सुनवाई 6वहां दिन
हिंदुओं की आस्था है कि अयोध्या में जन्मे थे भगवान राम सुप्रीम कोर्ट तर्कों की कसौटी पर इसे ना देखें-हिन्दू पक्ष
मनीष पांडेय
राजीव धवन नहीं सुधरोगे जब पूरी लाइफ नहीं सुधरे तो भला अब क्या सुधरोगे जी हां सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता और कांग्रेसी मानसिकता मैं जकड़े और अति होशियारी नामक के लिए कीङे द्वारा काटे गए, अधिवक्ता राजीव धवन अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं सुप्रीम कोर्ट द्वारा बार-बार टोके जाने के बावजूद उनका हालिया हो गया है दिल है कि मानता नहीं और दिमाग है कि काम करता नहीं कोई ना कोई छींटाकशी करना उनकी आदत में शुमार हो चुका है सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को ताक पर रखते हुए ऐसा दिन कोई नहीं जाता जिस दिन वे अनावश्यक रूप से टोका टाकी कर माहौल को खराब करने की कोशिश ना करते हो आज प्रातः जैसे ही कोर्ट शुरू हुई उनकी यह बीमारी फिर से उबर आई जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई रामलला विराजमान के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन को उन्होंने टोकते हुए कहा कि वेदनाथन का ध्यान सिर्फ दिए गए न्यायालय के निर्णय पर यह कोई तथ्यात्मक बात हुई रख नहीं रहे साक्ष्य व सबूतों से तो वह कोसों दूर है, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने लगभग डांटते हुए राजीव धवन को एक बार फिर से चेताया कि आप पहले दिन से ही इस तरह की हरकतें कर रहे हैं क्या मतलब है इसका संविधान पीठ ने कहा कि हम अनावश्यक रूप से आप की दखलंदाजी नहीं चाहते हैं जब आपकी बारी आएगी तो साक्षी रखिएगा तब रामलला विराजमान के अधिवक्ता द्वारा बहस को जारी रखते हुए स्कंद पुराण में वर्णित अयोध्या महात्म्य कसार कोर्ट के सामने रखना शुरू किया संक्षेप में मैं यहां स्कंद पुराण में वर्णित राम जन्मभूमि स्थान के साक्ष्य को रख रहा हूं स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में लिखा हुआ है रामकोट मे एक राम मंदिर था और 12वीं और 13वीं शताब्दी में वहां हिंदू पूजा और अर्चना करने के लिए आया हुआ करते थे रामलला विराजमान के अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने ब्रिटिश सर्वाइवर रॉबर्ट मांटगोमरी मार्टिन द्वारा लिखित एक स्केच या कहे पुस्तक का वर्णन भी किया 1838 में लिखी गई पुस्तक जिसमें वह स्पष्ट रूप से लिखते हैं कि मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं कि मस्जिद राम कोठी के अवशेषों पर ही बनाई गई थी उसमें प्रयुक्त स्तंभ राम मंदिर से ही निकाल कर वहां लगाए गए थे वहां चित्र आकृतियों को बाबर के आदेश पर ही मिटा दिया गया था माइटी द्वारा अपनी रिपोर्ट में दर्ज किया गया है कि ईसा मसीह के जन्म के 57 साल पहले ही राम मंदिर का निर्माण हो चुका था अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए रामलला विराजमान के वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा यह कहा गया कि जब अयोध्या में बौद्धों का राज था तभी से शहर का पतन शुरू हुआ राजा विक्रमा दित्य द्वारा 378 मंदिरों का निर्माण हुआ जिसमें राम जन्मभूमि अभी मंदिर है बौद्ध काल में ही मंदिरों को तोड़कर मस्जिदों का निर्माण हुआ जिसमें राम जन्मभूमि मंदिर भी आता है वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा पुरातत्व विभाग द्वारा 1863,1864,1865, की रिपोर्टों को भी संक्षेप में पूरे कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया गया रामलला विराजमान द्वारा उत्खनन में प्राप्त कस्तूरी स्तंभ का भी उल्लेख किया गया1608-1611 मैं अंग्रेज व्यापारी विलियम फिंच व विलियम हॉकिंस, जोजेफ टाईपैंथर,सेन्स बेकर,आदि की यात्रा वृतांतो के बारे में भी वर्णन किया जिसमें अयोध्या के संबंध में उसने काफी कुछ लिखा है मित्रों यह यात्रा वृतांत विलियम फास्टर द्वारा अर्ली ट्रैवल टू इंडिया नामक पुस्तक में वर्णित है, मित्रों विलियम फिंच जब भारत आए तो उन्होंने अध्याय की भी यात्रा की थी बेहद बारीकी से उन्होंने राम जन्मभूमि के खंडहरों का अध्ययन किया था तत्पश्चात फिंच ने कहा था कि हिंदुओं को यह विश्वास है कि भगवान राम ने हजारों वर्षों पहले यहां जन्म लिया था वही पादरी जोजेफ टाइपैंथर (1766-1771) ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बाबा ने राम मंदिर तोड़कर वहां पर मस्जिद का निर्माण किया और मस्जिद बनाने के लिए उसने मंदिरों के स्तंभों का प्रयोग किया था दीपेंद्र ने आगे लिखा है कि हिंदुओं ने मुसलमानों से मंदिर का स्थान वापस लेने के लिए बहुत प्रयास किए हैं हिंदुओं ने हर प्रकार से कठिनाई को सहते हुए मंदिर स्थल में जा कर पूजा की है वह अपने कार्य में सफल होकर पूजा करते रहे हैं हिंदुओं ने मस्जिद के अंदर एक चबूतरे को नए सिरे से बनाया है जिसकी वे लोग तीन बार परिक्रमा करते हैं टाइपैन्थर आगे लिखते हैं कि रामनवमी का उत्सव त्योहार अयोध्या बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है सारे देश हिंदू वहां का परिक्रमा करते हैं वही हंस बेकर की पुस्तक अयोध्या 1948 का भी उल्लेख करते हुए रामलला विराजमान के वरिष्ठ अधिवक्ता वैद्यनाथन महोदय ने हंस ब्रेकर को उद्धृत किया हंस बेकर ने अपनी पुस्तक अयोध्या में लिखा है कि जहां राम ने धरती पर "धारण किया था वहां पर एक प्राचीन वैष्णो मंदिर बना हुआ था इसी जन्म भूमि को विदेशी आक्रमणकारी बाबर ने तोड़कर एक मस्जिद बनवा दी और मीर बाकी ने इस मस्जिद के निर्माण में 14 काले पत्थरों से बने स्तंभ भी लगाए हैं स्तंभ मुस्लिम संत मूसा आशिकाना की कब्र के पास उलटे खड़े हुए हैं कहा जाता है कि इसी संत ने बाबर को मस्जिद बनाने के लिए प्रेरित किया था उसी का एक अन्य नमूना है दरवाजे पर लगा कुंडा निकटवर्ती टीवी पर बने जन्म स्थान मंदिर में रखा हुआ है जन्म भूमि मंदिर देश के उन प्राचीन मंदिरों में से एक है जो 11वीं शताब्दी में ही अस्तित्व में हैं ,शाम होते-होते एक बार फिर शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड टकराव तब दिखाई दिया जब जब न्यायालय ने यह कहा कि 1945 में शिया वक्फ बोर्ड ने माना था कि था कि वहां पर राम मंदिर है इस पर राजीव धवन ने कहा कि हां 1946 में हमने इसके विरुद्ध न्यायालय में वाद भी डाला था, बाबरनामा का भी उल्लेख हुआ मंदिर बाबर ने चुड़वाया नहीं तर्क वितर्क हुए बाबरनामा से यात्रा वृतांत के कुछ पन्ने गायब हुए इस पर भाई काफी गर्मा गर्मी वाली बहस हुई ,और अंत में रामलला विराजमान की ओर से सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट रूप से कह दिया गया कि यह हिंदुओं का विश्वास है कि भगवान प्रभु श्री राम अयोध्या में ही जन्मे थे ऐसे में सुप्रीम कोर्ट इसे बार-बार तर्कों की कसौटी पर ना कसे,मित्रों कोर्ट में कभी कभी फालतू के सवाल पूछ कर हिंदू आस्थाओं के साथ खिलवाड़ करता है उनको यह पूछने की आवश्यकता है कि क्या सबूत है कि बाबर ने ही मंदिर को ध्वस्त करवाया, अजब गजब सवाल है सुप्रीम कोर्ट के चाहे बाबर के सेनापति मीर बांकी ने गिर वाया या अन्य किसी ने गिराया ध्वस्त तो मंदिर ही हुआ ना, सुप्रीम कोर्ट को यह देखना चाहिए कि वहां मस्जिद को ध्वस्त कर उसी स्थान पर एक मस्जिद रूपी ढांचे को खड़ा किया गया था न्यायालय को हमने पूरे साक्ष्य और सबूतों के साथ पूर्व में भी यह बताया है कि वह स्थान भगवान प्रभु श्री राम का जन्म स्थान है, दुर्भाग्य है कि कोर्ट 59 और सबूतों और बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दे रही है और सिर्फ नेशनल इंटीग्रेशन के चक्कर में पड़ी हुई है सुप्रीम कोर्ट से विनम्र निवेदन यही कि अब हिंदुओं की आस्थाओं के साथ खिलवाड़ बंद होनी चाहिए और सम्मान राम जन्मभूमि का निर्णय हिंदू पक्ष में कर देना चाहिए अन्यथा ***** वही होई जो राम रचि राखा, जी हां विध्वंस के बाद ही निर्माण होता है यही जीवन का सत्य है, इस प्रकार पूरे दिन की सुनवाई की समरी मैंने आपके सामने प्रस्तुत कर दी है पिछले दो-तीन दिनों से निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा यह लगातार कहा जा रहा था रामलला विराजमान के देवता कुछ साक्ष्य तथ्य प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं परंतु जिसकी प्रारंभ आज रामलला विराजमान की और अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन द्वारा कर दिया आगे क्या होता है यह अब देखने लायक होगा
आपका ही
मनीष पांडेय
अधिवक्ता
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
विशेष: जी हां आज कुछ विशेष है और विशेष यह है कि सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान के अधिवक्ताओं द्वारा विलियम फिंच विलियम हॉकिंस विलियम फास्टर या फिर जोजफ़ टाइफेंथर ,रॉबर्ट मार्टगुमरी मार्टिन की स्केच या किताब का वर्णन किया वह न्यायालय द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों में उसका वर्णन है और उसी आधार को लेकिन मैंने यहां अपने पोस्ट में लिखा है प्रयास यही है कि जो भी तथ्य दूं,वह सटीक हो विश्वसनीय हो आपके सामने आने चाहिए चाहे जैसे भी , आगे भी कोशिश यही रहेगी कि जो भी जानकारी दूं, उस में किंचित मात्र भी कहीं से गलती ना हो बाकी सब ठीक है प्रतीक्षा करते हैं कल की जय श्री राम वंदे मातरम हर हर महादेव
राष्ट्रहित के लिए आवश्यकःसमान नागरिक संहिता लेखक - मनीष कुमार पाण्डेय अधिवक्ता पत्रकार एम0काॅम0. , एल0एल0बी0, एम0बी0ए0 (एच0आर0) प्रदेश प्रवक्ता अखिल भारत हिन्दू महासभा उ0प्र0. ऽ शरीयत अदालतो मुस्लिम पसर्नलाॅ बोर्ड जैसी संस्थाओं पर लगे बैन कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक समारोह में कहा था है कि वे चाहते है कि देश में ऐसे कानूनोे को वे समाप्त करना चाहते है जिनकी प्रासंगिकता वर्तमान समय में लगभग समाप्त हो चुकी है उन्होने यह भी कहा कि ऐसे कानूनो को एक दिन में एक कानून समाप्त करने की उनकी मंशा है अर्थात वे चाहते है कि एक दिन में एक कानून की समाप्ति की जाऐ प्रधान मंत्री जी की सोच बिल्कुल सही है हम भारतवासी सैकड़ो वर्षो से ऐसे कानूनो को क्यों ढोऐ जो घिस पिट चुके है जो सभ्य समाज के लिए नासूर बन चुके है ऐसे कानून जो हमें राष्ट्रीयता नही बल्कि गुलामी,राष्ट्रद्रोह की ओर ढकेलती हो निश्चित रूप से ऐसी व्यवास्थाओं कानूनो को समाप्त कर उसकी जगह नये कानूनोे का सृजन करना ही राष्ट्रहित के लिए आवश्यक होगा परन्तु तब बड़ा आश्चर्य होता है जब राष्ट्र के ...
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