जब रोम का हुआ इसाईकरण,और रोमन धर्म का अंत भाग 3
भाग 3
रोम का हुआ ईसाईकरण, रोमन धर्म का हुआ पतन, ईसाई पंथ बना राष्ट्रीय मजहब
मनीष पाण्डेय
पिछले भाग में मैंने लिखा था कि और रोम की संस्कृति और रोमन धर्म को नष्ट करने के उद्देश्य से ईसाइयों द्वारा नए-नए कुचक्र रचे जा रहे थे षड्यंत्रो का बोलबाला था, नित नई साज़िश अपने पैर पसार रही थी, कैथोलिक चर्च न सिर्फ रोम में बल्कि पूरे विश्व में अपने धर्म गुरुओं पादरियों और ईसाई मिशनरियों को उन राष्ट्रों की संस्कृति को नष्ट करने हेतु वहां के नागरिकों का ईसाईकरण करने हेतु, उन्हें विभिन्न राष्ट्रों में भेज रहा था, रोम भी इससे अछूता नहीं था, वहां भी उनके धर्म गुरु सेवा और परोपकार की आड़ में रोम का तेजी से ईसाई करण कर रहे थे, रूम के शासक जिन्होंने इस आर्यों को प्रारंभ में बड़े हल्के में लिया था धीरे-धीरे उनकी कृत्यो, को उनकी साजिशो और षड्यंत्रो को जब समझे तब तक शायद बहुत देर हो चुकी थी, रूम के शासकों ने अपने देश में इस ईसाईकरण को रोकने के लिए अनेक यत्न प्रयत्न किए जिन्हें ईसाई समाज ने अपने ऊपर अत्याचार बताया था पानी जब सर के ऊपर से गुजर गया तो सम्राट क्लॉडियस ने वैलेंटाइन को फांसी पर चढ़ा दिया किंतु ईसाईकरण का सैलाब इतना तेजी से बह रहा था, कि सम्राट क्लॉडियस द्वारा वैलेंटाइन को फांसी पर चढ़ाने के बाद भी यह नहीं रुका सन 130 में रोम के सम्राट काॅन्सटेनटाइन मैं रूम में पूर्ण रूप से ईसाई पंथ का समर्थन करते हुए मिलान आदेश जारी करते हुए उसने कहा था कि ईसाई भी मानव है ठीक है, लोगों को स्वतंत्रता में विश्वास है हमें इसकी अनुमति देनी चाहिए कांसटेनटाइन ने 330 में एक नए शहर काॅन्स्टेटिनोपल का निर्माण करवाया जो कि पूर्ण रूप से ईसाई पंथ को ही समर्पित था, कांसटेनटाइन ने रोम की संस्कृति का ईसाईकरण प्रारंभ करते हुए उसे बहुदेववाद से एकेश्वरवाद में बदल दिया, कांस्टेंटटाइन ने रूस में अनेक चर्च बनवाएं जैसे "हागिया सोफिया" चर्च, वही हागिया सोफिया चर्च जिसे अभी हाल ही में तुर्की के इस्लाम धर्मावलंबियों शासकों द्वारा पुनः मस्जिद में परिवर्तन कर दिया गया है, हागिया सोफिया वही स्थित है जिसे कांस्टेंटटाइन ने एक नए शहर के रूप में अर्थात, कान्स्टेटिनोपल जो कालांतर में इस्तांबूल बना, ईसाई पंथ हमेशा से मूर्ति पूजा का विरोधी था वह मूर्ति पूजको को अपना दुश्मन मानते थे, कांसटेनटाइन जोगी धीरे-धीरे ईआई बनने की दिशा में बढ़ रहा था, जब और रोमनो द्वारा मूर्ति पूजा के जुलूस में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया तो उसने इंकार कर दिया था, प्रसंग वश यहां या लिखना आवश्यक हो जाता है कि जिस तरह भारतीय संस्कृति में विभिन्न प्रकार के बहुदेववादी विचारधारा का समावेश है विभिन्न प्रकार के देवी और देवताओं को मानने वाले लोग हैं उसी प्रकार रोमन धर्म में भी विभिन्न प्रकार के देवी देवताओं को मानने का प्रचलन था ज्यादातर देवी-देवताओं पर भारतीय संस्कृति का ही प्रभाव अधिक साफ दिखाई देता है, फारस के अभियान पर जाने से पहले ही कांस्टेंटटाइन बुरी तरह से बीमार पड़ा ,और अंत में सन 337 को उसकी मृत्यु हो गई जब उसका अंतिम क्रिया कर्म पूर्ण रूप से ईसाई विधि विधान से जॉर्डन नदी में बपतिस्मा( धार्मिक स्नान) कराया गया था, ऊपर मैंने वर्णन किया है कि की प्राचीन रोम में रोमन धर्म का पतन करने के उद्देश्य से किस तरह ईसाइयों द्वारा वहां पर डेरा डाला गया था विश्व में ऐसी कई घटनाएं हैं जहां ना सिर्फ ईसाई धर्मावलंबियों द्वारा भारतीय संस्कृति से जुड़े राष्ट्रों में घुसकर वहां की संस्कृति को नष्ट भ्रष्ट कर उसका ईसाईकरण करते हैं ठीक वैसे ही इस्लाम धर्मावलंबियो द्वारा भी यही किया जा रहा है इसका सबसे बड़ा उदाहरण पेरिस में हुए पिछले दोनों आतंकी हमले को देखा जा सकता है जहां बहुत थोड़ी संख्या में मुस्लिम शरणार्थी बनकर गए थे, प्रारंभ में पेरिस प्रशासन द्वारा इस पर ध्यान नहीं दिया किंतु जब यही मुस्लिम शरणार्थी लाखों की संख्या में हो गए और उन्होंने वहां के जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया तब उसके विरुद्ध पैरिस प्रशासन ने हल्के कदम उठाए थे, किंतु उसकी भयावह परिणीति जब आतंकी हमले के रूप में सामने आई तो पेरिस प्रशासन द्वारा बड़ी संख्या में मुसलमानों को अपने सीमा से बाहर किया गया है यही हाल बर्मा के मयंमार का भी रहा है जहां भारतीय संस्कृति का एक विराट दर्शन दिखलाई पड़ता है वहां पर बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठियों ने अपना कब्जा जमाया यह बांग्लादेश घुसपैठिए वहां रोहिंग्या मुसलमानों के नाम से जाने जाते हैं रोहिंग्या मुसलमानों की कुदृष्टि भारत पर भी पड़ी है लाखों की संख्या में रोहिंग्या मुसलमान भारत में अपनी पैठ बनाते चले जा रहे हैं दुर्भाग्यवश यहां के राजनेता अपने वोट बैंक के चक्कर में रोहिंग्या ओं को लगातार शरण दे रहे हैं आने वाले समय में भारत की क्या भयावह स्थिति हो गई इसे शायद लिखने की आवश्यकता नहीं है अभी हाल ही में जिस तरह केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में यह बयान दिया कि इस्लाम अथवा ईसाई पंथ में धर्म परिवर्तन करने वाले अनुसूचित जाति के लोगों को रिजर्वेशन का लाभ नहीं मिल पाएगा ऐसे लोग सांसद या विधायक भी नहीं बन पाएंगे कालू से भले ही यह भारत के दृष्टिकोण से लाभप्रद हो पर लंबे समय के लिए शायद ऐसा नहीं होगा क्योंकि भारत में जिस तरह से तेजी से इसाई करण और इस्लामीकरण हुआ है उसके लिए हमें और भी कठोर कानून बनाने होंगे तथा जितने लोगों का धर्म परिवर्तन हुआ है उनकी घर वापसी सुनिश्चित करनी होगी
शेष अगले अंक में
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
MCOM,LLB,MBA (HR)
राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
BLOG:-MANISHPANDEYVARTA•BLOGSPOT•COM
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