भारतीय संस्कृति और दर्शन की ब्रांड एंबेसडर रेनी लिन
भारतीय संस्कृति और दर्शन की ब्रांड एंबेसडर हैं रेनी लिन
मनीष पाण्डेय
भारतीय संस्कृति विश्व की सभी संस्कृतियों में महान और सर्वोपरि है यह भारतीय संस्कृति की वैभव ता ही है जिस से प्रभावित होकर विदेशी अक्सर इस ओर खींचे चले आते हैं जहां एक ओर भारतीय संस्कृति की वैभव ता व संपन्नता को देख विदेशी लुटेरे इस ओर आकर्षित हुए वहीं भारत की महान संस्कृति के विद्यमान ऐसे अनेक तथ्य थे जिनको देखकर यह विदेशी भारतीय रंग में ही रंग गए यह भारतीय संस्कृति का ही प्रभाव था कि उन्हें भारत की मातृभूमि अपनी मातृभूमि से अधिक प्यारी लगने लगी इतिहास में ऐसे अनेक चरित्र हैं जिन्होंने इस संस्कृति को सर आंखों पर बैठाया उसका गुणगान किया और जीवन पर्यंत भारत के दर्शन कला संस्कृति को अक्षुण्ण रखने का मनसा,वाचा कर्मणा से आत्मसात भी किया है, इतिहास पर अगर दृष्टि डालें तो अनेक विदेशी नागरिक भारत आए और भारत की कला दर्शन और संस्कृति को देखकर यही पर अपना सारा जीवन व्यतीत कर दिया अथवा उन्होंने अपना सारा जीवन संपूर्ण व्यक्तित्व ने ही अभूतपूर्व परिवर्तन कर लिया कुछ समय पहले आई हुई हॉलीवुड सुपरस्टार विल स्मिथ भारतीय संस्कृति और दर्शन से अत्याधिक प्रभावित थे, बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स तो भारतीय संस्कृति से इतनी ज्यादा प्रभावित हुई कि वह तो हिंदू धर्म में ही दीक्षित हो गई थी, बीटल ग्रुप के प्रसिद्ध गायक जार्ज हैरिसन, भारतीय संस्कृति और दर्शन से इतने ज्यादा प्रभावित हुऐ कि उन्होंने हिंदू सनातन धर्म को स्वीकार कर यहीं के होकर रह गए, अनेक विदेशी जुड़े हर वर्ष भारत में आकर यहां की संस्कृति से के ज्यादा प्रभावित होते हैं कि यही कि परंपरा अनुसार आपस में विवाह कर लेते हैं इस कड़ी में ब्रिटिश अभिनेता रसैल ब्रॉड ने प्रसिद्ध अभिनेत्री केटी पेरी से 23 अक्टूबर 2010 को रणथंबोर के टाइगर रिजर्व में विवाह बंधन में बने थे, हर वर्ष अनेक विदेशी यहां भारत आकर भारतीय परंपरा अनुसार विवाह करते हैं और जब अपने देश को जाते हैं तो भारतीय संस्कृति का गुणगान करते हुए जाते हैं, इसी कड़ी में अमेरिका की प्रसिद्ध लेखिका स्तंभकार और सामाजिक कार्यकत्री रेनी लिन, जो कि भारतीय संस्कृति और दर्शन से इतनी ज्यादा प्रभावित हुई कि उन्होंने हिंदू धर्म में दीक्षित होकर अपना नाम पूजा रख लिया 2009 से लेकर अब तक वे भारत में 37 बार आ चुकी है और विश्वास मानिए आने वाले समय में भी भारत में ही रह जाएं तो कोई बड़ी बात नहीं होगी, रेनी लिन न सिर्फ भारतीय संस्कृति और सभ्यता की दीवानी है बल्कि हिंदू सनातन धर्म पर हो रहे आघात से भी बुरी तरह आहत हैं गौ सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहने वाली रेनी निल गौ हत्या को भारतीय संस्कृति पर एक बड़ा हमला मानती हैं, उन्हें दुख होता है कि भारत गौ मांस का सबसे बड़ा निर्यातक है वह भारत आकर पूर्ण रूप से शाकाहारी बन चुकी है और हमेशा गौ संवर्धन और उसके विकास में लगी रहती है वह कहती है कि भारत की संस्कृति एक महान संस्कृति है जिसे यहां की मीडिया पूरे विश्व में गलत तरीके से प्रस्तुत कर रही है भारत की संस्कृति और दर्शन विश्व की संस्कृतियों में सर्वश्रेष्ठ है, हिंदू सनातन धर्म में बड़े पैमाने पूरे धर्म परिवर्तन से भी रेनी लिन बेहद आहत हैं वे कहती हैं कि जो कि हिंदू सनातन धर्म विश्व के सभी मजहब ओं से शांति प्रिय धर्म है इसीलिए अन्य मजहब इसमें धर्म परिवर्तन का कुचक्र रच रहे हैं उनके अनुसार हिंदू अपने ही देश में पीड़ित और शोषित है मुसलमानों की तुलना में उसे हाशिए पर रखा जाता है इतिहास में भी मुगलों का बखान किया गया है और वहां भी हिंदुओं को हाशिए पर रखा गया है, वह कहती है कि इस्लाम और ईसाई मजहब में ज्यादातर लोग मांसाहारी है किंतु हिंदू सनातन धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है जो पूर्णतया शाकाहारी सिद्धांतों पर टिका हुआ है इस्लाम और ईसाइयत द्वारा बड़े पैमाने पर हिंदू सनातन धर्म के लोगों का कन्वर्जन किया जा रहा है इसके लिए हिंदू समाज को एकजुट होना पड़ेगा, रेनी लिन है मानती है कि उनका जन्म हिंदुत्व के लिए ही हुआ है ,अवश्य ही वह पिछले जन्म में हिंदू ही रही होंगी, क्योंकि जिस तरह उनका मन हिंदू सनातन धर्म और हिंदुत्व के प्रति आकर्षित हुआ है वह तो इस ओर इशारा करता है कि उनका जुड़ाव कहीं ना कहीं भारत से अवश्य रहा है, लिन हिंदू हिंदुत्व और हिंदुस्तान की एक आवाज बंद कर जीना चाहती हैं और इसीलिए उन्होंने वॉइस फॉर इंडिया नाम से एक संगठन की भी रचना की है अनेक पुस्तकें लिखने वाली रेनी लिन कहते हैं कि भारत उनकी आत्मा में बसता है और अवश्य में पिछले जन्म में भारतीय ही थी अंतरराष्ट्रीय मीडिया और भारतीय मीडिया द्वारा भारत की गलत छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहती है ईसाइयत इस्लाम और वामपंथी विचारधारा के लोगों द्वारा भारत की छवि बिगाड़ने का कार्य किया है इसके लिए उन्होंने इंडिया स्ट्रप्ड नाम की पुस्तक भी लिखी है, निसंदेह इसमें कोई शक नहीं कि भारतीय संस्कृति विश्व की सभी संस्कृतियों में अपना सर्वोपरि स्थान रखती है विदेशी आक्रांता ओं द्वारा भारतीय संस्कृति को नष्ट करने के उद्देश्य से अनेकों बार इस पर आक्रमण किए गए किंतुकुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी। सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़माँ हमारा।। यूनान-ओ- मिस्र-ओ- रोमा, सब मिट गए जहाँ से ।
अब तक मगर है बाकी, नाम-ओ-निशाँ हमारा “ जय श्री राम वंदे मातरम हर हर महादेव भारत माता की जय
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
M COM,LLB,MBA (HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
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