ह्वेनसांग ने जब देखी थी भगवान शिव की 100 फुट की मूर्ति

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विवाद श्रंखला  
भाग 1
जब ह्वेनसांग ने देखी थी 100 फुट भगवान शिव की मूर्ति
*अब मथुरा और काशी की बारी है••••
मनीष पाण्डेय 
जब से राम जन्मभूमि का ऐतिहासिक निर्णय देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया तब से ही देश के हिंदू जनमानस में मुगल आक्रांता द्वारा कब्जा किए गए हिंदू मंदिरों जिन्हें मुगल आक्रांताओं द्वारा जानबूझकर एक विशेष रणनीति के तहत विवादित बनाया गया था की मुक्ति का रास्ता दिखाई देने लगा राम जन्म भूमि के बाद देश के बहुसंख्यक हिंदू समाज और हिंदूवादी संगठनों की दृष्टि मथुरा और काशी की ओर मुड़ गई है, वाराणसी शहर का नामकरण वरुणा और असी नदी को मिलाकर बना हुआ है, काशी और मथुरा पर अखाड़ा परिषद की प्रयागराज में हुई बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय हुआ कि, एक ओर तो वे हिंदू संगठनों के माध्यम से जन आंदोलन को चलाने हेतु प्राथमिकता देंगे तथा दूसरे वे न्यायालय की भी शरण लेंगे फिलहाल राष्ट्रीय स्वयं संघ ने इस विषय पर अपना गोलमोल उत्तर दिया है और कहा कि अखाड़ा परिषद फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है हमें यह सूचना है कि हमें भविष्य में इस मुद्दे पर आगे जाना है अथवा नहीं समय ने सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही है कि हमने राम मंदिर की शुरुआत नहीं की थी इस तरह संघ ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब वह काशी और मथुरा के आंदोलन के लिए कोई प्रारंभ नहीं करेगा , सवाल ये उठता है कि तब संघ क्या करेगा, इस यक्ष प्रश्न का जवाब मैं देने की कोशिश करता हूं अगर संघ के इतिहास पर डालें विशेषकर राम मंदिर पर तुम मुझे अमीर खुसरो की लिखी हुई बात अनायास ही याद आ जाती है "खीर पकाई जतन से औ चरखा दियाचलाय। आया कुत्ता ले गया, तू बैठी ढोल बजाय, ला पानी पिला! इसका अर्थ बुद्धिजीवी पाठक अवश्य समझ रहे होंगे अगर नहीं समझ रहे हैं तो उसका स्पष्टीकरण में अगले आर्टिकल में अवश्य दूंगा, फिलहाल दृष्टि डालते हैं काशी विश्वनाथ और ज्ञानवापी मंदिर के विवाद पर और इसके जीर्णोद्धार पर इतिहास में यह बताता है कि सातवीं शताब्दी के प्रारंभ में अर्थात् सन् 629 ईसवी में चीनी दार्शनिक यात्री ह्वेनसांग जिसे युवान च्वाग भी कहा जाता था, अपनी भारत यात्रा के दौरान वह बनारस भी गया था उस समय उसने बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर का वर्णन अपनी पुस्तक "सी यूकी" में किया था, कोई इंसान कुल 15 साल भारत में रहा अर्थात 629 इसी से लेकर 645 इसवी तक, वहीं ह्वेनसांग ने अपनी बनारस यात्रा में काशी विश्वनाथ मंदिर आदि के बारे में वर्णन करते हुए कहा है, कि मुख्य शहर में लगभग 20 मंदिर हैं महेश्वर देव की एक सौ फुट तांबे की मूर्ति है जो कि बेहद धीर गंभीर व्यक्तित्व प्रभावशाली है जोकि सजीव सी प्रतीत होती है अब आप जरा सोचिए कि उस समय भगवान शिव की 100 फुट की मूर्ति विश्वनाथ मंदिर में हुआ करती थी जिसे कालांतर में संभवतः मुगल आक्रांताओं द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था, ह्वेनसांग ने उस समय के लगभग साधु संतों के वेशभूषा और केस विन्यास पर भी चर्चा की है उसने कहा कि लगभग 3000 साधु सन्यासी यहां पर है वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में विवादित परिसर में स्वयंभू विश्वेश्वरनाथ का शिवलिंग आज भी स्थापित है | यह देश के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है | 11वीं शताब्दी में राजा हरिश्चंद्र ने इसका जीर्णोद्धार कराया था पश्चात राजा विक्रमादित्य ने भी इसका जीर्णोद्धार कराया था जय श्री राम वंदे मातरम हर-हर महादेव जय श्री कृष्णा शेष अगले अंक में
आपका ही 
अधिवक्ता मनीष पांडेय 
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
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