दलितस्तान द्रविड़स्तान के जनक अंबेडकर और पेरियार

दलितस्तान, दलितों के लिए पृथक निर्वाचन व्यवस्था और बौद्धपंथी डॉक्टर भीमराव
अंबेडकर भाग 1
*बौद्धिक आतंकवाद के जनक थे पेरियार
मनीष पाण्डेय
क्या यह सच है कि अम्बेडकर दलितों के लिए एक अलग राष्ट्र चाहते थे जैसे मुस्लिम पाकिस्तान चाहते थे? फरवरी 2020 में गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर अजगांवकर ने गोवा विधानसभा में यह कहा कि डॉक्टर बी आर अंबेडकर ने दलितों के लिए ललित स्थान के विचार का समर्थन किया था सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में डॉक्टर अंबेडकर जो की नात सिर्फ दलितों के मसीहा के रूप में जाने जाते थे बल्कि दलित हितों के संघर्ष करने वाले सर्वप्रथम राजनेता के रूप में पूरी तरह से प्रतिष्ठित हो चुके थे बात 14 अगस्त 1931 की है जब डॉक्टर अंबेडकर पहली बार महात्मा गांधी से मिले थे यह मुलाकात मुलाकात में गांधी और अंबेडकर के मध्य एक जबरदस्त कड़वापन और रूखापन पैदा कर दिया था दोनों ओर से काफी कड़वे सवाल जवाब हुए थे और इसी बातचीत के मध्य डॉ अंबेडकर के मुंह से भावावेश यह निकला कि गांधी जी सच में मेरी कोई अपनी मातृभूमि नहीं है तब गांधी ने कहा कि आपकी मातृभूमि है गोलमेज परिषद में आपके कार्य की रिपोर्ट मिली है उससे मैं जानता हूं कि आप बेहतरीन देशभक्त हैं अब अंबेडकर ने पलटकर कहा कि आप कहते हैं कि मेरी मातृभूमि है परंतु मैं फिर दोहराना चाहता हूं कि मैं इस देश को अपनी मातृभूमि और इस धर्म को अपना धर्म कैसे कह सकता हूं जिसमें हमारे साथ कुत्ते बिल्लियों से भी बुरा व्यवहार किया जाता है और हम पीने के लिए पानी नहीं ले सकते दूसरी घटना तब की है जब दक्षिण भारत के दलित नेता रामास्वामी पेरियार जो कि ना सिर्फ घोर हिंदू विरोधी थे बल्कि घोर ब्राह्मण विरोधी भी पेरियार द्वारा वाल्मीकि कृत रामायण के विरोध में एक सच्ची रामायण लिखी गई थी जिसमें उन्होंने देवी देवताओं के प्रति घोर अपमानजनक लज्जाजनक बातें लिखी थी
राम के बारे में पेरियार का मत है कि वाल्मीकि के राम विचार और कर्म से धूर्त थे। झूठ, कृतघ्नता, दिखावटीपन, चालाकी, कठोरता, लोलुपता, निर्दोष लोगों को सताना और कुसंगति जैसे अवगुण उनमें कूट-कूट कर भरे थे।  पेरियार संस्कृत भाषा के विरोधी थे, हिंदू धर्म और हिंदू देवी देवताओं तथा ब्राह्मणों के बारे में जिस तरह पेरियार की विचारधारा थी वह विचारधारा उन्हें बौद्धिक आतंकवादी के जनक के रूप में प्रस्तुत करती थी, दुर्भाग्यवश डॉक्टर अंबेडकर ने भी लगभग वही कृत्य किए जिन्हें पेरियार किया करते थे हिंदू राष्ट्र के गठन के प्रति ना सिर्फ अंबेडकर बल्कि पेरियार भी घोर विरोध करते थे, डॉक्टर अंबेडकर की मुलाकात दिसंबर 1940 में हुई थी इसके बाद पेरियार ने दविडर कषणम नामक पार्टी का गठन कर चुके थे और उसी पार्टी के बैनर तले उन्होंने यह घोषणा कर दी कि द्रविड़ ने भारत से अलग होकर जाति मुक्त द्रविड़ स्थान गठित करने का निर्णय किया है और इस नए देश का संबंध ब्रिटिश भारत की सरकार के बजाय सीधे इंग्लैंड की सरकार के साथ होगा इस बात की पूरी खबर परियार के ही समाचार पत्र "कुदीअरासू" में छपी थी अंबेडकर ने धर्म स्थान के गठन के विरोधी नहीं है बशर्ते उनका क्षेत्र और उनके लोग भी इसका हिस्सा हो(कुदीअरासू अंक2.9.1940) एरिया द्वारा गठित 1944 में द्रविडार कड़गम जिसका पहले नाम जस्टिस पार्टी था 5 साल बाद ही दोस्तों में बैठ गई इससे हिस्से के जनक थे कांजीवरम नटराजन अन्नादुरैई जो कि द्रविड़ स्तान के प्रबल समर्थक के रूप में उभरे, 1942 में ही अन्नादुरई जो कि बाद में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थे, द्वारा द्रविडनाडु तमिल पत्रिका की स्थापना की गई थी अन्नादुरई नहीं मार्च व जून 1940 में की गई जन सभाओं के माध्यम से 3 राष्ट्र सिद्धांत को समाधान के रूप में प्रस्तुत किया था
यह बात अलग है कि डॉक्टर अंबेडकर ने कभी भी सार्वजनिक मंच से दलित स्थान की मांग नहीं रखी किंतु कभी भी इसका खंडन भी नहीं किया उपरोक्त उदाहरण से यह स्पष्ट है कि डॉक्टर अंबेडकर के मन के किसी कोने में यह दबी अथवा गुप्त इच्छा एजेंडर के रूप में विद्यमान थी कि दलितों के लिए अलग दलित स्तान हो, हालांकि वे दलितों की समस्या का समाधान भारतीय कानून, संस्कृति, परिवेश, में ही रहकर करने की बातें किया करते थे, किंतु सच यह भी है कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा दलित वर्ग के लिए अलग से निर्वाचन व्यवस्था के राजनैतिक अधिकार की जिस तरह बातें की गई, मांग की गई, कालांतर में उसे लागू करवाया गया, भविष्य में भारत को दलितस्तान बनाने की एक उनकी सोची समझी, रणनीति का हिस्सा थी, सत्य यही है कि डॉक्टर अंबेडकर के पृथक निर्वाचन की मांग रखते ही भारत में दलितस्तान की नींव पड़ गई थी
शेष अगले भाग में
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
MCOM, LLB, MBA( HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिन्दू महासभा 

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