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इस्लाम और ईसाई पंथ की गंगोत्री है यहूदी पंथ भाग 1

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इस्लाम और ईसाई पंथ की गंगोत्री हैं यहूदी पंथ भाग 1 *याकूब के पुत्र यहूदा के नाम से बने यहूदी *याकूब ने अपने 12 पुत्रो को इकट्ठा कर बनाया था इजराइल मनीष पाण्डेय यहूदी पंथ जिसे युदा बाद भी कहा जाता है विश्व के प्राचीन पदों में से एक है यहूदियों के धार्मिक स्थल को मंदिर तथा प्रार्थना स्थल को सीनेगाग कहा जाता है, वास्तव में इस्लाम और ईसाई पंथ का उद्गम स्थल यहूदी पंथ है यहूदी पंत की प्रमुख धार्मिक ग्रंथ तनख तालमुद मिद्रश है, जेरूसलम के पास युवा नामक प्रदेश है जहां से बेबीलोन से निर्वाचित होकर आए लोगों को बसाया गया था बताया जाता है कि यह प्रदेश याकूब के पुत्र युवा के वंश को मिला था बाइबिल में इसका अर्थ यह बताया गया है कि आप उनका पुत्र यहूदा इसी वजह से सभी इजराइली यों को यहूदी कहा जाने लगा याकूब का दूसरा नाम इजराइल भी था इसी वजह से यहूदी लोगों को इजराइली भी कहा जाता है याकूब ने यहूदियों की 12 जातियों को मिलाकर एक राष्ट्र इजराइल बनाया था यहूदी पंत को 3000 वर्ष पुराना पंथ माना जाता है यहूदियों के प्रमुख या पैगंबर अब्राहिम माने जाते हैं इब्राहिम का पुत्र आईजैक तथा आईजैक का पुत्र इस्माइल अर्थ...

हिंदू राष्ट्र विरोधी ब्राह्मण विरोधी बौद्ध पंथी डॉक्टर अंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाएं भाग 4

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हिंदू राष्ट्र विरोधी , ब्राह्मण विरोधी मानसिकता से ग्रस्त बौद्धपंथी डॉक्टर अंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाएं (भाग 4) मनीष पाण्डेय डॉक्टर अंबेडकर ने अपनी पुस्तक अंबेडकर एंड बुद्धिस्म इन इंडिया में कहा कि मैं हिंदू धर्म में पैदा जरूर हुआ हूं लेकिन हिंदू रहते मरूंगा नहीं डॉक्टर अंबेडकर ने ऐसा क्यों कहा इस वक्तव्य की गंभीरता को समझना अत्यंत आवश्यक है हिंदू राष्ट्र बनाए जाने की हिंदू महासभा की विचारधारा का विरोध करते हुए डॉक्टर अंबेडकर ने कहा था कि" वास्तव में हिंदू राज बनने पर निसंदेह इस देश के लिए एक भारी खतरा उत्पन्न हो जाएगा हिंदू कुछ भी कहे लेकिन यह सत्य है कि हिंदुत्व स्वतंत्रता समानता और भाईचारे के लिए एक खतरा है इस आधार पर प्रजातंत्र के लिए यह अनुपयुक्त हिंदू राज को हर कीमत पर रोका जाना चाहिए" इसका वर्णन उन्होंने अपनी पुस्तक पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन में किया है डॉ आंबेडकर ना सिर्फ हिंदू विरोधी मानसिकता से ग्रसित थे बल्कि ब्राह्मण विरोधी भी थी उनकी दृष्टि में हिंदू राष्ट्र का उदय का अर्थ ब्राह्मण वर्चस्व की स्थापना करना ही था डॉक्टर अंबेडकर की पुस्तक"REVOLU...

पूना पैक्ट राजा मुजे पैक्ट और हिंदू महासभा भाग 3

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राजा मुंजे पैक्ट, पूना पैक्ट और हिंदू महासभा भाग 3 *पूना पैक्ट से पहले राजा मुंजे पैक्ट हिंदू महासभा का था विशिष्ट योगदान मनीष पाण्डेय 24 सितंबर 1932 को अंबेडकर और गांधी के मध्य यरवदा सेंट्रल जेल में एक समझौता हुआ जिसे पूना पैक्ट समझौता के नाम से जाना गया डॉक्टर अंबेडकर दलितों के लिए पृथक निर्वाचन व्यवस्था की मांग कर रहे थे और अपनी मांग पर अड़े हुए थे तब गांधी ने यह कहते हुए यरवदा जेल में अनशन प्रारंभ कर दिया कि दलितों के पृथक निर्वाचन व्यवस्था से हिंदू समाज विघटित होगा जब चारों ओर से दबाव पड़ने लगा तो डॉक्टर अंबेडकर मजबूर हुए और उन्होंने अंत में जो समझौता किया वही पूना पैक्ट कहलाया किंतु यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पूना पैक्ट से पहले ही हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे डॉक्टर बालकृष्ण शिवराम मुंजे तमिलनाडु के दलित नेता मालकाई चिन्ना थंबी राजा द्वारा दलित हितों को ध्यान में रखते हुए पृथक निर्वाचन का विरोध करते हुए संयुक्त निर्वाचन प्रणाली का समर्थन करते हुए एक समझौता फरवरी 1932 माह में कर दिया गया था, जिसे राजा मुंजेपैक्ट कहा गया था राजा मुंजे पैक्ट का मूल उद्देश्य ही थ...

कम्युनल अवार्ड साइमन कमीशन और हिंदू महासभा का विरोध

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कम्युनल अवार्ड, , साइमन कमीशन और हिंदू महासभा भाग 2 *जब अंग्रेजों की फूट डालो शासन करो की नीति के शिकार हो गए थे डॉक्टर अंबेडकर मनीष पाण्डेय 1909 के इंडियन काउंसिल एक्ट (मॉर्ले-मिंटो सुधार) ने पहले ही मुसलमानों को अलग मतदाताओं का अधिकार दे दिया है। बाद में इसे 1919 की मोंटागु-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट द्वारा मान्यता दी गई और 1935 के भारत सरकार अधिनियम द्वारा आगे बढ़ाया गया। 1909 से 1946 तक स्थानीय निकाय और विधान परिषद के सभी चुनाव पृथक निर्वाचक प्रणाली के आधार पर हुए।डॉ। बी.आर अम्बेडकर अनुसूचित जातियों के लिए भी इसी तरह के प्रावधान चाहते थे। ब्रिटिश सरकार अंबेडकर के विवाद से सहमत थी, लाहौर प्रस्ताव प्रस्तुत करते समय जिन्ना के मन में पाकिस्तान अथवा देश विभाजन की अवधारणा नहीं थी उस समय मद्रास के गवर्नर के साथ हुई चर्चा के समय जिन्ना का कथन था कि भारत को चार हिस्सों में बांट देना चाहिए यह चार हिस्से में थे पहला द्रविड़ स्थान दूसरा हिंदुस्तान (मुंबई तथा मध्य प्रांत को लेकर) तीसरा बंगालीस्तान (बंगाल व असम) तथा चौथा पंजाब सिंध और उत्तर-पश्चिम सरहदी प्रदेश 1931 32 में दो ...

दलितस्तान द्रविड़स्तान के जनक अंबेडकर और पेरियार

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दलितस्तान, दलितों के लिए पृथक निर्वाचन व्यवस्था और बौद्धपंथी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर भाग 1 *बौद्धिक आतंकवाद के जनक थे पेरियार मनीष पाण्डेय क्या यह सच है कि अम्बेडकर दलितों के लिए एक अलग राष्ट्र चाहते थे जैसे मुस्लिम पाकिस्तान चाहते थे? फरवरी 2020 में गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर अजगांवकर ने गोवा विधानसभा में यह कहा कि डॉक्टर बी आर अंबेडकर ने दलितों के लिए ललित स्थान के विचार का समर्थन किया था सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में डॉक्टर अंबेडकर जो की नात सिर्फ दलितों के मसीहा के रूप में जाने जाते थे बल्कि दलित हितों के संघर्ष करने वाले सर्वप्रथम राजनेता के रूप में पूरी तरह से प्रतिष्ठित हो चुके थे बात 14 अगस्त 1931 की है जब डॉक्टर अंबेडकर पहली बार महात्मा गांधी से मिले थे यह मुलाकात मुलाकात में गांधी और अंबेडकर के मध्य एक जबरदस्त कड़वापन और रूखापन पैदा कर दिया था दोनों ओर से काफी कड़वे सवाल जवाब हुए थे और इसी बातचीत के मध्य डॉ अंबेडकर के मुंह से भावावेश यह निकला कि गांधी जी सच में मेरी कोई अपनी मातृभूमि नहीं है तब गांधी ने कहा कि आपकी मातृभूमि है गोलमेज परिषद में आपके कार्य की रिपोर्ट मि...

वैलेंटाइन का बाजारीकरण भाग 4

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भाग 4 वैलेंटाइन का बाजारीकरण कैथोलिक चर्च और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का षड्यंत्रकारी गठजोड़ मनीष पाण्डेय  आपने कभी भेड़ चाल वाली कहानी सुनी है अगर सुनी है तो बेहतर, नहीं सुनी है तो संक्षेप में कहानी कुल मिलाकर यह है कि, एक राजा अपने दरबारियों से भेड़चाल मुहावरे की बात का अर्थ पूछता है उसके दरबार में एक अति विद्वान मंत्री इसका अर्थ समझाने के लिए कुछ समय की मांग करता है, और अगले दिन वह मंत्री तालाब के किनारे पहुंच जाता है ,वहां पर अनेक खच्चर उसे दिखलाई पड़ते हैं उसमें से एक खच्चर को वह चुनकर उसके तीन चक्कर लगाकर उसका बाल तोड़ लेता है, और अपने कान के पास रख लेता है, आसपास के बहुत से गांव वाली उसको इस हरकत करते हुए जब देखते हैं तो उसका कारण पूछते हैं, मंत्री बताता है कि यह खच्चर बहुत ही पहुंचा हुआ कोई ऋषि है अभी हाल ही में भगवान शिव की स्थान की तीर्थ यात्रा करके इस गांव में आया हुआ है ,भक्ती इसकी आंखों से टपक रही है और तब सारे गांव वाले मिलकर उस खच्चर के तीन तीन चक्कर लगाते हुए उसका बाल तोड़ कर चले जाते हैं खच्चर असहनीय पीड़ा सहते सहते अंत में मर जाता है घर का मालिक अपनी पीड़ा लेकर राजा ...

जब रोम का हुआ इसाईकरण,और रोमन धर्म का अंत भाग 3

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भाग 3 रोम का हुआ ईसाईकरण, रोमन धर्म का हुआ पतन, ईसाई पंथ बना राष्ट्रीय मजहब  मनीष पाण्डेय  पिछले भाग में मैंने लिखा था कि और रोम की संस्कृति और रोमन धर्म को नष्ट करने के उद्देश्य से ईसाइयों द्वारा नए-नए कुचक्र रचे जा रहे थे षड्यंत्रो का बोलबाला था, नित नई साज़िश अपने पैर पसार रही थी, कैथोलिक चर्च न सिर्फ  रोम में बल्कि पूरे विश्व में अपने धर्म गुरुओं पादरियों और ईसाई मिशनरियों को उन राष्ट्रों की संस्कृति को नष्ट करने हेतु वहां के नागरिकों का ईसाईकरण करने हेतु, उन्हें  विभिन्न राष्ट्रों में भेज रहा था,  रोम भी इससे अछूता नहीं था, वहां भी उनके धर्म गुरु सेवा और परोपकार की आड़ में रोम का तेजी से ईसाई करण कर रहे थे, रूम के शासक जिन्होंने इस आर्यों को प्रारंभ में बड़े हल्के में लिया था धीरे-धीरे उनकी कृत्यो, को उनकी साजिशो और षड्यंत्रो को जब समझे तब तक शायद बहुत देर हो चुकी थी, रूम के शासकों ने अपने देश में इस ईसाईकरण को रोकने के लिए अनेक यत्न प्रयत्न किए  जिन्हें ईसाई समाज ने अपने ऊपर अत्याचार बताया था पानी जब सर के ऊपर से गुजर गया तो सम्राट क्लॉडियस ने वैलेंटाइ...