जब शाहजहां ने तुडवाया था काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रृंखला भाग 3
जब शाहजहां ने करवाया था मंदिर का विध्वंस
मनीष पाण्डेय 
भारत में मुगल आक्रांताओं का इतिहास बेहद डरावना घृणित विभक्त विलासिता अय्याशी और आतंक से परिपूर्ण है मोहम्मद बिन कासिम से लेकर जितने भी मुगल शासकों ने इस भारत की पवित्र पावन भूमि पर राज करने का मकसद मात्र और मात्र इस्लाम को फैलाना, शरीयत को लागू करना , भारत की संपत्ति को लूटना, और यहां के हिंदू धर्म स्थलों को ध्वस्त कर उसे विवादित बनाते हुए वहां पर मस्जिदों का निर्माण कर देना ,जो सेकुलर वादी हिंदू मुगलों द्वारा बनाई गई इमारतों स्थलों को मुगल स्थापत्य का शानदार नमूना बताते हुए थकते नहीं हैं उन्हें इस बात का ज्ञान होना चाहिए कि जिस जिस इमारत जिस भवन और जिस मस्जिद का आज वे यशोगान वे कर रहे हैं, उस भवन उस इमारत और उस तथाकथित मस्जिद के पीछे न जाने कितने हिंदुओं का रक्त और हड्डियां उसकी नींव पड़ी हुई है, भारत के अनेक वामपंथी इतिहासकारों,  मुगल साम्राज्य और मुगल आक्रांताओं की शान में न जाने कितने प्रशस्ति पत्र पुस्तक के रूप में लिख डाले, पर क्या असली इतिहास हमारे सामने कभी आया या कभी हमने असली इतिहास को जानने की कोशिश की? आज जब मैं काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला का भाग 3 लिखने जा रहा हूं तो मेरे समक्ष मुगल साम्राज्य के एक ऐसे शासक का चरित्र सामने उपस्थित हुआ है जिसके विषय में वामपंथी इतिहासकारों ने प्रशंसा के गीत गाए हैं जी हां मैं शाहजहां की बात कर रहा हूं, इतिहास का बर्नियर और मनुची ने शाहजहां को  कामातुर, विलासी, और पाशविक प्रवृत्ति का बताया है वे लिखते हैं कि शाहजहां एक कट्टर सुन्नी मुसलमान था जिसने बड़ी संख्या में हिंदुओं का धर्मांतरण और उन पर अत्याचार किया था  अपने पूर्वजों की भांति ही शाहजहां ने अनेक हिंदू मंदिरों को ध्वस्त किया था, अब्दुल हमीद लाहौरी ने अपनी पुस्तक बादशाहनामा में लिखा है कि महामहिम शहंशाह महोदय की सूचना में लाया गया कि अब अविश्वासियों अर्थात हिंदुओं के एक सशक्त केंद्र बनारस में उनके पिताजी के शासनकाल में अनेकों मंदिरों के निर्माण का काम प्रारंभ हुआ था किंतु वे अपूर्ण रह गए थे, और अविश्वासी अर्थात हिंदू अब उन्हें पूर्ण कर देने के इच्छुक हैं इस्लाम पंथ के रक्षक महामहिम ने आदेश दिया कि बनारस में उनके सारे राज्य में अनियंत्रित सभी स्थानों पर जिन मंदिरों का निर्माण प्रारंभ हो गया है उन्हें ध्वस्त कर दिया जाए इलाहाबाद प्रदेश से सूचना प्राप्त हो गई है कि जिला बनारस के 76 मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया है (बादशाहनामा अब्दुल हमीद लाहौरी एलियट एंड जॉनसन खंड 7 प्रश्न 36)
यहां यह बता देना आवश्यक है कि जब 1632 ईस्वी में शहंशाह ने काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने के लिए उस पर अपने चाचा "भाई जद" तथा सैनिकों को भेजा था तब वहां के हिंदू वीरों ने उसका डटकर मुकाबला किया था और उसने गुस्से में आकर बनारस के 76 मंदिरों को ध्वस्त कर दिया था, इसी कड़ी में तुगलक वंश, जो कि बाद में जौनपुर सल्तनत में शर्की वंश में परिवर्तित हुआ था के इब्राहिम शाह के बड़े पुत्र महमूद शाह द्वारा भी 1447 ईस्वी में काशी विश्वनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था और मंदिर को ध्वस्त करने के साथ ही साथ बनारस के अन्य मंदिरों को भी ध्वस्त कर दिया गया था, डॉक्टर टाइटस द्वारा लिखित इंडियन इस्लाम पृष्ठ संख्या 24 पर भी शाहजहां द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर के विध्वंस के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है शेष अगले अंक में
आपका ही 
अधिवक्ता मनीष पांडेय 
M•COM,LLB,MBA (HR) 
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
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