उत्तराखंड का लैंड जिहाद मजार जिहाद लव जिहाद और सांप्रदायिक दंगे तथा आचार्य प्रमोद कृष्ण की भूमिका
उत्तराखंड का लैंड, मजार और लव जिहाद ,सांप्रदायिक दंगे, और आचार्य प्रमोद कृष्णन
मनीष पांडेय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रमोद कृष्णन के कल्कि धाम शिलान्यास कार्यक्रम में प्रमोद कृष्णन की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने काफी संघर्ष किया है और यह कि वह ऐसी धार्मिक आध्यात्मिक कार्यों में वे कितनी मेहनत से लगे रहते हैं।अब सवाल यह उठता है की भला कौन सा संघर्ष? किसके विरुद्ध? कौन से आध्यात्मिक कार्य? सनातन धर्म का चोला ओढ़कर मुस्लिम मुशायरों में जाकर अल्लाह हू अकबर अल्लाह हू अकबर, मौला मौला या अली या अली का गान करने वाले आध्यात्मिक कार्य प्रमोद त्यागी जिन्हें आज आचार्य प्रमोद कृष्णन के रूप में जाना जाता है, को कांग्रेस से हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखला दिया गया, इतिहास में जाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि लगभग यह सभी को ज्ञात है कि जब कोई जहाज डूबने को होता है तो सबसे पहले उसे जहाज के चूहे अपने आप को बचाने के लिए समुद्र में छलांग लगा देते हैं, प्रमोद कृष्णन ऐसे ही चूहे हैं, आचार्य प्रमोद कृष्णन कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं, और दोनों बार चुनाव हारे हैं, निश्चित रूप से वे आगे भी चुनाव लड़ने के आकांक्षी हैं किंतु समस्या यह है कि वे जिस संगठन में थे , उस संगठन से अब चुनाव जीतने की गारंटी बिल्कुल भी नहीं है, और दुर्भाग्य से उनके आसपास और जितने भी संगठन हैं वे भी उन्हें चुनाव नहीं जितवा सकते हैं तब ले देकर सिर्फ भाजपा ही ऐसा संगठन बचता है जो उनके लिए लोकसभा का दरवाजा खोल सकता है, किंतु समस्या यह थी कि जब तक आचार्य प्रमोद कृष्ण कांग्रेस में रहे उन्होंने सिर्फ भाजपा की आलोचना और उसे गरियाने का कार्य ही किया, कोई भी ऐसा मंच नहीं बचा जिस पर उन्होंने भाजपा को पानी पी पीकर गरिआया ना हो, अपने आप को हिंदू सनातन धर्म का झंडाबरदार बताने वाले आचार्य प्रमोद कृष्णन किस तरह के सनातनी हिंदू हैं यह बताने से पहले उनके द्वारा समय-समय पर हिंदू सनातन धर्मावलंबियों को किस तरह इस तरह से आलोचना की गई अपशब्दों का प्रयोग किया गया, उसे देखने के पश्चात यह बात समझ में आ जाती है की प्रमोद त्यागी की मानसिकता कितनी जहरीले कितनी जिहादी और कितनी सनातन द्रोही है
(१)कल्कि महाराज ने कैबिनेट मंत्री आजम खां को देशभक्त बताते हुए शिवसैनिकों को ‘गुंडा’ बताया था।
(२) चरण में बड़ी संख्या में हिंदुओं का पलायन हुआ, किंतु किंतु प्रमोद कृष्णन द्वारा सपा सरकार को जो रिपोर्ट प्रस्तुत की गई उसमें उन्होंने हिंदुओं को ही दोषी बताते हुए मुसलमान को क्लीन चिट दे दी और उसे रिपोर्ट को प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर ही कैराना पलायन मुद्दे को भाजपा ने जानबूझकर हवा दी, ताकि वोटों का ध्रुवीकरण किया जा सके,हमने गोपनीय रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है। कैराना घटना सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की खतरनाक साजिश है। दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए
(३)साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर पागल और मानसिक रुप से दिवालिया हो चुकी है।
प्रमोद कृष्णन ने मुशायरा के एक प्रोग्राम में यह कहा था कि मैं मुसलमान के प्रोग्राम में नहीं जाता हूं इंसानों के प्रोग्राम में जाता हूं, अब इसका अर्थ प्रमोद कृष्णन की दृष्टि में क्या हुआ क्या यह की मुसलमान ही इंसान है ?और बाकी सब लोग जानवर?
भेड़ की खाल में भेड़िया यह कहानी तो अपने अवश्य सुनी होगी प्रमोद कृष्णन का भी यही हाल है, आज अपनी राजनीतिक इच्छा के वशीभूत होकर जिस तरह उसने भारतीय जनता पार्टी का हाथ थाम कर सनातन हिंदू धर्म की जय बोल रहा है उससे प्रमोद कृष्ण कालनेमि ही नहीं बल्कि कहीं उससे आगे खड़े हुए हैं, प्रमोद कृष्णन का यह कालनेमि चेहरा इस देश के बहुसंख्यक हिंदुओं के सामने आना ही चाहिए उत्तराखंड के हल्द्वानी में जहां सांप्रदायिक हिंसा हुई है वहीं पर और अन्य मंचों पर भी अनेकों बार प्रमोद कृष्ण ने अपने मुशायराओं के मंच पर जो वक्तव्य दिए हैं उसे पूरे हिंदू समाज को अवश्य सुनना चाहिए,
(१)जो मोहम्मद का वह हमारा हो नहीं सकता,
(२) क्या अल्लाह को भगवान का देने से वह बदल जाता है
(३) मुसलमान होना ही वतन परस्ती का सबसे बड़ा सबूत है
(४) आचार्य प्रमोद कृष्णन ने किसी ऐसे ही मुशायरा के मंच पर कहा था कि यह ऐसी तंजीम है जिसे गांधी को हिंदू नहीं माना तो वह मुसलमान को भला हिंदुस्तानी कैसे मानेगी
(५) आज प्रमोद कृष्णन भाजपा के प्रिय बने हुए हैं किंतु यही प्रमोद कृष्णन द्वारा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक सभा में यह कहा गया था कि त्रेता में मामा मरीज हुए द्वापर में कंस मामा इसके बाद शकुनी मामा ने चल और प्रपंच रच कर पांडवों को बर्बाद कर दिया तीनों मामू का कमिना पन अगर निचोड़ दिया जाए तो इससे मिलकर शिवराज बनते हैं
(6) मुशायरे की ही एक मंच पर उन्होंने मोदी की नकल उतारते हुए कहा कि किसी शैतान का नाम ना लेना
(7) ऐसे ही किसी मुशायरा में उन्होंने कहा कि मुसलमान को डराया जाता है धमकाया जाता है बहकने की कोशिश होती है हम तलवार की धार पर हैं
(8) वर्ष 2018 वार्षिक हुसैनी डे बेंगलुरु के मंच पर उन्होंने कहा की जो ब्राह्मण होते हैं वही हुसैनी होते हैं
एक मुशायरा में प्रमोद कृष्ण ने यह कहा कि यजीदी इकट्ठा हो गए हैं इसलिए हुसैनिया को भी इकट्ठा होना पड़ेगा उनकी इस बात का अर्थ जरा विस्तार पूर्वक समझने और बतलाने की कोशिश करता हूं वास्तव में यजीदियों के बारे में कहा जाता है कि यह पंथ हिंदू सनातन धर्म की ही एक शाखा हुआ करती थी, अर्थात यह हिंदुओं का एक खोया हुआ पंथ है, अगर यह वीडियो के इतिहास और उनके धार्मिक क्रियाकलापों पर आप गहन दृष्टि डालेंगे तो आपको यह ज्ञात होगा कि यजीदी और हिंदुओं का कहीं ना कहीं कोई आपसी संबंध जरूर रहा है, क्योंकि यजीदियों के मंदिर के अंदर नागों की आकृति बनी होती है तथा यजीदियों का प्रभाव पवित्र चिन्ह मोर है ध्यान इस बात का दिन की इराक सीरिया आदि देशों में मर पाया ही नहीं जाता है कहा जाता है कि मोर चिन्ह भारत के तमिल देवता भगवान सुब्रमण्यम की परंपरागत चित्रों से मिलता है इसके अलावा उनके प्रतीक चिन्ह सूर्य भी है जिसमें 21 किरणें दर्शी गई हैं 21 की संख्या हिंदू सनातन धर्म में पवित्र मानी जाती है हिंदुओं की तरह ही भी हाथ जोड़कर नमस्कार भी करते हैं और हिंदुओं की तरह ही वे यज्ञ भी करते हैं तथा आरती के लिए थल एवं पूजा भी हिंदुओं की तरह ही करते हैं,
ऐसे में जब प्रमोद कृष्णन हल्द्वानी के मंच पर हुए मुशायरा में यह कहते हैं की एचडी इकट्ठा हो गए हैं इसलिए हुसैनिया को भी खट्टा होना पड़ेगा तो इस बात का स्पष्ट रूप से अर्थ यही निकलता है कि वह हिंदू बनाम मुस्लिम का वक्तव्य लेकर सांप्रदायिक दंगे कराने की पहल करते हैं, सोशल मीडिया पर प्रमोद कृष्ण को गुल शायद खान बताया गया था, यह कितना सही है अथवा गलत यह तो जांच का विषय है किंतु प्रमोद कृष्णन की हरकतें वक्तव्य क्रियाकलाप और मुस्लिम परस्ती उन्हें गुल शमद खान ही बतलाती है, सोशल मीडिया पर प्रमोद कृष्ण को त्यागी ब्राह्मण बतलाया गया है किंतु बड़ा आश्चर्य होता है कि वर्ष 2017 के लोकसभा चुनाव में उनके द्वारा दिए गए एफिडेविट में अपने पिता का नाम स्वर्गीय जसवंत सिंह बतलाया गया है, अब सवाल उठता है कि हल्द्वानी में सांप्रदायिक दंगे क्यों हुए? अगर देखा जाए तो जिस कारण से हल्द्वानी में सांप्रदायिक दंगे हुए वही कारण पूरे देश में मुसलमान द्वारा सांप्रदायिक दंगे किए जाने के प्रमुख कर्म में से एक है, लैंड जिहाद दूसरा लव जिहाद और तीसरा मजार जिहाद, उत्तराखंड में ल** जिहाद की भयावता इसी बात से समझी जा सकती है कि उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने पिछले 1 वर्ष में 5000 एकड़ से अधिक लैंड जिहाद के अंतर्गत हुई भूमि को मुक्त करवाया है वहीं मजार जिहाद के अंतर्गत उत्तराखंड सरकार द्वारा 1000 से ऐसे अधिक स्थानों को चिन्हित किया गया है जहां पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करके 1000 से अधिक मजारों का निर्माण करवा दिया गया है उत्तराखंड में लव जिहाद की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और आए दिन किसी न किसी लव जिहाद की घटना को लेकर उत्तराखंड में तनाव फैला रहा है, अब सवाल यह उठता है कि की इन घटनाओं के पीछे आखिरकार कौन साजिश रच रहा है, इन घटनाओं पर मुसलमान वास्तविक रूप से क्या सोचता है, गहन विश्लेषण करने के उपरांत या स्पष्ट होता है कि अधिकांश मुसलमान आज ही भी यही सोचता है कि मुगलों द्वारा काफिरों अर्थात हिंदुओं पर सैकड़ो वर्षों तक राज किया गया आज जब मुगलिया सल्तनत समाप्त हो चुकी है किंतु जिहादी और इस्लामी आतंकियों एवं उनसे जुड़े आतंकी संगठन उनके स्लीपर सेल और अधिकांश मुस्लिम जो संविधान को नहीं बल्कि शरीयत पर चलना चाहता है इस मुगलिया सल्तनत को वापस पाने के लिए इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए भारत को दारुल हद से दारुल इस्लाम बनाने के लिए अपनी गजवा ए हिंद की अवधारणा को लागू करने के उद्देश्य से लगातार किसी न किसी बहाने वह भारत को सांप्रदायिक दंगों की आग में झोंकना चाहता है और प्रमोद कृष्णन जैसे दोगले चरित्र के लोग इस आग में निरंतर घी डालने का कार्य कर रहे हैं, कल की धाम की शिलानाथ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जिस तरह प्रमोद कृष्णन की प्रशंसा की गई है वह निश्चित तौर पर पूरे हिंदू समाज के लिए न सिर्फ शर्म की बात है ,बल्कि आने वाले समय में हिंदुओं के लिए एक बेहद घातक कदम सिद्ध होने वाली है ,और साथ ही साथ भारत को दारुल हरब से दारुल इस्लाम बनाने , गजवा ए हिंद का स्वप्न देख पाल रहे जिहादी और इस्लामी आतंकियों के हौसलों को भी बढ़ाने वाली सिद्ध होगी
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
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