अयोध्या के पौराणिक़ महत्व के कुण्डों पर भू माफियों का कब्जा
ऽ नजूल, रजिस्ट्री व राजस्व विभाग की मिलीभगत के चलते कुण्डों का अस्तित्व खतरे में
मनीष पाण्डेय
फैजाबाद! अयोध्या जहां कभी युद्ध ना हुआ हो, स्कन्दपुराण के अनुसार समस्त उपपातकों के साथ ब्रह्महत्या आदि महापातक इस पुरी से युद्ध नही कर सकते इसलिए इसे अयोध्या कहते हैं, अयोध्या भगवान विष्णु की आदि नगरी है, और उनके सुदर्शन चक्र पर स्थित मानी गई है, जिस अयोध्या को भगवान विष्णु का निवास अन्तर्गृह, राजा रामचन्द्र जी का जन्मस्थान, माना जाता हो वहीं आज चंद भू माफियाओं स्वार्थी, असंतो, पुलिस प्रशासन के गठजोड़ के कारण अपने ही लोगों द्वारा छली हुई हार की कगार पर खड़ी हो कोने में बेबसी के आंसू बहाते देखी जा सकती है, जिस अयोध्या धाम को बड़े-बड़े आतताई , राक्षस, दुष्ट, निशाचर, डिगा, हरा ना सके उसे अब अपने ही उसके महात्मय को छिन्न-भिन्न नष्ट करने पर उतारू हैं। वास्तव में देखा जाऐ तो अयोध्या धाम का महत्व अन्तर्राष्ट्रीय फलक पर अपनी अमिट, विशिष्ट छाप छोड़ने वाले राम मंदिर आन्दोलन के कारण तो रही ही है किन्तु उससे अधिक इस पुरी मंे स्थित पौराणिक कुण्डो, तीर्थों, मंदिरों, और पवित्र सरयू नदी के कारण यह अपना विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व रखती है। दुर्भाग्यवश आज इसी अयोध्या धाम पर चंद भू माफियाओं की जैसे नजर लग गयी है अयोध्या धाम में स्थित पचास पौराणिक कुण्डो जिनमें- रामसरोवर (रामतीर्थ), सीताकुण्ड, श्रीसागर, अदभुतसर, दशरथकुण्ड, रूकमणिकुण्ड, राधिका कुण्ड, लक्ष्मण कुण्ड, भरतकुण्ड, योगिनीकुण्ड, ब्रह्मकुण्ड, निर्मलीकुण्ड, धनक्षय कुण्ड (धनाइज), गणेशकुण्ड, पार्वतीकुण्ड, यमराजकूप, कौशल्या कुण्ड, वृहस्पतिकुण्ड, हनुमान कुण्ड, वासुकी कुण्ड, सूर्य कुण्ड, स्वर्णखनी कुण्ड, सुग्रीवकुण्ड, खर्जुलीकुण्ड, बैतरणी, तिलोदकी गंगा, अग्नि कुण्ड, शक्र कुण्ड, उर्वशीकुण्ड, सप्तसागर, क्षीरसागर, दन्तधावन कुण्ड, पिशाची कुण्ड, धो पाप कुण्ड, कुशमायुध कुण्ड, चन्द्र सरोवर, गिरिजा कुण्ड, वशिष्ठ कुण्ड, दुर्भरसर, महाभ्रमर, विभीषण कुण्ड, विद्या कुण्ड, जन्मेजय कुण्ड, चक्रतीर्थ, माण्डवी कुण्ड, शत्रुघ्न कुण्ड, विदेहसर (जनौरा), अन्जनी कुण्ड, प्रमोद कुण्ड, लक्ष्मी कुण्ड हैं। स्कन्द पुराण के अनुसार यह माना गया है कि इन कुण्डों का निर्माण इनके नाम के ही अनुरूप स्वंय देवी देवताओं, ऋषियों, महात्माओं, राजा रानियों द्वारा कराया गया था किन्तु प्रशासनिक उपेक्षा या कहें कि मिलीभगत के चलते वर्तमान में इन कुण्डों के अस्तित्व पर ही गहरा प्रश्न चिह्न लग गया है आज कुण्ड खुद ही अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ने के लिए निरीह बन पुलिस प्रशासन की ओर याचना भरी निगाहों से देख शायद म नही मन अपनी बदनसीबी पर रो रहे प्रतीत होते हैं साक्ष्यों व सबूतों की मानें तो नजूल रजिस्ट्री व राजस्व विभाग इस खेल में पूरी तरह से लिप्त दिखाई पड़ रहे हैं खुलेआम भूू माफियाओं द्वारा नजूल रजिस्ट्री व राजस्व विभाग के अधिकारीयों व कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते सरकारी भूमि कुण्डों की भूमि को फ्री होल्ड व रजिस्ट्री कराने के इस कार्य को अंजाम दिया जा रहा है ताजा तरीन मामला योगिनीकुण्ड का है स्कन्द पुराण के अनुसार वशिष्ठकुण्ड के पश्चिम में सागर कुण्ड स्थित है इसी सागर कुण्ड के नैर्ऋत्यकोण में योगिनीकुण्ड स्थित है जिसके जल में 64 योगिनियां निवास करती हैं। स्कन्द पुराण मंे यह स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि इस कुण्ड मंे स्नान करने से पुरूषों के सम्पूर्ण मनोरथ सिद्ध होते हैं तथा स्त्रियांे को उत्तम सिद्धि प्राप्त होती है ये योगिनियां समस्त मनोवांछित फल देने वाली होती हैं दुर्भाग्य से आज योगिनीकुण्ड आम के बाग में परिवर्तित हो चुकी है पूरे कुण्ड में आम के लगभग 35 पेड़ हैं इन पेड़ो की देखभाल निस्वार्थ भाव से राजाराम अपनी पिछली तीन पीढि़यों से सेवा करते व कुण्ड की देखभाल करते चले आ रहे हैं। किन्तु स्वार्थी व लालची भू माफिया प्रेमचन्द्र रस्तोगी द्वारा नजूल रजिस्ट्री राजस्व पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर दो बीघे में फैली हुई योगिनी कुण्ड को योगिनी मोहल्ला दिखाकर उस पर प्लाटिंग कराने के उद्देश्य से कब्जा किया जा चुका है। सर्वप्रथम सवाल यह उठता है कि दो बीघा कुण्ड का फ्री होल्ड किस नियम के तहत किया गया नजूुल व रजिस्ट्री विभाग के पास इस प्रश्न का उत्तर नही है देखा जाय तो नजूल रजिस्टर नं0 2 चक सं0 6 की भूमि सं0 413 खसरा सं0 1309 फसली कालम 3 में भूमि सं0 413 की हतबन्धी योगिनी कुण्ड के रूप में ही दर्ज है उसके बाद भी नजूल व रजिस्ट्री विभाग द्वारा की गयी अंधेरगर्दी समझ से परे है सबसे आश्चर्यजनक रूप से नजूल विभाग द्वारा संसार का दसवां आश्चर्य करते हुए सिर्फ दो बीघे भूमि को मोहल्ला बना दिया गया दूसरे उच्चतम व उच्च न्यायालय के इस आदेश के बावजूद कि कुण्डों व तालाबों को उसके मूल स्वरूप में बरकरार रखा जाय के आदेश को दरकिनार करते हुए योगिनी कुण्ड को अभिलेख में सिर्फ भूमि संख्या 413 दिखाते हुए फ्री होल्ड व रजिस्ट्री भू माफिया प्रेमचन्द्र रस्तोगी के पक्ष में कर दी गयी जबकि फ्री होल्ड के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दायर अपील संख्या 1557-59/1998 में पारित होने वाले अंतिम निर्णय का रजिस्ट्री विभाग द्वारा इंतजार भी नही किया गया जबकि फ्री होल्ड विलेख में यह अंकित है कि फ्री होल्ड की समस्त कार्यवाही माननीय उच्च न्यायालय के अधीन होगी इस तरह देखा जाय तो नजूल व रजिस्ट्री विभाग द्वारा भू माफिया प्रेमचन्द्र रस्तोगी के पक्ष में की गयी फ्री होल्ड रजिस्ट्री पूरी तरह से अवैध सिद्ध होती है दुर्भाग्य से यह खेल न सिर्फ नजूल व रजिस्ट्री विभाग के स्तर पर खेला गया बल्कि इस खेल में प्रशासनिक सह भागिता बराबर रूप से बनी हुई है सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा नियमों को ताक पर रखते हुए दीवानी न्यायालय के कार्याें व अधिकारों पर अतिक्रमण करते हुए प्रेमचन्द्र रस्तोगी के पक्ष में स्वत्व का निर्धारण कर दिया जबकि स्वत्व का निर्धारण सिर्फ दीवानी न्यायालय ही कर सकती है उसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा पुलिस बल का प्रयोग करते हुए उल्टे राजाराम को ही कुण्ड से बेदखल करते हुए भू माफिया प्रेमचन्द्र रस्तोगी को कब्जा दिला दिया सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा किया गया कृत्य अनेक संदेहो को जन्म देने के लिए काफी है फिलहाल कमिश्नर एस0पी0 मिश्र द्वारा मामले का जिस तरह संज्ञान में लेते हुए यथा स्थिति बनाये रखते हुए की जांच एस0डी0एम0 सदर को सौंपी है उससे उम्मीद की एक किरण दिखाई पड़ रही है इससे पहले भी कमिश्नर एस0पी0 मिश्र द्वारा जिला अधिकारी अनिल ढींगरा को जांच कमेटी बिठाने का आदेश दिया था किन्तु जिला अधिकारी द्वारा उनके आदेश को जैसे ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया फिलहाल स्थिति यह है कि राजाराम को कुण्ड से बेदखल करने के बाद भी पुलिस उसके आवास पर पहुंचकर उसे डरा धमका रही है विभिन्न हिन्दूवादी संगठनों सामाजिक कार्यकर्ताआंे द्वारा धरना प्रदर्शन ज्ञापन सौंपा जा चुका है किन्तु पुलिस प्रशासन जिस तरह का व्यवहार कर रही है वह भू माफिया के पक्ष में जाता दिखाई पड़ रहा है हिन्दूवादी संगठनों व सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा इस मुद्दे को कोर्ट तथा राज्यपाल के समक्ष ले जाने की बात कही जा रही है फिलहाल पैसा पावर और पालिटिक्स का यह गठजोड़ कितना गहरा है इसे पाठकगण आसानी से समझ सकते हैं हिन्दूवादी संगठनों राजाराम सामाजिक कार्यकर्ताओें को न्याय कब तक मिलता है यह अभी भविष्य के गर्भ में छिपा हुआ है।

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