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जोमैटो एक सेकुलर वादी सोच से ग्रसित व्यवसाय कंपनी

खाना खाना अपने आप में है धर्म जोमैटो की यह विकृत और घृणित सोच मनीष पांडेय जोमैटो ने जो किया वह पूरी तरह से गलत है उसका यह कुतर्क देना कि खाने का कोई धर्म नहीं होता खाना अपने आप में खुद धर्म है यह भी जोमैटो के अल्प ज्ञान को ही प्रदर्शित करता है एक कुलीन ब्राह्मण जो शिवभक्त भी है अगर सावन के महीने में पूरी तरह सात्विक भावना के साथ मात्र इतना कहता है कि उसे जोमैटो के खाने से परहेज नहीं बल्कि उस खाने को लेकर आने वाले से परहेज है इस विषय पर एक गहन विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है गहन विचार-विमर्श करने के उपरांत अमित शुक्ला ने यह क्यों कहा यह पूरी तरह से सामने आ जाएगा वास्तव में मुस्लिम को कभी भी हिंदू त्योहारों की पवित्रता क्या होती है इस विषय में सर्वथा जानकारी का अभाव रहता है एक हिंदू जब व्रत त्यौहार रखता है तो वह कितनी सात्विकता के साथ उसका निर्वहन करता है यह बात कभी भी मुस्लिम नहीं समझ सकता इस बात का ध्यान दीजिए कि अमित शुक्ला ने भोजन का विरोध नहीं किया बल्कि उस भोजन को लाने वाले मुस्लिम युवक का विरोध किया जो संभवतः एक सात्विक विचारधारा में परिपूर्ण नहीं अथवा खरा नहीं उतरता है, और...
जर जोरू जमीन कांग्रेस और सोनभद्र हत्याकांड की सच्चाई मनीष पांडेय  कहा जाता है कि विश्व में अगर कभी कोई लड़ाई लड़ी गई अथवा वर्तमान या फिर भविष्य में कोई लड़ी जाएगी तो उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ जर जोरू और जमीन की होगी सोनभद्र हत्याकांड के पीछे भी विवाद ,लड़ाई और फिर हत्याकांड की मूल जड़ वही जमीन ही है परंतु इस पूरे घटनाक्रम उसमें कांग्रेस का कितना दोष रहा इस बात को समझने के लिए हमें पुन: इतिहास के पन्नों को पलट ना होगा और विश्वास करें पन्ने पलटने के बाद हमारे सामने कांग्रेस का भ्रष्टतम चेहरा उजागर होगा कहानी या फिर कहें विवाद का प्रारंभ होता है वर्ष 1955 से उस समय वहां के जिलाधिकारी हुआ करते थे प्रभात कुमार मिश्र जिन्होंने आदिवासियों की जमीनों पर अपनी बुरी नजर डालते हुए उसे अपने नाम पर कराने के लिए एड़ी की चोट पर जोर लगा दिया वह जमीनी जिन पर आदिवासियों का कब्जा था और जो ना सिर्फ सैकड़ों वर्षों से वहां पर लगातार खेती करते आ रहे थे बल्कि राजस्व का भुगतान अभी पूरी ईमानदारी से करते चले आ रहे थे 600 बीघे से ऊपर की जमीन पर डीएम महोदय द्वारा कागजों में हेराफेरी कर और अन्य प्रशासनिक अधिकार...

हाफिज सईद के विरुद्ध सर्जिकल स्ट्राइक करे भारत सरकार

हाफिज सईद के विरुद्ध कोट लखपत जेल में हो सर्जिकल स्ट्राइक मनीष पांडेय पूरे विश्व में अपनी आतंकवादी गतिविधियों आतंकी संगठनों को संरक्षित और पोषित करने के चक्कर में जिस तरह पाकिस्तान ने अपनी छीछालेदर करवाई है वह किसी से छुपा नहीं है ऐसे समय में जब पाकिस्तान अपने कुकृत्य के कारण आईसीजे में बुरी तरह मात खा चुका है पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान एक बार पुनः अमेरिका की चरण वंदना करने हेतु राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने हेतु जा रहे हैं और जाने से पहले विश्व भर को यह दिखाने हेतु कि हम आतंकवाद के विरुद्ध कितना खड़े हैं हाफिज सईद को गिरफ्तार कर कोर्ट लखपत जेल लाहौर की दीवारों के पीछे डाल दिया गया किंतु सच्चाई पूरा विश्व जानता है कि यह मात्र पाकिस्तान का दिखावा है पाकिस्तान के मन में आज भी कड़ुवाहट है आंखों में बेशर्मी है दिल में जिहाद है और मस्तिष्क में कुटिल चालें यह वही कोट लखपत जेल है जहां सरबजीत सिंह को बुरी तरह प्रताड़ना देकर उसकी हत्या की गई थी इतिहास गवाह है कि कोट लखपत जेल में अनेक भारतीय कैदियों की हत्या कर दी गई है आपको याद होगा इससे पहले चमेल सिंह को भी इसी तरह मारा गया था ब...

इस प्यार को मैं क्या नाम दूं😀

धोखे विश्वासघात और षडयंत्र की बुनियाद पर टीका अजितेश साक्षी का बेमेल रिश्ता # लव जिहाद की तर्ज पर दलित जिहाद की शिकार हो गई साक्षी मनीष पांडेय पिछले कई दिनों से मैं अजय देश द्वारा किए गए लव जिहाद पिया कहे दलित हाथ पर पैनी दृष्टि गड़ाए बैठा हुआ था तत्काल टिप्पणी से बचना चाहता था क्योंकि मन के किसी कोने में यह विचार लगातार उठ रहा था कि अभी इस केस में बहुत से रहस्य का आना अभी बाकी है और ठीक वैसा ही हुआ आज अजितेश के बारे में वह सारा काला चिट्ठा सोशल मीडिया पर आ चुका है जिसे आप भी लगातार देख व समझ रहे होंगे विश्वास करें अगर मैं तभी तत्काल कोई एक तरफा टिप्पणी कर देता तो शायद या लेख आज आपके सामने ना होता शायद मेरी क्षणिक उत्तेजना पूरे मामले के पीछे छिपे हुए एक भयानक षडयंत्र को ले डूबती कागजों पर यू उतार ना पाती, ज्यादा भूमिका ना बांधते हुए मैं सीधे मूल मुद्दे पर ही आ जाता हूं घटनाक्रम के, अतीत के पन्नों को थोड़ा सा पलटता हुआ चलता हूं मैंने शुरूआत में ही एक शब्द का प्रयोग किया है लव जिहाद वैसे तो जो हिंदू हैं वह इस शब्द से अच्छी तरह परिचित होंगे इस्लाम को बढ़ावा देने के मकसद से मुस्लिम ल...

अमर्त्य सेन एक अर्थशास्त्री अथवा अर्थशास्त्री

पहले अपने घर की बिगड़ती संस्कृति पर ध्यान दें अनर्थशास्त्री अमर्त्य सेन मनीष पांडे अपने आपको को अर्थशास्त्र भी बताने वाले अमर्त्य सेन ने अभी पश्चिमी बंगाल के जादवपुर विश्वविद्यालय में आयोजित एक समारोह में कहा कि जय श्री राम का नारा बंगाली संस्कृति का हिस्सा नहीं है यह लोगों को पीटने के बहाने के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है जब उन्होंने यह कहा तो मुझे उनकी इस अद्भुत ज्ञान पर बेहद आश्चर्य हुआ क्या इसी ज्ञान के बल पर वह एक अर्थशास्त्री बने जिन्हें ना बांग्ला संस्कृति का ज्ञान है ना ही साहित्य का, आश्चर्य होता है मुझे इस बात का भी की अमृत सेन को बांग्ला साहित्य कि इतनी ज्यादा तो समझ है किंतु अपने घर की संस्कृति और सभ्यता जो उनकी बेटी नंदिता सेन के द्वारा समाज में नग्नता और अश्लीलता परोसी जा रही है वह उन्हें कभी नहीं दिखाई डी इससे पहले कि मैं अपनी बातों को आप सभी जागरूक जनता जनार्दन विशेष कर बंगाल साहित्य और संस्कृति को समझने वाले बांग्ला जनता के बीच रखो हम लोगों के लिए यह जान लेना आवश्यक है कि आखरी बंगाल में जय श्री राम के विरोध का इतना बड़ा कारण क्या है आन अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन पह...

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नोटबन्दी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर व जन मानस पर असर:- लेखक:- मनीष पाण्डेय अधिवक्ता पत्रकार एम0काॅम, एल0एल0बी0, एम0बी0ए0 (एच0आर0) 8 नवम्बर की रात जब अचानक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपना सम्बोधन देना शुरू किया , तो एक बारगी जनता का मन कई आंशकाओं से ग्रसित हो गया, अचानक अफवाहो का बाजार गर्म हो गया, जितनी मुँह उतनी बाते, इन कई अंजानी आशंकाओं से भयाक्रांत हो लोगन्यूज चैनलो से चिपक कर बैठ गये, किसी को स्वप्न में उम्मीद नहीं थी कि प्रधानमंत्री मोदी देश में 500 - 1000 के नोट बंद करने जा रहे है। देश की जनता को लगा कि लगता है कि मोदी जी पाकिस्तान के साथ युद्ध की घोषणा करने जा रहे है वे लगातार आक्रमक अंदाज में बोले जा रहे थे और लेाग बस अलपक निगाहांे से टी0वी0स्क्रीन को निहारे जा रहे थे फिर जैसे ही उन्होने नोटबंदी की घोषणा की , उसके परिणाम व प्रक्रिया स्वरूप जो हँगामा मचा, उसे पूरे विश्व ने बखूबी से देखा, क्या कालाधनिये, भ्रष्टाचारी, हवालिये, आर्थिक आतंकिये, सभी बस किम्कर्तव्यविमूढ़, भौजक्के, विवकशून्य होकर रह गये, बस सबके मँुह से यही निकला अरे यह क्या कर दिया मोदी ने? इस ल...
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