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अरे सुनो कालनेमियो राम का नाम बदनाम ना करो

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 धरोहर, सभ्यता,संस्कृति,और इतिहास है, हमारी पहचान इसकी उपेक्षा पड़ेगी बेहद भारी? मनीष पाण्डेय पिछले कई वर्षों से मेरे द्वारा राम जन्मभूमि के मुद्दे पर मुखर होकर ना सिर्फ आंदोलन किया गया बल्कि कई स्तरों पर भव्य राम मंदिर निर्माण हेतु, एक ओर तो अधर्मी और विधर्मियों से, तो दूसरी ओर कुछ कालनेमियों से भी अनेक अवसरों पर विवाद में उलझना पड़ा, पिछले 30 वर्षों से हिंदू हितों के संघर्ष सहित हिंदू अस्मिता से जुड़े अनेक विषयों, मुद्दो पर न सिर्फ मैंने आवाज उठाई, बल्कि एक लंबा संघर्ष भी किया, राम जन्म भूमि के लिए यह संघर्ष दशकों से चल रहा है, और जब तक इस पृथ्वी पर हूं यह संघर्ष अनवरत प्रारंभ रहेगा चाहे हार मिले अथवा जीत, खैर अब आता हूं मूल मुद्दे पर, माननीय सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद भव्य राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो चुका है,तो ऐसे में राम जन्मभूमि से जुड़े हुई सभी अनावश्यक विषयों पर विराम लग जाना चाहिए था, परन्तु ऐसा हो नहीं सका, सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के उपरांत कुछ अनुत्तरित प्रश्न ऐसे भी रह गए, जिनका हल तलाशा जाना ...

फ्री का चंदन घिस मेरे नंदन

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फ्री का चंदन घिसो मेरे नंदन, वाली मानसिकता छोड़ें भारतीय मनीष पाण्डेय  फ्री फ्री फ्री एक के साथ दूसरा फ्री,इस सामान के साथ यह फ्री, उस सामान के साथ वह फ्री, बाय वन गेट वन फ्री, अधिकतर ई-कॉमर्स कंपनियों पर चले जाइए फ्री का मकड़जाल, में  उलझे हुए बिना आप रह नहीं पाएंगे, ग्राहक इस ओर ध्यान नहीं देते की वस्तुएं ग्रे मार्केट की हैं अथवा घटिया क्वालिटी की, बस उनका दाम कम होना चाहिए, अथवा वस्तु फ्री में मिली चाहिए, याद करिए जब अंग्रेज भारत में आए थे और उन्हें अपनी चाय को बेचने के लिए किस तरह भारतीयों को फ्री में चाय पिला पिला कर भारतीयों को इसका मानसिक रूप से गुलाम बना लिया था जो भारतीय कभी घी और दूध पर निर्भर रह कर अपना हष्ट पुष्ट शरीर किया करते थे वह दिन रात चाय पी पी कर अपना शारीरिक और मानसिक बल लोप करने में लग गए, इतिहास गवाह है कि फ्री के चक्कर में पड़कर हम भारतीयों ने ज्यादातर घाटा ही उठाया है, हर वर्ष दीपावली के आसपास ई कॉमर्स कंपनियां बिग बिलीयन डे अथवा इसी प्रकार के ऑफर ग्राहकों के लिए निकालती है ग्राहक इस ओर कभी ध्यान ही नहीं देता कि वह वस्तु जो खरीद रहे हैं अथवा एक के साथ ...

जब जब होई धरम कै हानि

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जब जब होई धरम कै हानि, बारहि असुर अधम अभिमानी अयोध्या में यह अधर्म और अन्याय भला क्यों? मनीष पाण्डेय  राम राम जन्मभूमि परिसर में ऐसे अनेक मंदिर विद्यमान हैं जिनका अपना पौराणिक महत्व है एक उसी में एक कंदर्पकूप भी है साक्षी गोपाल का मंदिर भी है और मानस भवन भी है और वह ऐतिहासिक राम चबूतरा भी है जिसके इर्द-गिर्द पूरी राम जन्मभूमि का आंदोलन टिका हुआ था, यह वही राम चबूतरा था जिस पर वर्षों तक निर्मोही अखाड़े का कब्जा था और उसके द्वारा प्रभु राम की मूर्ति स्थापित कर पूजा अर्चना की गई थी, राम चबूतरे का अपना पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व है, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि राम जन्मभूमि आंदोलन का मुख्य केंद्र बिंदु ही राम चबूतरा रहा है अब ऐसे में एक विध्वंस कारी निर्णय लेते हुए जिस तरह इन स्थानों को तोड़ने का निर्णय लिया गया है वह अनर्थ और अधर्म नहीं तो और क्या है? ऐसे में जब अयोध्या की पवित्र पावन भूमि पर राम मंदिर का निर्माण होने जा रहा है तो यह आवश्यक था कि इन ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों की सुरक्षा की जाती है उनका जीवन उद्धार किया जाता जिससे कि आने वाली पीढ़ियां उन स्थानों को देखकर भाव विभोर हो...

शायरी के पीछे एक जहरीली सोच नाम राहत इंदौरी

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शायरी के पीछे जहरीली सोच, नाम••• राहत इंदौरी मनीष पाण्डेय  कल एक ऐसे व्यक्ति की मौत हो गई, जो मेरी दृष्टि में ना सिर्फ देशद्रोही था बल्कि रामद्रोही भी, दुनिया को दिखाने के लिए तो वह व्यक्ति एक शायर था शायरी को ही हथियार बनाकर वह अक्सर अपनी जहरीली सोच को समाज के सामने उड़ेल देता था, और समाज की बेवकूफियां देखिए विशेषकर हिंदू समाज उसकी इसी जहरीली सोच पर वाह-वाह कर उठती थी, कल मैं सोशल मीडिया पर देख रहा था उसकी मौत पर न जाने कितने लोगों ने विधवा विलाप किया, ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे उनका सगा वाला मर गया हो ,मेरी दृष्टि में राहत इंदौरी का क्या अस्तित्व क्या है उसके काले चेहरे के पीछे छिपी हुई कलुषित भावना पर आइये मैं चर्चा कर लेता हूं, 1992 में जब बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ तो राहत इंदौरी के लिए मानों हृदय पर व्रजपात हो गया था, कुछ कर तो सकते थे नहीं, किंतु अपनी शायरी को ही इन्होंने जहरीला हथियार बनाकर जनमानस के समक्ष प्रस्तुत कर दिया था उनकी जहरीली शायरी थी" टूट रही है हर दिन मुझ में एक मस्जिद, इस बस्ती में रोज दिसंबर आता है, देश में जब सीएए तथा एनआरसी लागू किया गया तब इसका विरोध करत...

कांग्रेसी सत्ता के दलाल देव मुरारी बापू

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कांग्रेस, सत्ता, दलाली,मक्कारी, लोभीबाबा, और देव मुरारी बापू मनीष पाण्डेय  देव मुरारी बापू हो सकता है यह नाम बहुत लोगों को पता ना हो, किंतु आजकल मध्य प्रदेश की जनता इस नाम को बखूबी जानने लगी है, और हां अब मथुरा वाले भी जानने लगे हैं, क्योंकि कल ही मथुरा पुलिस द्वारा उनके विरुद्ध सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने के दृष्टिकोण से उन पर 153a 153b आदि धाराओं को लगाकर जेल भेजने की तैयारी करने का प्लान शुरू कर दिया है, मेरी दृष्टि में देव मुरारी बापू एक ऐसे असंत हैं जिन्हें सत्ता का दलाल कहीं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी, सत्ता किसी की हो यह दलाली करने अवश्य पहुंच जाएंगे, वैसे तो यह सामान्य सी बात है न जाने कितने ऐसे व्यक्ति/संत इस पृथ्वी पर विद्यमान है, जिनको सरकार बदलने से कोई चिंता नहीं होती, सरकार जिसकी होगी दलाली उसी की शुरू हो जाएगी, किंतु दुख और ग्लानी उस समय होती है, जब कोई संत वेशधारी व्यक्ति सत्ता की दलाली और पद लोलुपता में इतना अंधा हो जाए कि अपनी सारी मर्यादा भूल कर, उसे तार-तार करता हुआ बस किस तरह सत्ता की मलाई खाए जाए दिन रात इसी में डूबा रहता है, देव मुरारी बापू की दलाली का प्रारंभ ह...

न्यायमूर्ति के•एम•पांडेय:- राम जन्मभूमि का ताला खुलवाकर जिन्होंने दिया था, स्वतंत्र भारत का अद्भुत अकल्पनीय व अविश्वसनीय निर्णय

न्यायमूर्ति के•एम•पांडेय:- राम जन्मभूमि का ताला खुलवाकर जिन्होंने दिया था, स्वतंत्र भारत का अद्भुत अकल्पनीय व अविश्वसनीय निर्णय मनीष पांडेय क्या आपने अपने जीवन में किसी ऐसी घटना देखा या सुना है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत के किसी न्यायालय द्वारा एक ही दिन में किसी अधिवक्ता द्वारा प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया हो और उसी दिन उसकी सुनवाई होकर शाम तक निर्णय देते हुए यह कहा गया हो कि इस निर्णय का कार्यान्वयन 1 घंटे से कम समय में हो जाना चाहिए ऐसा चमत्कार हुआ जनपद फैजाबाद मैं जो अब अयोध्या के नाम से जाना जाता है , 25 जनवरी 1986 को अधिवक्ता उमेश चंद्र पांडे ने फैजाबाद के मुंसिफ सदर हरिशंकर द्विवेदी के न्यायालय में ताला खुलवाने हेतु प्रार्थना पत्र दिया था प्रार्थना पत्र में अधिवक्ता उमेश चंद्र पांडेय ने लिखा कि उनके व अन्य हिंदू समुदाय द्वारा जन्म स्थान पर पूजा और अर्चना की जाती है अतः जन्मभूमि की पूजा पर प्रतिबंध ना लगाया जाए तथा वहां लगे तालों को खोल दिया जाए, माननीय मुंसिफ सदर हरिशंकर द्विवेदी ने 28 जनवरी 1986 को यह कहते हुए प्रार्थना पत्र को निस्तारित करने में असमर्थता जताई ...
गोपाल सिंह विशारद:- राम के लिए संपूर्ण जीवन न्योछावर करने वाले एक योद्धा मनीष पांडेय स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद राम जन्मभूमि का पहला मुकदमा गोपाल सिंह विशारद पुत्र श्री गिरधारी सिंहo.o.s. (other original suit)no 1,1jan.1950 गोपाल सिंह विशारद बना जहूर अहमद तथा अन्य गोपाल सिंह विशारद 1949 में अखिल भारत हिंदू महासभा फैजाबाद यूनिट के जनरल सेक्रेटरी हुआ करते थे उनके द्वारा ही फैजाबाद की सिविल कोर्ट में माननीय भीम सिंह के न्यायालय में एक पिटीशन यह कहते हुए दायर की गई थी मेरे परिवार के लोग पिछले कई वर्षों से भगवान राम लला के दर्शन और पूजा अर्चना करते चले आ रहे हैं मैं भी जन्म स्थान पर लगाता जाकर पूजा-अर्चना करता हूं परंतु अब मुझे रोका जा रहा है इस जन्म स्थान की पूजा करना मेरा मौलिक अधिकार है इसलिए मुझे पूजा करने से ना रोका जाए ना ही मेरे मार्ग में कोई बाधा खड़ी की जाए इसके साथ ही साथ भगवान राम लला की सुरक्षा भी की जाए जिससे वहां कोई उनको हटाना सके तब जिला अदालत ने गोपाल सिंह विशारद जी के पक्ष में अंतरिम आदेश दे दिया मुसलमानों ने इसका विरोध किया उन्होंने हाईकोर्ट में जाकर फिर से इसके विरुद्ध...