कांग्रेसी सत्ता के दलाल देव मुरारी बापू

कांग्रेस, सत्ता, दलाली,मक्कारी, लोभीबाबा, और देव मुरारी बापू
मनीष पाण्डेय 
देव मुरारी बापू हो सकता है यह नाम बहुत लोगों को पता ना हो, किंतु आजकल मध्य प्रदेश की जनता इस नाम को बखूबी जानने लगी है, और हां अब मथुरा वाले भी जानने लगे हैं, क्योंकि कल ही मथुरा पुलिस द्वारा उनके विरुद्ध सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने के दृष्टिकोण से उन पर 153a 153b आदि धाराओं को लगाकर जेल भेजने की तैयारी करने का प्लान शुरू कर दिया है, मेरी दृष्टि में देव मुरारी बापू एक ऐसे असंत हैं जिन्हें सत्ता का दलाल कहीं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी, सत्ता किसी की हो यह दलाली करने अवश्य पहुंच जाएंगे, वैसे तो यह सामान्य सी बात है न जाने कितने ऐसे व्यक्ति/संत इस पृथ्वी पर विद्यमान है, जिनको सरकार बदलने से कोई चिंता नहीं होती, सरकार जिसकी होगी दलाली उसी की शुरू हो जाएगी, किंतु दुख और ग्लानी उस समय होती है, जब कोई संत वेशधारी व्यक्ति सत्ता की दलाली और पद लोलुपता में इतना अंधा हो जाए कि अपनी सारी मर्यादा भूल कर, उसे तार-तार करता हुआ बस किस तरह सत्ता की मलाई खाए जाए दिन रात इसी में डूबा रहता है, देव मुरारी बापू की दलाली का प्रारंभ होता है अयोध्या से, कहने को तो देव मुरारी बापू एक कथा वाचक हैं अयोध्या में कोई रहने का निश्चित ठिकाना नहीं था, कभी इस मंदिर तो कभी उस मंदिर, जहां स्थान मिल जाए यह प्रवृत्ति मैंने बहुत से साधु संतों में देखी है नेताओं के साथ फोटो खिंचवाने का, अगर नेता बड़ा हो तो फिर कहना ही क्या, देव मुरारी बापू मैं भी यही लत विद्यमान थी कुछ ना कुछ ऐसे करते रहना कि वह आए दिन पेपरों की हेडिंग बनी रहे और इसी के चलते हुए कुछ समय तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज द्वारा स्थापित हिंदू युवा वाहिनी के पदाधिकारी भी बने, फिर एकाएक पता नहीं क्या हुआ शायद वो दाल नहीं गली तो उन्हें राम मंदिर की याद सताने लगी बापू कोर्ट के पूर्व जज आलोक बसु जो कि अयोध्या में निरंतर आकर राम मंदिर के नाम पर सुलह समझौता और मध्यस्था कराने के लिए प्रयासरत थे नागरिक समझौता समिति के प्रवक्ता बन गए, उक्त समझौता समिति द्वारा सुलह समझौता और मध्यस्थता करवा कर मंदिर और मस्जिद बराबर में बनवाने का एक जबरदस्त प्लान था, मंशा में दोष था, इसलिए जबरदस्त विरोध हुआ, जस्टिस पलोक बसु देव मुरारी बापू और भी अन्य कई लोग पूरी तरह कांग्रेस और सपा के इशारे पर कार्य कर रहे थे सौभाग्य वश इनकी लंका में आग लगाने का कार्य मैंने ही किया था और अंत समय तक किया जब तक कि इनके पांव अयोध्या से उखड़ नहीं गए दुर्भाग्य से आज जस्टिस पलोक बसु इस दुनिया में नहीं है किंतु उनकी आत्मा जहां कहीं भी होगी निश्चित रूप से मुझे कोस रही होगी, तो कहने का आशय यह है कि देव मुरारी बापू उसी गुट के एक खास मेंबर हुआ करते थे, कालांतर में जब इस समिति के लोगों को लगने लगा कि उनका जहाज बस डूबने ही वाला है तो आपसी मतभेद पैदा हो गए, मतभेद पैदा होने के क्या कारण है, हो सकता है जिस बारगेनिंग की मंशा यह लोग पाले बैठे थे, वह कांग्रेसी सपा वाले कर ना पाए हो? या जितना पेमेंट की बात हुई हो वह पेमेंट ना दे पाए हो, और अथवा जो पद लोगों द्वारा मांगे गए थे वह पद की पूर्ति कांग्रेसो सपा वाले ना कर पाए हो, मेरा यह अंदाजा गलत नहीं हो सकता क्यों उसका वर्णन आगे आने वाले स्थितियों में जब मैं करूंगा तो आप स्वयं समझ जाएंगे खैर बड़े बेआबरू होकर निकले तेरे कूचे से अयोध्या रास नहीं, आई क्योंकि यहां का प्लान फेल हो चुका था, तो बापू बढ़ चले मध्यप्रदेश की ओर मनसा वाचा कर्मणा से कांग्रेसी तो थे ही, किंतु जब माहौल को शिवराज सिंह चौहान के पक्ष में देखा तो उन्हीं की ओर मुड़ गए, चुनावों का समय था ,देव मुरारी बापू और उनके साथ बड़े मूर्धन्य संत जैसे कंप्यूटर बाबा मिर्ची बाबा लौकी बाबा, कद्दू बाबा, और उसी में देव मुरारी बापू भी सभी ने मिलकर एक जबर्दस्त अभियान भाजपा के पक्ष चलाया भाजपा ने भी जमकर मलाई लोगों के बीच बाटी, कंप्यूटर बाबा को नर्मदा न्यास बोर्ड के रूप में राज्यमंत्री का दर्जा मिल गया, तो उनके सपने भी हिलोरे मारने लगे हेलीकॉप्टर मांगने लगे, ड्रोन मांगने लगे, मंत्रालय में बैठने के लिए कमरा तक मांगने लगे, मिर्ची बाबा भी परेशान उन्होंने भी घोषणा कर दी कि अगर दिग्विजय सिंह हार गए तो मैं जल समाधि ले लूंगा यह घोषणा करते वक्त मिर्ची बाबा को कहीं से यह नहीं लगा था कि दिग्विजय सिंह वास्तव में चुनाव हार जाएंगे, लेकिन साहब होनी को कौन टाल सकता है "होई है वही जो राम रचि राखा" दिग्विजय सिंह चुनाव हार गए लोगों ने मिर्ची बाबा को बहुत ढूंढा लेकिन मिर्ची बाबा फरारी काट गए,बचे देव मुरारी बापू उनके हाथ में क्या आया? बाबाजी का ठुल्लू, खैर साहब माहौल बदला विधानसभा के चुनाव एक बार फिर सिर पर थे पाला बदल चुका था, सारे बाबा कांग्रेसी हो चुके थे ,कांग्रेस ने भी वक्त की नजाकत को समझा, और बाबाओं पर धन लुटाना शुरू कर दिया, मरता क्या न करता चुनाव का जो समय था, चुनाव निपटते निपटते तक बाबाओं को हराम की खाने की आदत पड़ चुकी थी, कांग्रेस भी बड़ी चालाक निकली चुनावों तक तो उसने संभाल लिया, लेकिन चुनाव के बाद उसने कंप्यूटर बाबा मिर्ची बाबा लौकी बाबा कद्दू बाबा और देव मुरारी बापू जैसे संतो को बाहर का रास्ता दिखा दिया, बाबा कुपित? ना इधर के रहे ना उधर के अब जाएं तो जाएं कहां इसीलिए उन्होंने अपना दंड और कमंडल अबकी बार कांग्रेस के विरुद्ध उठा लिया इन सब में अभागे सबसे बड़े अभागे जो सिद्ध हुए थे वह देव मुरारी बापू ही थे मेहनत इतनी कि अंत में माया मिली ना राम सो घोषणा कर डाली, अगर मुझे सम्मान नहीं मिला तो आत्महत्या कर लूंगा, देव मुरारी बापू मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिले और गौ संवर्धन आयोग का अध्यक्ष बनाने के लिए अल्टीमेटम तक दे डाला और कहा कि अगर 18 अगस्त तक मांग नहीं मानी गई तो वे आत्महत्या कर लेंगे, मीडिया के सामने तब देव मुरारी बापू ने कहा था कि क्योंकि मेरी कथाएं चल नहीं पा रही है, नहीं चल पा रही है का अर्थ यह होता है कि जबसे उन्होंने कांग्रेस की चाटुकारिता शुरू कर दी है तब तक भाजपा वालों ने उनकी कथाएं करवाना बंद कर दिया था तब देव मुरारी बापू ने कहा इसीलिए कांग्रेसी मुझे सम्मान दें क्योंकि मैंने कांग्रेश के चुनाव में काफी कार्य किया है, ज्ञातव्य है कि देव मुरारी बापू ने कांग्रेस के लिए लोकसभा और उसके उपरांत विधानसभा में जमकर कार्य किया था उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनावों में कांग्रेस के लिए मैंने कार्य किया था इसलिए लोग बतौर मुझे कथावाचक अब नहीं बुलाते है अब कथा की दुकान उनकी चलती नहीं थी, शटरडॉउन हो चुका था, बेरोजगारी की भरपाई कांग्रेस को करनी ही पड़ेगी, देव मुरारी बापू का स्पष्ट रूप से कहना था कि जो कि चुनावों में उन्होंने बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाया था इसलिए उसको इसका इनाम मिलना चाहिए और कम से कम कैबिनेट मंत्री का दर्जा उन्हें दिया जाना चाहिए, मुख्यमंत्री कमलनाथ जी पशोपेश में पड़ गए कि अब क्या होगा बाबाओं को ना तो उगलते बनता है ना हीं निगलते, खैर कमलनाथ भी राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं जो उनके दिमाग में जबरदस्त प्लान कौंध ही गया, और उसी प्लान की पूर्ति कराने के लिए उन्होंने देव मुरारी बापू के साथ एक डील की, वही डील जो राम जन्म भूमि के मामले में हुई थी इस बार वह डील कृष्ण जन्म भूमि के मामले में हुई, देव मुरारी बापू को इस नए प्लान के तहत मथुरा भेजा गया, कृष्ण जन्म भूमि के विवाद को जबरदस्त हवा देकर कांग्रेस के पक्ष में करने का, याद रखियेगा राम जन्म भूमि के मामले में भी कांग्रेस द्वारा कई अहम मोड़ पर लोगों को आगे करके इसे अपने पक्ष में पूरी तरह से करने का प्लान बनाया गया था किंतु जब मलाई काटने का समय आया तो वह कांग्रेस के पाले में ना कर भाजपा के पाले में चला गया, अबकी बार ऐसा ना हो इसलिए उसने बड़ा फूंक-फूंक कर कदम मथुरा में रखना शुरू किया था और इसी अपनी विशेष योजना की पूर्ति के लिए उन्होंने देव मुरारी बापू को मथुरा भेजा, देव मुरारी बापू ने अपना काम भी पूरी शिद्दत के साथ करना शुरू कर दिया था सफलताएं भी मिलनी शुरू हो गई थी अब भला यह बात भाजपा को क्यों पचती, कि कांग्रेस और उसके द्वारा लाए गए मोहरे देव मुरारी बापू ,सारी मलाई को अकेले ही चट कर जाए, सो लगा दी धाराएं सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का प्रयास करने के जुर्म में, सवाल यह उठता है कि अब कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी जैसे विवादों में अब आगे क्या होगा एक और 1991,का उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 ( Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 जिसमें कहा गया है कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था वो आज, और भविष्य में, भी उसी का रहेगा. दूसरी ओर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष, कृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज का बयान यह कह रहा है कि राम जन्म भूमि की तरह कृष्ण जन्म भूमि में अब कोई आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं है हमारा पूजा स्थल अलग है उनका पूजा स्थल अलग अब ऐसे नहीं इस देश की हिंदुत्ववादी जनमानस को करना क्या चाहिए मेरी दृष्टि में न्यायालय का सहारा तो लेना ही चाहिए साथ ही साथ हिंदू जनमानस को एक वृहत्त आंदोलन के लिए तैयार ही रहना चाहिए, भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद यह कदापि नहीं चाहेगी कि कृष्ण जन्मभूमि और मथुरा काशी का मुद्दा उसके हाथ से निकल जाए वह यह भी नहीं चाहेगी कि कोई दूसरा हिंदूवादी संगठन इसे अपने पाले में कर ले, कांग्रेश तो खैर कदापि नहीं जैसा कि श्री राम जन्मभूमि में किया है राम जन्मभूमि में मूल परिश्रम हिंदू महासभा का किंतु हिंदू महासभा के मूल परिश्रम, निर्मोही अखाड़े के 400 साल की निरंतर लड़ाई, अन्य हिंदूवादी संगठनों द्वारा समय-समय पर किया गया, आंदोलन को धता बताते हुए भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद ने राम जन्म भूमि पर कब्जा कर लिया, वैसा ही वह कृष्ण जन्मभूमि और काशी और मथुरा विवाद में भी करना चाहेगी इसीलिए हिंदू महासभा सहित अन्य हिंदूवादी संगठनों को बेहद सावधानी के साथ अपने कदम बढ़ाने होंगे, जय श्री राम वंदे मातरम हर-हर महादेव जय श्री कृष्णा 
आपका ही 
मनीष पांडेय 
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा

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