वैलेंटाइन का बाजारीकरण भाग 4
भाग 4
वैलेंटाइन का बाजारीकरण कैथोलिक चर्च और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का षड्यंत्रकारी गठजोड़
मनीष पाण्डेय
आपने कभी भेड़ चाल वाली कहानी सुनी है अगर सुनी है तो बेहतर, नहीं सुनी है तो संक्षेप में कहानी कुल मिलाकर यह है कि, एक राजा अपने दरबारियों से भेड़चाल मुहावरे की बात का अर्थ पूछता है उसके दरबार में एक अति विद्वान मंत्री इसका अर्थ समझाने के लिए कुछ समय की मांग करता है, और अगले दिन वह मंत्री तालाब के किनारे पहुंच जाता है ,वहां पर अनेक खच्चर उसे दिखलाई पड़ते हैं उसमें से एक खच्चर को वह चुनकर उसके तीन चक्कर लगाकर उसका बाल तोड़ लेता है, और अपने कान के पास रख लेता है, आसपास के बहुत से गांव वाली उसको इस हरकत करते हुए जब देखते हैं तो उसका कारण पूछते हैं, मंत्री बताता है कि यह खच्चर बहुत ही पहुंचा हुआ कोई ऋषि है अभी हाल ही में भगवान शिव की स्थान की तीर्थ यात्रा करके इस गांव में आया हुआ है ,भक्ती इसकी आंखों से टपक रही है और तब सारे गांव वाले मिलकर उस खच्चर के तीन तीन चक्कर लगाते हुए उसका बाल तोड़ कर चले जाते हैं खच्चर असहनीय पीड़ा सहते सहते अंत में मर जाता है घर का मालिक अपनी पीड़ा लेकर राजा के दरबार में पहुंचता है और कहता है कि महाराज वही मेरा एक मात्र सहारा था जिसके बल पर में जीविकोपार्जन किया करता था, राजा मंत्री को बुला कर उस पूरी घटना का कारण पूछते हैं, तब मंत्री राजा से कहता है महाराज जी भेड़ चाल का अर्थ यही तो था ,जो मैं आपको समझाना चाहता था राजा समझ जाता है कि भेडचाल का मतलब क्या होता है, अंत में वह खच्चर मालिक को कुछ सोने की अशर्फियां देकर विदा करता है कहने का अर्थ यह है कि भेड़ चाल का अर्थ कालांतर में वही हुआ जो वैलेंटाइन को लेकर पूरे विश्व में कैथोलिक चर्च द्वारा बताया गया और तत्पश्चात उसमें नमक मिर्च और फ्लेवर डालकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने विश्व के सामने परोसा पूरे विश्व के लोग विशेषकर भारत के लोग इस भेड़चाल कि इस दुष्चक्र में इतनी सन्लिप्त हो गए, कि उन्होंने वैलेंटाइन की असली कहानी जानना समझना की चेष्टा ही नहीं की, जो कहानी कैथोलिक चर्च और बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बताई गई उसी को लकीर के फकीर मानकर उसी पर आज तक चलते चले आए है, रोम में ईसाईकरण की जो आंधी चली उसका प्रारंभ सम्राट कांस्टेंटटाइन द्वारा किया गया, फरवरी 313 में रोमन सम्राट और ईसाइयों की ओर से सम्राट लाइव सी नियम के मध्य ईसाइयों के संबंध में समझौते किए गए जिसके तहत रोम में ईसाइयों को कानूनी तौर पर मान्यता प्रदान हो गई उस समय ईसाई पंथ को रोम का अधिकाधिक पंथ तो नहीं बनाया गया था, किंतु कालांतर में अर्थात 380 ईसवी में रोम का अधिकाधिक पंथ ईसाई पंत को घोषित कर दिया गया, जिसे उस समय के रोमन सम्राट थियोडोसियस द्वारा किया गया था, सम्राट कांसटेनटाइन और सम्राट लाइसिनियम के मध्य जो समझौता हुआ वह एक पत्र के रूप में था जिसे एडिक्ट ऑफ मिलान कहा गया, एडिक्ट ऑफ मिलान में जो कहा गया उस का संक्षिप्त वर्णन निम्न है, मैं कांसटेनटाइन अगस्टस साथ में लाइसिनियस मिलान (मेडी ओनर्स) के पास मिले हम हर उस चीज का विचार कर रहे थे जो उससे संबंधित है हमने लोक कल्याण और सुरक्षा के विषय में सोचा जो चीजें हमने सोची वह बहुत से लोगों की भलाई के लिए होंगी,DIVINITY को निश्चित रूप से बनाया जाना चाहिए, ताकि हम इसाईयों तथा अन्य लोगों को अपना अधिकार प्रदान कर सकें हम उस धर्म का प्रदान कर सके, जो प्रत्येक को पसंद है, एडिक्ट ऑफ मिलान में आगे कहा गया है कि सबसे ईमानदार प्रावधान जो हमने इस व्यवस्था के लिए सोचा है, उसमें किसी को वंचित नहीं किया जाना चाहिए , ईसाई धर्म के पालन के लिए अपना दिल देने के लिए उस धर्म के लिए खुद के लिए जो सबसे अच्छा है सोचना चाहिए जिसकी हम पूजा करते हैं हमारा दिल इन सभी चीजों उसका सामान एहसान व परोपकार जिसकी हम पूजा करते हैं हमारा दिल इन सभी चीजों को दिखा सकता है ,नींद कमजोर लोगों के लिए होती है हमने उन सभी शर्तों को हटाने की कृपा की है जो पूर्व में दिए गए थे अधिकारिक तौर पर ईसाइयों को किसी एक विषय में वह ईसाई धर्म का पालन करते हैं वैसा कर सकते हैं धार्मिक पूजा का प्रतिबंध अवसर हमने उन सभी मसीहियो को मुफ्त में दिया है यह हमारे द्वारा तुम्हारी उपासना के लिए दिया गया है हमने दूसरे धर्मों को भी स्वीकार किया है जिससे उनकी पूजा खुली व मुक्त हो हम शांति के लिए एक हो सकते हैं इस ईसाईयो के मामले में हम यह कह सकते हैं कि यह सबसे बढ़िया आदेश है, अगर इसाईयो का कोई भुगतान अथवा क्षतिपूर्ति का दावा है ,तो उसे ईसाइयों के को दी जानी चाहिए ,उनके द्वारा किसी भी तरीके से अर्जित संपत्ति ईसाइयों में वितरित की जानी चाहिए बिना किसी भेदभाव के बिना किसी हिमाकत के, बिना किसी हिचकिचाहट के ,इस आदेश को बहाल का आदेश देंगे इस तरह एडिक्ट ऑफ मिलान में जो समझौता हुआ उसे स्पष्ट तौर पर लिखा गया कि इस सहयोग की द्वारा न सिर्फ़ जो संपत्ति लूटी गई एंव गैर कानूनी तरीके से अर्जित की गई उसको इस समझौते के तहत ईसाइयों को वापस प्रदान की गई और रोमन साम्राज्य में ईसाई पंथ को कानूनी मान्यता प्रदान कर दी गई
शेष अगले भाग में
आपका ही
अधिवक्ता मनीष पांडेय
MCOM,LLB,MBA( HR)
का राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू महासभा
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