कैथोलिक चर्च का षड्यंत्र संपूर्ण विश्व का हो ईसाईकरण

              भाग 5
ईसाईकरण के घातक हथियार प्रेम सेवा और परोपकार
मनीष पाण्डेय
संपूर्ण विश्व में कैथोलिक चर्च और उसके पश्चात बहुराष्ट्रीय कंपनियों की मिलीभगत के चलते ईसाई करण करने का जो गंदा खेल खेला गया उसमें न सिर्फ नए नए षडयंत्रो का समावेश किया गया, बल्कि उसमें ऐसे ग्लैमर का तड़का लगाया गया जिसने आम जनमानस को पूरी तरह से दिग्भ्रमित करते हुए अपनी जड़ों अपनी संस्कृति से काट दिया वह पाश्चात्य जगत जहां फूहड़ता का बोलबाला है, जहां व्यभिचार, के रूप में फ्री सेक्स वहां की संस्कृति का अभिन्न अंग हो, ऐसे ईसाई राष्ट्र अगर भारत को प्रेम का पाठ पढ़ाने चलें तो यह सिर्फ उनकी मूर्खता ही तो कहीं जाएगी, वास्तव में कैथोलिक चर्च का मूल षड्यंत्र यही है कि प्रेम, परोपकार और सेवा की आड़ में पूरे विश्व का ईसाईकरण करने के लिए नित नऐ प्रपंच गढे जाऐ, और उन्हें बेहद शातिराना तरीके से पूरे विश्व में फैलाया जाए, जिस प्रकार कैथोलिक चर्च द्वारा वैलेंटाइन को रोम में बड़े पैमाने पर वहां की संस्कृति को नष्ट करने एवं वहां के लोगों का धर्मांतरण करने के लिए भेजा गया था ठीक उसी प्रकार भारत में कैथोलिक चर्च द्वारा 1925 में युगोस्लाविया से एक ईसाई मिशनरी को भारत में सेवा करने के उद्देश्य से भेजा गया था, जिनका मूल कार्य सेवा नहीं बल्कि भारत के लोगों का बड़े पैमाने पर धर्मांतरण करना था, 1929 में एंन्जेज अर्थात तथाकथित संत टेरेसा जिन्होंने अपने आपको बाद में मदर टेरेसा घोषित किया, अपनी इसी उद्देश्य को लेकर भारत आई, कैथोलिक चर्च किस तरह एक अति साधारण व्यक्ति को संत की उपाधि देकर पूरे विश्व के सामने परोसता है, उस अति साधारण व्यक्ति के पक्ष में झूठे चमत्कारिक दावे प्रस्तुत किए जाते हैं, यह में उसके संदिग्ध क्रियाकलापों से पता चलता है कैथोलिक चर्च ने वैलेंटाइन के विषय में भी इसी प्रकार का एक झूठा चमत्कारिक दावा करते हुए उन्हें संत की उपाधि प्रदान की थी, की रोम के जेलर की बेटी की आंखो की रोशनी मात्र इसीलिए आ गई थी कि उसने वैलेंटाइन को याद कर प्रार्थना की थी, जिस प्रकार कैथोलिक चर्च वैलेंटाइन को संत की उपाधि उसे ईसाईकरण करने का हथियार बनाया, ठीक उसी प्रकार को मदर टेरेसा को भी संत की उपाधि लेकर कैथोलिक चर्च में भारत के लोगों का ईसाईकरण करने का कार्य किया 1969 में एक कैथोलिक पत्रकार मेलकम मगरिज द्वारा मदर टेरेसा को संत बनाने की एक मुहिम का प्रारंभ किया गया, इसके लिए मगरिज ने एक फिल्म का निर्माण किया था, जिसमें मदर टेरेसा के विभिन्न झूठे चमत्कारिक दावों को दर्शाया गया था, अभी हाल ही में मदर टेरेसा के चमत्कारों के ऊपर एक और फिल्म का निर्माण हुआ है जिसका नाम है मदर टेरेसा द संत, 31 मई 1983 के इंडिया टुडे अंक में मदर टेरेसा ने अपना जो साक्षात्कार दिया उसके प्रश्न का उत्तर उन्होंने बड़ी ही चालाकी के साथ दिया था, किंतु जो उन्होंने उत्तर दिए उसके उनके धर्मांतरण करने के तरीके बता तो वही प्रेम सेवा और परोपकार के माध्यम से करने का खुलासा हो गया था, मदर टेरेसा ने जब यह प्रश्न पूछा गया कि क्या आप धर्म मानती हैं, तो उन्हें कहा था कि मैं न्यूट्रल नहीं हूं मेरा धर्म है ,अगला सवाल यह था कि क्या ऐसा ही होने के नाते क्या एक गरीब विषय और दूसरे गरीब गैर ईसाई है के मध्य स्वयं को तटस्थ आती हैं, तो मदर टेरेसा ने कहा कि मैं तटस्थ नहीं हूं,अगला सवाल यह था कि क्या आप धर्म बदलने में विश्वास रखती है, तो मदर टेरेसा ने कहा था कि मेरे लिए बदलाव का अर्थ प्यार से किसी का दिल बदलना है (,To me, conversion means changing of heart by love.)अगला सवाल था कि अगर आप मध्ययुगीन युग में पैदा हुई होती तो गैलीलियो वाले मामले में किसका साथ देती चर्च का या गैलीलियो और मदर टेरेसा ने मुस्कुराते हुए कहा कि चर्च का ,जब 4 सितंबर 2016 को मदर टेरेसा को संत की उपाधि प्रदान की गई तो उनके दो चमत्कारों को आधार बनाया गया था जिसके आधार पर उन्हें संत की उपाधि प्रदान की गई वे दो चमत्कार निम्न थे , सर्वप्रथम 1997 में जब मदर टेरेसा की मृत्यु हुई किंतु चमत्कार वर्ष 2002 में हुआ मोनिका बेसरा नाम की लड़की ने दावा किया कि उसे ट्यूमर था मोनिका ने मदर टेरेसा की लॉकेट में लगी हुई फोटो अपनी पेट पर रखा था तब उस लाकेट में तेज रोशनी निकली ,और उसका ट्यूमर धीरे धीरे ठीक हो गया, दूसरा चमत्कार ब्राजील के एक व्यक्ति ने किया था जिसमें मदर टेरेसा के कारण ही उसके सारे ट्यूमर ठीक हो गए थे, मैंने ऊपर लिखा है कि कैथोलिक चर्च अपना साम्राज्य विस्तार हेतु वर्चस्व को बढ़ाने हेतु एवं ईसाई करण करने की प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से इस प्रकार छल कपट और झूठ का सहारा लेकर एक अति साधारण व्यक्ति को संत बनाने का चमत्कार दिखला कर अपनी ईसाई करण अर्थात धर्मांतरण की मुहिम को आगे बढ़ाता है, एक अमेरिकन पत्रकार क्रिस्टोफर हिचेंस ने तथाकथित संत मदर टेरेसा के चमत्कारों की पोल खोलते हुए यह दावा किया कि जिस बंगाली महिला मोनिका द्वारा दावा किया था कि मदर टेरेसा के लॉकेट लगे फोटो की वजह से उसका ट्यूमर ठीक हो गया वास्तव में उसको कैंसर का ट्यूमर था ही नहीं ,मोनिका बसरा के डॉक्टर रंजन मुस्तफी का कहना था कि मोनिका बसरा को कैंसर था ही नहीं, बल्कि वह तो टीवी के मरीज थी एवं उसका पूरी तरह से इलाज किया गया था उसी प्रकार का दावा वैलेंटाइन के संबंध में भी किया गया था कैथोलिक चर्च द्वारा जितनी भी संत आज तक घोषित किए गए हैं उनको इसी झूठ प्रपंच रचकर संत घोषित किया गया है, इसी प्रकार दिसम्बर 4,1989 में पत्रकार एडवर्ड डब्ल्यू डेसमंड ने टाइम पत्रिका के लिए मदर टेरेसा का साक्षात्कार लिया था उस साक्षात्कार में भी मदर टेरेसा से जब यह सवाल पूछा गया कि क्या आप रुढीवादी तरीके से इवेंजलाइज अर्थात ईसाई नहीं बनाती क्या ?तब मदर टेरेसा ने कहा था मैं प्यार से इवेंजलाइज करती हूं ,अगला सवाल था कि क्या यह सबसे अच्छा तरीका है मदर टेरेसा ने कहा था हमारे लिए हां हम अनेक देशों में गोस्पेल का संदेश पहुंचा रहे हैं टाइम पत्रिका के द्वारा अगला प्रश्न हुआ आपके कुछ मित्र कहते हैं कि इस विशाल हिंदू देश में पर्याप्त संख्या में धर्मांतरण नहीं होने के कारण आप निराश हैं मदर टेरेसा ने कहा मिशनरीज ऐसा नहीं सोचते हम नहीं जानते कि भविष्य में क्या है लेकिन क्राइस्ट के लिए दरवाजा खुल चुका है हो सकता है कि बड़ी संख्या में कन्वर्जन ना हो रहा हो किंतु हम नहीं जानते कि लोगों का अंदर क्या चल रहा है,(Missionaries don't think of that. They only want to proclaim the word of God. Numbers have nothing to do with it. But the people are putting prayer into action by coming and serving the people. Everywhere people are helping. There may not be a big conversion like that, but we do not know what is happening in the soul.)
साक्षात्कार में ही मदर टेरेसा ने यह स्वीकार किया कि यदि लोगों को शांति और आनंद चाहिए तो उन्हें जीसस को खोजना होगा लोग धीरे धीरे पास आ रहे हैं और जब हमारे पास आएंगे तब उन्हें चुनाव करना होगा
शेष अगले अंतिम भाग में
आपका ही
मनीष पाण्डेय
MCOM,LLB,MBA (HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
प्लीज डू नॉट कट पेस्ट एंड कॉपी ओनली शेयर

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