सूफीवाद का असली मकसद संपूर्ण विश्व का इस्लामीकरण
सूफीवाद का असली मकसद विश्व का इस्लामीकरण करना-
अभी हाल में माननीय प्रधान मंन्त्री नरेन्द्र मोदी जी वर्ड सूफी कान्फ्रेन्स में आतंकवाद से लड़ने के लिए सूफीवाद की आवश्यकता पर बल देते हुऐ उसे इस्लाम का असली चेहरा तथा, पे्रम ,इंसानियत और पता नहीं क्या -2 कह डाला, साथ में ये भी कहा कि धर्म को आतंकवाद में नहीं जोडना चाहिए ये बातें लिखते समय मेरे मन में भा0ज0पा0 का दोहरा चरित्र ठीक मामने आकर खडा हो गया है भा0ज0पा0 की राष्ट्रवादी नीति बड़ी ही निराली है जब सत्ता में नहीं होती तो राष्ट्रवाद का नारा लगा कर सत्ता में आने के लिए आतुर दिखाई पड़ती है पर सत्ता में आने के वह राष्ट्रवाद पर्दे के पीछे क्यो चला जाता है? वोट बैंक की राजनीति में राष्ट्रवाद गुम क्यों हो जाता है खैर बात करने है सूफीवाद की , मुस्लिम बैंक के चक्कर में प्रधानमंत्री महोदय ने सूफीवाद और राष्ट्रवाद का जो धालमेल कर लोगो के सामने परोसा है वह बेशक लोगो के लिए अति लुभवनी स्वादिष्ट डिश है बिल्कुल मेड इन चाईना के प्रोडेक्ट की तरह उपर से लुभावनी सस्ती पर अन्दर से बेहद घटिया यूजलेस मेटेरियल से बनायी गयी जिसकी कोई गारंटी नहीं । प्रधानमन्त्री के द्वारा सूफीवाद को इंसानियत का पैगाम इस्लाम का असली चेहरा जिस तरह बताया है वह बेहद हास्यास्पद साजिशों व षड़यन्त्रांे से भरा हुआ है किसके लिए खतरा है सूफी वाद वास्तविक रूप से सूफीवाद का असली चेहरा क्या है? इनबातों को समझना हर हिन्दू के लिए समझना बेहद आवश्यक है नही ंतो वह दिन दूर नहीं जब भा0ज0पा0 कांग्रेस मुक्त भारत करने के चक्कर में भारत का इस्लामीकरण करवा देगी प्रधानमन्त्री जी सूफियों को धर्मनिर्पेक्षता का अवतार गंगा जमुनी सरस्वती का वाहक संन्त कहकर वोट बैंक की जो गंन्दी राजनीति खेल रहे है उससे एक बढ़ा नुकसान पूर्व में भी हिन्दुओं को हुआ है और निश्चित रूप से आने वाले समय में होगा। सूफियों के बारे में प्रधानमंत्री जी ने जो बाते कहीं है वह बेहद बचकाना व इतिहास विरूद्ध है काश मोदी जी ने अपनी हिन्दूवादी छवि के साथ न्याय करते हुए देश के सामने सूफी वाद का असली वास्तविक चेहरा सामने रखा होता वे देश को बताते कि सूफीवाद में किस तरह हिन्दुत्व व हिन्दूओं को किस तरह क्षति पहुचायीं है जिन सूफियों को उन्होने सन्त , इंसानियत , मानवता का दूत बताया है कास वे ये भी बताते कि इन सूफियों से जुड़े गाजी व शहीद शब्द का अर्थ क्या है काश मोदी जी देश को ये बता पाते कि अपने आपको सूफी सन्त कहने वाले शहीद सालार मसूद गाजी की हकीकत क्या है लखनऊ के सूफी सन्त खम्मनपीर बाबा , दिलकुशा के शहीद कासिम बाबा जैसे सूफी सन्तों की असलीयत क्या है काश मोदी जी ये भी बता पाते कि सूफी सन्त मुइनुद्दीन चिश्ती की असलीयत क्या है सच तो यह है कि एक ओर जहाँ इस्लाम तलवार के बल पर पूरे विश्व में फैलाया गया वहीं दूसरी ओर बेहद धूर्तता , मक्कारी चालाकी जिसमें इनसानियत मानवता गंगा जमुनी सरस्वती धर्मनिर्पेक्षता का रंग मिलाकर इसे सूफियों द्वारा फैलाया गया कहने का अर्थ यह है कि बड़ी धूर्तता के साथ पहले सूफी किसी देश में घुसते थे वहाँ के लोगो को इन्सानियत मानवता प्रेम इत्यादि का जाल फेककर फसाते थे और फिर धर्मान्तरण लवजिहाद तथा इस्लामीकरण करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते थे ऐसे इन्सानियत का पैगाम देने वाले तथा कथित सूफियों की मजारे व कबरे भारत में यत्र तत्र सर्वत्र बिखरी पड़ी है सच तो यह है कि इस्लाम का बर्बर चेहरा और सूफीवाद का दिखावटी नर्म चेहरा दोनों एक दूसरे के पूरक है तथा दोनो का मकसद विश्व का इस्लामीकरण करना ही है बस रास्ते अलग-अलग है। अतः बिना किसी भ्रम धोखे छल या राजनीति में न पड़कर हिन्दू जनमानस को खुद ही असलीयत का पता लगाना चाहिए तभी सच्चे अर्थो में हिन्दू व हिन्दुत्व की रक्षा सम्भव है।
लेखक मनीष पाण्डेय प्रदेश प्रवक्ता अखिल भारत हिन्दू महासभा उ0प्र0।
अभी हाल में माननीय प्रधान मंन्त्री नरेन्द्र मोदी जी वर्ड सूफी कान्फ्रेन्स में आतंकवाद से लड़ने के लिए सूफीवाद की आवश्यकता पर बल देते हुऐ उसे इस्लाम का असली चेहरा तथा, पे्रम ,इंसानियत और पता नहीं क्या -2 कह डाला, साथ में ये भी कहा कि धर्म को आतंकवाद में नहीं जोडना चाहिए ये बातें लिखते समय मेरे मन में भा0ज0पा0 का दोहरा चरित्र ठीक मामने आकर खडा हो गया है भा0ज0पा0 की राष्ट्रवादी नीति बड़ी ही निराली है जब सत्ता में नहीं होती तो राष्ट्रवाद का नारा लगा कर सत्ता में आने के लिए आतुर दिखाई पड़ती है पर सत्ता में आने के वह राष्ट्रवाद पर्दे के पीछे क्यो चला जाता है? वोट बैंक की राजनीति में राष्ट्रवाद गुम क्यों हो जाता है खैर बात करने है सूफीवाद की , मुस्लिम बैंक के चक्कर में प्रधानमंत्री महोदय ने सूफीवाद और राष्ट्रवाद का जो धालमेल कर लोगो के सामने परोसा है वह बेशक लोगो के लिए अति लुभवनी स्वादिष्ट डिश है बिल्कुल मेड इन चाईना के प्रोडेक्ट की तरह उपर से लुभावनी सस्ती पर अन्दर से बेहद घटिया यूजलेस मेटेरियल से बनायी गयी जिसकी कोई गारंटी नहीं । प्रधानमन्त्री के द्वारा सूफीवाद को इंसानियत का पैगाम इस्लाम का असली चेहरा जिस तरह बताया है वह बेहद हास्यास्पद साजिशों व षड़यन्त्रांे से भरा हुआ है किसके लिए खतरा है सूफी वाद वास्तविक रूप से सूफीवाद का असली चेहरा क्या है? इनबातों को समझना हर हिन्दू के लिए समझना बेहद आवश्यक है नही ंतो वह दिन दूर नहीं जब भा0ज0पा0 कांग्रेस मुक्त भारत करने के चक्कर में भारत का इस्लामीकरण करवा देगी प्रधानमन्त्री जी सूफियों को धर्मनिर्पेक्षता का अवतार गंगा जमुनी सरस्वती का वाहक संन्त कहकर वोट बैंक की जो गंन्दी राजनीति खेल रहे है उससे एक बढ़ा नुकसान पूर्व में भी हिन्दुओं को हुआ है और निश्चित रूप से आने वाले समय में होगा। सूफियों के बारे में प्रधानमंत्री जी ने जो बाते कहीं है वह बेहद बचकाना व इतिहास विरूद्ध है काश मोदी जी ने अपनी हिन्दूवादी छवि के साथ न्याय करते हुए देश के सामने सूफी वाद का असली वास्तविक चेहरा सामने रखा होता वे देश को बताते कि सूफीवाद में किस तरह हिन्दुत्व व हिन्दूओं को किस तरह क्षति पहुचायीं है जिन सूफियों को उन्होने सन्त , इंसानियत , मानवता का दूत बताया है कास वे ये भी बताते कि इन सूफियों से जुड़े गाजी व शहीद शब्द का अर्थ क्या है काश मोदी जी देश को ये बता पाते कि अपने आपको सूफी सन्त कहने वाले शहीद सालार मसूद गाजी की हकीकत क्या है लखनऊ के सूफी सन्त खम्मनपीर बाबा , दिलकुशा के शहीद कासिम बाबा जैसे सूफी सन्तों की असलीयत क्या है काश मोदी जी ये भी बता पाते कि सूफी सन्त मुइनुद्दीन चिश्ती की असलीयत क्या है सच तो यह है कि एक ओर जहाँ इस्लाम तलवार के बल पर पूरे विश्व में फैलाया गया वहीं दूसरी ओर बेहद धूर्तता , मक्कारी चालाकी जिसमें इनसानियत मानवता गंगा जमुनी सरस्वती धर्मनिर्पेक्षता का रंग मिलाकर इसे सूफियों द्वारा फैलाया गया कहने का अर्थ यह है कि बड़ी धूर्तता के साथ पहले सूफी किसी देश में घुसते थे वहाँ के लोगो को इन्सानियत मानवता प्रेम इत्यादि का जाल फेककर फसाते थे और फिर धर्मान्तरण लवजिहाद तथा इस्लामीकरण करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते थे ऐसे इन्सानियत का पैगाम देने वाले तथा कथित सूफियों की मजारे व कबरे भारत में यत्र तत्र सर्वत्र बिखरी पड़ी है सच तो यह है कि इस्लाम का बर्बर चेहरा और सूफीवाद का दिखावटी नर्म चेहरा दोनों एक दूसरे के पूरक है तथा दोनो का मकसद विश्व का इस्लामीकरण करना ही है बस रास्ते अलग-अलग है। अतः बिना किसी भ्रम धोखे छल या राजनीति में न पड़कर हिन्दू जनमानस को खुद ही असलीयत का पता लगाना चाहिए तभी सच्चे अर्थो में हिन्दू व हिन्दुत्व की रक्षा सम्भव है।
लेखक मनीष पाण्डेय प्रदेश प्रवक्ता अखिल भारत हिन्दू महासभा उ0प्र0।
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