काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 2
काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 2
जब काशी में मोहम्मद गौरी ने धर्म पर आरूढ़ हिंदुओं का किया था वध
*फिरोजशाह तुगलक ने लगाया था ब्राह्मणों पर जजिया कर, विध्वंस किया काशी विश्वनाथ मंदिर
मनीष पाण्डेय
मोहम्मद गौरी( 1173 से 1206) का इतिहास हमें यह बताता है कि मोहम्मद गौरी द्वारा भारत पर आक्रमण करने का उद्देश्य सर्वप्रथम यहां की संपत्ति को लूटना और दूसरा इस्लाम अर्थात तुर्क साम्राज्य की स्थापना करना जिस तरह ज्यादातर मुस्लिम शासक शरीयत और कुरान से वशीभूत होकर काफिरों अर्थात हिंदुओं का क़त्ल करो, उनकी संपत्ति को लूट लो, और उनके मंदिरों को नष्ट भ्रष्ट कर दो , यही भावना मोहम्मद गोरी में भी थी लेखक हसन निजामी मैं मोहम्मद गौरी के व्यक्तित्व का वर्णन अपनी पुस्तक ताज उल मासिर में इस तरह से किया है पंथ के दायित्वों के निर्वाह के लिए जैसा वीर पुरुष चाहिए वह सुल्तानों के सुल्तान भविष्य वासियों और बहू देवता पूजन के विध्वंस मोहम्मद गौरी के शासन में उपलब्ध हुआ, और उसे अल्लाह ने उस समय के राजाओं और शहंशाह में से छांटा था, क्योंकि उसने अपने आपको पंथ के शत्रुओं के मूलोच्छदन एवं सवंश विनाश के लिए नियुक्त किया था, उनके हृदय के रक्त से भारत भूमि को इतना भर दिया था कि कयामत के दिन तक यात्रियों को नाव में बैठाकर उस गाढी खून की भरपूर नदी को पार करना पड़ेगा, उसने जिस किले पर आक्रमण किया, उसे जीत लिया, मिट्टी में मिला दिया, और उस किले की नींव खंभों को हाथियों के पैरों के नीचे रौंदकर भस्मसात कर दिया, और मूर्ति पूजको को,
सारे विश्व को, अपनी अच्छी वाली तलवार से काट कर नरक की अग्नि में झोंक दिया, मंदिरों मूर्तियों आकृतियों
के स्थान पर मस्जिदें बना दी ताज उल मासिर हसन निजामी अनुवाद एलियट और डाउन सन खंड सेकंड पृष्ठ 209
वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के विध्वंस पर जोकि मोहम्मद गौरी द्वारा 1194 ईस्वी में किया गया था पर हसन निजामी लिखते हैं कि उस स्थान से आगे शाही सेना बनारस की ओर बढ़ चली जो भारत की आत्मा है और यहां उन्होंने 1000 मंदिरों का ध्वंस किया तथा उनकी नियमों के स्थान पर मस्जिदें बनवा दी इस्लामी पंथ के केंद्र की नींव रखी पृष्ठ संख्या 223
इसी के आगे हसन निजामी यह भी लिखते हैं कि तलवार की धार से हिंदुओं को नरक की आग में झोंक दिया गया उनके सिरों से आसमान तक ऊंचे 3 बुर्ज बनाए गए, और उनके शवों को जंगली पशुओं और पक्षियों के भोजन के लिए छोड़ दिया गया पृष्ठ संख्या 298
इस संबंध में मिनहाज उल सिराज ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि दुर्ग रक्षकों में से जो बुद्धिमान एवं कुशाग्र बुद्धि के थे उन्हें धर्मांतरण कर मुसलमान बना लिया गया किंतु जो अपने पूर्व धर्म पर आरूढ़ रहे उन्हें रद्द कर दिया गया तब आप काफी नशीली मिनहाज अनुवाद एलियट एंड डाउसन खंड 2 पृष्ठ 228
इतिहास का एक और मुगल आक्रांता फिरोज़ शाह तुगलक (1357-1388)जो कि अपनी कामवासना को शांत करने के लिए हिंदू महिलाओं को दासिया बनाया करता था, फिरोजशाह तुगलक द्वारा लाखों हिंदुओं कि हत्या की गई, उनके मंदिरों का विध्वंस किया गया फारसी इतिहासकार फरिश्ता जिसका जन्म कैस्पियन सागर के तटीय नगर अस्त्राबाद में गुलाम अली हिन्दू शाह के घर हुआ ने विस्तारपूर्वक अपनी पुस्तक सिरात ए फिरोजशाही फरिश्ता एलियट एंड डाउसन खंड 3 मैं उड़ीसा के मंदिरों का विध्वंस सहित काशी विश्वनाथ मंदिर तथा बनारस के अन्य मंदिरों के विध्वंस के बारे में लिखा है,फ़िरोज़ कट्टर सुन्नी मुसलमान था। उसने हिन्दू जनता को ‘जिम्मी’ (इस्लाम धर्म स्वीकार न करने वाले) कहा और हिन्दू ब्राह्मणों पर जज़िया कर लगाया। डॉ॰ आर.सी. मजूमदार ने कहा है कि, "फ़िरोज़ इस युग का सबसे धर्मान्ध एवं इस क्षेत्र में सिंकदर लोदी एवं औरंगज़ेब का अप्रगामी था।’ दिल्ली सल्तनत में प्रथम बार फ़िरोज़ तुग़लक़ ने ब्राह्मणों से भी जज़िया लिया।
शेष अगले अंक में जय श्री राम वंदे मातरम हर-हर महादेव जय श्री कृष्णा
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
M•COM,LLB,MBA (HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
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