीक है मोहम्मद ने यह भी बताया है कि इन वामपंथी इतिहासकारों ने पत्र-पत्रिकाओं में जनता के बीच भ्रम और असमंजस था उत्पन्न करने के लिए कई लेख लिखे थे और इन सब में सबसे आगे जो अखबारी समूह कार्य कर रहा था वह अंग्रेजी का टाइम्स ऑफ इंडिया था, ठीक है मोहम्मद ने कहा कि टाइम्स ऑफ इंडिया ने जो कृत्य किया जो अपराध किया इससे राष्ट्र को आगे जाकर एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ी, काफी बाद में अपने इन विचारों को केके मोहम्मद ने इंडियन एक्सप्रेस और लेटर टू एडिटर मैं कई कालम लिखे थे जिसकी कुछ लोगों ने प्रशंसा भी की थी तो अनेक लोगों ने उन्हें फोन पर धमकियां मिली थी इसी कड़ी में जब केंद्रीय संस्कृति विभाग के संयुक्त सचिव आरसी त्रिपाठी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक एमसी जोशी न्यू ने अपने कक्ष में बुलाकर यह पूछा कि सरकार की अनुमति के बिना इस तरह आपने क्यों लिखा क्यों ना आपको जांच के अनुसार निलंबित किया जाए के कम उमर ने कहा कि मैंने देश की भलाई के लिए अपना कार्य पूर्ण ईमानदारी से किया है तब उन्होंने वहां संस्कृत के 2 श्लोक बोल कर अपना पक्ष रखा था उसे सुन डॉक्टर त्रिपाठी, ने कहा था कि आपका अटल निर्णय अभिनंदन योग्य है जो सच्चे प्रदा जो एक सच्चे पुरातत्व विद को करना चाहिए था वही आपने किया सच तो यह था आरसी त्रिपाठी के ऊपर चारों ओर से केके मोहम्मद को निलंबित करने का दबाव बना हुआ था ऐसे में डॉक्टर त्रिपाठी और डॉक्टर जोशी ने संयुक्त रूप से निर्णय लेते हुए निलंबन को तबादले में परिवर्तित कर दिया और केके मोहम्मद का ट्रांसफर मथुरा से गोवा कर दिया गया इसके बाद की कहानी फिर कभी किसी अन्य आर्टिकल में तब तक जय श्री राम वंदे मातरम हर हर महादेव आपका ही मनीष पांडेय अधिवक्ता राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा विनम्र निवेदन एक बार फिर से कृपया कट और पेस्ट ना करें संभव हो तो शेर अवश्य कर दें बार-बार लिखने की आवश्यकता मात्र इसलिए पड़ती है क्योंकि फेसबुक, सोशल मीडिया पर कट पेस्ट गैंग अति सक्रिय रहता है जो कि अक्सर मेहनत करने वालों की मेहनत पर पानी फेर देता है

Comments

Popular posts from this blog

कृष्ण जन्मभूमि का इतिहास भाग 3

इस्लाम और ईसाई पंथ की गंगोत्री है यहूदी पंथ भाग 1