जब औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर के विध्वंस का दिया था आदेश

काशी काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 5
जब औरंगजेब ने विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने का जारी किया था आदेश
मनीष पाण्डेय
जब मैं मुसलमानों के मुंह से सुनता हूं कि उन्हें भारतीय संविधान भारतीय कानून के अनुसार नहीं चलना बल्कि अपनी शरीयत के अनुसार ही सारी व्यवस्थाओं को चलाना चाहते हैं शरिया में पैगम्बर मुहम्मद की, इस्लाम की, और कुरान की आलोचना को कड़ाई से निषिद्ध किया गया है। इसमें जिहाद के बारे में और जिहाद की परिभाषा दी गयी है। शरिया के अनुसार तब तक जिहाद जारी रखना चाहिए जब तक पूरा विश्व शरिया की शरण में न आ जाय (शरिया के अनुसार न चलना शुरू कर दे)। शरिया के अनुसार सभी काफिर और गैर-मुसलमानों को धिम्मी बनाना हैं इस्लाम में धिम्मी (dhimmi ([ˈðɪmːiː]; अरबी: ذمي‎, समूह में أهل الذمة अह्ल अल-धिम्माह; ओटोमान तुर्की एवं उर्दू में जिम्मी) उस व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को कहते हैं जो मुसलमान नहीं है और शरियत कानून के अनुसार चलने वाले किसी राज्य की प्रजा है। इस्लाम के अनुसार इन्हें जीवित रहने के लिये कर (टैक्स) देना अनिवार्य है जिसे जजिया कहा जाता है। धिम्मी को मुसलमानों की तुलना में बहुत कम सामाजिक और कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं। लेकिन यदि धिम्मी इस्लाम स्वीकार कर ले तो उसको लगभग पूरा अधिकार मिल जाता  काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस में इस विषय को उठाने का अर्थ मात्र मेरा इतना ही है कि भारतवर्ष पर जितने भी मुगल आक्रांता ओं ने आक्रमण किए उनका मकसद मात्र भारतवर्ष में इस्लाम की स्थापना करना भारत में रह रहे हिंदू का कत्ल करना हिंदू मंदिरों को ध्वस्त करना और यहां के नागरिकों को जो उनकी दृष्टि में काफिर थे उन्हें धर मातृत्व कर इस्लाम में कन्वर्ट कर आना जो हिंदू इस्लाम को स्वीकार नहीं करते थे उनका वध कर देना अथवा उन्हें धिम्मी या जिम्मी बना देना, जितने भी मुगल आक्रांता अथवा मुगल शासक सभी ने शरीयत अर्थात कुरान हदीस और सुन्नत को मान कर हिंदू सनातन धर्म पर आघात और उसे नष्ट भ्रष्ट करने का ही कार्य किया इसी कड़ी में काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर पर आक्रमण करने वाला औरंगजेब
औरंगज़ेब ने पूरे साम्राज्य पर फ़तवा-ए-आलमगीरी (शरियत या इस्लामी क़ानून पर आधारित) लागू किया और कुछ समय के लिए ग़ैर-मुस्लिमों पर अतिरिक्त कर भी लगाया। ग़ैर-मुसलमान जनता पर शरियत लागू करने वाला वो पहला मुसलमान शासक था।औरंगज़ेब ‘दारुल हर्ब’ (क़ाफिरों का देश भारत) को ‘दारुल इस्लाम’ (इस्लाम का देश) में परिवर्तित करने को अपना महत्त्वपूर्ण लक्ष्य मानता था। सन 1616 ईस्वी में जय छत्रपति शिवाजी महाराज को औरंगजेब ने दिल्ली बनवाया था दिल्ली में औरंगजेब द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज को ना सिर्फ अपमान किया गया था बल्कि उन्हें बंदी बना लिया गया था शिवाजी अपनी बुद्धि चातुर्य और व कुशलता से औरंगजेब की कैद से भाग निकले थे, शिवाजी भागकर बनारस पहुंचे थे माना यह जाता है कि शिवाजी के बनारस में रहने की घटना की की कारण औरंगजेब बनारस के प्रति मन में दूषित भावना रखता था साकी मुस्तइद खान द्वारा लिखित मासीर ए आलमगिरी में कहा गया है कि 17 जिलकदा हिजरी 1079 अर्थात 18 अप्रैल 1669 के दिन दीन के रक्षक बादशाह सलामत के कानों में खबर पहुंची की ठट्ठा और मुल्तान के सूबों में और विशेषकर बनारस में बेवकूफ ब्राह्मण अपनी रद्दी किताबों अपनी पाठशालाओ में पढ़ाते और समझाते हैं, और उनसे दूर-दूर से हिंदू और मुसलमान विद्यार्थी और जिज्ञासु उनके बदमाशी भरे ज्ञान विज्ञान को पढ़ने की दृष्टि से जाते हैं, धर्म संचालक बादशाह दे यह सुनने के बाद सब सूबेदारो के नाम यह फरमान जारी किया( इस आदेश की एक प्रति एशियाटिक सोसायटी कोलकाता संग्रहालय में आज ही सुरक्षित रखी हुई है )कि वह अपनी इच्छा से काफिरों के तमाम मंदिर तथा पाठशाला में गिरा दे, उन्हें इस बात का सख्त आदेश दिया गया कि वह सब प्रकार की मूर्ति पूजा संबंधी शास्त्रों का पठन-पाठन और मूर्ति पूजा को बंद करवा दें, 15 अरब उल आखिर 2 सितंबर 1659 को दिन प्रतिपालक बादशाह को खबर मिली कि उनकी आता के अनुरूप उनके हम लोगों ने बनारस में विश्वनाथ मंदिर को गिरा दिया मंदिर को केवल गिराया ही नहीं गया बल्कि वहां ज्ञानवापी मस्जिद भी उठा दी गई मस्जिद बनाने वालों ने पुरानी मंदिर की पश्चिमी दीवार गिरा दी और छोटे मंदिर को जमीन रोज कर दिया पश्चिमी उत्तरी और दक्षिणी द्वार बंद कर दिए गए द्वारों पर उठे शिखर गिरा दिए गए और उसकी जगह गुंबद खड़े कर दिए गए गर्भ ग्रह मस्जिद के मुख्य दालान में परिवर्तित कर दिया गया मस्जिद में अभी भी पुराने खंभे इस बात के गवाह हैं मंदिर के पूर्वी मंडप में जो कि 125× 35 फुट का था पत्थर के चौके बिठाकर उसे एक लंबे चौक में बदल दिया गया इसी मंदिर विध्वंस के लपेटे में बिंदु माधव मंदिर का नाम भी आता है बिंदु माधव मंदिर को तोड़ा कर मस्जिद बनवाई गई थी, प्रसंग वश इस संबंध में ब्राह्मण कुल में जन्मे भूषण त्रिपाठी अर्थात वीर रस के कवि महाकवि भूषण द्वारा लिखित शिवा बावनी का एक छंद मुझे याद आ रहा है जो इस प्रकार है "कुंभकन्न असुर औतारी औवरंगजेब, कीन्ही कत्ल मथुरा दहाई फेरी रब की, खोदी डारे देवी देव सहर महल्ला बांके, लाखन तुरुक कीन्हें छूटि गई तब की, भूषण भनत भाग्यो काशीपति विश्वनाथ, और कौन गिनती में भूल गति भब की चारों वर्ण धर्म छोड़ि कलमा निवाज पढ़ि शिवाजी ना होतो तो सुनति होति सब की"
अर्थात कुंभकरण के अवतार औरंगजेब ने मथुरा में जनसंघार कराकर वहां इस्लाम को बलपूर्वक फैलाया उसने सभी देवी देवताओं के सुंदर मंदिर नगर और मोहल्ले नष्ट करके लाखों हिंदुओं को बलात मुसलमान बनाया यहां तक कि काशी को छोड़कर जब भगवान विश्वनाथ ही भाग खड़े हुए तो अन्य देवताओं की कौन गिनती मारे डर के सब जगत गति भूल गए ऐसे में यदि शिवाजी ना होते तो चारों वर्ण ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र अर्थात सभी हिंदुओं की सुन्नत होकर वैकलमा और नमाज पढ़ रहे होते,
हर हर महादेव
शेष अगले अंक में••••••••••
आपका ही
मनीष पांडेय
M•COM,LLB,MBA (HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
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