यूपीएससी जिहाद रसोडे में कौन-कौन था और कौन-कौन है
यूपीएससी के प्रशासनिक जिहाद पर भला सरकार मौन क्यों?
* जांच हो कि रसोडे में कौन-कौन था, और कौन है?
मनीष पाण्डेय
28 तारीख को सुदर्शन टीवी पर बिंदास बोल के माध्यम से एक कार्यक्रम प्रसारित होना था जिस पर सरकार द्वारा रोक लगा दी गई कार्यक्रम में सुदर्शन टीवी के प्रमुख सुरेश चौहान यूपीएससी मैं बड़ी तादाद में बढ़ रहे मुस्लिमों की संख्या एक पीछे छुपे हुए सत्य को उजागर करने मंशा थी किंतु कार्यक्रम प्रसारित होने से पहले ही सरकार की भ्रुकुटी पूरे कार्यक्रम पर जिस तरह तनी वह अपने आप में बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है खैर जब कार्यक्रम पर रोक लगाई गई तो मुझे बहुत विशेष आश्चर्य नहीं हुआ था क्योंकि वर्तमान में जिस तरह सरकार मुस्लिम तुष्टीकरण की ओर तेजी से बढ़ी है उसमें यह आश्चर्य कतई नहीं होना चाहिए कि अपने मुस्लिम वोट बैंक और बड़ी मात्रा में प्राप्त होने वाली फंडिंग को सरकार किसी भी दशा में छोड़ना नहीं चाहती है दुर्भाग्यवश जो कार्य कांग्रेश के काल में होता था अब वही कार्य भाजपा के काल में हो रहा है खैर मूल मुद्दा वह है जिसे सुरेश चौहान अपने कार्यक्रम के माध्यम से उठाना चाहते थे उसके पीछे की सत्यता क्या है, भयावहता क्या है इसे जानना प्रत्येक देशवासी के लिए विशेष कर हिंदू सनातन धर्म से जुड़े हुए लोगों को जानना बेहद आवश्यक है, प्रारंभिक मामला यह था कि यूपीएससी में अचानक इतनी बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज एक के बाद एक कामयाबी कैसे प्राप्त कर रहा है आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2019 में यूपीएससी में कुल 829 लोगों ने परीक्षाएं पास की थी जिस में मुस्लिमों की संख्या 42 थी वहीं 2018 में यह संख्या 28 थी सवाल यह है कि अचानक सिविल सेवा परीक्षाओं में मुस्लिमों की संख्या इतनी तेजी से क्यों बड़ी तथ्य निकलकर सामने आया कि यह सब सिविल सेवा परीक्षा में उनके द्वारा चुनी जा रहे इस्लामिक स्टडीज विषय को लेकर है सीधा-सीधा का हेतु इस्लामिक स्टडीज ही वह विषय है जिसके आधार पर मुस्लिम बड़ी संख्या में सिविल सेवा परीक्षा पास कर देश के महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान हो रहे हैं और यह सब उनकी यूपीएससी जिहाद की रणनीति का एक हिस्सा है यूपीएससी जिहाद का अर्थ जानने से पहले आपको यह जानना आवश्यक है कि इस्लाम में जिहाद का अर्थ क्या होता है मैंने अपने अनेक लेखो के माध्यम से इस्लाम के अनेक प्रकार से वर्णित जेहादो का वर्णन किया है, जिसमें प्रमुख रुप से जिहाद के मुख्य रूप से चार प्रकार बताए गए हैं जिहाद अल लफ्स अर्थात दिल से जिहाद जिहाद अल लासन अर्थात उपदेश वार्तालाप और मौखिक रूप से जिहाद जिहाद विल कलम अर्थात लेखनी द्वारा जिहाद और जिहाद विल सेव अर्थात संधि युद्ध और आक्रमण द्वारा जिहाद, कुरान में वर्णित जिहाद अल अकबर और जिहाद अल असगर मैं भी यही सब वर्णित किया गया है, इसके अलावा भी जिनकी यादों को हम अपने सार्वजनिक जीवन में प्रमुखता से देखते हैं उसमें रेप जिहाद लैंड जेहाद लव जिहाद भी प्रमुख रूप से है हम जिसे यूपीएससी जिहाद के नाम से जान रहे हैं वह भी इस्लाम का ही एक रूप है, प्रशासनिक सेवाओं में अन्य महत्वपूर्ण पदों पर तथा प्रोफेशनल क्षेत्रों में जैसे लाॅ क्षेत्र में अधिवक्ता के रूप में, भी अधिक से अधिक मुसलमानों की एंट्री जानबूझकर करवाई जा रही है, ताकि भी मुस्लिम जो दंगों में या राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं, उन्हें कानूनी सहायता मुसलमान अधिवक्ता द्वारा ही प्रदान की जा सके, पूरे विश्व को विशेषकर भारत को दारुल हरब से दारुल इस्लाम बनाने के लिए यह इस्लाम की साजिश का एक हिस्सा है, देखा जाए तो सभी जिहादो का समावेश इस्लाम की सबसे घातक हथियार अलतकिया में है फिलहाल अलतकिया का वर्णन विस्तार पूर्वक फिर कभी संक्षेप में कुल अलतकिया का अर्थ यही है कि अल तकिया के अनुसार यदि इस्लाम के प्रचार, प्रसार अथवा बचाव के लिए किसी भी प्रकार का झूठ, धोखा, द्वेष अपने वादे से मुकर जाना काफिरों (हिन्दू) का विस्वास जितना और उनको घात लगाकर पीछे से हमला करना यहाँ तक की कुरान की झूठी कसमे खाना – सब धर्म स्वीकृत है। ण अगर यूपीएससी जिहाद के पूरे प्रकरण को ध्यान से देखा जाए तो यह इस्लामिक राष्ट्रों आतंकी संगठनों द्वारा भारत के विरुद्ध चलाए जा रहे गजवा ए हिंद अभियान का एक भाग है, हदीस में स्पष्ट रूप से वर्णन है कि हजरत अबू हुरैरा (सहाबी- पैगंबर के साथी) फरमाते हैं कि इस उम्मत (मुस्लिम) में सिंध और हिंद की तरफ एक लश्कर रवाना होगा. अगर मुझे इस गजवा में शिरकत का मौका मिला तो शहीद कहलाऊंगा और अगर बच गया तो वह अबू हुरैरा होऊंगा, जिसे अल्लाह ने जहन्नुम की आग से आजाद कर दिया होगा.’
इसी प्रकार हदीस में पैगंबर मोहम्मद आगे कहता है कितुम्हारा एक लश्कर हिंद से जंग करेगा. मुजाहिदीन वहां के बादशाह को बेडि़यों में जकड़कर लाएंगे और फिर जब वह वापस पलटेंगे तो हजरत ईसा ( जीसस क्राइस्ट, मुसलमान इन्हें भी एकश्वेरवाद के तमाम पैगंबरों में से एक मानते हैं और यह भी मानते हैं कि कयामत से पहले उनका अवतरण होगा) को स्याम (वर्तमान सीरिया) में पाएंगे. इस पर अबू हुरैरा ने कहा कि अगर मैं इस गजवा में शामिल हुआ तो मेरी ख्वाहिश होगी कि मैं हजरत ईसा के पास पहुंच कर यह बताऊं कि मैं आपका (पैगंबर मोहम्मद) सहाबी हूं. इस पर रसूल अल्लाह मुस्कराए और कहा- बहुत मुश्किल, बहुत मुश्किल.’
मधु पूर्णिमा किश्वर जो कि एक जानी-मानी लेखिका और समाज सेविका है ने एक पत्र के माध्यम से इस बात की जांच कराने के आदेश केंद्र की मोदी सरकार व अमित शाह को दिए हैं की आईएस में पीसीएस परीक्षा में इस तरह बढ़ रहे जिहाद की जांच क्यों ना हो, मैंने यूपीएससी एसोसिएशन का वक्त भी देखा जिसमें उन्होंने सुदर्शन न्यूज़ के उक्त कार्यक्रम का विरोध किया है मैंने कुछ अन्य न्यूज़ चैनल पर यह भी देखा कि उन्होंने कहा कि यूपीएससी की परीक्षाओं में इस्लामिक स्टडीज नाम का कोई विषय ही नहीं है जिस पर इतना बवाल किया जा रहा है और उर्दू विषय को अब मुस्लिम छात्र लेना नहीं चाहते हैं इन सभी बातों का गहन विश्लेषण करना आवश्यक है, जो मैं आगे करूंगा आपको यह याद होगा कि कई बार उत्तर प्रदेश पीसीएस में भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं और इसके लिए कई बार छात्रों द्वारा तीव्र विरोध करते हुए आयोग का पुतला दहन भी किया गया है आरोप यह लगा की यूपीपीसीएस की परीक्षाओं में बड़े स्तर पर धांधली की जाती है जिसमें सरकार में बैठे हुए मंत्री तक शामिल है सर्वप्रथम बात तो यह कि जब ऐसे में केंद्र की भाजपा सरकार भी मुस्लिम तुष्टीकरण को एक बड़े अवसर के रूप में देख रही है तो क्या जो भ्रष्टाचार पीसीएस में हो सकता है या हो रहा है वह भ्रष्टाचार यूपीएससी में क्या नहीं हो सकता या हो नहीं रहा होगा, सीधा सीधा सा अर्थ है कि क्या कोई इस विषय की गारंटी दे सकता है कि यूपीएससी भ्रष्टाचार से मुक्त है क्या इस बात की विशेष जांच के सीबीआई करेगी, वैसे तो सरकार द्वारा आजादी के तुरंत बाद ही भारत में प्रशासनिक भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भारत सरकार ने 1947 में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम बनाया। साथ ही विभिन्न नियमावली भी तैयार की जैसे- अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1954 एवं केंद्रीय नागरिक सेवा नियम 1956 आदि। किंतु दिखाया गया कि समय के साथ साथ यह कानून भी अपनी महत्ता को दी चले गए और सिविल सेवा परीक्षाओं में धीरे-धीरे भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच गया, इसमें कहीं भी किसी प्रकार का कोई शक नहीं कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार की परंपरा सदियों पुरानी है अक्सर यह समाचार आपको प्राप्त होते ही रहते हैं कि लोकायुक्त द्वारा निचले स्तर के कर्मचारियों के यहां छापे डालने के दौरान करोड़ों की संपत्ति प्राप्त हुई और यह निचले स्तर के कर्मचारी चपरासी स्तर के होते हैं अब ज़रा आप सोचिए कि जब एक चपरासी के यहां करोड़ों की संपत्ति ऐसे भ्रष्टाचार के रूप में प्राप्त होती है तो उसके प्रशासनिक अधिकारी के पास कितनी संपत्ति होगी आयकर विभाग द्वारा कई प्रशासनिक अधिकारियों के यहां छापे डाले गए हैं और उनके पास अकूत संपत्ति या प्राप्त हुई है सवाल ये उठता है कि यह संपत्ति आई कहां से जब उन्होंने ईमानदारी के साथ यूपीएससी की परीक्षाएं पास की थी? आज बेशक मुस्लिमों के बहाने ही सही पर यूपीएससी यूपीपीसीएस के भ्रष्टाचार चेहरे को उजागर करने में कामयाबी प्राप्त हुई है जिसके माध्यम से यह प्रशासनिक जिहाद की तस्वीर उभर कर सामने आई है यह प्रशासनिक जिहादी नहीं यहां कूप में ही भांग पड़ी हुई है अर्थात पूरी की पूरी यूपी पीसीएस यूपीएससी भ्रष्टाचार के दलदल में लिपटी हुई है और यही भ्रष्टाचार प्रशासनिक जिहाद के रूप में हमारे सामने आया है इस विषय की एक बड़ी स्तर पर जांच होनी चाहिए इन मुस्लिमों को किस स्तर पर सहयोग और सहायता देकर या लेकर इन्हें प्रशासनिक अधिकारी बनाया जा रहा है प्रारंभिक स्तर पर, मेन स्तर पर ,अथवा इंटरव्यू में ,फिर अथवा वह कौन से विषय ले रहे हैं जिसके आधार पर, इन्हें अधिकतम अंको की प्राप्ति देकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है प्रशासनिक भ्रष्टाचार को मैं एक दूसरे एंगल से भी देखने की कोशिश करता हूं अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद तीन तलाक की समाप्ति के बाद एनआरसी और सीएए के भारी विरोध के बीच और निश्चित रूप से उस में राम मंदिर भी सम्मिलित है के पश्चात हिंदुस्तान का मुसलमान केंद्र की भाजपा सरकार से बुरी तरह नाराज है भाजपा के लिए इस डैमेज कंट्रोल को रोकने में बेहद कठिनाई का अनुभव हो रहा था तब कोरोना संक्रमित बीच मोहम्मद साद का उदय हुआ तब्दीली जमात का भी उदय किया गया काफी हो-हल्ला मचाया गया किंतु अंत में हुआ क्या आज तक मोहम्मद साद पकड़ा नहीं जा सका जबकि विकास दुबे को पकड़कर उसका एनकाउंटर कर दिया जाता है उससे पहले शाहीन बाग का प्रकरण हुआ शाहीन बाग के प्रमुख दोषी आज भाजपा में शामिल हो चुके हैं इन सब उदाहरणों को देखने के बाद इसमें कोई हैरत की बात नहीं है कि कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद जम्मू कश्मीर क्षेत्र में उपजे असंतोष को कंट्रोल करने के लिए तथा अन्य जो मुद्दे मैंने ऊपर वर्णन किए हैं उसे संभालने के लिए जो भाजपा मुस्लिम तुष्टीकरण की घोर विरोधी थी आज मुस्लिम वोट और मोटे फंड के चक्कर में उसी मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति को आगे बढ़ा रही है यूपीएससी में जो प्रशासनिक जिहाद वर्षों से कायम है जिसे निश्चित रूप से कांग्रेस ने भी बढ़ाया, उसे भाजपा अगर बढ़ा रही है तो उसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए मेरा मात्र इतना कहना यही है कि अगर भाजपा इस विषय पर पूरी तरह से निष्पक्ष है तो यूपीएससी तथा अन्य प्रशासनिक सेवाओं की जांच सीबीआई द्वारा करवाई जानी चाहिए क्योंकि अगर धुआं उठा है तो यह साफ है कि कहीं ना कहीं आग अवश्य लगी हुई है, और यह आग का एक छोर निश्चित रूप से जकात फाउंडेशन के मौलाना कलीम सिद्धकी कि और भी जाता हुआ दिखाई दे रहा है जहां से इस साल उसके द्वारा ट्रेंन किए गए 27 मुस्लिम यूपीएससी परीक्षा में सफल हुए हैं, जकात फाउंडेशन के मौलाना कलीम सिद्दीकी वही व्यक्ति है जो बड़े गर्व के साथ इस्लाम को सर्वोपरि बताते हुए बड़ी संख्या में हिंदुओं के धर्म परिवर्तन कराने की बात को स्वीकार करता है, वर्षों से यूपी स्कैम पर भी उंगलियां उठ रही है सवाल है कि इसकी जांच कर आएगा कौन? यक्ष प्रश्न यही है किचन यह यूपीएससी तथा अन्य प्रशासनिक सेवाओं में स्कैम हो रहा था यह प्रशासनिक जिहाद हो रहा था तब रसोडे में कौन-कौन था?
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
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