जर जोरू जमीन कांग्रेस और सोनभद्र हत्याकांड की सच्चाई
मनीष पांडेय
 कहा जाता है कि विश्व में अगर कभी कोई लड़ाई लड़ी गई अथवा वर्तमान या फिर भविष्य में कोई लड़ी जाएगी तो उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ जर जोरू और जमीन की होगी सोनभद्र हत्याकांड के पीछे भी विवाद ,लड़ाई और फिर हत्याकांड की मूल जड़ वही जमीन ही है परंतु इस पूरे घटनाक्रम उसमें कांग्रेस का कितना दोष रहा इस बात को समझने के लिए हमें पुन: इतिहास के पन्नों को पलट ना होगा और विश्वास करें पन्ने पलटने के बाद हमारे सामने कांग्रेस का भ्रष्टतम चेहरा उजागर होगा कहानी या फिर कहें विवाद का प्रारंभ होता है वर्ष 1955 से उस समय वहां के जिलाधिकारी हुआ करते थे प्रभात कुमार मिश्र जिन्होंने आदिवासियों की जमीनों पर अपनी बुरी नजर डालते हुए उसे अपने नाम पर कराने के लिए एड़ी की चोट पर जोर लगा दिया वह जमीनी जिन पर आदिवासियों का कब्जा था और जो ना सिर्फ सैकड़ों वर्षों से वहां पर लगातार खेती करते आ रहे थे बल्कि राजस्व का भुगतान अभी पूरी ईमानदारी से करते चले आ रहे थे 600 बीघे से ऊपर की जमीन पर डीएम महोदय द्वारा कागजों में हेराफेरी कर और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग से जिसमें शासन सत्ता से जुड़े हुए कई नेतागण भी मौजूद थे के बल पर उस जमीन को हथिया कर अपनी पत्नी व पुत्री के नाम करा दिया 1955 में ही अपने ही रिश्तेदार की एक आदर्श को ऑपरेटिव सोसाइटी नाम पर जमीन करवा दी गई 1955 में उस वक्त के तत्कालीन तहसीलदार को नामांतरण( दाखिल खारिज) का अधिकार नहीं था 1978 में आदर्श को ऑपरेटिव सोसाइटी का रजिस्ट्रेशन रद्द हो गया तब 1989 में जिलाधिकारी प्रभात कुमार मिश्र ने उस जमीन को अपनी पुत्री और पत्नी के नाम पर करवा दिया जो कि पूर्ण रूप से गैर कानूनी था 1991 में जिला अधिकारी की पुत्री ने वहां पर एक हर्बल खेती करने के उद्देश्य से अपना कार्य शुरू किया किंतु 1992 में उसे जमीन का किसी व्यक्ति के नाम पर ना होने के कारण डीएम की पुत्री का प्लान पूरी तरह फेल हो गया क्योंकि सोसायटी की जमीन किसी व्यक्ति के नाम नहीं की जा सकती वर्ष 2015 में गोंड जनजाति के लोगों का जो कि जमीन पर कब्जा था वी आजादी से पहले ही उस जमीन के राजस्व का भी भुगतान कर रहे थे वर्ष 2017 में डीएम महोदय ने वहां के ग्राम प्रधान से मिलकर उसे जमीन को बेच दिया उसी जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से ग्राम प्रधान द्वारा अपने साथियों के साथ जो खूनी खेल खेला गया उसकी ही परिणिति या सोनभद्र हत्याकांड के रूप में आज हमारे सामने आई हुई है सोनभद्र हत्याकांड के पीछे की यह कहानी आप सभी जागरूक पाठकों के सामने प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से आ चुकी होगी अब सवाल यह उठता है कि इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेसी कितनी बड़ी दोषी है तो कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को याद दिलाना आवश्यक है कि 1955 में जब सोनभद्र के जिला अधिकारी प्रभात कुमार मिश्र थे तो उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार थी जिस के मुख्यमंत्री डॉ संपूर्णानंद थे और जिलाधिकारी प्रभात कुमार मिश्र एक भ्रष्ट नौकरशाह थे जिन्होंने सरकारी मशीनरी का पूर्ण रूप से दुरुपयोग करते हुए सत्ता में बैठे हुए दलाल नेताओं की मदद से और अपने कुछ सहयोगी प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल करते हुए यह 600 बीघे से ऊपर की जमीन की बंदरबांट में पूरी तरह शामिल हो गए ऐसा भला कैसे नहीं हो सकता की एक भ्रष्ट नौकरशाह हकीकत में उस वक्त तत्कालीन सत्ता से जुड़े हुए त कांग्रेश से जुड़े हुए नेता गण शामिल नहीं थे कहने का सीधा-सीधा अर्थ है कि इस जमीन के बंदरबांट में उस समय के कांग्रेसी नेता भी शामिल थे इसमें किसी को किसी कोण से शक नहीं होना चाहिए की अगर कोई भ्रष्ट नौकरशाह है तो उसके पीछे शासन सत्ता के जुड़े नेता अपना वरद हस्त अवश्य रखे हुए हैं प्रियंका गांधी यह भी कहती हैं कि सोनभद्र हत्याकांड का प्रमुख कारण प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था है तो मैडम प्रियंका 1955 में जब कांग्रेश के दलाल भ्रष्ट नौकरशाहों के साथ मिलकर कानून की धज्जियां उड़ाते हुए गरीब आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा कर रहे थे अब क्या कानून व्यवस्था अपने स्वर्ण युग में थी ? और सबसे बड़ा आश्चर्य वह यह कि 'सूप तो सूप छलनी भी बोलेने लगी' कांग्रेश तो कांग्रेश समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव भी कांग्रेस के ही सुर में सुर मिलाते हुए बिगड़ती कानून व्यवस्था भू माफिया और न जाने क्या क्या कहकर सवाल उठा रहे हैं पर वे यह कहते हुए भूल जाते हैं कि अगर सबसे अधिक कानून व्यवस्था किसी के राज में बिगड़ी तो वह अखिलेश यादव के बतौर मुख्यमंत्री होते हुए हुई थी और तब भी कहा प्रदेश की कानून व्यवस्था बिगड़ी थी जब उनके पिता श्री मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हुआ करते थे अखिलेश यादव शादी अभी भूल जाते हैं कि 1992 में अयोध्या में निहत्थे निर्दोष कारसेवकों पर गोली कांड करवा कर उन्होंने कौनसी कानून व्यवस्था का सुधार कर लिया था सपा शासन में 200 से ऊपर सांप्रदायिक दंगे घोसी सुधरी हुई कानून-व्यवस्था को उजागर करते हैं फिलहाल उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री परम पूज्य योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने तत्काल पूरे प्रकरण की जांच के आदेश देकर एक उचित निर्णय लिया है जमीन किसकी है यह वास्तविक रूप से पता चलेगा जमीन किस किस के नाम पर फर्जी ढंग से रजिस्ट्री की गई यह सच भी जल्द ही सामने आ जाएगा किंतु इस पूरे प्रकरण में अर्थात 1955 से पहले और 1955 के बाद इस बंदरबांट में किन-किन कांग्रेसियों द्वारा सत्ता और कानून का दुरुपयोग करते हुए भू माफिया और भ्रष्ट नौकरशाहों पर अपना वरद हस्त रख यह गोरखधंधा किया गया इसकी विस्तृत जांच भी होनी चाहिए जय श्री राम वंदे मातरम हर हर महादेव आपका ही मनीष पांडेय अधिवक्ता राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा पूर्ण विनम्रता के साथ करबद्ध निवेदन कट पेस्ट किन्हीं तीन अपनाकर अगर शेयर कर दें 

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