इस प्यार को मैं क्या नाम दूं😀
धोखे विश्वासघात और षडयंत्र की बुनियाद पर टीका अजितेश साक्षी का बेमेल रिश्ता
# लव जिहाद की तर्ज पर दलित जिहाद की शिकार हो गई साक्षी
मनीष पांडेय
पिछले कई दिनों से मैं अजय देश द्वारा किए गए लव जिहाद पिया कहे दलित हाथ पर पैनी दृष्टि गड़ाए बैठा हुआ था तत्काल टिप्पणी से बचना चाहता था क्योंकि मन के किसी कोने में यह विचार लगातार उठ रहा था कि अभी इस केस में बहुत से रहस्य का आना अभी बाकी है और ठीक वैसा ही हुआ आज अजितेश के बारे में वह सारा काला चिट्ठा सोशल मीडिया पर आ चुका है जिसे आप भी लगातार देख व समझ रहे होंगे विश्वास करें अगर मैं तभी तत्काल कोई एक तरफा टिप्पणी कर देता तो शायद या लेख आज आपके सामने ना होता शायद मेरी क्षणिक उत्तेजना पूरे मामले के पीछे छिपे हुए एक भयानक षडयंत्र को ले डूबती कागजों पर यू उतार ना पाती, ज्यादा भूमिका ना बांधते हुए मैं सीधे मूल मुद्दे पर ही आ जाता हूं घटनाक्रम के, अतीत के पन्नों को थोड़ा सा पलटता हुआ चलता हूं मैंने शुरूआत में ही एक शब्द का प्रयोग किया है लव जिहाद वैसे तो जो हिंदू हैं वह इस शब्द से अच्छी तरह परिचित होंगे इस्लाम को बढ़ावा देने के मकसद से मुस्लिम लड़कों द्वारा हिंदू लड़कियों को प्रेम जाल में फंसा कर निकाह करना लव जिहाद कहलाता है हिंदू धर्म को नेस्तनाबूद करने हेतु जिहाद के कई तरीकों में एक तरीका यह लव जिहाद भी है जो हिंदू संगठन है या जिन्होंने कभी इस लव जिहाद के प्रकरण पर फेस टू फेस लड़ाइयां लड़ी है वे यह बात अच्छी तरह समझते होंगे कि लव जिहाद की शिकार हिंदू युवती का किस तरह ब्रेनवाश किया जाता है जिन्होंने ऐसी घटनाओं को बेहद नजदीकी से देखा है वे यह बात आसानी से समझ रहे होंगे कि ऐसी युवती एक अजीब विक्षिप्तपना में रहती है आप उसे कितना भी समझा लीजिए वह सिर्फ अपनी ही रट लगाए रहती है अपने माता पिता भाई या अन्य रिश्तेदार कि वह एक नहीं सुनती उसका विक्षिप्त ना देख कर यह साफ-साफ लगता है कि जैसे उस युवती पर किसी ने जबरदस्त जादू टोना कर दिया हो या काली शक्तियों का प्रयोग किया गया हो जानकार तो यही बताते कि हां ऐसा ज्यादातर मामलों में होता है आज जब मैं टीवी चैनल पर साक्षी मिश्रा को बेहद गहराई से पर रख रहा हूं मुझे साफ-साफ लगता है साक्षी भी अजितेश द्वारा लव जिहाद या कहीं दलित जिहाद की शिकार हो चुकी है लव जिहाद को तो आप बेहतर ढंग से समझते होंगे संक्षेप में दलित जिहाद को भी समझना आवश्यक है दरअसल जब हम यह कहते हैं कि हिंदू धर्म खतरे में हैं तो हम यह बात नहीं समझ पाते कि हिंदू धर्म को कहां किससे कब और कैसे खतरा है यक्ष प्रश्न यह है कि क्या दलित वर्ग अपने आपको हिंदू मानता है अगर हां तो कितने प्रतिशत और अगर नहीं तो कितने प्रतिशत सच तो यही है की हिंदू धर्म से टूटकर एक नए पंथ या मजहब में जाने की छटपटाहट दलित वर्ग में सैकड़ों वर्षों से रही है एक और जहां दूसरे पंथ्यों या मजहबो के षड्यंत्र के शिकार होकर यह दलित वर्ग धर्म परिवर्तन की राह पर चल पड़ा वहीं दूसरी ओर अपने ही तथाकथित दलित नेताओं द्वारा परोसे गए विश्व अमन का भी यह शिकार हुआ, और कई स्तरों पर सवर्ण जातियों के विरुद्ध इसने मोर्चा खोल दिया हिंदू देवी देवताओं को ना मानना उनकी मूर्तियों को तोड़ देना सवर्णों को गालियां देना उन्हें एसटी एससी एक्ट में फंसा कर जेल भिजवा ना उनकी लड़कियों पर बुरी नजर रखना यही तो ज्यादातर दलितों का प्रिय शगल बन चुका है अजितेश के मन में भी वही विष भरा हुआ है जिसके तहत उसने साक्षी को अपना शिकार बनाया, ध्यान दे आप इस बात का कि लव जिहाद में क्या होता है सबसे पहले मुस्लिम लड़का किसी हिंदू लड़के से दोस्ती करता है फिर उसके माध्यम में उसके घर में घुसता है और उसकी बहन को लव जिहाद का शिकार बना देता है अजितेश ने भी तो ही किया दुर्भाग्य कुछ लोग से सामाजिक समरसता का नाम दे रहे हैं किंतु उन्हें इस बात को समझना होगा कि जो रिश्ते विश्वासघात धोखे और षडयंत्र की बुनियाद पर खड़े होते हैं वी सामाजिक समरसता की श्रेणी में नहीं बल्कि सामाजिक आतंकवाद कहीं जाते हैं मैं आता हूं अब इलेक्ट्रॉनिक चैनलों के ऊपर जो अनावश्यक रूप से इस मामले को बेहद तूल दे रहे हैं इसके पीछे के षड्यंत्र को भी समझना आवश्यक होगा यह मात्र टीआरपी का खेल नहीं है बंधु बल्कि इससे भी कहीं ज्यादा कुछ और ही है समझाने का प्रयास करता हूं दरअसल आप ध्यान दें कि राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल बरेली से भाजपा के विधायक हैं उनका भाजपा का विधायक होना ही इलेक्ट्रॉनिक चैनलों द्वारा इस कवरेज को जोर-शोर से करने का दबाव कहीं ऊपर से ही है इस देश में सैकड़ों अंतरजातीय विवाह होते हैं लेकिन कभी किसी इलेक्ट्रॉनिक चैनल ने उन्हें तो नहीं दिखाया फिर इसी घटना को इतना तूल देने की आवश्यकता है उसे क्यों पड़ी कवरेज करने वाले ज्यादातर वही टुकड़े-टुकड़े गैंग के सदस्य हैं जो यदा-कदा भाजपा पर निशाना साधते रहे हैं अजितेश और साक्षी प्रकरण के माध्यम से इन्हें एक बार फिर भाजपा पर निशाना साधने का मौका मिला इसके पीछे इलेक्ट्रॉनिक चैनल नहीं बल्कि इलेक्ट्रानिक चैनलों को फाइनेंस करने वाले हुए हैं जो राष्ट्र द्रोही है कभी सूची निकलवा लीजिएगा कि इन ट्रेन इलेक्ट्रॉनिक चैनलों को फाइनेंस कौन-कौन लोग करते हैं कौन-कौन इसाई मिशनरियों कौन-कौन इस्लामिक संगठन है कहने का अर्थ यह है कि यह मात्र टीआरपी का खेल नहीं बल्कि इस खेल के पीछे भी कुछ और खेल भी खेला जा रहा है जिसे हमें और आपको समझना होगा अंत में बरेली के वीर सावरकर नगर में निवास करने वाले अजितेश का काला चिट्ठा सोशल मीडिया के माध्यम से हमारे सामने आ ही चुका है अपने आप को ठाकुर जाति का बताकर एक चरित्रहीन एक अपराधी और एक नशेड़ी और एक अय्याश व्यक्ति द्वारा किया गया यह घोर अपराध पूरी तरह से अक्षम्य है फिलहाल तो यही कहूंगा कि सावधान इंडिया किसी पर, चाहे वह अंदर के रिश्ते हो या फिर बाहर से बनाए हुए रिश्ते उन पर इतना अति विश्वास ना कर ले कि वह अंत में हमारे लिए एक बड़ा अभिशाप बन जाए और यह जबरदस्ती के बनाए गए रिश्ते एक दिन ह अपनी कुत्सित मानसिकता को उजागर करते हुए हमारे रिश्ते को ही तार-तार कर दे हमारे विश्वास को धोखा दे दे साक्षी मिश्रा जितनी जल्दी समझ जाए जो कि शायद कभी समझ नहीं पाएगी ऐसे बेमेल रिश्तो का भयानक अंत कैसे होता है यह आने वाले समय में वह स्वयं प्रत्यक्ष रूप से अवश्य देखेगी हम भी आप भी और यह पूरा विश्व भी इन रिश्तो का बेहद दर्दनाक अंत होना अवश्यंभावी है तथास्तु
आपका ही
मनीष पांडे
अधिवक्ता
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
विनम्र निवेदन कट और पेस्ट की नीति ना अपनाएं हो सके तो शेयर अवश्य कर दे
# लव जिहाद की तर्ज पर दलित जिहाद की शिकार हो गई साक्षी
मनीष पांडेय
पिछले कई दिनों से मैं अजय देश द्वारा किए गए लव जिहाद पिया कहे दलित हाथ पर पैनी दृष्टि गड़ाए बैठा हुआ था तत्काल टिप्पणी से बचना चाहता था क्योंकि मन के किसी कोने में यह विचार लगातार उठ रहा था कि अभी इस केस में बहुत से रहस्य का आना अभी बाकी है और ठीक वैसा ही हुआ आज अजितेश के बारे में वह सारा काला चिट्ठा सोशल मीडिया पर आ चुका है जिसे आप भी लगातार देख व समझ रहे होंगे विश्वास करें अगर मैं तभी तत्काल कोई एक तरफा टिप्पणी कर देता तो शायद या लेख आज आपके सामने ना होता शायद मेरी क्षणिक उत्तेजना पूरे मामले के पीछे छिपे हुए एक भयानक षडयंत्र को ले डूबती कागजों पर यू उतार ना पाती, ज्यादा भूमिका ना बांधते हुए मैं सीधे मूल मुद्दे पर ही आ जाता हूं घटनाक्रम के, अतीत के पन्नों को थोड़ा सा पलटता हुआ चलता हूं मैंने शुरूआत में ही एक शब्द का प्रयोग किया है लव जिहाद वैसे तो जो हिंदू हैं वह इस शब्द से अच्छी तरह परिचित होंगे इस्लाम को बढ़ावा देने के मकसद से मुस्लिम लड़कों द्वारा हिंदू लड़कियों को प्रेम जाल में फंसा कर निकाह करना लव जिहाद कहलाता है हिंदू धर्म को नेस्तनाबूद करने हेतु जिहाद के कई तरीकों में एक तरीका यह लव जिहाद भी है जो हिंदू संगठन है या जिन्होंने कभी इस लव जिहाद के प्रकरण पर फेस टू फेस लड़ाइयां लड़ी है वे यह बात अच्छी तरह समझते होंगे कि लव जिहाद की शिकार हिंदू युवती का किस तरह ब्रेनवाश किया जाता है जिन्होंने ऐसी घटनाओं को बेहद नजदीकी से देखा है वे यह बात आसानी से समझ रहे होंगे कि ऐसी युवती एक अजीब विक्षिप्तपना में रहती है आप उसे कितना भी समझा लीजिए वह सिर्फ अपनी ही रट लगाए रहती है अपने माता पिता भाई या अन्य रिश्तेदार कि वह एक नहीं सुनती उसका विक्षिप्त ना देख कर यह साफ-साफ लगता है कि जैसे उस युवती पर किसी ने जबरदस्त जादू टोना कर दिया हो या काली शक्तियों का प्रयोग किया गया हो जानकार तो यही बताते कि हां ऐसा ज्यादातर मामलों में होता है आज जब मैं टीवी चैनल पर साक्षी मिश्रा को बेहद गहराई से पर रख रहा हूं मुझे साफ-साफ लगता है साक्षी भी अजितेश द्वारा लव जिहाद या कहीं दलित जिहाद की शिकार हो चुकी है लव जिहाद को तो आप बेहतर ढंग से समझते होंगे संक्षेप में दलित जिहाद को भी समझना आवश्यक है दरअसल जब हम यह कहते हैं कि हिंदू धर्म खतरे में हैं तो हम यह बात नहीं समझ पाते कि हिंदू धर्म को कहां किससे कब और कैसे खतरा है यक्ष प्रश्न यह है कि क्या दलित वर्ग अपने आपको हिंदू मानता है अगर हां तो कितने प्रतिशत और अगर नहीं तो कितने प्रतिशत सच तो यही है की हिंदू धर्म से टूटकर एक नए पंथ या मजहब में जाने की छटपटाहट दलित वर्ग में सैकड़ों वर्षों से रही है एक और जहां दूसरे पंथ्यों या मजहबो के षड्यंत्र के शिकार होकर यह दलित वर्ग धर्म परिवर्तन की राह पर चल पड़ा वहीं दूसरी ओर अपने ही तथाकथित दलित नेताओं द्वारा परोसे गए विश्व अमन का भी यह शिकार हुआ, और कई स्तरों पर सवर्ण जातियों के विरुद्ध इसने मोर्चा खोल दिया हिंदू देवी देवताओं को ना मानना उनकी मूर्तियों को तोड़ देना सवर्णों को गालियां देना उन्हें एसटी एससी एक्ट में फंसा कर जेल भिजवा ना उनकी लड़कियों पर बुरी नजर रखना यही तो ज्यादातर दलितों का प्रिय शगल बन चुका है अजितेश के मन में भी वही विष भरा हुआ है जिसके तहत उसने साक्षी को अपना शिकार बनाया, ध्यान दे आप इस बात का कि लव जिहाद में क्या होता है सबसे पहले मुस्लिम लड़का किसी हिंदू लड़के से दोस्ती करता है फिर उसके माध्यम में उसके घर में घुसता है और उसकी बहन को लव जिहाद का शिकार बना देता है अजितेश ने भी तो ही किया दुर्भाग्य कुछ लोग से सामाजिक समरसता का नाम दे रहे हैं किंतु उन्हें इस बात को समझना होगा कि जो रिश्ते विश्वासघात धोखे और षडयंत्र की बुनियाद पर खड़े होते हैं वी सामाजिक समरसता की श्रेणी में नहीं बल्कि सामाजिक आतंकवाद कहीं जाते हैं मैं आता हूं अब इलेक्ट्रॉनिक चैनलों के ऊपर जो अनावश्यक रूप से इस मामले को बेहद तूल दे रहे हैं इसके पीछे के षड्यंत्र को भी समझना आवश्यक होगा यह मात्र टीआरपी का खेल नहीं है बंधु बल्कि इससे भी कहीं ज्यादा कुछ और ही है समझाने का प्रयास करता हूं दरअसल आप ध्यान दें कि राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल बरेली से भाजपा के विधायक हैं उनका भाजपा का विधायक होना ही इलेक्ट्रॉनिक चैनलों द्वारा इस कवरेज को जोर-शोर से करने का दबाव कहीं ऊपर से ही है इस देश में सैकड़ों अंतरजातीय विवाह होते हैं लेकिन कभी किसी इलेक्ट्रॉनिक चैनल ने उन्हें तो नहीं दिखाया फिर इसी घटना को इतना तूल देने की आवश्यकता है उसे क्यों पड़ी कवरेज करने वाले ज्यादातर वही टुकड़े-टुकड़े गैंग के सदस्य हैं जो यदा-कदा भाजपा पर निशाना साधते रहे हैं अजितेश और साक्षी प्रकरण के माध्यम से इन्हें एक बार फिर भाजपा पर निशाना साधने का मौका मिला इसके पीछे इलेक्ट्रॉनिक चैनल नहीं बल्कि इलेक्ट्रानिक चैनलों को फाइनेंस करने वाले हुए हैं जो राष्ट्र द्रोही है कभी सूची निकलवा लीजिएगा कि इन ट्रेन इलेक्ट्रॉनिक चैनलों को फाइनेंस कौन-कौन लोग करते हैं कौन-कौन इसाई मिशनरियों कौन-कौन इस्लामिक संगठन है कहने का अर्थ यह है कि यह मात्र टीआरपी का खेल नहीं बल्कि इस खेल के पीछे भी कुछ और खेल भी खेला जा रहा है जिसे हमें और आपको समझना होगा अंत में बरेली के वीर सावरकर नगर में निवास करने वाले अजितेश का काला चिट्ठा सोशल मीडिया के माध्यम से हमारे सामने आ ही चुका है अपने आप को ठाकुर जाति का बताकर एक चरित्रहीन एक अपराधी और एक नशेड़ी और एक अय्याश व्यक्ति द्वारा किया गया यह घोर अपराध पूरी तरह से अक्षम्य है फिलहाल तो यही कहूंगा कि सावधान इंडिया किसी पर, चाहे वह अंदर के रिश्ते हो या फिर बाहर से बनाए हुए रिश्ते उन पर इतना अति विश्वास ना कर ले कि वह अंत में हमारे लिए एक बड़ा अभिशाप बन जाए और यह जबरदस्ती के बनाए गए रिश्ते एक दिन ह अपनी कुत्सित मानसिकता को उजागर करते हुए हमारे रिश्ते को ही तार-तार कर दे हमारे विश्वास को धोखा दे दे साक्षी मिश्रा जितनी जल्दी समझ जाए जो कि शायद कभी समझ नहीं पाएगी ऐसे बेमेल रिश्तो का भयानक अंत कैसे होता है यह आने वाले समय में वह स्वयं प्रत्यक्ष रूप से अवश्य देखेगी हम भी आप भी और यह पूरा विश्व भी इन रिश्तो का बेहद दर्दनाक अंत होना अवश्यंभावी है तथास्तु
आपका ही
मनीष पांडे
अधिवक्ता
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