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कैथोलिक चर्च का षड्यंत्र संपूर्ण विश्व का हो ईसाईकरण

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              भाग 5 ईसाईकरण के घातक हथियार प्रेम सेवा और परोपकार मनीष पाण्डेय संपूर्ण विश्व में कैथोलिक चर्च और उसके पश्चात बहुराष्ट्रीय कंपनियों की मिलीभगत के चलते ईसाई करण करने का जो गंदा खेल खेला गया उसमें न सिर्फ नए नए षडयंत्रो का समावेश किया गया, बल्कि उसमें ऐसे ग्लैमर का तड़का लगाया गया जिसने आम जनमानस को पूरी तरह से दिग्भ्रमित करते हुए अपनी जड़ों अपनी संस्कृति से काट दिया वह पाश्चात्य जगत जहां फूहड़ता का बोलबाला है, जहां व्यभिचार, के रूप में फ्री सेक्स वहां की संस्कृति का अभिन्न अंग हो, ऐसे ईसाई राष्ट्र अगर भारत को प्रेम का पाठ पढ़ाने चलें तो यह सिर्फ उनकी मूर्खता ही तो कहीं जाएगी, वास्तव में कैथोलिक चर्च का मूल षड्यंत्र यही है कि प्रेम, परोपकार और सेवा की आड़ में पूरे विश्व का ईसाईकरण करने के लिए नित नऐ प्रपंच गढे जाऐ, और उन्हें बेहद शातिराना तरीके से पूरे विश्व में फैलाया जाए, जिस प्रकार कैथोलिक चर्च द्वारा वैलेंटाइन को रोम में बड़े पैमाने पर वहां की संस्कृति को नष्ट करने एवं वहां के लोगों का धर्मांतरण करने के लिए भेजा गया था ठीक उसी प्रका...

वैलेंटाइन की आड़ में भारतीय संस्कृति पर आघात करता ईसाई पंथ,

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भाग 1 हिंदू सनातन संस्कृति पर आघात करता वैलेंटाइन, डे, वीक, एंटी वीक और ईसाई पंथ मनीष पाण्डेय  रोमन साम्राज्य (27 ईसा पूर्व 476(प•)1453 पूर्व)एक ऐसी विकसित सभ्यता जिसका धीरे-धीरे अपने विलासी, बर्बर, सत्ता लोलुप, और अनियंत्रित आकांक्षाओं, वाले शासकों की वजह से अंत हो गया रोमन साम्राज्य में एक से एक प्रतापी राजा जूलियस सीजर, क्लेडोलिअस, नीरो, वही नीरो जिस जो एक उदाहरण का रूप ले चुका है वह उदाहरण है कि जब "रोम जल रहा था तो नीरो पहाड़ी पर बैठा हुआ वायलिन बजा रहा था हालांकि यह पूरी तरह से गलत है सच यह है कि उस समय नीरो ने तुरंत कार्यवाही के आदेश दिए थे, जिन्हें आज पूरा विश्व जानता पहचानता हूं समझता है, किंतु दुर्भाग्य है कि एक अच्छे प्रशासक, और ऊंची सोच रखने वाले ज्यादातर रोमन राजाओं की हत्या सत्ता के लालच में उन्हीं के करीबी लोगों द्वारा कर दी गई, ऐसा नहीं था कि जो रोमन शासक मारे गए वह पूरी तरह दूध के धुले हुए थे, उन्होंने भी किसी ना किसी राजा की हत्या इसी तरह से करके रोमन साम्राज्य के शासक बने थे, और उनकी आने वाली पीढ़ियों ने उनकी हत्या करके सत्ता की प्राप्ति की थी ,रोमन साम्राज्य के...

काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 16

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काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 16 *न्यायालय ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड पर लगाया ₹3000 का जुर्माना *तारीख पर तारीख और कानूनी दांव पेंच मनीष पाण्डेय वाराणसी के जनपद न्यायालय में हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों के अधिवक्ताओं द्वारा कानूनी दांवपेचो की एक लंबी श्रृंखला चल रही है जहां यह कोई हिंदू पक्ष कार पूरे परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की अपनी मांग पर अधिक है वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्षकार यह नहीं चाह रहा कि वहां पर पुरातात्विक सर्वेक्षण जैसी कोई बातें हो 4 मार्च 2020 को काशी विश्वनाथ मंदिर तथा ज्ञानवापी मामले में सुनवाई जब प्रारंभ हुई तो संशय के बादल इस बात पर मंडराने लगी की सुनवाई बनारस भी चलेगी अथवा नहीं 26 फरवरी को हाईकोर्ट के आदेश अपलोड ना हो पाने के कारण दोनों पक्ष तरीका वक्ताओं द्वारा वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायालय में बहस की गई न्यायालय ने बहस उपरांत दोनों पक्षों से शपथ पत्र मांगा तथा इसके साथ ही साथ हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रेक कोर्ट में प्रस्तुत करने हेतु 2 दिन का समय भी दिया गया तथा अगली सुनवाई 6...

काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 15

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काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रृंखला भाग 15 तारीख पर तारीख कानूनी दांवपेच बौखलाया मुस्लिम पक्ष मनीष पाण्डेय काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रृंखला में दोनों पक्षों की ओर से अर्थात हिंदू और मुस्लिम पक्ष की ओर से न्यायालय में कानूनी दांव पर चले जाने लगे तारीख पे तारीख पड़ने लगी है जहां हिंदू न्यायालय से यह मांग कर रहा है कि पूरे परिसर का पुरातत्व सर्वेक्षण करवाया जाए वही मुस्लिम पक्ष हिंदू पक्ष की इस मांग से बेहद डरा हुआ दिखाई पड़ रहा है ,वह बार-बार पुरातात्विक सर्वेक्षण की बात को नकारने पर तुला हुआ है 9 जनवरी 1920 को सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रेक के न्यायालय में बेशक सुनवाई टल गई, और अगली सुनवाई हेतु तारीख को 21 जनवरी के लिए डाल दिया गया 21 जनवरी 2020 को जो सुनवाई हुई उसमें सोमनाथ व्यास के पुत्र (परिवार) द्वारा न्यायालय में कहा गया कि मुझे भी सुना जाए, क्योंकि अगला डीपी में ही हूं, क्योंकि सोमनाथ व्यास इस पर गद्दी नशीन थी, किंतु न्यायालय ने उस याचिका पर था क्योंकि प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया मुस्लिम पक्ष का यह कहना कि हमारा स्टे अभी बरकरार है तथा आगे भी बरकरार रहने की उम्मीद है जब तक...

बिहार में का बा••••••••?

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बिहार में का बा••••• जंगलराज, बाहुबल, राजनीति का अपराधीकरण यही है बिहार की असली त्रासदी? मनीष पाण्डेय  आखिरकार बिहार विधानसभा चुनाव वर्ष 2020 संपन्न हो ही गए, एग्जिट पोलो के अनुसार जहां कमल जहां मुरझाने की तैयारी कर रहा था, वही सुशासन बाबू के सुशासन का सूर्य अस्त होने की कगार पर था, अप्रत्याशित रूप से लालटेन की तेजी राजनीतिक धुरंधरों को भी हैरान कर रही थी, राजनैतिक विश्लेषकों और पंडितों के अनुमान धरे के धरे रह गए, बिहार के पूरे चुनाव परिदृश्य में अगर कुछ अप्रत्याशित हुआ तो वह लालटेन अर्थात आरजेडी का सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरना, चिराग तले अंधेरा हो जाना, और अपने बड़े-बड़े वादों और ईमानदार छवि की बदौलत पहली बार इस महासमर में उतरी द प्लूरल्स पार्टी, की करारी हार ने बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया, निश्चित रूप से पल्सर पार्टी की सर्वेसर्वा पुष्पम प्रिया चौधरी जो खुद दो स्थानों पर खड़ी हुई थी, दोनों जगहों पर करारी हार मिली बिहार की राजनीति में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में आरजेडी का आना बिहार के उस चेहरे को दिखाने के लिए काफी था जिसकी पहचान ना कभी मिटी है और ना ही शायद ही कभी मिटेगी...

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 14

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 14 तारीख पर तारीख बौखलाया और डरा मुस्लिम पक्ष? मनीष पाण्डेय राम जन्मभूमि के ऐतिहासिक निर्णय के तुरंत बाद वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर तथा मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति हेतु प्रयास तेजी से प्रारंभ कर दिए गए, 15 अक्तूबर, 1991 को इस अध्यादेश के विरुद्ध श्री काशी वि·श्वे·श्वर मुक्ति संघर्ष समिति, ज्ञानवापी वाराणसी तथा प्राचीन मंदिर के पुजारी पं. सोमनाथ भट्ट ने स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में न्यायालय सिविल जज, वाराणसी में वाद संख्या 610/91 दायर की। अन्जुमन इन्तजामिया मस्जिद इसमें प्रतिवादी बना। वाद की प्रक्रिया के बीच में उ.प्र. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ ने पक्षकार बनने हेतु प्रार्थना पत्र दिया, जिसको बहस के बाद न्यायालय प्रथम अतिरिक्त सिविल जज, वाराणसी ने पक्षकार मान लिया। सन् 1991 से सन् 1998 के बीच इस वाद में विभिन्न मुद्दों पर दोनों पक्षों ने प्रमाण प्रस्तुत किए। हिन्दू पक्ष ने न्यायालय के समक्ष मंदिर का ऐतिहासिक तथा पौराणिक साक्ष्य रखते हुए जानकारी दी कि सन् 1669 में औरंगजेब के कुछ सैनिकों द्...

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 13

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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मंदिर विध्वंस श्रंखला भाग 13 न्यायालय की प्रक्रिया और पुरातात्विक जांच से भागते मुस्लिम मनीष पाण्डेय इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 1942 में मुसलमानों का मुकदमा खारिज होने के बाद यह मामला ठंडा पड़ा रहा, कालांतर में अक्टूबर 1991 एक बार फिर से यह मुद्दा धीरे-धीरे गरमाने लगा, शिवभक्त जनता एक बार फिर से एकजुट होने लगी तब वाराणसी की शिवभक्त जनता ने ज्ञानवापी विशेषण मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए वर्ष 1991 श्री विश्वेश्वर विश्वनाथ मुक्ति संघर्ष समिति ज्ञानवापी वाराणसी का गठन किया जिसके अध्यक्ष बनारस के ही ख्याति प्राप्त अधिवक्ता श्री दान बहादुर सिंह एडवोकेट तथा वहां मंत्री श्री विजय शंकर रस्तोगी एडवोकेट को चुना गया उक्त समिति के तत्वाधान में ज्ञानवापी विशेषण मंदिर के तत्वों को दूर करने वार्ड संख्या 610 सन 1991 ईस्वी प्राचीन मूर्ति स्वयं को विशेष वर्ग व अन्य प्रति अंजुमन इंतजामियां मस्जिद दिनांक 15•10•1991में को न्यायालय सिविल जज वाराणसी में दाखिल किया गया, उसके बाद हिंदू जनता की ओर से आदेश 1 नियम जाब्ता दीवानी के अंतर्गत प्रतिनिधित्व वाद (रिप्रेजेंटेटिव सूट )दाखिल किया गया...